सुबह अलमारी खोलते वक्त हम अक्सर मौसम, मौका या फैशन देखकर कपड़े चुनते हैं, लेकिन बहुत कम लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि कपड़ों का रंग हमारे मूड को भी प्रभावित करता है। साइकोलॉजी और कलर थेरेपी मानती है कि रंग सीधे दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित करते हैं, जो भावनाओं और व्यवहार को नियंत्रित करता है। यही वजह है कि कई बार बिना किसी ठोस कारण के भी दिन अच्छा या बोझिल महसूस होने लगता है।
रंग और दिमाग का रिश्ता
रंग देखने से दिमाग में हार्मोनल प्रतिक्रियाएं होती हैं। कुछ रंग ऊर्जा बढ़ाते हैं, तो कुछ शांति देते हैं। यही कारण है कि अस्पतालों, स्कूलों और ऑफिस के इंटीरियर में खास रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। वही असर हमारे पहनावे पर भी लागू होता है, क्योंकि कपड़े दिनभर हमारे शरीर और नजरों के सबसे करीब रहते हैं।
नीला: शांति और भरोसे का रंग
नीला रंग दिमाग को शांत करता है। यह स्ट्रेस कम करने और फोकस बढ़ाने में मदद करता है। यही वजह है कि इंटरव्यू या ऑफिस मीटिंग के लिए नीला रंग पसंद किया जाता है। अगर आप मानसिक रूप से थके हुए हैं, तो नीले शेड्स आपको स्थिरता का एहसास दे सकते हैं।
लाल: ऊर्जा और आत्मविश्वास
लाल रंग भावनाओं को तेज करता है। यह आत्मविश्वास, जोश और साहस से जुड़ा है। हालांकि, ज्यादा लाल रंग बेचैनी भी बढ़ा सकता है। जब आपको खुद को assert करना हो या किसी अहम मौके पर आत्मविश्वास दिखाना हो, तब लाल रंग असरदार हो सकता है।
पीला: खुशी और सकारात्मकता
पीला रंग दिमाग को एक्टिव करता है और पॉजिटिव सोच से जुड़ा माना जाता है। यह मूड को हल्का बनाता है और क्रिएटिविटी बढ़ाता है। उदासी या लो एनर्जी महसूस हो रही हो, तो हल्का पीला रंग पहनना मन को बेहतर कर सकता है।
हरा: संतुलन और ताजगी
हरा रंग प्रकृति से जुड़ा है, इसलिए यह बैलेंस और रिलैक्सेशन का एहसास देता है। यह आंखों को सुकून देता है और मानसिक थकान कम करता है। लंबे कामकाजी दिन या तनाव के समय हरा रंग पहनना फायदेमंद हो सकता है।
काला और सफेद: नियंत्रण और सादगी
काला रंग ताकत और कंट्रोल का प्रतीक है, लेकिन लगातार काला पहनने से मूड भारी भी हो सकता है। वहीं सफेद रंग साफ-सुथरे दिमाग और नई शुरुआत का संकेत देता है। दोनों रंगों का संतुलित इस्तेमाल मानसिक स्थिरता बनाए रखता है।
क्यों जरूरी है सही रंग चुनना
रंग आपके मूड को पूरी तरह नहीं बदलते, लेकिन वे भावनाओं को दिशा जरूर देते हैं। जब आप अपने मूड और दिन की जरूरत के हिसाब से रंग चुनते हैं, तो अनजाने में ही आप खुद को बेहतर महसूस कराने की कोशिश करते हैं।अगली बार कपड़े चुनते वक्त सिर्फ फैशन नहीं, अपने मन की हालत भी देखें—हो सकता है सही रंग आपका दिन बदल दे।
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