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घर पर बनाएं बंगाल की पारंपरिक मिठाई राजभोग, मां सरस्वती को करें अर्पित
लाइफ स्टाइल
बसंत पंचमी पर पीली मिठाइयों की परंपरा, राजभोग के स्वाद से खास बनाएं पूजा और त्योहार
बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने और पीले व्यंजनों का भोग लगाने की परंपरा है। ऐसे में अगर घर पर कुछ खास और पारंपरिक बनाने की बात हो, तो बंगाल की प्रसिद्ध मिठाई राजभोग एक बेहतरीन विकल्प मानी जाती है। स्वाद और आकार में रसगुल्ले से अलग, राजभोग त्योहार की मिठास को दोगुना कर देता है।
भारतीय घरों में त्योहारों पर बाहर से मिठाई लाने के बजाय घर पर बनाने की परंपरा आज भी कायम है। विशेषज्ञों के अनुसार, घर पर बनी मिठाई न केवल स्वाद में बेहतर होती है, बल्कि शुद्धता और भावनात्मक जुड़ाव भी बनाए रखती है। बसंत पंचमी जैसे धार्मिक अवसर पर यह मिठाई विशेष महत्व रखती है।
राजभोग बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
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फुल क्रीम दूध – 1 लीटर
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नींबू का रस या सिरका – 2 टेबलस्पून
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कॉर्नफ्लोर – 1 टीस्पून
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केसर – 10–12 धागे (गुनगुने दूध में भिगोए हुए)
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इलायची पाउडर – आधा टीस्पून
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पिस्ता और काजू (बारीक कटे हुए) – 2 टेबलस्पून
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पीला फूड कलर – एक चुटकी
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चीनी – 2 कप
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पानी – 5 कप
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इलायची – 2–3 (कुटी हुई)
राजभोग बनाने की विधि
सबसे पहले दूध को उबाल लें। गैस बंद करने के बाद उसमें नींबू का रस या सिरका डालें, जिससे दूध फट जाए। छेना बनने पर उसे मलमल के कपड़े में छानकर ठंडे पानी से धो लें और 15 मिनट के लिए टांग दें, ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए।
अब छेने को प्लेट में निकालकर हथेली से अच्छी तरह मसलें, जब तक वह पूरी तरह चिकना न हो जाए। इसमें कॉर्नफ्लोर, इलायची पाउडर, केसर वाला दूध, कटे हुए ड्राई फ्रूट्स और हल्का पीला रंग मिलाएं। मिश्रण जब नरम आटे जैसा हो जाए, तब इसके बड़े आकार के गोले बना लें। ध्यान रखें कि राजभोग सामान्य रसगुल्लों से थोड़ा बड़ा होता है।
एक कढ़ाही में पानी और चीनी डालकर उबालें। इसमें कुटी हुई इलायची डालें और चाशनी को पतला ही रखें। उबलती चाशनी में तैयार गोले डालें और ढककर मध्यम आंच पर 15 से 20 मिनट तक पकाएं। जरूरत पड़ने पर बीच-बीच में थोड़ा पानी डाल सकते हैं, ताकि चाशनी गाढ़ी न हो।
पकने के बाद गैस बंद कर दें और राजभोग को चाशनी में ही ठंडा होने दें। ऊपर से पिस्ता और काजू से सजाएं।
पूजा के लिए खास
तैयार राजभोग को बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है। इसका केसरिया रंग और पारंपरिक स्वाद पर्व की भावना को और भी खास बना देता है।
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बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने और पीले व्यंजनों का भोग लगाने की परंपरा है। ऐसे में अगर घर पर कुछ खास और पारंपरिक बनाने की बात हो, तो बंगाल की प्रसिद्ध मिठाई राजभोग एक बेहतरीन विकल्प मानी जाती है। स्वाद और आकार में रसगुल्ले से अलग, राजभोग त्योहार की मिठास को दोगुना कर देता है।
भारतीय घरों में त्योहारों पर बाहर से मिठाई लाने के बजाय घर पर बनाने की परंपरा आज भी कायम है। विशेषज्ञों के अनुसार, घर पर बनी मिठाई न केवल स्वाद में बेहतर होती है, बल्कि शुद्धता और भावनात्मक जुड़ाव भी बनाए रखती है। बसंत पंचमी जैसे धार्मिक अवसर पर यह मिठाई विशेष महत्व रखती है।
राजभोग बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
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फुल क्रीम दूध – 1 लीटर
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नींबू का रस या सिरका – 2 टेबलस्पून
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कॉर्नफ्लोर – 1 टीस्पून
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केसर – 10–12 धागे (गुनगुने दूध में भिगोए हुए)
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इलायची पाउडर – आधा टीस्पून
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पिस्ता और काजू (बारीक कटे हुए) – 2 टेबलस्पून
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पीला फूड कलर – एक चुटकी
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चीनी – 2 कप
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पानी – 5 कप
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इलायची – 2–3 (कुटी हुई)
राजभोग बनाने की विधि
सबसे पहले दूध को उबाल लें। गैस बंद करने के बाद उसमें नींबू का रस या सिरका डालें, जिससे दूध फट जाए। छेना बनने पर उसे मलमल के कपड़े में छानकर ठंडे पानी से धो लें और 15 मिनट के लिए टांग दें, ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए।
अब छेने को प्लेट में निकालकर हथेली से अच्छी तरह मसलें, जब तक वह पूरी तरह चिकना न हो जाए। इसमें कॉर्नफ्लोर, इलायची पाउडर, केसर वाला दूध, कटे हुए ड्राई फ्रूट्स और हल्का पीला रंग मिलाएं। मिश्रण जब नरम आटे जैसा हो जाए, तब इसके बड़े आकार के गोले बना लें। ध्यान रखें कि राजभोग सामान्य रसगुल्लों से थोड़ा बड़ा होता है।
एक कढ़ाही में पानी और चीनी डालकर उबालें। इसमें कुटी हुई इलायची डालें और चाशनी को पतला ही रखें। उबलती चाशनी में तैयार गोले डालें और ढककर मध्यम आंच पर 15 से 20 मिनट तक पकाएं। जरूरत पड़ने पर बीच-बीच में थोड़ा पानी डाल सकते हैं, ताकि चाशनी गाढ़ी न हो।
पकने के बाद गैस बंद कर दें और राजभोग को चाशनी में ही ठंडा होने दें। ऊपर से पिस्ता और काजू से सजाएं।
पूजा के लिए खास
तैयार राजभोग को बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है। इसका केसरिया रंग और पारंपरिक स्वाद पर्व की भावना को और भी खास बना देता है।
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