वोटर लिस्ट केस में सोनिया गांधी का कोर्ट को जवाब: नागरिकता और मतदाता सूची सरकार व चुनाव आयोग का विषय, निजी शिकायत पर क्रिमिनल कार्रवाई गलत

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राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल जवाब में सोनिया गांधी ने FIR की मांग वाली याचिका को राजनीति से प्रेरित बताया, अगली सुनवाई 21 फरवरी को

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने नागरिकता से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होने से जुड़े मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया है। उन्होंने अपने खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली पुनर्विचार याचिका को तथ्यों से परे, अनुमान आधारित और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया है। मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी को होगी।

शनिवार को स्पेशल जज (CBI) विशाल गोगने की अदालत में वकील के माध्यम से दाखिल जवाब में सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि नागरिकता और वोटर लिस्ट से जुड़े विषय संवैधानिक और वैधानिक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, न कि आपराधिक अदालतों के। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में किसी व्यक्ति की निजी शिकायत पर क्रिमिनल कोर्ट का हस्तक्षेप चुनावी प्रक्रिया में दखल के समान है, जो कानूनन उचित नहीं है।

सोनिया गांधी ने अपने जवाब में शिकायतकर्ता पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने किसी भी प्रामाणिक सरकारी रिकॉर्ड के बजाय मीडिया रिपोर्टों, व्यक्तिगत धारणाओं और अनुमानों के आधार पर आरोप लगाए हैं। शिकायत में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि कौन सा दस्तावेज जाली है या किस रिकॉर्ड में कानूनी त्रुटि है। ऐसे में इस याचिका का कोई ठोस आधार नहीं बनता।

अपने जवाब में सोनिया गांधी ने यह भी रेखांकित किया कि नागरिकता से संबंधित सभी निर्णय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। वहीं, मतदाता सूची का निर्माण, संशोधन और रखरखाव भारत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अदालत से कहा कि इन प्रक्रियाओं के लिए विधिवत वैधानिक मंच मौजूद हैं और इन्हें दरकिनार कर आपराधिक कार्यवाही की मांग करना कानून की मंशा के खिलाफ है।

इस मामले की पृष्ठभूमि में, शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी ने आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की वोटर लिस्ट में शामिल किया गया था, जबकि उन्होंने अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की। यह भी दावा किया गया कि 1982 में उनका नाम मतदाता सूची से हटाया गया और 1983 में दोबारा जोड़ा गया।

इससे पहले 11 सितंबर 2025 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने इस शिकायत को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ विकास त्रिपाठी ने सेशन कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिस पर 9 दिसंबर 2025 को सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया गया।

इस प्रकरण को राजनीतिक रंग भी मिला है। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया था कि सोनिया गांधी का नाम दो बार वोटर लिस्ट में उस समय शामिल हुआ, जब वह भारतीय नागरिक नहीं थीं। कांग्रेस की ओर से इन आरोपों को पहले ही बेबुनियाद बताया जा चुका है।

अब अदालत के समक्ष मुख्य सवाल यही है कि क्या इस तरह के मामलों में आपराधिक अदालत की दखलंदाजी बनती है या नहीं। 21 फरवरी को होने वाली सुनवाई में इस पर अगली कानूनी दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।

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07 Feb 2026 By ANKITA

वोटर लिस्ट केस में सोनिया गांधी का कोर्ट को जवाब: नागरिकता और मतदाता सूची सरकार व चुनाव आयोग का विषय, निजी शिकायत पर क्रिमिनल कार्रवाई गलत

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कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने नागरिकता से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होने से जुड़े मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया है। उन्होंने अपने खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली पुनर्विचार याचिका को तथ्यों से परे, अनुमान आधारित और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया है। मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी को होगी।

शनिवार को स्पेशल जज (CBI) विशाल गोगने की अदालत में वकील के माध्यम से दाखिल जवाब में सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि नागरिकता और वोटर लिस्ट से जुड़े विषय संवैधानिक और वैधानिक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, न कि आपराधिक अदालतों के। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में किसी व्यक्ति की निजी शिकायत पर क्रिमिनल कोर्ट का हस्तक्षेप चुनावी प्रक्रिया में दखल के समान है, जो कानूनन उचित नहीं है।

सोनिया गांधी ने अपने जवाब में शिकायतकर्ता पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने किसी भी प्रामाणिक सरकारी रिकॉर्ड के बजाय मीडिया रिपोर्टों, व्यक्तिगत धारणाओं और अनुमानों के आधार पर आरोप लगाए हैं। शिकायत में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि कौन सा दस्तावेज जाली है या किस रिकॉर्ड में कानूनी त्रुटि है। ऐसे में इस याचिका का कोई ठोस आधार नहीं बनता।

अपने जवाब में सोनिया गांधी ने यह भी रेखांकित किया कि नागरिकता से संबंधित सभी निर्णय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। वहीं, मतदाता सूची का निर्माण, संशोधन और रखरखाव भारत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अदालत से कहा कि इन प्रक्रियाओं के लिए विधिवत वैधानिक मंच मौजूद हैं और इन्हें दरकिनार कर आपराधिक कार्यवाही की मांग करना कानून की मंशा के खिलाफ है।

इस मामले की पृष्ठभूमि में, शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी ने आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की वोटर लिस्ट में शामिल किया गया था, जबकि उन्होंने अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की। यह भी दावा किया गया कि 1982 में उनका नाम मतदाता सूची से हटाया गया और 1983 में दोबारा जोड़ा गया।

इससे पहले 11 सितंबर 2025 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने इस शिकायत को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ विकास त्रिपाठी ने सेशन कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिस पर 9 दिसंबर 2025 को सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया गया।

इस प्रकरण को राजनीतिक रंग भी मिला है। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया था कि सोनिया गांधी का नाम दो बार वोटर लिस्ट में उस समय शामिल हुआ, जब वह भारतीय नागरिक नहीं थीं। कांग्रेस की ओर से इन आरोपों को पहले ही बेबुनियाद बताया जा चुका है।

अब अदालत के समक्ष मुख्य सवाल यही है कि क्या इस तरह के मामलों में आपराधिक अदालत की दखलंदाजी बनती है या नहीं। 21 फरवरी को होने वाली सुनवाई में इस पर अगली कानूनी दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।

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