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बिलासपुर में जल जीवन मिशन की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश, मार्च 2027 तक हर ग्रामीण घर में शुद्ध पानी का लक्ष्य
बिलासपुर (छ.ग.)
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने की समीक्षा, अधूरे काम समय पर पूरा करने और गुणवत्ता में लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश
जिले के ग्रामीण इलाकों में नल के जरिए सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए चल रहे जल जीवन मिशन के काम में अब तेजी लाई जाएगी। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मार्च 2027 तक निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए काम तय समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए। निर्माण की गुणवत्ता या काम में अनावश्यक देरी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
जिला प्रशासन का फोकस जिले के प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने पर है। योजना के तहत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने का मानक रखा गया है। समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने कहा कि केवल पाइपलाइन बिछाने या निर्माण पूरा करने तक काम सीमित नहीं रहना चाहिए। पानी का स्रोत पर्याप्त हो, घरों तक नियमित सप्लाई पहुंचे और पूरी व्यवस्था लंबे समय तक काम करती रहे, इसे भी सुनिश्चित किया जाए।
903 गांवों के लिए 668 योजनाओं पर काम
जल जीवन मिशन के तहत बिलासपुर जिले के 903 गांवों में पेयजल व्यवस्था विकसित करने के लिए कुल 668 योजनाओं पर काम किया जा रहा है। बैठक में अधिकारियों ने इन योजनाओं की वर्तमान स्थिति, पूरे हो चुके कार्यों और ग्राम पंचायतों को हस्तांतरण की प्रक्रिया की जानकारी कलेक्टर के सामने रखी।
जिले में पूर्ण की गई योजनाओं में से 219 ग्राम पंचायतों को संबंधित पेयजल व्यवस्था सौंपी जा चुकी है। इसके अलावा 90 अन्य योजनाओं का निर्माण पूरा हो गया है। अब इनका हस्तांतरण जल्द पूरा करने की तैयारी है। प्रशासन के अनुसार इससे 74 गांवों में सुरक्षित पेयजल की नियमित आपूर्ति शुरू करने का रास्ता साफ होगा।
अक्टूबर 2026 और मार्च 2027 की डेडलाइन पर नजर
कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि CIRP के अनुसार जिन योजनाओं को अक्टूबर 2026 और मार्च 2027 तक पूरा किया जाना है, उनकी प्रगति की लगातार समीक्षा की जाए। प्रत्येक योजना की स्थिति पर नजर रखी जाए और जहां काम निर्धारित गति से पीछे चल रहा है, वहां देरी का कारण पता कर तुरंत समाधान किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को फील्ड स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश भी दिए। निर्माण एजेंसियों से तय समय में काम कराने के साथ गुणवत्ता की जांच करने को कहा गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य हासिल करने के लिए गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बिजली कनेक्शन के कारण नहीं रुकना चाहिए काम
समीक्षा के दौरान ऐसी योजनाओं पर भी चर्चा हुई, जिनमें बिजली कनेक्शन या दूसरे विभागों से संबंधित प्रक्रिया के कारण काम प्रभावित हो रहा है। कलेक्टर ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर ऐसे मामलों का जल्द समाधान कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि विभागीय प्रक्रिया या आपसी समन्वय की कमी के कारण तैयार पेयजल व्यवस्था का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचने में देरी नहीं होनी चाहिए। जिन स्थानों पर तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन है, उनकी अलग से पहचान कर समयबद्ध तरीके से समस्या दूर की जाए।
जल संकट वाले गांवों के लिए अलग रणनीति
जिले के ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं, जहां गर्मी के दौरान जल संकट की स्थिति बनने की आशंका रहती है। इन गांवों में केवल मौजूदा स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय जल स्रोतों को लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाए रखने की दिशा में काम किया जाएगा।
कलेक्टर ने फ्रैक्चर जोन आधारित स्रोत सुदृढ़ीकरण के साथ भूजल रिचार्ज से जुड़ी संरचनाओं के निर्माण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। जल स्रोतों की स्थिरता का आकलन करने और भविष्य में पेयजल की कमी न हो, इसके लिए आवश्यक तकनीकी कार्य भी समय रहते पूरे करने को कहा गया है।
क्षतिग्रस्त योजनाओं की जल्द होगी मरम्मत
बारिश, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक कारणों से प्रभावित पेयजल योजनाओं को भी जल्द ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। जहां पाइपलाइन, जल संरचना या योजना का कोई दूसरा हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है, वहां पुनर्स्थापना और जरूरी मरम्मत का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि पहले से पूरी हो चुकी योजना किसी तकनीकी खराबी के कारण लंबे समय तक बंद न रहे। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को ऐसी योजनाओं की सूची तैयार कर आवश्यक सुधार कार्य तेजी से कराने को कहा गया है।
