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WhatsApp पर देर से रिप्लाई करना क्या संकेत देता है? आदत, मानसिकता और रिश्तों पर असर
लाइफस्टाइल डेस्क
डिजिटल कम्युनिकेशन के दौर में मैसेज का जवाब देने की टाइमिंग अब सिर्फ आदत नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, प्राथमिकताओं और मानसिक स्थिति का संकेत मानी जा रही है
WhatsApp पर देर से रिप्लाई करना आज की डिजिटल लाइफस्टाइल की एक आम आदत बन चुकी है। कोई इसे बिजी शेड्यूल से जोड़ता है, तो कोई इसे जानबूझकर अपनाई गई रणनीति मानता है। लेकिन साइकोलॉजिस्ट और बिहेवियर एक्सपर्ट्स का कहना है कि मैसेज का जवाब देने में लगने वाला समय अक्सर किसी व्यक्ति की सोच, प्राथमिकताओं और रिश्तों के प्रति उसके नजरिये को दर्शाता है।
मानसिक व्यवहार विशेषज्ञों के अनुसार, देर से रिप्लाई करने वाले लोग एक जैसे नहीं होते। कुछ लोग समय की कमी के कारण जवाब नहीं दे पाते, जबकि कुछ जानबूझकर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचते हैं। यह आदत छात्रों, प्रोफेशनल्स और यहां तक कि रिश्तों में भी अलग-अलग मायने रखती है।
वर्क फ्रॉम होम और स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल के बाद से यह ट्रेंड खासतौर पर शहरी युवाओं और कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स में ज्यादा दिख रहा है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों में काम और निजी जीवन की सीमाएं धुंधली होने के साथ यह आदत और बढ़ी है।
क्यों देर से आता है जवाब
साइकोलॉजी बताती है कि देर से रिप्लाई करने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोग मल्टीटास्किंग में उलझे रहते हैं और मैसेज को बाद के लिए टाल देते हैं। वहीं कुछ लोग डिजिटल ओवरलोड से बचने के लिए जानबूझकर नोटिफिकेशन इग्नोर करते हैं। कई मामलों में यह आदत “तुरंत उपलब्ध रहने” के दबाव से दूरी बनाने का तरीका भी होती है।
कैसे जुड़ी है यह आदत व्यक्तित्व से
विशेषज्ञों के मुताबिक, जो लोग देर से जवाब देते हैं, वे अक्सर अपनी सीमाएं तय करना जानते हैं। वे काम और निजी समय को अलग रखना चाहते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में यह आदत असुरक्षा, टालने की प्रवृत्ति या रिश्तों में स्पष्टता की कमी का भी संकेत हो सकती है। खासकर करीबी रिश्तों में लगातार देर से जवाब देना सामने वाले को अनदेखा किए जाने का एहसास करा सकता है।
रिश्तों पर क्या असर पड़ता है
कम्युनिकेशन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रिप्लाई में देरी गलतफहमियों को जन्म दे सकती है। सामने वाला इसे उदासीनता या अरुचि के रूप में ले सकता है। हालांकि, अगर दोनों पक्ष एक-दूसरे की प्राथमिकताओं और व्यस्तता को समझते हैं, तो यह आदत रिश्तों में तनाव नहीं पैदा करती।
डिजिटल एटिकेट पर काम कर रहे विशेषज्ञों का कहना है कि देर से या जल्दी रिप्लाई करना अपने आप में सही या गलत नहीं है। अहम यह है कि सामने वाले को स्पष्टता दी जाए। जरूरत पड़ने पर “अभी बिजी हूं, बाद में जवाब दूंगा” जैसा छोटा सा संदेश भी रिश्तों को संतुलित बनाए रख सकता है।
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