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अमेरिका ने PoK और अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाया, ट्रेड डील के बाद जारी मैप वायरल
अंतराष्ट्रीय न्यूज
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के साथ USTR ने साझा किया इंडियन मैप, सोशल मीडिया पर तेज़ प्रतिक्रिया
भारत और अमेरिका के बीच घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के बाद एक अमेरिकी सरकारी दस्तावेज ने कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) द्वारा साझा किए गए एक आधिकारिक इंडियन मैप में पूरे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र को भारत का हिस्सा दिखाया गया है, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन भी शामिल हैं। यह मैप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।
यह घटनाक्रम तब सामने आया, जब भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट (ITA) का फ्रेमवर्क घोषित किया। इसी घोषणा के साथ जारी ग्राफिक सामग्री में भारत की सीमाओं को पूरी तरह दर्शाया गया, जो अमेरिका के पूर्ववर्ती नक्शों से अलग है। इससे पहले अमेरिकी और पश्चिमी देशों के अधिकांश आधिकारिक नक्शों में PoK और अक्साई चिन को विवादित क्षेत्र के रूप में अलग रंग या डॉटेड लाइन से दिखाया जाता रहा है।
इस बार जारी मैप को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह बदलाव जानबूझकर किया गया है या यह केवल एक तकनीकी प्रस्तुति है। हालांकि, इसे भारत के लंबे समय से चले आ रहे दावे के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें नई दिल्ली पूरे जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न अंग बताती रही है।
PoK को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद 1947 से चला आ रहा है। भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय कानूनी और अंतिम था, जबकि पाकिस्तान इसे विवादित क्षेत्र मानता है। दूसरी ओर, अक्साई चिन भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का प्रमुख केंद्र रहा है। 1962 के युद्ध के बाद से इस क्षेत्र पर चीन का नियंत्रण है, जिसे भारत अवैध कब्जा मानता है।
इस मैप के सामने आने का समय भी अहम माना जा रहा है। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कश्मीर को लेकर बयान दिया था, जिसे भारत ने खारिज किया। ऐसे में अमेरिकी मैप को पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संकेत बताया जा रहा है, हालांकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी गई है।
उधर, भारत-अमेरिका ट्रेड डील के तहत दोनों देशों ने टैरिफ में बड़ी कटौती और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है और रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाया गया अतिरिक्त शुल्क भी हटाया गया है। इस समझौते से भारतीय निर्यातकों, MSME, किसानों और फार्मा सेक्टर को लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मैप भले ही कानूनी घोषणा न हो, लेकिन भारत-अमेरिका रिश्तों में बढ़ती रणनीतिक नजदीकी का संकेत जरूर देता है। आने वाले दिनों में यह देखा जाएगा कि अमेरिका इस मुद्दे पर आधिकारिक रूप से क्या रुख अपनाता है।
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