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छठघाट के पास निर्माण पर निगम का बुलडोजर, पोखरी पारा की जमीन प्रशासन ने कब्जे में ली
कोरबा (छ.ग.)
नोटिस के बाद भी निर्माण जारी रखने का आरोप, महिला ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
नगर निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-9 स्थित इमली डुग्गू के पोखरी पारा में निर्माण को लेकर चल रहा विवाद प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया। छठघाट के नजदीक बनाए जा रहे ढांचे को नगर निगम की टीम ने जेसीबी की मदद से ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान किसी तरह की विवाद की स्थिति न बने, इसके लिए कोतवाली पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। निगम अधिकारियों का कहना है कि संबंधित निर्माण सार्वजनिक जमीन पर किया जा रहा था और निर्माण रोकने के लिए पहले ही सूचना दी गई थी। इसके बावजूद काम जारी रहने पर कार्रवाई की गई। निर्माण हटाने के बाद संबंधित जमीन को प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है।
मामला उस पोखरी के आसपास की जमीन से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल स्थानीय लोगों द्वारा धार्मिक और सार्वजनिक गतिविधियों के लिए किए जाने की बात कही जा रही है। यहां हर साल छठ पूजा सहित कई धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। इसी क्षेत्र में निर्माण शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर आपत्ति सामने आई थी। आरोप लगाया गया कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर स्थायी निर्माण कर कब्जा किया जा रहा है। इसके बाद मामला जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों तक पहुंचा।
पूर्व वार्ड पार्षद सुफल दास के मुताबिक छठघाट के आसपास सार्वजनिक जमीन पर निर्माण किए जाने की शिकायत प्रशासन से की गई थी। उनका कहना है कि पोखरी लंबे समय से स्थानीय लोगों के उपयोग में है और छठ पर्व के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में इस जमीन पर निजी निर्माण होने से सार्वजनिक उपयोग की जगह प्रभावित होने की आशंका थी। शिकायत के बाद अधिकारियों ने जमीन और निर्माण से संबंधित स्थिति की जांच की, जिसके बाद नगर निगम ने कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
नगर निगम के तोड़ू दस्ता प्रभारी विकास दुबे के अनुसार शिकायत मिलने के बाद मामले में नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई गई। संबंधित पक्ष को निर्माण रोकने के लिए कहा गया था, लेकिन इसके बाद भी निर्माण गतिविधियां जारी रहने की जानकारी सामने आई। इसके बाद निगम की टीम जेसीबी लेकर मौके पर पहुंची और निर्माणाधीन हिस्से को हटा दिया। कार्रवाई के समय पुलिस बल भी मौजूद रहा। मौके पर आसपास के लोगों की भीड़ भी जमा हो गई थी, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में पूरी कार्रवाई की गई।
विवाद में प्रधानमंत्री आवास योजना का पहलू भी सामने आया है। शिकायत करने वाले पक्ष का आरोप है कि योजना के तहत आवास स्वीकृति का हवाला देकर पोखरी से लगी सार्वजनिक जमीन पर निर्माण किया जा रहा था। उनका कहना है कि आवास योजना का लाभ मिलने का अर्थ सार्वजनिक भूमि पर निर्माण की अनुमति नहीं है। इसी आधार पर प्रशासन से जमीन की स्थिति की जांच कराने की मांग की गई थी।
दूसरी तरफ कार्रवाई का सामना करने वाली महिला ने नगर निगम के कदम पर आपत्ति जताई है। महिला का दावा है कि वह करीब 10 वर्षों से इसी स्थान पर रह रही है। उसके मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत होने के बाद उसने निर्माण शुरू कराया था। महिला का कहना है कि वह अचानक जमीन पर कब्जा करने नहीं आई थी, बल्कि लंबे समय से वहां रह रही है और योजना के तहत घर तैयार करा रही थी।
