400 करोड़ की लागत से तैयार जबलपुर डुमना एयरपोर्ट, फिर भी उड़ानों का टोटा: बढ़ी सुविधाएं, घटा भरोसा

जबलपुर (म.प्र.)

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रनवे और टर्मिनल की क्षमता बढ़ी, लेकिन बड़े शहरों से हवाई कनेक्टिविटी अब भी सीमित

डुमना एयरपोर्ट के विस्तार और आधुनिकीकरण पर केंद्र सरकार ने करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन इसका लाभ यात्रियों को पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है। अत्याधुनिक टर्मिनल, लंबा रनवे और बड़े विमानों की लैंडिंग की सुविधा होने के बावजूद जबलपुर से उड़ानों की संख्या बेहद सीमित बनी हुई है। इससे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में विस्तारित एयरपोर्ट का लोकार्पण किया था। उम्मीद जताई गई थी कि इससे जबलपुर को देश के बड़े शहरों से सीधी हवाई कनेक्टिविटी मिलेगी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। आज भी कई अहम रूट्स पर फ्लाइट न होने के कारण यात्रियों को ट्रेन या सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

क्षमता बढ़ी, कनेक्टिविटी नहीं

विस्तार से पहले डुमना एयरपोर्ट का रनवे लगभग 1998 मीटर लंबा था, जिसे बढ़ाकर करीब 2750 मीटर कर दिया गया है। टर्मिनल क्षमता भी 150 यात्रियों से बढ़ाकर 800 यात्रियों तक पहुंचाई गई है। अब यहां एयरबस ए-320 जैसे बड़े विमान उतर सकते हैं, फिर भी उड़ानों की संख्या में अपेक्षित इजाफा नहीं हुआ।

दूसरे शहरों से तुलना में पिछड़ा जबलपुर

हवाई सेवाओं के मामले में जबलपुर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। इंदौर से जहां 20 से ज्यादा शहरों के लिए 40-50 उड़ानें संचालित हो रही हैं, वहीं भोपाल से भी दर्जनों फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। इसके मुकाबले जबलपुर जैसे संभागीय मुख्यालय में सीमित उड़ानें यात्रियों की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही हैं।

भोपाल और प्रयागराज की फ्लाइट अब भी इंतजार में

बीते वर्ष भोपाल और प्रयागराज के लिए सीधी उड़ान शुरू करने की चर्चाएं जोरों पर थीं। इन रूट्स पर यात्रियों की मांग भी काफी अधिक है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है। इससे व्यापारियों, छात्रों और धार्मिक यात्रियों को खासा नुकसान हो रहा है।

पहले स्थिति थी बेहतर

एयरपोर्ट विस्तार से पहले पुराने टर्मिनल से दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, इंदौर, बेंगलुरु और पुणे के लिए उड़ानें उपलब्ध थीं। रोजाना चार से आठ विमानों की आवाजाही होती थी। विस्तार के बाद उम्मीदों के विपरीत उड़ानों की संख्या छह से बढ़कर केवल सात तक ही सीमित रह गई है।

फिलहाल जबलपुर से दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, इंदौर, बेंगलुरु, बिलासपुर और जगदलपुर के लिए फ्लाइट्स संचालित हो रही हैं।

एयरपोर्ट डायरेक्टर राजीव रत्न पांडे के अनुसार, एयरपोर्ट के पास अतिरिक्त उड़ानों को संभालने की पूरी क्षमता है, लेकिन नए रूट शुरू करने के लिए शासन स्तर पर फैसला होना जरूरी है।

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