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दुर्ग में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, 1242 म्यूल खाते मिले; करीब 3 करोड़ रुपए फ्रीज
दुर्ग (छ.ग.)
सात महीने में 122 आरोपी गिरफ्तार, 2 हजार से ज्यादा संदिग्ध खातों की जांच; बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
छत्तीसगढ़ की दुर्ग पुलिस ने साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच चलाए गए अभियान में पुलिस ने 1,242 ऐसे बैंक खातों की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग साइबर अपराधों से जुड़ी रकम के लेन-देन में होने की बात सामने आई है। अब तक 122 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें 117 बैंक खाताधारक और साइबर अपराधियों तक खाते पहुंचाने वाले पांच एजेंट शामिल हैं। जांच के दौरान करीब 3 करोड़ रुपए की संदिग्ध रकम फ्रीज कराई गई है, जबकि 2 हजार से अधिक अन्य बैंक खातों की जांच अभी जारी है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि साइबर अपराध से जुड़े लोग अपने नाम के खातों का इस्तेमाल करने के बजाय दूसरे लोगों के बैंक खातों को हासिल करते थे। इसके लिए खास तौर पर बेरोजगार युवाओं और आर्थिक जरूरत वाले लोगों को नौकरी, आसान कमाई या कमीशन का लालच दिया जाता था। कई मामलों में लोगों के पहले से मौजूद बैंक खाते लिए गए, जबकि कुछ के नाम से नए खाते खुलवाए गए। इसके बाद एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से संबंधित जानकारी एजेंटों या गिरोह से जुड़े लोगों तक पहुंचा दी जाती थी। कुछ खाताधारक कथित तौर पर कमीशन लेकर अपने खाते उपलब्ध कराते थे, जबकि कुछ खातों का संचालन सीधे गिरोह के लोगों द्वारा किए जाने की जानकारी मिली है।
जांच के दौरान डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, शेयर ट्रेडिंग के नाम पर धोखाधड़ी, ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन सट्टेबाजी और नकली कस्टमर केयर जैसी साइबर ठगी से जुड़े ट्रांजेक्शन भी सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार पीड़ित से ठगी गई रकम पहले किसी म्यूल बैंक खाते में जमा कराई जाती थी। इसके बाद पैसे को तेजी से दूसरे खातों में भेज दिया जाता था। कई बार बड़ी रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था, जिससे पैसे की वास्तविक मंजिल तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल हो सके। इसके बाद एटीएम से नकद निकासी, UPI, इंटरनेट बैंकिंग और ई-वॉलेट जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर रकम आगे पहुंचाई जाती थी।
दुर्ग पुलिस ने 1 जनवरी से 29 जुलाई 2026 के बीच इस तरह के मामलों को लेकर विशेष अभियान चलाया। इस अवधि में कुल 18 प्रकरण दर्ज किए गए। जांच में पुलिस मुख्यालय की साइबर तकनीकी टीम के साथ Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP), विभिन्न राज्यों में दर्ज शिकायतों और बैंकों से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया गया। संदिग्ध बैंक खातों की पहचान के लिए ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, KYC दस्तावेज, मोबाइल नंबर, UPI रिकॉर्ड और इंटरनेट बैंकिंग लॉग की जांच की गई। पुलिस ने बुधवार को भी अलग-अलग मामलों से जुड़े 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
कार्रवाई में पकड़े गए 122 आरोपियों में पांच एजेंट भी शामिल हैं। पुलिस को आशंका है कि ये एजेंट खाताधारकों और साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क के बीच कड़ी का काम करते थे। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि एजेंटों ने कितने बैंक खाते साइबर अपराधियों तक पहुंचाए और इसके बदले उन्हें कितनी रकम या कमीशन मिला। उनके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस ने आरोपियों और संदिग्ध खातों से जुड़े एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, KYC दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए हैं। इनकी जांच के जरिए पूरे मनी ट्रेल को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगा रही है कि ठगी की रकम सबसे पहले किस खाते में आई, उसके बाद किन-किन खातों में भेजी गई और आखिर में पैसा किस व्यक्ति तक पहुंचा। UPI आईडी और एटीएम से हुई नकद निकासी की जानकारी को भी जांच में शामिल किया गया है।
मामले की जांच अब केवल खाताधारकों और एजेंटों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में संदिग्ध खाते सामने आने के बाद संबंधित बैंकों की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस यह देख रही है कि खाते खोलते समय KYC नियमों का पालन किस तरह किया गया और खातों में लगातार संदिग्ध लेन-देन होने के बावजूद क्या बैंक स्तर पर जरूरी निगरानी की गई थी। किसी बैंक कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही अथवा मिलीभगत के सबूत मिलने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस के सामने अब 2 हजार से ज्यादा अन्य संदिग्ध खातों की जांच बड़ी चुनौती है। इन खातों में हुए लेन-देन और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। भिलाई नगर सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी के मुताबिक, 1 जनवरी से 29 जुलाई के बीच साइबर ठगी से जुड़े 18 मामलों की जांच में 1,242 म्यूल बैंक खातों की पहचान हुई है। इन मामलों में 117 खाताधारकों के अलावा साइबर ठगों को खाते उपलब्ध कराने वाले पांच एजेंट गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
