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रायपुर समेत पांच शहरों में रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की शुरुआत, हडको ने जारी किए टेंडर
रायपुर,(छ.ग.)
250 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं से बदलेगी शहरी तस्वीर, शासकीय परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग पर सरकार का जोर
छत्तीसगढ़ में शहरी विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के विभिन्न शहरों में लंबे समय से अनुपयोगी या कम उपयोग में आने वाली शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक स्वरूप देने के लिए पांच प्रमुख रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की शुरुआत की जा रही है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की ओर से इन परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी क्रम में हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HUDCO) के माध्यम से परियोजनाओं के लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से न केवल शहरों का स्वरूप बदलेगा, बल्कि शासकीय भूमि और परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। प्रस्तावित रिडेवलपमेंट परियोजनाएं रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कोरबा और जगदलपुर में विकसित की जाएंगी। इन सभी परियोजनाओं को राज्य की रिडेवलपमेंट नीति के तहत क्रियान्वित किया जाएगा। इसके लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को क्रियान्वयन एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन पहले ही तैयार किए जा चुके हैं। साथ ही निजी डेवलपर्स के चयन के लिए पारदर्शी निविदा प्रक्रिया भी तय की गई है।
राज्य सरकार के अनुसार इन पांच परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 19.14 एकड़ है। वर्ष 2025-26 की संशोधित गाइडलाइन दरों के आधार पर इनकी अनुमानित कीमत करीब 250.30 करोड़ रुपये आंकी गई है। जिन स्थानों पर रिडेवलपमेंट किया जाना है उनमें रायपुर का बी.टी.आई. रोड शंकर नगर क्षेत्र, महासमुंद का क्लब पारा, राजनांदगांव का कैलाश नगर, कोरबा का कटघोरा और जगदलपुर का चांदनी चौक फेज-2 शामिल हैं। इन क्षेत्रों को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण और संभावनाओं से भरपूर माना जाता है। इन परियोजनाओं में रायपुर की योजना को विशेष महत्व दिया जा रहा है। राजधानी के शंकर नगर क्षेत्र में बी.टी.आई. ग्राउंड के सामने और सिंधु भवन के समीप प्रस्तावित परियोजना शहर के सबसे विकसित और व्यस्त इलाकों में से एक में स्थित है। यह क्षेत्र शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक गतिविधियों और आवासीय कॉलोनियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में यहां आधुनिक अधोसंरचना विकसित होने से पूरे क्षेत्र की उपयोगिता और आकर्षण दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है।
रिडेवलपमेंट मॉडल के माध्यम से शहरों के भीतर मौजूद पुरानी और कम उपयोग वाली परिसंपत्तियों को नई उपयोगिता दी जा सकती है। इससे सरकार को नई भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम होगी और पहले से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकेगा। यही वजह है कि देश के कई बड़े शहरों में रिडेवलपमेंट परियोजनाओं को शहरी विकास का प्रभावी माध्यम माना जा रहा है। अब छत्तीसगढ़ भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इन परियोजनाओं में सार्वजनिक-निजी सहभागिता यानी पीपीपी मॉडल को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश का लाभ मिलेगा, वहीं सरकारी निगरानी के कारण परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहेगी। निजी डेवलपर्स के लिए भी यह अवसर महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें शहरों की प्राइम लोकेशन पर विकास कार्य करने का मौका मिलेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आधुनिक और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास के लिए लगातार काम कर रही है। रिडेवलपमेंट नीति के जरिए जर्जर और अनुपयोगी शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त परिसरों में बदला जाएगा। इससे शहरों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि यह पहल केवल भवन निर्माण परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों का समग्र कायाकल्प करना है। उन्होंने विशेष रूप से रायपुर की प्रस्तावित परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राजधानी के लिए एक आदर्श शहरी विकास मॉडल बन सकती है और भविष्य की परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शक साबित होगी। इन परियोजनाओं के लागू होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है। निर्माण कार्यों के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं परियोजनाएं पूरी होने के बाद व्यावसायिक गतिविधियों में भी वृद्धि हो सकती है। शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन होता है तो यह राज्य के शहरी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही इन परियोजनाओं को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
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रायपुर समेत पांच शहरों में रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की शुरुआत, हडको ने जारी किए टेंडर
रायपुर,(छ.ग.)
