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सैलरी अच्छी, फिर भी काम से मन क्यों भर जाता है? बढ़ती बेचैनी के पीछे की असली वजह
लाइफस्टाइल डेस्क
पैसा पर्याप्त होने के बावजूद नौकरी से असंतोष बढ़ना अब केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि बदलती वर्क कल्चर और मानसिक थकान से जुड़ा ट्रेंड बनता जा रहा है
अच्छी सैलरी, तय समय पर प्रमोशन और सुरक्षित नौकरी—इसके बावजूद काम से मन उचट जाना आज खासकर शहरी प्रोफेशनल्स में आम होता जा रहा है। ऑफिस में सब कुछ “ठीक” दिखने के बाद भी भीतर की असंतुष्टि कई लोगों को परेशान कर रही है। विशेषज्ञ इसे सिर्फ करियर का सवाल नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और बदलती कार्यसंस्कृति से जुड़ा मुद्दा मानते हैं।
एचआर एक्सपर्ट्स और साइकोलॉजिस्ट बताते हैं कि यह स्थिति मिड-करियर प्रोफेशनल्स, आईटी कर्मचारियों, कॉरपोरेट मैनेजर्स और स्टार्टअप कल्चर में काम कर रहे युवाओं में ज्यादा देखने को मिल रही है। वेतन संतोषजनक होने के बावजूद काम में उत्साह की कमी, थकान और खालीपन की भावना उभर रही है।
कोविड के बाद वर्क फ्रॉम होम, हाइब्रिड मॉडल और लगातार ऑनलाइन रहने की आदत ने इस समस्या को और गहरा किया है। मेट्रो शहरों के साथ-साथ अब टियर-2 शहरों में भी यह ट्रेंड दिखने लगा है, जहां करियर के शुरुआती लक्ष्य पूरे हो चुके हैं।
क्यों खत्म होने लगता है मन
मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, सैलरी सिर्फ बाहरी प्रेरणा है। जब काम में सीखने की गुंजाइश खत्म हो जाती है या भूमिका बार-बार दोहराव वाली हो जाती है, तो दिमाग उसे चुनौती के रूप में नहीं लेता। इसके अलावा, लगातार टारगेट, मीटिंग्स और परफॉर्मेंस प्रेशर मानसिक थकान पैदा करता है, जिसे अक्सर बर्नआउट कहा जाता है।
कैसे जुड़ा है यह पहचान से
कई प्रोफेशनल्स एक समय बाद यह सवाल करने लगते हैं कि वे जो कर रहे हैं, क्या वही उनकी पहचान है। जब काम सिर्फ बिल भरने का जरिया बन जाता है और व्यक्तिगत मूल्यों या रुचियों से मेल नहीं खाता, तो असंतोष बढ़ने लगता है। यह भावना तब और मजबूत हो जाती है जब निजी जिंदगी के लिए समय कम बचता है।
सिर्फ पैसा क्यों काफी नहीं
एचआर एनालिस्ट मानते हैं कि सैलरी एक हद तक ही मोटिवेशन देती है। इसके बाद काम का अर्थ, टीम कल्चर, सराहना और स्वायत्तता ज्यादा मायने रखने लगते हैं। जिन संगठनों में कर्मचारियों की राय और विकास पर ध्यान नहीं दिया जाता, वहां अच्छे पैकेज के बावजूद टर्नओवर बढ़ता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे दौर में तुरंत नौकरी छोड़ने की बजाय स्किल अपग्रेड, भूमिका में बदलाव या ब्रेक पर विचार करना बेहतर होता है। कंपनियां भी अब एंगेजमेंट, मेंटल वेलनेस और फ्लेक्सिबल वर्क मॉडल पर ध्यान देने लगी हैं। आने वाले समय में करियर संतुष्टि को सिर्फ सैलरी से नहीं, बल्कि काम के मायने से आंका जाएगा।
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