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NSE पर 13 अप्रैल से कच्चे तेल के फ्यूचर्स लॉन्च, कैश सेटलमेंट के साथ ट्रेडिंग शुरू
बिजनेस न्यूज
सेबी की मंजूरी के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल कॉन्ट्रैक्ट BRCRUDEOIL सिंबल पर उपलब्ध होगा; ग्लोबल मार्केट के आधार पर हेजिंग संभव
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अपने कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट का विस्तार करते हुए 13 अप्रैल 2026 से डेटेड ब्रेंट क्रूड ऑयल के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च करेगा। मार्केट रेगुलेटर सेबी की मंजूरी मिलने के बाद यह कदम भारतीय ट्रेडर्स और निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हेजिंग करने का अवसर देगा।
NSE के सर्कुलर के अनुसार, नया कॉन्ट्रैक्ट BRCRUDEOIL सिंबल के तहत ट्रेड होगा और S&P ग्लोबल एनर्जी के डेटेड ब्रेंट असेसमेंट पर आधारित होगा। यह प्लेटफॉर्म भारतीय बाजार को ग्लोबल क्रूड ऑयल बेंचमार्क के साथ तालमेल बिठाने और जोखिम प्रबंधन का नया जरिया देगा।
ट्रेडिंग का समय सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9 बजे से रात 11:30 या 11:55 बजे तक रखा गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मार्केट के उतार-चढ़ाव का लाभ उठाया जा सके। कॉन्ट्रैक्ट मंथली बेसिस पर लिस्ट होंगे और कैश-सेटलमेंट के जरिए एक्सपायरी पर फिजिकल डिलीवरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। फाइनल सेटलमेंट प्राइस के लिए महीने भर के एवरेज डेटेड ब्रेंट रेट का आधार लिया जाएगा और इसे भारतीय रुपयों में बदलने के लिए RBI के USD-INR रेफरेंस रेट का इस्तेमाल होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कॉन्ट्रैक्ट भारत की वैश्विक तेल आयात निर्भरता को देखते हुए विशेष महत्व रखता है। तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का सीधा असर भारतीय कंपनियों और निवेशकों पर पड़ता है। नए फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से कंपनियां और बड़े निवेशक कीमतों के जोखिम से खुद को बचा पाएंगे।
NSE ने कॉन्ट्रैक्ट की गुणवत्ता के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। इसमें ब्रेंट क्रूड के वैश्विक मानकों के अनुसार क्वालिटी स्पेसिफिकेशन तय किए गए हैं। इससे कॉन्ट्रैक्ट की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी रहेगी और ट्रेडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी।
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि NSE के इस कदम से कमोडिटी सेगमेंट में लिक्विडिटी बढ़ेगी और MCX के अलावा ट्रेडर्स के पास एक और मजबूत विकल्प उपलब्ध होगा। इससे निवेशकों को ब्रेंट क्रूड हेजिंग के लिए वैकल्पिक मंच मिलेगा।
वित्तीय बाजारों में इस कदम को रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़े फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश और हेजिंग के लिए भारतीय निवेशकों की सुविधा बढ़ेगी। इसके अलावा, वैश्विक तेल दरों के उतार-चढ़ाव के प्रभाव को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
इस नए प्लेटफॉर्म से न केवल ट्रेडिंग ऑप्शंस बढ़ेंगे, बल्कि भारतीय कमोडिटी मार्केट की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत होगी।
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NSE पर 13 अप्रैल से कच्चे तेल के फ्यूचर्स लॉन्च, कैश सेटलमेंट के साथ ट्रेडिंग शुरू
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अपने कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट का विस्तार करते हुए 13 अप्रैल 2026 से डेटेड ब्रेंट क्रूड ऑयल के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च करेगा। मार्केट रेगुलेटर सेबी की मंजूरी मिलने के बाद यह कदम भारतीय ट्रेडर्स और निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हेजिंग करने का अवसर देगा।
NSE के सर्कुलर के अनुसार, नया कॉन्ट्रैक्ट BRCRUDEOIL सिंबल के तहत ट्रेड होगा और S&P ग्लोबल एनर्जी के डेटेड ब्रेंट असेसमेंट पर आधारित होगा। यह प्लेटफॉर्म भारतीय बाजार को ग्लोबल क्रूड ऑयल बेंचमार्क के साथ तालमेल बिठाने और जोखिम प्रबंधन का नया जरिया देगा।
ट्रेडिंग का समय सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9 बजे से रात 11:30 या 11:55 बजे तक रखा गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मार्केट के उतार-चढ़ाव का लाभ उठाया जा सके। कॉन्ट्रैक्ट मंथली बेसिस पर लिस्ट होंगे और कैश-सेटलमेंट के जरिए एक्सपायरी पर फिजिकल डिलीवरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। फाइनल सेटलमेंट प्राइस के लिए महीने भर के एवरेज डेटेड ब्रेंट रेट का आधार लिया जाएगा और इसे भारतीय रुपयों में बदलने के लिए RBI के USD-INR रेफरेंस रेट का इस्तेमाल होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कॉन्ट्रैक्ट भारत की वैश्विक तेल आयात निर्भरता को देखते हुए विशेष महत्व रखता है। तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का सीधा असर भारतीय कंपनियों और निवेशकों पर पड़ता है। नए फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से कंपनियां और बड़े निवेशक कीमतों के जोखिम से खुद को बचा पाएंगे।
NSE ने कॉन्ट्रैक्ट की गुणवत्ता के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। इसमें ब्रेंट क्रूड के वैश्विक मानकों के अनुसार क्वालिटी स्पेसिफिकेशन तय किए गए हैं। इससे कॉन्ट्रैक्ट की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी रहेगी और ट्रेडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी।
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि NSE के इस कदम से कमोडिटी सेगमेंट में लिक्विडिटी बढ़ेगी और MCX के अलावा ट्रेडर्स के पास एक और मजबूत विकल्प उपलब्ध होगा। इससे निवेशकों को ब्रेंट क्रूड हेजिंग के लिए वैकल्पिक मंच मिलेगा।
वित्तीय बाजारों में इस कदम को रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़े फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश और हेजिंग के लिए भारतीय निवेशकों की सुविधा बढ़ेगी। इसके अलावा, वैश्विक तेल दरों के उतार-चढ़ाव के प्रभाव को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
इस नए प्लेटफॉर्म से न केवल ट्रेडिंग ऑप्शंस बढ़ेंगे, बल्कि भारतीय कमोडिटी मार्केट की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत होगी।
