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उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, शिवसेना (UBT) के 6 सांसद बागी; पार्टी में फिर मचा सियासी भूचाल
Digital Desk
लोकसभा स्पीकर को विलय की चिट्ठी भेजे जाने का दावा, संजय राउत के तीखे बयान से बढ़ा राजनीतिक विवाद
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों के बागी होने की खबरें सामने आईं। सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की इच्छा जताई है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे बागी सांसदों की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजा गया। इस पत्र में संसदीय दल के विलय से जुड़ी मांग रखी गई है। जिन सांसदों के नाम चर्चा में हैं उनमें नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल भी शामिल बताए जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि संजय दीना पाटिल ने कुछ घंटे पहले ही पार्टी छोड़ने की खबरों का खंडन किया था और खुद को उद्धव ठाकरे के साथ बताया था। इसके बाद अचानक उनके नाम के बागी सांसदों की सूची में शामिल होने की खबर ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया। दिल्ली और मुंबई के राजनीतिक गलियारों में पिछले कई दिनों से ऐसी अटकलें चल रही थीं कि शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं। हालांकि पार्टी की ओर से लगातार इन खबरों को खारिज किया जाता रहा। इस बीच दिल्ली में सांसदों की गतिविधियों और अलग-अलग बैठकों ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए थे। अब छह सांसदों के एक साथ अलग होने की खबर सामने आने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिवसेना (UBT) के प्रमुख नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत की प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बन गई। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला। राउत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया । उनके बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया। विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने उनके शब्दों पर सवाल उठाए, जबकि राउत ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि मराठी भाषा और बोलचाल में इस तरह के शब्द कई बार सामान्य रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं। यदि छह सांसदों का अलग होना आधिकारिक रूप से साबित होता है तो यह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए पिछले चार वर्षों में दूसरा बड़ा झटका होगा। इससे पहले जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के 39 विधायकों ने बगावत कर दी थी। उस बगावत ने न केवल महाराष्ट्र की तत्कालीन महाविकास अघाड़ी सरकार को गिरा दिया था, बल्कि शिवसेना की राजनीतिक दिशा भी पूरी तरह बदल दी थी।
2022 के घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह शिंदे गुट को दे दिया था। इसके बाद उद्धव ठाकरे को नए नाम और नए चुनाव चिन्ह के साथ राजनीतिक संघर्ष शुरू करना पड़ा। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन अब सांसदों के संभावित टूटने की खबरें संगठन के लिए नई चुनौती बनकर सामने आई हैं महाराष्ट्र में बदलते समीकरणों का असर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर भी पड़ सकता है। यदि सांसदों का एक बड़ा वर्ग शिंदे गुट के साथ जाता है तो इससे संगठनात्मक ढांचे और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ गठबंधन इसे अपनी राजनीतिक मजबूती के रूप में देख रहा है।
इस घटनाक्रम की एक और खास बात यह है कि हाल के महीनों में देश की राजनीति में दल-बदल और राजनीतिक पुनर्संरचना की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के कई सांसद और विधायक नए राजनीतिक विकल्प तलाशते दिखाई दिए हैं। पिछले तीन महीनों के दौरान विपक्षी दलों के करीब 27 सांसद अलग-अलग कारणों से अपने मूल दल से दूरी बनाकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के करीब पहुंचे हैं। इनमें आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसदों के नाम भी चर्चा में रहे हैं। हालांकि शिवसेना (UBT) की ओर से अब भी यह दावा किया जा रहा है कि पार्टी मजबूत है और संगठन में किसी तरह की कमजोरी नहीं आई है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि वे अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ मजबूती से खड़े हैं। दूसरी ओर शिंदे गुट के नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम पर संयमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जो भी नेता विकास और स्थिरता की राजनीति करना चाहता है, उसका स्वागत है।
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उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, शिवसेना (UBT) के 6 सांसद बागी; पार्टी में फिर मचा सियासी भूचाल
Digital Desk
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों के बागी होने की खबरें सामने आईं। सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की इच्छा जताई है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे बागी सांसदों की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजा गया। इस पत्र में संसदीय दल के विलय से जुड़ी मांग रखी गई है। जिन सांसदों के नाम चर्चा में हैं उनमें नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल भी शामिल बताए जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि संजय दीना पाटिल ने कुछ घंटे पहले ही पार्टी छोड़ने की खबरों का खंडन किया था और खुद को उद्धव ठाकरे के साथ बताया था। इसके बाद अचानक उनके नाम के बागी सांसदों की सूची में शामिल होने की खबर ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया। दिल्ली और मुंबई के राजनीतिक गलियारों में पिछले कई दिनों से ऐसी अटकलें चल रही थीं कि शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं। हालांकि पार्टी की ओर से लगातार इन खबरों को खारिज किया जाता रहा। इस बीच दिल्ली में सांसदों की गतिविधियों और अलग-अलग बैठकों ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए थे। अब छह सांसदों के एक साथ अलग होने की खबर सामने आने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिवसेना (UBT) के प्रमुख नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत की प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बन गई। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला। राउत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया । उनके बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया। विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने उनके शब्दों पर सवाल उठाए, जबकि राउत ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि मराठी भाषा और बोलचाल में इस तरह के शब्द कई बार सामान्य रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं। यदि छह सांसदों का अलग होना आधिकारिक रूप से साबित होता है तो यह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए पिछले चार वर्षों में दूसरा बड़ा झटका होगा। इससे पहले जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के 39 विधायकों ने बगावत कर दी थी। उस बगावत ने न केवल महाराष्ट्र की तत्कालीन महाविकास अघाड़ी सरकार को गिरा दिया था, बल्कि शिवसेना की राजनीतिक दिशा भी पूरी तरह बदल दी थी।
2022 के घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह शिंदे गुट को दे दिया था। इसके बाद उद्धव ठाकरे को नए नाम और नए चुनाव चिन्ह के साथ राजनीतिक संघर्ष शुरू करना पड़ा। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन अब सांसदों के संभावित टूटने की खबरें संगठन के लिए नई चुनौती बनकर सामने आई हैं महाराष्ट्र में बदलते समीकरणों का असर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर भी पड़ सकता है। यदि सांसदों का एक बड़ा वर्ग शिंदे गुट के साथ जाता है तो इससे संगठनात्मक ढांचे और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ गठबंधन इसे अपनी राजनीतिक मजबूती के रूप में देख रहा है।
इस घटनाक्रम की एक और खास बात यह है कि हाल के महीनों में देश की राजनीति में दल-बदल और राजनीतिक पुनर्संरचना की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के कई सांसद और विधायक नए राजनीतिक विकल्प तलाशते दिखाई दिए हैं। पिछले तीन महीनों के दौरान विपक्षी दलों के करीब 27 सांसद अलग-अलग कारणों से अपने मूल दल से दूरी बनाकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के करीब पहुंचे हैं। इनमें आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसदों के नाम भी चर्चा में रहे हैं। हालांकि शिवसेना (UBT) की ओर से अब भी यह दावा किया जा रहा है कि पार्टी मजबूत है और संगठन में किसी तरह की कमजोरी नहीं आई है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि वे अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ मजबूती से खड़े हैं। दूसरी ओर शिंदे गुट के नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम पर संयमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जो भी नेता विकास और स्थिरता की राजनीति करना चाहता है, उसका स्वागत है।
