शक जब रिश्तों में घर कर जाता है, तो वह प्रेम, भरोसे और साथ की सारी नींव को धीरे-धीरे खोखला कर देता है। अशोकनगर जिले के अमाही ताल क्षेत्र में सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने यही साबित किया है, जहां एक पति ने अपनी ही पत्नी को बेवफाई के भ्रम में मौत के घाट उतार दिया।
जनवरी 2026 की ठिठुरन भरी रातें चल रही थीं। पांच दिन बीत चुके थे, लेकिन सर्द हवाओं का असर कम होने का नाम नहीं ले रहा था। अशोकनगर जिले के गांव अमाही ताल में रहने वाली गौरी (परिवर्तित नाम) उस रात कुछ अलग ही उम्मीदों में थी। बीते कई दिनों से पति नन्नू आदिवासी के साथ उसका विवाद चल रहा था। झगड़े बढ़कर मारपीट तक पहुंच चुके थे, लेकिन उस दिन सुबह नन्नू ने पहली बार नरमी दिखाई थी।

काम पर जाने से पहले उसने पत्नी से माफी मांगी, हाथ थामकर भरोसा दिलाया कि शाम को जल्दी लौटेगा। यही वजह थी कि गौरी उस रात का बेसब्री से इंतजार कर रही थी, यह जाने बिना कि यह उसकी जिंदगी की आखिरी रात होगी।
रात ढलते ही दोनों कमरे में चले गए। बाहर अलाव तापते परिजनों को क्या पता था कि भीतर भरोसे की सांसें टूट रही हैं। कुछ ही देर बाद, नन्नू ने मौका देखकर पत्नी का गला दबा दिया। इसके बाद उसने शव को कंबल में लपेटकर आग लगाने की कोशिश की, ताकि मामला हादसा लगे।
आधी रात के बाद डायल 112 पर सूचना पहुंची। बहादुरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम हासली निवासी और गौरी के पिता मानसिंह आदिवासी ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी की हत्या कर दी गई है। सूचना मिलते ही देहात थाना प्रभारी उपनिरीक्षक भुवनेश शर्मा पुलिस बल के साथ अमाही ताल पहुंचे।
मौके पर गौरी का शव पड़ा था। गले पर दबाव के स्पष्ट निशान थे। आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को बताया कि नन्नू खुद ही यह कह रहा था कि उसने अपनी पत्नी को मार दिया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की।

घटना के महज आठ घंटे के भीतर पुलिस ने नन्नू आदिवासी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद जांच में जो कहानी सामने आई, वह और भी डरावनी थी।
नन्नू और गौरी की शादी करीब पांच साल पहले हुई थी। शुरुआती चार साल दोनों के बीच सब कुछ सामान्य रहा। दो छोटे बच्चों के साथ परिवार खुशहाल दिखता था। लेकिन पिछले एक साल से नन्नू के व्यवहार में बदलाव आने लगा। वह पत्नी के चरित्र पर शक करने लगा था।
पुलिस जांच में सामने आया कि नन्नू अपनी शारीरिक कमजोरी को लेकर मानसिक दबाव में था। उसे डर था कि उसकी अक्षमता के कारण पत्नी किसी और से संबंध बना सकती है। इसी आशंका ने उसके भीतर अविश्वास और गुस्से को जन्म दिया। हाल ही में गौरी के शरीर में आए बदलावों को उसने गलत नजरिए से देखना शुरू कर दिया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गौरी के गर्भवती होने की पुष्टि नहीं हुई, जिससे साफ हो गया कि आरोपी का शक पूरी तरह निराधार था।
पुलिस के अनुसार, नन्नू ने पहले पत्नी को भरोसे में लिया, फिर प्रेम का नाटक कर उसे असहाय स्थिति में पहुंचाया और बाद में वारदात को अंजाम दिया। हत्या के बाद सबूत मिटाने की भी कोशिश की गई, लेकिन वह ज्यादा देर तक कानून से बच नहीं सका।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि शक, जब संवाद की जगह ले लेता है, तो वह केवल एक रिश्ते को नहीं, पूरी जिंदगी को खत्म कर देता है।
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