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30 की उम्र के बाद क्यों टूटने लगती हैं दोस्तियां? साइकोलॉजी बताती है रिश्तों के बदलते समीकरण
लाइफस्टाइल डेस्क
करियर, शादी और जिम्मेदारियों के बीच क्यों सिमट जाता है दोस्ती का दायरा, विशेषज्ञों की राय में समझिए बदलती सामाजिक मानसिकता
कई लोगों के जीवन में एक दौर ऐसा आता है जब अचानक यह महसूस होने लगता है कि पुराने दोस्त अब पहले जैसे पास नहीं रहे। फोन कम हो जाते हैं, मुलाकातें टलती रहती हैं और बातचीत औपचारिक बन जाती है। मनोविज्ञान के विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव अक्सर 30 की उम्र के बाद दिखाई देता है और इसके पीछे भावनात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक कारण ज्यादा होते हैं।
कब और कैसे शुरू होता है बदलाव
साइकोलॉजिस्ट बताते हैं कि 20 की उम्र तक दोस्ती जरूरत और समय की उपलब्धता पर आधारित होती है। कॉलेज, हॉस्टल या शुरुआती नौकरी में लोग एक जैसे हालात से गुजरते हैं, जिससे गहरा जुड़ाव बनता है। लेकिन 30 के बाद जीवन की प्राथमिकताएं बदलने लगती हैं। करियर की स्थिरता, शादी, बच्चों की जिम्मेदारी और परिवार की अपेक्षाएं व्यक्ति के समय और ऊर्जा का बड़ा हिस्सा ले लेती हैं।
क्यों कम होने लगती है बातचीत
मनोविज्ञान के मुताबिक, दोस्ती बनाए रखने के लिए भावनात्मक निवेश और नियमित संवाद जरूरी होता है। जैसे-जैसे जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, लोग अनजाने में उन्हीं रिश्तों पर ध्यान देते हैं जो तत्काल जीवन को प्रभावित करते हैं। दोस्ती धीरे-धीरे प्राथमिकता सूची से नीचे खिसकने लगती है। यह दूरी अक्सर जानबूझकर नहीं, बल्कि परिस्थितियों के चलते बनती है।
समानता का टूटना भी एक वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र के साथ जीवन के अनुभव अलग-अलग दिशा में बढ़ने लगते हैं। कोई करियर में आगे निकल जाता है, कोई पारिवारिक जीवन में व्यस्त हो जाता है, तो कोई अलग शहर या देश चला जाता है। जब साझा अनुभव कम हो जाते हैं, तो बातचीत के विषय भी सीमित हो जाते हैं। यही दूरी को और गहरा कर देता है।
क्या यह टूटन स्थायी होती है?
साइकोलॉजी यह भी बताती है कि 30 के बाद दोस्ती पूरी तरह खत्म नहीं होती, बल्कि उसका स्वरूप बदल जाता है। पहले रोज की बात अब कभी-कभार के हालचाल में बदल जाती है। रिश्ते कम लेकिन ज्यादा अर्थपूर्ण हो जाते हैं। कई लोग इस उम्र में कम दोस्तों के साथ ज्यादा गहरे और भरोसेमंद संबंध बनाते हैं।
डिजिटल कनेक्शन का भ्रम
सोशल मीडिया ने जुड़े रहने का भ्रम तो दिया है, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव को कमजोर भी किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लाइक और मैसेज असली बातचीत का विकल्प नहीं बन सकते। यही वजह है कि लोग जुड़े दिखते हैं, लेकिन अंदर से दूरी महसूस करते हैं।
मनोवैज्ञानिक सलाह देते हैं कि अगर दोस्ती बनाए रखना चाहते हैं, तो उसे समय देना जरूरी है। पहल करना, मिलना-जुलना और खुले संवाद रिश्तों को जिंदा रख सकते हैं। 30 के बाद दोस्ती टूटना असामान्य नहीं है, लेकिन उसे पूरी तरह खत्म मान लेना भी सही नहीं।
यह बदलाव दरअसल उम्र का नहीं, जीवन की दिशा का संकेत है—जहां रिश्ते कम होते हैं, लेकिन समझ और परिपक्वता ज्यादा होती है।
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