गढ़चिरौली ऑपरेशन: तीन दिन, सात नक्सली ढेर और एक वीर जवान शहीद

छत्तीसगढ़

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25 लाख का इनामी कमांडर प्रभाकर कैसे बना सुरक्षाबलों का टारगेट

महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित घने जंगलों में सुरक्षाबलों और माओवादी कैडर के बीच चला तीन दिवसीय ऑपरेशन आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंचा। गढ़चिरौली जिले के फोडेवाड़ा इलाके में हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने सात नक्सलियों को मार गिराया, जिनमें 25 लाख रुपये का इनामी शीर्ष कमांडर प्रभाकर भी शामिल है। हालांकि, इस कार्रवाई में C-60 फोर्स के एक जवान ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

खुफिया सूचना से शुरू हुआ ऑपरेशन

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ सीमा से सटे इलाकों में माओवादियों की सक्रिय मूवमेंट की पुख्ता जानकारी मिलने के बाद 3 फरवरी की रात विशेष एंटी-नक्सल दस्ते C-60 की कई यूनिट्स को जंगल में उतारा गया। ऑपरेशन का फोकस फोडेवाड़ा और आसपास के दुर्गम इलाके रहे, जहां माओवादी कैडर के छिपे होने की आशंका थी।

तीन दिन चला सर्च और कॉम्बैट

लगातार तीन दिनों तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच कई बार गोलीबारी हुई। पहले चरण में तीन नक्सलियों के शव बरामद किए गए, जबकि अंतिम दिन चार और माओवादी मारे गए। मारे गए नक्सलियों में चार पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं।

हथियारों का जखीरा बरामद

मुठभेड़ स्थल से सुरक्षाबलों ने बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया है। इनमें आधुनिक ऑटोमैटिक राइफलें और अन्य घातक हथियार शामिल हैं, जो नक्सलियों की बड़ी कार्रवाई की तैयारी की ओर इशारा करते हैं।

वीर जवान की शहादत

इस ऑपरेशन में C-60 कमांडो दीपक चिन्ना मडावी (38) ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दो नक्सलियों को ढेर किया। मुठभेड़ के दौरान उन्हें गोली लगी। गंभीर हालत में उन्हें हवाई मार्ग से अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। एक अन्य जवान भी इस कार्रवाई में घायल हुआ है, जिसकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है।

कौन था इनामी नक्सली प्रभाकर

मारा गया शीर्ष नक्सली प्रभाकर माओवादी संगठन का अहम रणनीतिक चेहरा माना जाता था। उसका असली नाम लोकेटी चंद्र राव बताया गया है और वह तेलंगाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ था। प्रभाकर पर विभिन्न राज्यों में कई हिंसक घटनाओं में शामिल होने के आरोप थे। वह गढ़चिरौली क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क की कमान संभाल रहा था और लंबे समय से सुरक्षाबलों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था।

सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन नक्सल प्रभावित इलाकों में संगठन की कमर तोड़ने की दिशा में बड़ी सफलता है। इलाके में अब भी सर्च अभियान जारी है ताकि किसी अन्य संदिग्ध की मौजूदगी को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

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