पूरी योजनाएं पंचायतों को जल्द सौंपने के निर्देश
जिन गांवों में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, वहां योजनाओं को लंबे समय तक विभागीय स्तर पर लंबित नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पेयजल योजनाओं को ग्राम पंचायतों के सुपुर्द किया जाएगा।
इसके साथ संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी मजबूत करने पर जोर दिया गया है। पंचायतों को योजना सौंपने के बाद यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पेयजल आपूर्ति नियमित रूप से जारी रहे और तकनीकी समस्या आने पर उसका समय पर समाधान किया जा सके।
'हर घर जल' सर्टिफिकेशन में भी आएगी तेजी
बैठक में पूरी हो चुकी योजनाओं के 'हर घर जल' प्रमाणन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने पात्र गांवों में प्रमाणन की प्रक्रिया को बिना अनावश्यक देरी के पूरा करने के निर्देश दिए। जिन गांवों में नल कनेक्शन और पेयजल आपूर्ति से संबंधित निर्धारित मानक पूरे हो चुके हैं, वहां दस्तावेजी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी।
लंबित भुगतान के मामलों को भी बैठक में उठाया गया। कलेक्टर ने अधिकारियों से पात्र और नियमानुसार पूर्ण कार्यों से जुड़े भुगतान के मामलों की जांच कर उनका शीघ्र निपटारा करने को कहा, ताकि भुगतान संबंधी कारणों से निर्माण कार्यों की गति प्रभावित न हो।
रोजाना 55 लीटर प्रति व्यक्ति पानी का मानक
जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों को केवल नल कनेक्शन उपलब्ध कराना लक्ष्य नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 55 लीटर (LPCD) के मानक के अनुसार सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए जल स्रोत, टंकी, पाइपलाइन और घरेलू नल कनेक्शन के साथ पूरी सप्लाई व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
समीक्षा बैठक में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के सचिव और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता रूपेश धनंजय ने जिले में चल रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में विभागीय अधिकारी, सहायक अभियंता, उप अभियंता और विभिन्न निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
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बिलासपुर में जल जीवन मिशन की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश, मार्च 2027 तक हर ग्रामीण घर में शुद्ध पानी का लक्ष्य
बिलासपुर (छ.ग.)
जिले के ग्रामीण इलाकों में नल के जरिए सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए चल रहे जल जीवन मिशन के काम में अब तेजी लाई जाएगी। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मार्च 2027 तक निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए काम तय समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए। निर्माण की गुणवत्ता या काम में अनावश्यक देरी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
जिला प्रशासन का फोकस जिले के प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने पर है। योजना के तहत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने का मानक रखा गया है। समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने कहा कि केवल पाइपलाइन बिछाने या निर्माण पूरा करने तक काम सीमित नहीं रहना चाहिए। पानी का स्रोत पर्याप्त हो, घरों तक नियमित सप्लाई पहुंचे और पूरी व्यवस्था लंबे समय तक काम करती रहे, इसे भी सुनिश्चित किया जाए।
903 गांवों के लिए 668 योजनाओं पर काम
जल जीवन मिशन के तहत बिलासपुर जिले के 903 गांवों में पेयजल व्यवस्था विकसित करने के लिए कुल 668 योजनाओं पर काम किया जा रहा है। बैठक में अधिकारियों ने इन योजनाओं की वर्तमान स्थिति, पूरे हो चुके कार्यों और ग्राम पंचायतों को हस्तांतरण की प्रक्रिया की जानकारी कलेक्टर के सामने रखी।
जिले में पूर्ण की गई योजनाओं में से 219 ग्राम पंचायतों को संबंधित पेयजल व्यवस्था सौंपी जा चुकी है। इसके अलावा 90 अन्य योजनाओं का निर्माण पूरा हो गया है। अब इनका हस्तांतरण जल्द पूरा करने की तैयारी है। प्रशासन के अनुसार इससे 74 गांवों में सुरक्षित पेयजल की नियमित आपूर्ति शुरू करने का रास्ता साफ होगा।
अक्टूबर 2026 और मार्च 2027 की डेडलाइन पर नजर
कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि CIRP के अनुसार जिन योजनाओं को अक्टूबर 2026 और मार्च 2027 तक पूरा किया जाना है, उनकी प्रगति की लगातार समीक्षा की जाए। प्रत्येक योजना की स्थिति पर नजर रखी जाए और जहां काम निर्धारित गति से पीछे चल रहा है, वहां देरी का कारण पता कर तुरंत समाधान किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को फील्ड स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश भी दिए। निर्माण एजेंसियों से तय समय में काम कराने के साथ गुणवत्ता की जांच करने को कहा गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य हासिल करने के लिए गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बिजली कनेक्शन के कारण नहीं रुकना चाहिए काम
समीक्षा के दौरान ऐसी योजनाओं पर भी चर्चा हुई, जिनमें बिजली कनेक्शन या दूसरे विभागों से संबंधित प्रक्रिया के कारण काम प्रभावित हो रहा है। कलेक्टर ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर ऐसे मामलों का जल्द समाधान कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि विभागीय प्रक्रिया या आपसी समन्वय की कमी के कारण तैयार पेयजल व्यवस्था का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचने में देरी नहीं होनी चाहिए। जिन स्थानों पर तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन है, उनकी अलग से पहचान कर समयबद्ध तरीके से समस्या दूर की जाए।
जल संकट वाले गांवों के लिए अलग रणनीति
जिले के ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं, जहां गर्मी के दौरान जल संकट की स्थिति बनने की आशंका रहती है। इन गांवों में केवल मौजूदा स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय जल स्रोतों को लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाए रखने की दिशा में काम किया जाएगा।
कलेक्टर ने फ्रैक्चर जोन आधारित स्रोत सुदृढ़ीकरण के साथ भूजल रिचार्ज से जुड़ी संरचनाओं के निर्माण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। जल स्रोतों की स्थिरता का आकलन करने और भविष्य में पेयजल की कमी न हो, इसके लिए आवश्यक तकनीकी कार्य भी समय रहते पूरे करने को कहा गया है।
क्षतिग्रस्त योजनाओं की जल्द होगी मरम्मत
बारिश, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक कारणों से प्रभावित पेयजल योजनाओं को भी जल्द ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। जहां पाइपलाइन, जल संरचना या योजना का कोई दूसरा हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है, वहां पुनर्स्थापना और जरूरी मरम्मत का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि पहले से पूरी हो चुकी योजना किसी तकनीकी खराबी के कारण लंबे समय तक बंद न रहे। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को ऐसी योजनाओं की सूची तैयार कर आवश्यक सुधार कार्य तेजी से कराने को कहा गया है।
पूरी योजनाएं पंचायतों को जल्द सौंपने के निर्देश
जिन गांवों में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, वहां योजनाओं को लंबे समय तक विभागीय स्तर पर लंबित नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पेयजल योजनाओं को ग्राम पंचायतों के सुपुर्द किया जाएगा।
इसके साथ संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी मजबूत करने पर जोर दिया गया है। पंचायतों को योजना सौंपने के बाद यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पेयजल आपूर्ति नियमित रूप से जारी रहे और तकनीकी समस्या आने पर उसका समय पर समाधान किया जा सके।
'हर घर जल' सर्टिफिकेशन में भी आएगी तेजी
बैठक में पूरी हो चुकी योजनाओं के 'हर घर जल' प्रमाणन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने पात्र गांवों में प्रमाणन की प्रक्रिया को बिना अनावश्यक देरी के पूरा करने के निर्देश दिए। जिन गांवों में नल कनेक्शन और पेयजल आपूर्ति से संबंधित निर्धारित मानक पूरे हो चुके हैं, वहां दस्तावेजी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी।
लंबित भुगतान के मामलों को भी बैठक में उठाया गया। कलेक्टर ने अधिकारियों से पात्र और नियमानुसार पूर्ण कार्यों से जुड़े भुगतान के मामलों की जांच कर उनका शीघ्र निपटारा करने को कहा, ताकि भुगतान संबंधी कारणों से निर्माण कार्यों की गति प्रभावित न हो।
रोजाना 55 लीटर प्रति व्यक्ति पानी का मानक
जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों को केवल नल कनेक्शन उपलब्ध कराना लक्ष्य नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 55 लीटर (LPCD) के मानक के अनुसार सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए जल स्रोत, टंकी, पाइपलाइन और घरेलू नल कनेक्शन के साथ पूरी सप्लाई व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
समीक्षा बैठक में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के सचिव और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता रूपेश धनंजय ने जिले में चल रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में विभागीय अधिकारी, सहायक अभियंता, उप अभियंता और विभिन्न निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
