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कांवड़ यात्रा के साथ बदली दिल्ली-UP की ट्रैफिक व्यवस्था, हरिद्वार जाने वाले इन रास्तों पर
Digital Desk
गाजियाबाद से मुजफ्फरनगर तक भारी वाहनों पर पाबंदी, दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर भी चरणबद्ध प्रतिबंध
सावन की शुरुआत के साथ कांवड़ यात्रा 2026 का आगाज हो गया है। बड़ी संख्या में शिवभक्त गंगाजल लेने के लिए हरिद्वार और आसपास के धार्मिक स्थलों की ओर रवाना हो रहे हैं। कांवड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। कई स्थानों पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकी गई है, जबकि कुछ मार्गों पर चरणबद्ध तरीके से सामान्य ट्रैफिक भी डायवर्ट किया जाएगा। ऐसे में दिल्ली से हरिद्वार, देहरादून और सहारनपुर की तरफ जाने वाले यात्रियों को सफर से पहले वैकल्पिक मार्गों की जानकारी रखना जरूरी होगा।
कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में इस बार चार करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से कांवड़िये हरिद्वार पहुंचकर गंगा जल भरते हैं। इसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल अपने शहरों और गांवों की तरफ लौटते हैं और सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। यात्रा के दौरान कांवड़ियों का बड़ा हिस्सा मुख्य सड़कों से गुजरता है। इसी वजह से प्रशासन ने सुरक्षा के साथ यातायात प्रबंधन के लिए भी व्यापक इंतजाम किए हैं।
दिल्ली में कांवड़ियों की आवाजाही और अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए कांवड़ शिविरों के कारण पश्चिमी हिस्से की कई सड़कों पर ट्रैफिक प्रभावित होने की संभावना है। 30 जुलाई को जारी ट्रैफिक एडवाइजरी के अनुसार नजफगढ़ फिरनी रोड, रोहतक रोड, पंखा रोड, देव प्रकाश शास्त्री मार्ग, नांगलोई-नजफगढ़ रोड और आउटर रिंग रोड के कुछ हिस्सों पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो सकती है। इन रास्तों से गुजरने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।
दिल्ली पुलिस ने कांवड़ यात्रा से जुड़े प्रमुख रास्तों और शिविरों के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाई है। कांवड़ियों की संख्या बढ़ने के साथ कुछ स्थानों पर यातायात को परिस्थितियों के अनुसार डायवर्ट किया जा सकता है। पुलिस का फोकस ऐसे इलाकों पर है, जहां श्रद्धालुओं और सामान्य वाहनों का दबाव एक साथ बढ़ने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश में दिल्ली की तुलना में ट्रैफिक बदलाव का दायरा ज्यादा बड़ा रखा गया है। पश्चिमी यूपी के कई जिले कांवड़ यात्रा के प्रमुख मार्ग में आते हैं। दिल्ली से हरिद्वार जाने और वहां से वापस आने वाले लाखों श्रद्धालु गाजियाबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर सहित कई जिलों से होकर गुजरते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन ने अलग-अलग तारीखों के हिसाब से ट्रैफिक डायवर्जन लागू करने की व्यवस्था बनाई है।
गाजियाबाद में 29 जुलाई से 12 अगस्त तक चरणबद्ध तरीके से यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। दिल्ली की ओर से गाजियाबाद में प्रवेश करने वाले भारी मालवाहक वाहनों पर पहले चरण में प्रतिबंध लगाया गया है। इन वाहनों को शहर के व्यस्त और कांवड़ यात्रा वाले मार्गों से हटाकर दूसरे रास्तों पर भेजा जा रहा है। इसके लिए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे जैसे वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
मेरठ जोन में भी सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्था की गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पूरे जोन में लगभग 25 हजार पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। कांवड़ यात्रा के महत्वपूर्ण मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई है। भीड़ पर नजर रखने और किसी घटना की स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने के लिए तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है।
