छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बालिग और शादीशुदा महिला की मर्जी से बने संबंध अपराध नहीं, आरोपी को राहत

बिलासपुर (छ.ग.)

By Rohit.P
On

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बेमेतरा के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि बालिग और शादीशुदा महिला की सहमति से बने शारीरिक संबंध को रेप नहीं माना जा सकता।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि किसी बालिग और विवाहित महिला के साथ उसकी स्पष्ट सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध को रेप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले को सही मानते हुए अपील को खारिज कर दिया और आरोपी को राहत प्रदान की।

क्या था मामला और कैसे पहुंचा हाईकोर्ट

यह मामला बेमेतरा जिले से जुड़ा है, जहां महिला ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की अनुमति मांगी थी। महिला का आरोप था कि आरोपी ने शादी का वादा करके उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को बरी कर दिया था, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

पीड़िता के आरोप और घटनाक्रम

महिला ने अपनी शिकायत में कहा था कि आरोपी ने उसे विवाह का भरोसा दिलाकर संबंध बनाए और बाद में अपने वादे से मुकर गया। उसने यह भी बताया कि सामाजिक दबाव और भय के कारण उसने तत्काल शिकायत दर्ज नहीं कराई। बाद में अपने पति को जानकारी देने के पश्चात मामला दर्ज कराया गया।

साक्ष्य और गवाहों पर अदालत की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह पाया कि प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह साबित नहीं होता कि महिला की सहमति किसी दबाव, डर या धोखे के तहत ली गई थी। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि महिला पहले से शादीशुदा थी और गर्भवती भी थी। इन परिस्थितियों में यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिले कि संबंध उसकी इच्छा के विरुद्ध बने थे।

कानूनी दृष्टिकोण और फैसले की अहम बात

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि कोई बालिग महिला अपनी स्वतंत्र इच्छा से शारीरिक संबंध बनाती है, तो उसे रेप नहीं माना जा सकता। केवल यह आरोप कि संबंध शादी के वादे के आधार पर बने थे, पर्याप्त नहीं है जब तक यह साबित न हो कि सहमति धोखे या दबाव के कारण प्राप्त की गई थी। इस आधार पर अदालत ने अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

सहमति की परिभाषा पर फिर शुरू हुई बहस

इस फैसले के बाद सहमति और यौन अपराधों की कानूनी परिभाषा को लेकर नई बहस छिड़ गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल आरोपों के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता। हर मामले में परिस्थितियों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों का गहराई से विश्लेषण जरूरी होता है।

न्यायिक संतुलन की चुनौती

अदालतों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे पीड़ित के अधिकारों की रक्षा करते हुए आरोपी के लिए निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करें। सहमति जैसे संवेदनशील मुद्दे में यह समझना आवश्यक होता है कि क्या वह पूरी तरह स्वतंत्र इच्छा से दी गई थी या किसी प्रकार के भय, दबाव या भ्रम के कारण। यह फैसला इसी संतुलन को दर्शाता है और बताता है कि हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं।

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
30 Mar 2026 By Rohit.P

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बालिग और शादीशुदा महिला की मर्जी से बने संबंध अपराध नहीं, आरोपी को राहत

बिलासपुर (छ.ग.)

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि किसी बालिग और विवाहित महिला के साथ उसकी स्पष्ट सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध को रेप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले को सही मानते हुए अपील को खारिज कर दिया और आरोपी को राहत प्रदान की।

क्या था मामला और कैसे पहुंचा हाईकोर्ट

यह मामला बेमेतरा जिले से जुड़ा है, जहां महिला ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की अनुमति मांगी थी। महिला का आरोप था कि आरोपी ने शादी का वादा करके उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को बरी कर दिया था, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

पीड़िता के आरोप और घटनाक्रम

महिला ने अपनी शिकायत में कहा था कि आरोपी ने उसे विवाह का भरोसा दिलाकर संबंध बनाए और बाद में अपने वादे से मुकर गया। उसने यह भी बताया कि सामाजिक दबाव और भय के कारण उसने तत्काल शिकायत दर्ज नहीं कराई। बाद में अपने पति को जानकारी देने के पश्चात मामला दर्ज कराया गया।

