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बीरभूम में घर से ₹28.5 करोड़ कैश और 15 किलो सोना बरामद, करीब ₹50 करोड़ की जब्ती
Digital Desk
मिनार मंडल गिरफ्तार, फरार कारोबारी तुलु मंडल से कनेक्शन की जांच; रकम और सोने के स्रोत तक पहुंचने में जुटी पुलिस
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पुलिस की एक कार्रवाई में भारी मात्रा में नकदी और सोना बरामद होने के बाद हड़कंप मच गया है। बुधवार रात की गई छापेमारी के दौरान एक मकान से ₹28.5 करोड़ से ज्यादा की नकदी और करीब 15 किलोग्राम सोना जब्त किया गया। मौजूदा अनुमान के मुताबिक कैश और सोने को मिलाकर बरामद संपत्ति की कीमत करीब ₹50 करोड़ बताई जा रही है। पुलिस ने जिस मकान से यह संपत्ति बरामद की, वह मिनार मंडल का बताया गया है। कार्रवाई के बाद मिनार को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बरामद नोटों की गिनती करना रही। शुरुआती कार्रवाई में करीब ₹20 करोड़ मिलने की बात सामने आई थी, लेकिन रातभर चली गिनती के बाद रकम बढ़कर ₹28.5 करोड़ से अधिक पहुंच गई। बताया जा रहा है कि नकदी इतनी ज्यादा थी कि नोट गिनने के लिए कई मशीनों का सहारा लेना पड़ा। इस दौरान पांच करेंसी काउंटिंग मशीनों के काम करना बंद करने की भी जानकारी सामने आई है।
छापेमारी के दौरान बरामद नोट करीब 25 बैग में रखे हुए बताए गए। गिनती और जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद रकम को लोहे के बक्सों में रखकर मोहम्मद बाजार पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया। आगे की प्रक्रिया के तहत इस नकदी को बैंक में जमा कराया जा सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम एक आवासीय परिसर में किस उद्देश्य से रखी गई थी और इसके पीछे पैसों का वास्तविक स्रोत क्या है।
कैश के साथ मिला करीब 15 किलो सोना
जांच टीम को मकान से केवल करोड़ों रुपए की नकदी ही नहीं मिली, बल्कि बड़ी मात्रा में सोना भी बरामद हुआ। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस को एक-एक किलो वजन वाले 14 गोल्ड बार मिले हैं। इसके अलावा 100-100 ग्राम वजन के 10 छोटे गोल्ड बिस्किट भी बरामद किए गए। इस तरह सोने का कुल वजन लगभग 15 किलोग्राम बताया गया है।
बरामद सोने की अनुमानित कीमत करीब ₹21.5 करोड़ बताई जा रही है। नकदी और सोने को एक साथ जोड़ने पर पूरी जब्ती का मूल्य लगभग ₹50 करोड़ तक पहुंच रहा है। पुलिस सोने की खरीद, उसके दस्तावेज और मालिकाना हक से संबंधित जानकारी जुटा रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि सोना वैध कारोबार से खरीदा गया था या इसके पीछे किसी दूसरे वित्तीय लेन-देन का संबंध है।
बस ड्राइवर रह चुका है गिरफ्तार मिनार मंडल
मिनार मंडल की पृष्ठभूमि भी जांच के बाद चर्चा में आ गई है। जानकारी के मुताबिक वह पहले राज्य परिवहन विभाग में बस ड्राइवर के तौर पर काम कर चुका है। इसके बाद वह पत्थर के कारोबार से जुड़ गया। मिनार का संबंध फरार पत्थर कारोबारी तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन से भी बताया जा रहा है।
मिनार को तुलु मंडल का रिश्तेदार और उसके कारोबार से जुड़ा प्रबंधक बताया गया है। पुलिस पूछताछ में मिनार ने कथित तौर पर दावा किया कि उसके घर से बरामद कैश और सोना तुलु मंडल का है। हालांकि जांच एजेंसियां इस दावे की स्वतंत्र रूप से पड़ताल कर रही हैं। संपत्ति का वास्तविक मालिक कौन है और रकम वहां तक कैसे पहुंची, इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
अब तुलु मंडल की तलाश पर बढ़ा फोकस
इस कार्रवाई के बाद जांच का दायरा तुलु मंडल की तरफ भी बढ़ गया है। पुलिस उसके कारोबारी नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी जानकारियां जुटा रही है। तुलु मंडल का नाम बीरभूम के पत्थर कारोबार से लंबे समय से जुड़ा बताया जाता है। जांच अधिकारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि बरामद रकम का पत्थर खदानों या उससे संबंधित व्यवसाय से कोई संबंध है या नहीं।