यात्रा मार्ग पर करीब सात हजार AI आधारित CCTV कैमरों के इस्तेमाल की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अस्थायी पुलिस चौकियां, बैरिकेडिंग और इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर के जरिए प्रमुख रास्तों की निगरानी की जाएगी। कंट्रोल रूम के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में कांवड़ियों और वाहनों के दबाव की जानकारी जुटाकर जरूरत के अनुसार पुलिस और ट्रैफिक कर्मचारियों को तैनात किया जा सकेगा।
बरेली में भी कांवड़ यात्रा को देखते हुए पुलिस ने विशेष सुरक्षा प्लान लागू किया है। जिले में 3,900 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को विभिन्न स्थानों पर तैनात किए जाने की व्यवस्था है। निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए जिले को तीन सुपर जोन, नौ जोन, 28 सेक्टर और 104 सब-सेक्टर में बांटा गया है। प्रत्येक स्तर पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
सुरक्षा इंतजाम केवल सड़कों तक सीमित नहीं रखे गए हैं। महत्वपूर्ण घाटों और श्रद्धालुओं की अधिक आवाजाही वाले स्थानों पर मेडिकल सहायता और राहत टीमों की व्यवस्था की गई है। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं को किसी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी या आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है। कांवड़ मार्ग की व्यवस्थाओं के तहत शराब की दुकानों और मांसाहारी भोजन से जुड़े प्रतिष्ठानों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर कदम उठाए गए हैं।
यात्रा के आगे बढ़ने के साथ सबसे अधिक असर दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर देखने को मिल सकता है। मुजफ्फरनगर में 30 जुलाई से प्रमुख रास्तों पर भारी वाहनों का प्रवेश रोकने की व्यवस्था की गई है। कांवड़ियों की संख्या बढ़ने पर प्रतिबंध और सख्त किए जाएंगे। प्रशासन की योजना के मुताबिक 4 अगस्त से मुजफ्फरनगर क्षेत्र में दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे और गंग नहर रोड पर सामान्य वाहनों की आवाजाही रोकने की व्यवस्था लागू होनी है।
इस दौरान हरिद्वार और सहारनपुर से दिल्ली की ओर आने वाले वाहनों को मुख्य कांवड़ मार्ग से हटाकर वैकल्पिक रास्तों पर भेजा जाएगा। ऐसे वाहन देवबंद से पचेंडा, मीरापुर और मेरठ के मवाना होते हुए दिल्ली की तरफ बढ़ सकेंगे। दिल्ली से हरिद्वार या इस क्षेत्र की ओर जाने वाले वाहनों के लिए भी इसी वैकल्पिक नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है।
दिल्ली से देहरादून और हरिद्वार की तरफ जाने वाले यात्रियों के लिए दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर महत्वपूर्ण विकल्प रहेगा। प्रशासन का प्रयास रहेगा कि कांवड़ियों को इस कॉरिडोर से अलग रखा जाए, जिससे सामान्य यातायात को चलाने में परेशानी कम हो। इससे मुख्य कांवड़ मार्ग बंद या अत्यधिक व्यस्त होने की स्थिति में लंबी दूरी के यात्रियों को एक वैकल्पिक रास्ता मिल सकेगा।
कांवड़ यात्रा के दौरान लगाए जाने वाले सामान्य प्रतिबंधों से एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक आपातकालीन सेवाओं को छूट रहेगी। प्रतिबंधित मार्ग से गुजरने की जरूरत पड़ने पर आपातकालीन वाहनों को पुलिस की सहायता से निकाला जाएगा। प्रशासन ने अस्पतालों और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच बनाए रखने के लिए अलग व्यवस्था तैयार की है।
अगस्त में कांवड़ियों की संख्या बढ़ने के साथ दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ सकता है। हरिद्वार, देहरादून या सहारनपुर की यात्रा करने वाले लोगों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लग सकता है। खासकर भारी वाहनों के डायवर्जन और कुछ मार्ग पूरी तरह बंद होने के बाद वैकल्पिक सड़कों पर भी वाहनों का दबाव बढ़ने की संभावना है।