महिला ने यह भी दावा किया कि उसे लगभग 12 फीट की जगह में एक कमरा बनाने के लिए मौखिक रूप से अनुमति दी गई थी। इसी आधार पर निर्माण शुरू किया गया था। उसका कहना है कि अनुमति मिलने की बात सामने रखने के बावजूद निगम की टीम ने निर्माण को गिरा दिया। हालांकि इस कथित मौखिक अनुमति के संबंध में किसी लिखित दस्तावेज का उल्लेख सामने नहीं आया है। ऐसे में जमीन के अधिकार और निर्माण की अनुमति को लेकर प्रशासन और महिला के पक्ष अलग-अलग हैं।
नगर निगम का कहना है कि सार्वजनिक जमीन पर निर्माण से जुड़े मामलों में शिकायत मिलने पर दस्तावेज और भूमि की स्थिति की जांच की जाती है। यदि निर्माण नियमों के अनुरूप नहीं मिलता है तो संबंधित व्यक्ति को इसे रोकने के लिए सूचना दी जाती है। पोखरी पारा के मामले में भी इसी प्रक्रिया के तहत कदम उठाने का दावा किया गया है। अधिकारियों के अनुसार पहले निर्माण रोकने को कहा गया और उसके बाद भी काम जारी रहने पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई।
छठघाट के पास स्थित जमीन धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी होने के कारण मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा में है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि पोखरी और उसके आसपास की जगह को भविष्य में भी सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए। वहीं महिला अपनी लंबे समय से मौजूदगी और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृति का हवाला देकर कार्रवाई को अनुचित बता रही है।
जेसीबी से निर्माण हटाए जाने के बाद प्रशासन ने जमीन को अपने नियंत्रण में ले लिया है। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक इससे दोबारा निर्माण शुरू होने की स्थिति को रोका जा सकेगा। निगम और प्रशासन की ओर से सार्वजनिक भूमि पर सामने आने वाले अतिक्रमण या बिना अनुमति निर्माण के मामलों में शिकायत मिलने पर जांच और नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
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छठघाट के पास निर्माण पर निगम का बुलडोजर, पोखरी पारा की जमीन प्रशासन ने कब्जे में ली
कोरबा (छ.ग.)
नगर निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-9 स्थित इमली डुग्गू के पोखरी पारा में निर्माण को लेकर चल रहा विवाद प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया। छठघाट के नजदीक बनाए जा रहे ढांचे को नगर निगम की टीम ने जेसीबी की मदद से ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान किसी तरह की विवाद की स्थिति न बने, इसके लिए कोतवाली पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। निगम अधिकारियों का कहना है कि संबंधित निर्माण सार्वजनिक जमीन पर किया जा रहा था और निर्माण रोकने के लिए पहले ही सूचना दी गई थी। इसके बावजूद काम जारी रहने पर कार्रवाई की गई। निर्माण हटाने के बाद संबंधित जमीन को प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है।
मामला उस पोखरी के आसपास की जमीन से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल स्थानीय लोगों द्वारा धार्मिक और सार्वजनिक गतिविधियों के लिए किए जाने की बात कही जा रही है। यहां हर साल छठ पूजा सहित कई धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। इसी क्षेत्र में निर्माण शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर आपत्ति सामने आई थी। आरोप लगाया गया कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर स्थायी निर्माण कर कब्जा किया जा रहा है। इसके बाद मामला जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों तक पहुंचा।