तुलु मंडल पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रह चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में मवेशी तस्करी से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान सीबीआई ने उससे संबंधित परिसरों पर छापेमारी की थी। बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने भी उसे पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया था। इन पुराने मामलों में किसी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
पत्थर खदानों के राजस्व से कनेक्शन की पड़ताल
बीरभूम में पत्थर खदानों का बड़ा कारोबार है। इसी कारण पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है कि करोड़ों रुपए की बरामदगी का संबंध खनन क्षेत्र में होने वाले वित्तीय लेन-देन से तो नहीं है। खास तौर पर सरकारी राजस्व की वसूली और उसे सरकारी खजाने में जमा कराने की प्रक्रिया से जुड़े पुराने आरोपों की पृष्ठभूमि भी जांच के केंद्र में आ सकती है।
जानकारी के मुताबिक 2016-17 के आसपास तुलु मंडल पत्थर खदानों से संबंधित DCR कलेक्शन से जुड़ा हुआ बताया गया था। बाद में सरकारी टैक्स की वसूली और जमा किए जाने की प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप सामने आए थे। अब पुलिस यह देख रही है कि मौजूदा बरामदगी और उस समय के किसी लेन-देन के बीच कोई वित्तीय कड़ी मौजूद है या नहीं।
राजनीतिक आरोपों से भी गरमाया मामला
इतनी बड़ी मात्रा में कैश और सोना मिलने के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है। भाजपा की ओर से पत्थर खदानों से होने वाली राजस्व वसूली को लेकर पुराने और मौजूदा आंकड़ों की तुलना करते हुए सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का दावा है कि पहले सरकारी खातों में प्रतिदिन करीब ₹20 से ₹30 लाख ही जमा होते थे, जबकि वर्तमान में इसी क्षेत्र से राजस्व काफी अधिक है। ये राजनीतिक दावे हैं और इन्हें किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
तुलु मंडल के राजनीतिक संपर्कों को लेकर भी पहले कई दावे सामने आते रहे हैं। उसका नाम पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता अनुब्रत मंडल के करीबी लोगों में शामिल किए जाने की बात कही जाती रही है। मौजूदा कार्रवाई में पुलिस का मुख्य ध्यान फिलहाल जब्त नकदी और सोने की फंडिंग, मालिकाना हक और वित्तीय लेन-देन की कड़ी स्थापित करने पर है।
बेटी की महंगी शादी से भी चर्चा में आया था नाम
तुलु मंडल का नाम वर्ष 2024 में अपनी बेटी की भव्य शादी को लेकर भी चर्चा में आया था। मीडिया रिपोर्टों में उस आयोजन पर करीब ₹100 करोड़ खर्च होने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि खर्च की वास्तविक राशि को लेकर आधिकारिक पुष्टि का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है। अब उसके कथित कारोबारी सहयोगी और रिश्तेदार के घर से करोड़ों रुपए की संपत्ति मिलने के बाद पुराने वित्तीय लेन-देन भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
पुलिस खंगाल रही रकम का पूरा मनी ट्रेल
जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे अहम सवाल ₹28.5 करोड़ से अधिक नकदी के स्रोत का है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पैसा किन लोगों या कारोबारों से आया, इसे कब और किस तरीके से मिनार मंडल के घर पहुंचाया गया और इतनी बड़ी रकम बैंकिंग व्यवस्था से बाहर क्यों रखी गई थी।
इसके साथ ही 15 किलो सोने की खरीद से जुड़े रिकॉर्ड, बिल, भुगतान के तरीके और उससे संबंधित दस्तावेज भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं। मिनार मंडल से पूछताछ के आधार पर सामने आने वाले नामों और वित्तीय लेन-देन को भी सत्यापित किया जा रहा है। पुलिस फरार बताए जा रहे तुलु मंडल तक पहुंचने के साथ उन लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है, जो नकदी या सोना रखने और पहुंचाने की प्रक्रिया से जुड़े हो सकते हैं।