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कांवड़ यात्रा के साथ बदली दिल्ली-UP की ट्रैफिक व्यवस्था, हरिद्वार जाने वाले इन रास्तों पर
Digital Desk
सावन की शुरुआत के साथ कांवड़ यात्रा 2026 का आगाज हो गया है। बड़ी संख्या में शिवभक्त गंगाजल लेने के लिए हरिद्वार और आसपास के धार्मिक स्थलों की ओर रवाना हो रहे हैं। कांवड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। कई स्थानों पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकी गई है, जबकि कुछ मार्गों पर चरणबद्ध तरीके से सामान्य ट्रैफिक भी डायवर्ट किया जाएगा। ऐसे में दिल्ली से हरिद्वार, देहरादून और सहारनपुर की तरफ जाने वाले यात्रियों को सफर से पहले वैकल्पिक मार्गों की जानकारी रखना जरूरी होगा।
कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में इस बार चार करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से कांवड़िये हरिद्वार पहुंचकर गंगा जल भरते हैं। इसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल अपने शहरों और गांवों की तरफ लौटते हैं और सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। यात्रा के दौरान कांवड़ियों का बड़ा हिस्सा मुख्य सड़कों से गुजरता है। इसी वजह से प्रशासन ने सुरक्षा के साथ यातायात प्रबंधन के लिए भी व्यापक इंतजाम किए हैं।
दिल्ली में कांवड़ियों की आवाजाही और अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए कांवड़ शिविरों के कारण पश्चिमी हिस्से की कई सड़कों पर ट्रैफिक प्रभावित होने की संभावना है। 30 जुलाई को जारी ट्रैफिक एडवाइजरी के अनुसार नजफगढ़ फिरनी रोड, रोहतक रोड, पंखा रोड, देव प्रकाश शास्त्री मार्ग, नांगलोई-नजफगढ़ रोड और आउटर रिंग रोड के कुछ हिस्सों पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो सकती है। इन रास्तों से गुजरने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।
दिल्ली पुलिस ने कांवड़ यात्रा से जुड़े प्रमुख रास्तों और शिविरों के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाई है। कांवड़ियों की संख्या बढ़ने के साथ कुछ स्थानों पर यातायात को परिस्थितियों के अनुसार डायवर्ट किया जा सकता है। पुलिस का फोकस ऐसे इलाकों पर है, जहां श्रद्धालुओं और सामान्य वाहनों का दबाव एक साथ बढ़ने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश में दिल्ली की तुलना में ट्रैफिक बदलाव का दायरा ज्यादा बड़ा रखा गया है। पश्चिमी यूपी के कई जिले कांवड़ यात्रा के प्रमुख मार्ग में आते हैं। दिल्ली से हरिद्वार जाने और वहां से वापस आने वाले लाखों श्रद्धालु गाजियाबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर सहित कई जिलों से होकर गुजरते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन ने अलग-अलग तारीखों के हिसाब से ट्रैफिक डायवर्जन लागू करने की व्यवस्था बनाई है।
गाजियाबाद में 29 जुलाई से 12 अगस्त तक चरणबद्ध तरीके से यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। दिल्ली की ओर से गाजियाबाद में प्रवेश करने वाले भारी मालवाहक वाहनों पर पहले चरण में प्रतिबंध लगाया गया है। इन वाहनों को शहर के व्यस्त और कांवड़ यात्रा वाले मार्गों से हटाकर दूसरे रास्तों पर भेजा जा रहा है। इसके लिए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे जैसे वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
मेरठ जोन में भी सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्था की गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पूरे जोन में लगभग 25 हजार पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। कांवड़ यात्रा के महत्वपूर्ण मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई है। भीड़ पर नजर रखने और किसी घटना की स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने के लिए तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है।
