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शिक्षिका को अश्लील फोटो के नाम पर ब्लैकमेल किया, धमकी देकर 4.5 लाख उड़ा ले गए साइबर ठग
अंबिकापुर (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ में साइबर ठगों ने क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर शिक्षिका को बदनामी और गिरफ्तारी का डर दिखाया। झूठे अश्लील फोटो मामले में फंसाकर 6 दिनों में उनसे 4.5 लाख रुपये ठग लिए।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में साइबर अपराधियों ने एक बेहद चौंकाने वाली ठगी को अंजाम दिया है, जिसमें एक शिक्षिका को बदनामी और गिरफ्तारी के डर में फंसाकर लाखों रुपये ऐंठ लिए गए। यह मामला इस बात का बड़ा उदाहरण है कि किस तरह ठग लोगों के मानसिक डर और सामाजिक प्रतिष्ठा को निशाना बनाकर उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
घटना 19 मार्च 2026 की बताई जा रही है, जब शिक्षिका परीक्षा ड्यूटी पूरी कर घर लौट रही थीं। इसी दौरान उनके मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके खिलाफ ऑनलाइन अश्लील सामग्री देखने की शिकायत दर्ज हुई है। अचानक लगे इस आरोप से शिक्षिका घबरा गईं और स्थिति को लेकर असमंजस में आ गईं।
डर और दबाव में बनाया शिकार
फोन पर बात करने वाले ठग ने शिक्षिका को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि मामला बेहद गंभीर है और उन्हें तुरंत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उसने गिरफ्तारी से बचने का एक रास्ता भी सुझाया, जिसमें ‘सुरक्षा राशि’ जमा करने की बात कही गई। इस झांसे में आकर शिक्षिका मानसिक दबाव में आ गईं और उन्होंने ठगों की बातों पर भरोसा कर लिया।
किस्तों में ऐंठी गई मोटी रकम
ठगों ने योजनाबद्ध तरीके से 19 मार्च से 25 मार्च के बीच अलग-अलग समय पर पैसे ट्रांसफर करवाए। शिक्षिका ने यूपीआई के माध्यम से कई बार रकम भेजी, वहीं कुछ पैसे उनके पति ने भी एक च्वाइस सेंटर के जरिए ट्रांसफर किए। इस तरह कुल मिलाकर करीब 4 लाख 50 हजार रुपये ठगों के खाते में पहुंच गए।
धमकियों का सिलसिला जारी
पैसे लेने के बाद भी ठग यहीं नहीं रुके। 25 मार्च को फिर कॉल कर उन्होंने आश्वासन दिया कि तीन दिन के भीतर पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी कि यदि इस मामले की जानकारी किसी को दी गई, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस धमकी के चलते शिक्षिका लगातार तनाव में रहीं और किसी से बात करने से भी डरती रहीं।
सच सामने आने पर हुआ खुलासा
आखिरकार जब शिक्षिका ने अपनी सहकर्मी शिक्षिकाओं से यह बात साझा की, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार बन चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई और अपील
मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में ठग लोगों के डर और सामाजिक प्रतिष्ठा का फायदा उठाते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या धमकी से घबराएं नहीं और बिना पुष्टि के किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। यदि इस तरह की स्थिति का सामना हो, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
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शिक्षिका को अश्लील फोटो के नाम पर ब्लैकमेल किया, धमकी देकर 4.5 लाख उड़ा ले गए साइबर ठग
अंबिकापुर (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में साइबर अपराधियों ने एक बेहद चौंकाने वाली ठगी को अंजाम दिया है, जिसमें एक शिक्षिका को बदनामी और गिरफ्तारी के डर में फंसाकर लाखों रुपये ऐंठ लिए गए। यह मामला इस बात का बड़ा उदाहरण है कि किस तरह ठग लोगों के मानसिक डर और सामाजिक प्रतिष्ठा को निशाना बनाकर उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
घटना 19 मार्च 2026 की बताई जा रही है, जब शिक्षिका परीक्षा ड्यूटी पूरी कर घर लौट रही थीं। इसी दौरान उनके मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके खिलाफ ऑनलाइन अश्लील सामग्री देखने की शिकायत दर्ज हुई है। अचानक लगे इस आरोप से शिक्षिका घबरा गईं और स्थिति को लेकर असमंजस में आ गईं।
डर और दबाव में बनाया शिकार
फोन पर बात करने वाले ठग ने शिक्षिका को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि मामला बेहद गंभीर है और उन्हें तुरंत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उसने गिरफ्तारी से बचने का एक रास्ता भी सुझाया, जिसमें ‘सुरक्षा राशि’ जमा करने की बात कही गई। इस झांसे में आकर शिक्षिका मानसिक दबाव में आ गईं और उन्होंने ठगों की बातों पर भरोसा कर लिया।
किस्तों में ऐंठी गई मोटी रकम
ठगों ने योजनाबद्ध तरीके से 19 मार्च से 25 मार्च के बीच अलग-अलग समय पर पैसे ट्रांसफर करवाए। शिक्षिका ने यूपीआई के माध्यम से कई बार रकम भेजी, वहीं कुछ पैसे उनके पति ने भी एक च्वाइस सेंटर के जरिए ट्रांसफर किए। इस तरह कुल मिलाकर करीब 4 लाख 50 हजार रुपये ठगों के खाते में पहुंच गए।
धमकियों का सिलसिला जारी
पैसे लेने के बाद भी ठग यहीं नहीं रुके। 25 मार्च को फिर कॉल कर उन्होंने आश्वासन दिया कि तीन दिन के भीतर पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी कि यदि इस मामले की जानकारी किसी को दी गई, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस धमकी के चलते शिक्षिका लगातार तनाव में रहीं और किसी से बात करने से भी डरती रहीं।
सच सामने आने पर हुआ खुलासा
आखिरकार जब शिक्षिका ने अपनी सहकर्मी शिक्षिकाओं से यह बात साझा की, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार बन चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई और अपील
मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में ठग लोगों के डर और सामाजिक प्रतिष्ठा का फायदा उठाते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या धमकी से घबराएं नहीं और बिना पुष्टि के किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। यदि इस तरह की स्थिति का सामना हो, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