साक्ष्य और गवाहों पर अदालत की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह पाया कि प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह साबित नहीं होता कि महिला की सहमति किसी दबाव, डर या धोखे के तहत ली गई थी। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि महिला पहले से शादीशुदा थी और गर्भवती भी थी। इन परिस्थितियों में यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिले कि संबंध उसकी इच्छा के विरुद्ध बने थे।

कानूनी दृष्टिकोण और फैसले की अहम बात

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि कोई बालिग महिला अपनी स्वतंत्र इच्छा से शारीरिक संबंध बनाती है, तो उसे रेप नहीं माना जा सकता। केवल यह आरोप कि संबंध शादी के वादे के आधार पर बने थे, पर्याप्त नहीं है जब तक यह साबित न हो कि सहमति धोखे या दबाव के कारण प्राप्त की गई थी। इस आधार पर अदालत ने अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

सहमति की परिभाषा पर फिर शुरू हुई बहस

इस फैसले के बाद सहमति और यौन अपराधों की कानूनी परिभाषा को लेकर नई बहस छिड़ गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल आरोपों के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता। हर मामले में परिस्थितियों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों का गहराई से विश्लेषण जरूरी होता है।

न्यायिक संतुलन की चुनौती

अदालतों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे पीड़ित के अधिकारों की रक्षा करते हुए आरोपी के लिए निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करें। सहमति जैसे संवेदनशील मुद्दे में यह समझना आवश्यक होता है कि क्या वह पूरी तरह स्वतंत्र इच्छा से दी गई थी या किसी प्रकार के भय, दबाव या भ्रम के कारण। यह फैसला इसी संतुलन को दर्शाता है और बताता है कि हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-high-courts-big-decision-consensual-relationship-between-an-adult/article-49534

खबरें और भी हैं

सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत

टाप न्यूज

सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत

मझौली जनपद पंचायत के विभागीय ग्रुप में सामने आया मैसेज, प्रभारी मंत्री के दौरे से पहले सोशल मीडिया पर वायरल...
मध्य प्रदेश  विंध्य/रीवा 
सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत

रीवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: सोहागी पहाड़ पर घेराबंदी कर पकड़ी अवैध नशीली कफ सीरप की खेप, होंडा सिटी कार सहित लाखों का माल जब्त

प्रयागराज से रीवा लाई जा रही थी 1312 शीशी नशीली कफ सीरप, 19 वर्षीय तस्कर गिरफ्तार, पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस...
मध्य प्रदेश  विंध्य/रीवा 
रीवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: सोहागी पहाड़ पर घेराबंदी कर पकड़ी अवैध नशीली कफ सीरप की खेप, होंडा सिटी कार सहित लाखों का माल जब्त

ऑकलैंड में भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- 25 साल पुराना मफलर आज भी संभालकर रखा है

भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए साझा की पुरानी यादें, भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी, जनकल्याण और भविष्य के सहयोग पर दिया विशेष...
देश विदेश 
ऑकलैंड में भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- 25 साल पुराना मफलर आज भी संभालकर रखा है

2029 तक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की तैयारी तेज, जेपीसी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की दिशा में आगे

संयुक्त संसदीय समिति का दावा- अधिकांश लोगों ने किया समर्थन, राज्यों से सुझाव लेकर तैयार हो रहा रोडमैप; संवैधानिक संशोधन...
देश विदेश 
2029 तक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की तैयारी तेज, जेपीसी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की दिशा में आगे

बिजनेस

ओपनएआई पर एप्पल का बड़ा मुकदमा, ट्रेड सीक्रेट चोरी का लगाया आरोप ओपनएआई पर एप्पल का बड़ा मुकदमा, ट्रेड सीक्रेट चोरी का लगाया आरोप
एप्पल ने अमेरिका की अदालत में दायर याचिका में ओपनएआई, उसके हार्डवेयर सहयोगी और दो पूर्व कर्मचारियों पर गोपनीय तकनीकी...
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल फिर महंगे, नई कीमतें 11 जुलाई से लागू
शेयर बाजार में शानदार तेजी: सेंसेक्स 828 अंक उछला, निफ्टी 24,200 के पार; बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने भरी उड़ान
BSNL ने लॉन्च किया सैटेलाइट फोन, बिना मोबाइल नेटवर्क भी होगी बातचीत; खरीदने के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी
शेयर बाजार में जोरदार उछाल, सेंसेक्स 700 अंक चढ़ा; आईटी और मेटल शेयरों में दिखी मजबूत खरीदारी
Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.