यात्रा मार्ग पर करीब सात हजार AI आधारित CCTV कैमरों के इस्तेमाल की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अस्थायी पुलिस चौकियां, बैरिकेडिंग और इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर के जरिए प्रमुख रास्तों की निगरानी की जाएगी। कंट्रोल रूम के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में कांवड़ियों और वाहनों के दबाव की जानकारी जुटाकर जरूरत के अनुसार पुलिस और ट्रैफिक कर्मचारियों को तैनात किया जा सकेगा।
बरेली में भी कांवड़ यात्रा को देखते हुए पुलिस ने विशेष सुरक्षा प्लान लागू किया है। जिले में 3,900 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को विभिन्न स्थानों पर तैनात किए जाने की व्यवस्था है। निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए जिले को तीन सुपर जोन, नौ जोन, 28 सेक्टर और 104 सब-सेक्टर में बांटा गया है। प्रत्येक स्तर पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
सुरक्षा इंतजाम केवल सड़कों तक सीमित नहीं रखे गए हैं। महत्वपूर्ण घाटों और श्रद्धालुओं की अधिक आवाजाही वाले स्थानों पर मेडिकल सहायता और राहत टीमों की व्यवस्था की गई है। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं को किसी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी या आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है। कांवड़ मार्ग की व्यवस्थाओं के तहत शराब की दुकानों और मांसाहारी भोजन से जुड़े प्रतिष्ठानों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर कदम उठाए गए हैं।
यात्रा के आगे बढ़ने के साथ सबसे अधिक असर दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर देखने को मिल सकता है। मुजफ्फरनगर में 30 जुलाई से प्रमुख रास्तों पर भारी वाहनों का प्रवेश रोकने की व्यवस्था की गई है। कांवड़ियों की संख्या बढ़ने पर प्रतिबंध और सख्त किए जाएंगे। प्रशासन की योजना के मुताबिक 4 अगस्त से मुजफ्फरनगर क्षेत्र में दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे और गंग नहर रोड पर सामान्य वाहनों की आवाजाही रोकने की व्यवस्था लागू होनी है।
इस दौरान हरिद्वार और सहारनपुर से दिल्ली की ओर आने वाले वाहनों को मुख्य कांवड़ मार्ग से हटाकर वैकल्पिक रास्तों पर भेजा जाएगा। ऐसे वाहन देवबंद से पचेंडा, मीरापुर और मेरठ के मवाना होते हुए दिल्ली की तरफ बढ़ सकेंगे। दिल्ली से हरिद्वार या इस क्षेत्र की ओर जाने वाले वाहनों के लिए भी इसी वैकल्पिक नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है।
दिल्ली से देहरादून और हरिद्वार की तरफ जाने वाले यात्रियों के लिए दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर महत्वपूर्ण विकल्प रहेगा। प्रशासन का प्रयास रहेगा कि कांवड़ियों को इस कॉरिडोर से अलग रखा जाए, जिससे सामान्य यातायात को चलाने में परेशानी कम हो। इससे मुख्य कांवड़ मार्ग बंद या अत्यधिक व्यस्त होने की स्थिति में लंबी दूरी के यात्रियों को एक वैकल्पिक रास्ता मिल सकेगा।
कांवड़ यात्रा के दौरान लगाए जाने वाले सामान्य प्रतिबंधों से एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक आपातकालीन सेवाओं को छूट रहेगी। प्रतिबंधित मार्ग से गुजरने की जरूरत पड़ने पर आपातकालीन वाहनों को पुलिस की सहायता से निकाला जाएगा। प्रशासन ने अस्पतालों और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच बनाए रखने के लिए अलग व्यवस्था तैयार की है।
अगस्त में कांवड़ियों की संख्या बढ़ने के साथ दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ सकता है। हरिद्वार, देहरादून या सहारनपुर की यात्रा करने वाले लोगों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लग सकता है। खासकर भारी वाहनों के डायवर्जन और कुछ मार्ग पूरी तरह बंद होने के बाद वैकल्पिक सड़कों पर भी वाहनों का दबाव बढ़ने की संभावना है।