छत्तीसगढ़ में शहरी विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के विभिन्न शहरों में लंबे समय से अनुपयोगी या कम उपयोग में आने वाली शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक स्वरूप देने के लिए पांच प्रमुख रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की शुरुआत की जा रही है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की ओर से इन परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी क्रम में हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HUDCO) के माध्यम से परियोजनाओं के लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से न केवल शहरों का स्वरूप बदलेगा, बल्कि शासकीय भूमि और परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। प्रस्तावित रिडेवलपमेंट परियोजनाएं रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कोरबा और जगदलपुर में विकसित की जाएंगी। इन सभी परियोजनाओं को राज्य की रिडेवलपमेंट नीति के तहत क्रियान्वित किया जाएगा। इसके लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को क्रियान्वयन एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन पहले ही तैयार किए जा चुके हैं। साथ ही निजी डेवलपर्स के चयन के लिए पारदर्शी निविदा प्रक्रिया भी तय की गई है।
राज्य सरकार के अनुसार इन पांच परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 19.14 एकड़ है। वर्ष 2025-26 की संशोधित गाइडलाइन दरों के आधार पर इनकी अनुमानित कीमत करीब 250.30 करोड़ रुपये आंकी गई है। जिन स्थानों पर रिडेवलपमेंट किया जाना है उनमें रायपुर का बी.टी.आई. रोड शंकर नगर क्षेत्र, महासमुंद का क्लब पारा, राजनांदगांव का कैलाश नगर, कोरबा का कटघोरा और जगदलपुर का चांदनी चौक फेज-2 शामिल हैं। इन क्षेत्रों को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण और संभावनाओं से भरपूर माना जाता है। इन परियोजनाओं में रायपुर की योजना को विशेष महत्व दिया जा रहा है। राजधानी के शंकर नगर क्षेत्र में बी.टी.आई. ग्राउंड के सामने और सिंधु भवन के समीप प्रस्तावित परियोजना शहर के सबसे विकसित और व्यस्त इलाकों में से एक में स्थित है। यह क्षेत्र शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक गतिविधियों और आवासीय कॉलोनियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में यहां आधुनिक अधोसंरचना विकसित होने से पूरे क्षेत्र की उपयोगिता और आकर्षण दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है।
रिडेवलपमेंट मॉडल के माध्यम से शहरों के भीतर मौजूद पुरानी और कम उपयोग वाली परिसंपत्तियों को नई उपयोगिता दी जा सकती है। इससे सरकार को नई भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम होगी और पहले से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकेगा। यही वजह है कि देश के कई बड़े शहरों में रिडेवलपमेंट परियोजनाओं को शहरी विकास का प्रभावी माध्यम माना जा रहा है। अब छत्तीसगढ़ भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इन परियोजनाओं में सार्वजनिक-निजी सहभागिता यानी पीपीपी मॉडल को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश का लाभ मिलेगा, वहीं सरकारी निगरानी के कारण परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहेगी। निजी डेवलपर्स के लिए भी यह अवसर महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें शहरों की प्राइम लोकेशन पर विकास कार्य करने का मौका मिलेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आधुनिक और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास के लिए लगातार काम कर रही है। रिडेवलपमेंट नीति के जरिए जर्जर और अनुपयोगी शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त परिसरों में बदला जाएगा। इससे शहरों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि यह पहल केवल भवन निर्माण परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों का समग्र कायाकल्प करना है। उन्होंने विशेष रूप से रायपुर की प्रस्तावित परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राजधानी के लिए एक आदर्श शहरी विकास मॉडल बन सकती है और भविष्य की परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शक साबित होगी। इन परियोजनाओं के लागू होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है। निर्माण कार्यों के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं परियोजनाएं पूरी होने के बाद व्यावसायिक गतिविधियों में भी वृद्धि हो सकती है। शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन होता है तो यह राज्य के शहरी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही इन परियोजनाओं को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