पूर्व वार्ड पार्षद सुफल दास के मुताबिक छठघाट के आसपास सार्वजनिक जमीन पर निर्माण किए जाने की शिकायत प्रशासन से की गई थी। उनका कहना है कि पोखरी लंबे समय से स्थानीय लोगों के उपयोग में है और छठ पर्व के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में इस जमीन पर निजी निर्माण होने से सार्वजनिक उपयोग की जगह प्रभावित होने की आशंका थी। शिकायत के बाद अधिकारियों ने जमीन और निर्माण से संबंधित स्थिति की जांच की, जिसके बाद नगर निगम ने कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
नगर निगम के तोड़ू दस्ता प्रभारी विकास दुबे के अनुसार शिकायत मिलने के बाद मामले में नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई गई। संबंधित पक्ष को निर्माण रोकने के लिए कहा गया था, लेकिन इसके बाद भी निर्माण गतिविधियां जारी रहने की जानकारी सामने आई। इसके बाद निगम की टीम जेसीबी लेकर मौके पर पहुंची और निर्माणाधीन हिस्से को हटा दिया। कार्रवाई के समय पुलिस बल भी मौजूद रहा। मौके पर आसपास के लोगों की भीड़ भी जमा हो गई थी, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में पूरी कार्रवाई की गई।
विवाद में प्रधानमंत्री आवास योजना का पहलू भी सामने आया है। शिकायत करने वाले पक्ष का आरोप है कि योजना के तहत आवास स्वीकृति का हवाला देकर पोखरी से लगी सार्वजनिक जमीन पर निर्माण किया जा रहा था। उनका कहना है कि आवास योजना का लाभ मिलने का अर्थ सार्वजनिक भूमि पर निर्माण की अनुमति नहीं है। इसी आधार पर प्रशासन से जमीन की स्थिति की जांच कराने की मांग की गई थी।
दूसरी तरफ कार्रवाई का सामना करने वाली महिला ने नगर निगम के कदम पर आपत्ति जताई है। महिला का दावा है कि वह करीब 10 वर्षों से इसी स्थान पर रह रही है। उसके मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत होने के बाद उसने निर्माण शुरू कराया था। महिला का कहना है कि वह अचानक जमीन पर कब्जा करने नहीं आई थी, बल्कि लंबे समय से वहां रह रही है और योजना के तहत घर तैयार करा रही थी।
महिला ने यह भी दावा किया कि उसे लगभग 12 फीट की जगह में एक कमरा बनाने के लिए मौखिक रूप से अनुमति दी गई थी। इसी आधार पर निर्माण शुरू किया गया था। उसका कहना है कि अनुमति मिलने की बात सामने रखने के बावजूद निगम की टीम ने निर्माण को गिरा दिया। हालांकि इस कथित मौखिक अनुमति के संबंध में किसी लिखित दस्तावेज का उल्लेख सामने नहीं आया है। ऐसे में जमीन के अधिकार और निर्माण की अनुमति को लेकर प्रशासन और महिला के पक्ष अलग-अलग हैं।
नगर निगम का कहना है कि सार्वजनिक जमीन पर निर्माण से जुड़े मामलों में शिकायत मिलने पर दस्तावेज और भूमि की स्थिति की जांच की जाती है। यदि निर्माण नियमों के अनुरूप नहीं मिलता है तो संबंधित व्यक्ति को इसे रोकने के लिए सूचना दी जाती है। पोखरी पारा के मामले में भी इसी प्रक्रिया के तहत कदम उठाने का दावा किया गया है। अधिकारियों के अनुसार पहले निर्माण रोकने को कहा गया और उसके बाद भी काम जारी रहने पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई।
छठघाट के पास स्थित जमीन धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी होने के कारण मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा में है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि पोखरी और उसके आसपास की जगह को भविष्य में भी सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए। वहीं महिला अपनी लंबे समय से मौजूदगी और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृति का हवाला देकर कार्रवाई को अनुचित बता रही है।
जेसीबी से निर्माण हटाए जाने के बाद प्रशासन ने जमीन को अपने नियंत्रण में ले लिया है। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक इससे दोबारा निर्माण शुरू होने की स्थिति को रोका जा सकेगा। निगम और प्रशासन की ओर से सार्वजनिक भूमि पर सामने आने वाले अतिक्रमण या बिना अनुमति निर्माण के मामलों में शिकायत मिलने पर जांच और नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