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दुर्ग में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, 1242 म्यूल खाते मिले; करीब 3 करोड़ रुपए फ्रीज
दुर्ग (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ की दुर्ग पुलिस ने साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच चलाए गए अभियान में पुलिस ने 1,242 ऐसे बैंक खातों की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग साइबर अपराधों से जुड़ी रकम के लेन-देन में होने की बात सामने आई है। अब तक 122 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें 117 बैंक खाताधारक और साइबर अपराधियों तक खाते पहुंचाने वाले पांच एजेंट शामिल हैं। जांच के दौरान करीब 3 करोड़ रुपए की संदिग्ध रकम फ्रीज कराई गई है, जबकि 2 हजार से अधिक अन्य बैंक खातों की जांच अभी जारी है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि साइबर अपराध से जुड़े लोग अपने नाम के खातों का इस्तेमाल करने के बजाय दूसरे लोगों के बैंक खातों को हासिल करते थे। इसके लिए खास तौर पर बेरोजगार युवाओं और आर्थिक जरूरत वाले लोगों को नौकरी, आसान कमाई या कमीशन का लालच दिया जाता था। कई मामलों में लोगों के पहले से मौजूद बैंक खाते लिए गए, जबकि कुछ के नाम से नए खाते खुलवाए गए। इसके बाद एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से संबंधित जानकारी एजेंटों या गिरोह से जुड़े लोगों तक पहुंचा दी जाती थी। कुछ खाताधारक कथित तौर पर कमीशन लेकर अपने खाते उपलब्ध कराते थे, जबकि कुछ खातों का संचालन सीधे गिरोह के लोगों द्वारा किए जाने की जानकारी मिली है।
जांच के दौरान डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, शेयर ट्रेडिंग के नाम पर धोखाधड़ी, ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन सट्टेबाजी और नकली कस्टमर केयर जैसी साइबर ठगी से जुड़े ट्रांजेक्शन भी सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार पीड़ित से ठगी गई रकम पहले किसी म्यूल बैंक खाते में जमा कराई जाती थी। इसके बाद पैसे को तेजी से दूसरे खातों में भेज दिया जाता था। कई बार बड़ी रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था, जिससे पैसे की वास्तविक मंजिल तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल हो सके। इसके बाद एटीएम से नकद निकासी, UPI, इंटरनेट बैंकिंग और ई-वॉलेट जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर रकम आगे पहुंचाई जाती थी।
दुर्ग पुलिस ने 1 जनवरी से 29 जुलाई 2026 के बीच इस तरह के मामलों को लेकर विशेष अभियान चलाया। इस अवधि में कुल 18 प्रकरण दर्ज किए गए। जांच में पुलिस मुख्यालय की साइबर तकनीकी टीम के साथ Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP), विभिन्न राज्यों में दर्ज शिकायतों और बैंकों से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया गया। संदिग्ध बैंक खातों की पहचान के लिए ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, KYC दस्तावेज, मोबाइल नंबर, UPI रिकॉर्ड और इंटरनेट बैंकिंग लॉग की जांच की गई। पुलिस ने बुधवार को भी अलग-अलग मामलों से जुड़े 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
कार्रवाई में पकड़े गए 122 आरोपियों में पांच एजेंट भी शामिल हैं। पुलिस को आशंका है कि ये एजेंट खाताधारकों और साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क के बीच कड़ी का काम करते थे। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि एजेंटों ने कितने बैंक खाते साइबर अपराधियों तक पहुंचाए और इसके बदले उन्हें कितनी रकम या कमीशन मिला। उनके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस ने आरोपियों और संदिग्ध खातों से जुड़े एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, KYC दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए हैं। इनकी जांच के जरिए पूरे मनी ट्रेल को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगा रही है कि ठगी की रकम सबसे पहले किस खाते में आई, उसके बाद किन-किन खातों में भेजी गई और आखिर में पैसा किस व्यक्ति तक पहुंचा। UPI आईडी और एटीएम से हुई नकद निकासी की जानकारी को भी जांच में शामिल किया गया है।
मामले की जांच अब केवल खाताधारकों और एजेंटों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में संदिग्ध खाते सामने आने के बाद संबंधित बैंकों की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस यह देख रही है कि खाते खोलते समय KYC नियमों का पालन किस तरह किया गया और खातों में लगातार संदिग्ध लेन-देन होने के बावजूद क्या बैंक स्तर पर जरूरी निगरानी की गई थी। किसी बैंक कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही अथवा मिलीभगत के सबूत मिलने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस के सामने अब 2 हजार से ज्यादा अन्य संदिग्ध खातों की जांच बड़ी चुनौती है। इन खातों में हुए लेन-देन और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। भिलाई नगर सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी के मुताबिक, 1 जनवरी से 29 जुलाई के बीच साइबर ठगी से जुड़े 18 मामलों की जांच में 1,242 म्यूल बैंक खातों की पहचान हुई है। इन मामलों में 117 खाताधारकों के अलावा साइबर ठगों को खाते उपलब्ध कराने वाले पांच एजेंट गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