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बीरभूम में घर से ₹28.5 करोड़ कैश और 15 किलो सोना बरामद, करीब ₹50 करोड़ की जब्ती
Digital Desk
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पुलिस की एक कार्रवाई में भारी मात्रा में नकदी और सोना बरामद होने के बाद हड़कंप मच गया है। बुधवार रात की गई छापेमारी के दौरान एक मकान से ₹28.5 करोड़ से ज्यादा की नकदी और करीब 15 किलोग्राम सोना जब्त किया गया। मौजूदा अनुमान के मुताबिक कैश और सोने को मिलाकर बरामद संपत्ति की कीमत करीब ₹50 करोड़ बताई जा रही है। पुलिस ने जिस मकान से यह संपत्ति बरामद की, वह मिनार मंडल का बताया गया है। कार्रवाई के बाद मिनार को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बरामद नोटों की गिनती करना रही। शुरुआती कार्रवाई में करीब ₹20 करोड़ मिलने की बात सामने आई थी, लेकिन रातभर चली गिनती के बाद रकम बढ़कर ₹28.5 करोड़ से अधिक पहुंच गई। बताया जा रहा है कि नकदी इतनी ज्यादा थी कि नोट गिनने के लिए कई मशीनों का सहारा लेना पड़ा। इस दौरान पांच करेंसी काउंटिंग मशीनों के काम करना बंद करने की भी जानकारी सामने आई है।
छापेमारी के दौरान बरामद नोट करीब 25 बैग में रखे हुए बताए गए। गिनती और जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद रकम को लोहे के बक्सों में रखकर मोहम्मद बाजार पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया। आगे की प्रक्रिया के तहत इस नकदी को बैंक में जमा कराया जा सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम एक आवासीय परिसर में किस उद्देश्य से रखी गई थी और इसके पीछे पैसों का वास्तविक स्रोत क्या है।
कैश के साथ मिला करीब 15 किलो सोना
जांच टीम को मकान से केवल करोड़ों रुपए की नकदी ही नहीं मिली, बल्कि बड़ी मात्रा में सोना भी बरामद हुआ। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस को एक-एक किलो वजन वाले 14 गोल्ड बार मिले हैं। इसके अलावा 100-100 ग्राम वजन के 10 छोटे गोल्ड बिस्किट भी बरामद किए गए। इस तरह सोने का कुल वजन लगभग 15 किलोग्राम बताया गया है।
बरामद सोने की अनुमानित कीमत करीब ₹21.5 करोड़ बताई जा रही है। नकदी और सोने को एक साथ जोड़ने पर पूरी जब्ती का मूल्य लगभग ₹50 करोड़ तक पहुंच रहा है। पुलिस सोने की खरीद, उसके दस्तावेज और मालिकाना हक से संबंधित जानकारी जुटा रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि सोना वैध कारोबार से खरीदा गया था या इसके पीछे किसी दूसरे वित्तीय लेन-देन का संबंध है।
बस ड्राइवर रह चुका है गिरफ्तार मिनार मंडल
मिनार मंडल की पृष्ठभूमि भी जांच के बाद चर्चा में आ गई है। जानकारी के मुताबिक वह पहले राज्य परिवहन विभाग में बस ड्राइवर के तौर पर काम कर चुका है। इसके बाद वह पत्थर के कारोबार से जुड़ गया। मिनार का संबंध फरार पत्थर कारोबारी तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन से भी बताया जा रहा है।
मिनार को तुलु मंडल का रिश्तेदार और उसके कारोबार से जुड़ा प्रबंधक बताया गया है। पुलिस पूछताछ में मिनार ने कथित तौर पर दावा किया कि उसके घर से बरामद कैश और सोना तुलु मंडल का है। हालांकि जांच एजेंसियां इस दावे की स्वतंत्र रूप से पड़ताल कर रही हैं। संपत्ति का वास्तविक मालिक कौन है और रकम वहां तक कैसे पहुंची, इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
अब तुलु मंडल की तलाश पर बढ़ा फोकस
इस कार्रवाई के बाद जांच का दायरा तुलु मंडल की तरफ भी बढ़ गया है। पुलिस उसके कारोबारी नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी जानकारियां जुटा रही है। तुलु मंडल का नाम बीरभूम के पत्थर कारोबार से लंबे समय से जुड़ा बताया जाता है। जांच अधिकारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि बरामद रकम का पत्थर खदानों या उससे संबंधित व्यवसाय से कोई संबंध है या नहीं।
