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पारंपरिक ऊर्जा से हटकर हरित विकल्पों की ओर बढ़ रहा मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री
भोपाल (म.प्र.)
सौर–पवन ऊर्जा में निवेश के लिए राज्य में बना अनुकूल माहौल, 2030 तक 20 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश तेजी से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर अपनी निर्भरता घटाते हुए नवकरणीय ऊर्जा की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है। बीते 12 वर्षों में राज्य में नवीन और नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे कुल ऊर्जा उत्पादन में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी अब 30 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी को लागू किया है। इस नीति के तहत सौर और पवन ऊर्जा सहित विभिन्न स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में निवेश के लिए लचीला और अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। इससे न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ रहा है, बल्कि निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
ऊर्जा सरप्लस राज्यों में अग्रणी मध्यप्रदेश
सीएम डॉ. यादव ने बताया कि भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के कारण मध्यप्रदेश देश के अग्रणी ऊर्जा सरप्लस राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देते हुए हरित ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। इसी का परिणाम है कि मध्यप्रदेश अब धीरे-धीरे एक ग्रीन एनर्जी हब के रूप में उभर रहा है।
वर्तमान में राज्य में पांच बड़ी सौर परियोजनाएं संचालित हो रही हैं, जिनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता करीब 2.75 गीगावाट (2750 मेगावाट) है। सरकार की योजना वर्ष 2030 तक नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 20 गीगावाट (20,000 मेगावाट) तक पहुंचाने की है।
निवेश और रोजगार के नए अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रस्तावित निवेश से राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। इस सेक्टर में अब तक 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं, जिनसे डेढ़ लाख से ज्यादा रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलेंगे और पलायन पर भी अंकुश लगेगा।
राष्ट्रीय लक्ष्यों में मप्र की अहम भूमिका
डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2070 तक देश को नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन की दिशा में ले जाने के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में मध्यप्रदेश पूरी प्रतिबद्धता के साथ योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान सौर ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया था। वर्तमान में राज्य की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 31 हजार मेगावाट है, जिसमें करीब 30 प्रतिशत हिस्सा हरित ऊर्जा का है।
रीवा और ओंकारेश्वर बने पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा सोलर पार्क और देश के सबसे बड़े ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट ने मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। इन परियोजनाओं से न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिला है, बल्कि राज्य को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में नई दिशा भी मिली है।
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