अमेरिकी दस्तावेजों से खुलासा: ऑपरेशन सिंदूर से डरा पाकिस्तान, अमेरिका में 60 बार की थी गुहार

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पहलगाम हमले के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए पाकिस्तान ने की आक्रामक लॉबिंग, 45 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की संभावित सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान की बेचैनी अमेरिकी दस्तावेजों में उजागर हो गई है। अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत दाखिल रिकॉर्ड के अनुसार, पाकिस्तान ने भारत के सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने के लिए अमेरिका में बड़े स्तर पर कूटनीतिक और राजनीतिक लॉबिंग की। इस दौरान पाकिस्तानी राजनयिकों और लॉबिंग फर्मों ने अमेरिकी प्रशासन, सांसदों, पेंटागन और विदेश विभाग के अधिकारियों से करीब 60 बार संपर्क किया।

दस्तावेजों से पता चलता है कि यह संपर्क अप्रैल के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर भारत के चार दिवसीय सैन्य अभियान के बाद तक जारी रहा। पाकिस्तान का उद्देश्य साफ था—वॉशिंगटन के जरिए भारत पर दबाव बनाना ताकि किसी भी तरह से सैन्य कार्रवाई रोकी जा सके। इसके लिए ईमेल, फोन कॉल और आमने-सामने की बैठकों का सहारा लिया गया।

लॉबिंग पर करोड़ों का खर्च
FARA के तहत उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिका में छह लॉबिंग फर्मों की सेवाएं लीं और इस पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए। रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल और मई के दौरान पाकिस्तान का लॉबिंग खर्च भारत की तुलना में कहीं अधिक रहा। पाकिस्तान ने तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन तक अपनी पहुंच बढ़ाने और व्यापार व कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की।

सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने भारत की सैन्य तैयारी को क्षेत्रीय अस्थिरता के रूप में पेश करते हुए अमेरिका से हस्तक्षेप की मांग की। हालांकि, इन प्रयासों का भारत की रणनीति पर कोई सीधा असर नहीं पड़ा।

भारत का रुख स्पष्ट
इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में लॉबिंग एक कानूनी और स्थापित प्रक्रिया है। विदेशी सरकारें, दूतावास, निजी कंपनियां और व्यावसायिक संगठन वहां लॉबिंग फर्मों के जरिए अपनी बात रखते हैं। भारत का दूतावास भी दशकों से आवश्यकता के अनुसार ऐसी सेवाएं लेता रहा है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका के न्याय विभाग की वेबसाइट पर FARA के तहत सभी लॉबिंग गतिविधियों का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। इसे किसी तरह की गुप्त मध्यस्थता या असामान्य गतिविधि के तौर पर देखना गलत होगा।

रणनीतिक संदेश और आगे की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की आक्रामक लॉबिंग यह दिखाती है कि वह भारत की सैन्य क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति को लेकर गंभीर दबाव में था। इसके बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों से कोई समझौता नहीं किया और अंतरराष्ट्रीय दबावों से प्रभावित हुए बिना कदम उठाए।

अमेरिकी दस्तावेजों से सामने आया यह खुलासा दक्षिण एशिया की कूटनीति में पर्दे के पीछे चलने वाली गतिविधियों को सामने लाता है। यह भी स्पष्ट करता है कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में भारत का रुख अब पहले से अधिक सख्त और निर्णायक है।

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www.dainikjagranmpcg.com
07 Jan 2026 By Nitin Trivedi

अमेरिकी दस्तावेजों से खुलासा: ऑपरेशन सिंदूर से डरा पाकिस्तान, अमेरिका में 60 बार की थी गुहार

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की संभावित सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान की बेचैनी अमेरिकी दस्तावेजों में उजागर हो गई है। अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत दाखिल रिकॉर्ड के अनुसार, पाकिस्तान ने भारत के सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने के लिए अमेरिका में बड़े स्तर पर कूटनीतिक और राजनीतिक लॉबिंग की। इस दौरान पाकिस्तानी राजनयिकों और लॉबिंग फर्मों ने अमेरिकी प्रशासन, सांसदों, पेंटागन और विदेश विभाग के अधिकारियों से करीब 60 बार संपर्क किया।

दस्तावेजों से पता चलता है कि यह संपर्क अप्रैल के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर भारत के चार दिवसीय सैन्य अभियान के बाद तक जारी रहा। पाकिस्तान का उद्देश्य साफ था—वॉशिंगटन के जरिए भारत पर दबाव बनाना ताकि किसी भी तरह से सैन्य कार्रवाई रोकी जा सके। इसके लिए ईमेल, फोन कॉल और आमने-सामने की बैठकों का सहारा लिया गया।

लॉबिंग पर करोड़ों का खर्च
FARA के तहत उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिका में छह लॉबिंग फर्मों की सेवाएं लीं और इस पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए। रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल और मई के दौरान पाकिस्तान का लॉबिंग खर्च भारत की तुलना में कहीं अधिक रहा। पाकिस्तान ने तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन तक अपनी पहुंच बढ़ाने और व्यापार व कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की।

सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने भारत की सैन्य तैयारी को क्षेत्रीय अस्थिरता के रूप में पेश करते हुए अमेरिका से हस्तक्षेप की मांग की। हालांकि, इन प्रयासों का भारत की रणनीति पर कोई सीधा असर नहीं पड़ा।

भारत का रुख स्पष्ट
इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में लॉबिंग एक कानूनी और स्थापित प्रक्रिया है। विदेशी सरकारें, दूतावास, निजी कंपनियां और व्यावसायिक संगठन वहां लॉबिंग फर्मों के जरिए अपनी बात रखते हैं। भारत का दूतावास भी दशकों से आवश्यकता के अनुसार ऐसी सेवाएं लेता रहा है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका के न्याय विभाग की वेबसाइट पर FARA के तहत सभी लॉबिंग गतिविधियों का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। इसे किसी तरह की गुप्त मध्यस्थता या असामान्य गतिविधि के तौर पर देखना गलत होगा।

रणनीतिक संदेश और आगे की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की आक्रामक लॉबिंग यह दिखाती है कि वह भारत की सैन्य क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति को लेकर गंभीर दबाव में था। इसके बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों से कोई समझौता नहीं किया और अंतरराष्ट्रीय दबावों से प्रभावित हुए बिना कदम उठाए।

अमेरिकी दस्तावेजों से सामने आया यह खुलासा दक्षिण एशिया की कूटनीति में पर्दे के पीछे चलने वाली गतिविधियों को सामने लाता है। यह भी स्पष्ट करता है कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में भारत का रुख अब पहले से अधिक सख्त और निर्णायक है।

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