तुलु मंडल पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रह चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में मवेशी तस्करी से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान सीबीआई ने उससे संबंधित परिसरों पर छापेमारी की थी। बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने भी उसे पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया था। इन पुराने मामलों में किसी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
पत्थर खदानों के राजस्व से कनेक्शन की पड़ताल
बीरभूम में पत्थर खदानों का बड़ा कारोबार है। इसी कारण पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है कि करोड़ों रुपए की बरामदगी का संबंध खनन क्षेत्र में होने वाले वित्तीय लेन-देन से तो नहीं है। खास तौर पर सरकारी राजस्व की वसूली और उसे सरकारी खजाने में जमा कराने की प्रक्रिया से जुड़े पुराने आरोपों की पृष्ठभूमि भी जांच के केंद्र में आ सकती है।
जानकारी के मुताबिक 2016-17 के आसपास तुलु मंडल पत्थर खदानों से संबंधित DCR कलेक्शन से जुड़ा हुआ बताया गया था। बाद में सरकारी टैक्स की वसूली और जमा किए जाने की प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप सामने आए थे। अब पुलिस यह देख रही है कि मौजूदा बरामदगी और उस समय के किसी लेन-देन के बीच कोई वित्तीय कड़ी मौजूद है या नहीं।
राजनीतिक आरोपों से भी गरमाया मामला
इतनी बड़ी मात्रा में कैश और सोना मिलने के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है। भाजपा की ओर से पत्थर खदानों से होने वाली राजस्व वसूली को लेकर पुराने और मौजूदा आंकड़ों की तुलना करते हुए सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का दावा है कि पहले सरकारी खातों में प्रतिदिन करीब ₹20 से ₹30 लाख ही जमा होते थे, जबकि वर्तमान में इसी क्षेत्र से राजस्व काफी अधिक है। ये राजनीतिक दावे हैं और इन्हें किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
तुलु मंडल के राजनीतिक संपर्कों को लेकर भी पहले कई दावे सामने आते रहे हैं। उसका नाम पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता अनुब्रत मंडल के करीबी लोगों में शामिल किए जाने की बात कही जाती रही है। मौजूदा कार्रवाई में पुलिस का मुख्य ध्यान फिलहाल जब्त नकदी और सोने की फंडिंग, मालिकाना हक और वित्तीय लेन-देन की कड़ी स्थापित करने पर है।
बेटी की महंगी शादी से भी चर्चा में आया था नाम
तुलु मंडल का नाम वर्ष 2024 में अपनी बेटी की भव्य शादी को लेकर भी चर्चा में आया था। मीडिया रिपोर्टों में उस आयोजन पर करीब ₹100 करोड़ खर्च होने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि खर्च की वास्तविक राशि को लेकर आधिकारिक पुष्टि का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है। अब उसके कथित कारोबारी सहयोगी और रिश्तेदार के घर से करोड़ों रुपए की संपत्ति मिलने के बाद पुराने वित्तीय लेन-देन भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
पुलिस खंगाल रही रकम का पूरा मनी ट्रेल
जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे अहम सवाल ₹28.5 करोड़ से अधिक नकदी के स्रोत का है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पैसा किन लोगों या कारोबारों से आया, इसे कब और किस तरीके से मिनार मंडल के घर पहुंचाया गया और इतनी बड़ी रकम बैंकिंग व्यवस्था से बाहर क्यों रखी गई थी।
इसके साथ ही 15 किलो सोने की खरीद से जुड़े रिकॉर्ड, बिल, भुगतान के तरीके और उससे संबंधित दस्तावेज भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं। मिनार मंडल से पूछताछ के आधार पर सामने आने वाले नामों और वित्तीय लेन-देन को भी सत्यापित किया जा रहा है। पुलिस फरार बताए जा रहे तुलु मंडल तक पहुंचने के साथ उन लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है, जो नकदी या सोना रखने और पहुंचाने की प्रक्रिया से जुड़े हो सकते हैं।
