सक्ती में 4 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म की कोशिश, नाबालिग आरोपी पकड़ा गया

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परिजनों की शिकायत पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई, 14 वर्षीय आरोपी को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में एक चार वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म की कोशिश का मामला सामने आने के बाद इलाके में चिंता और आक्रोश का माहौल है। घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए एक 14 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया। बाद में उसे किशोर न्याय प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे कोरबा स्थित बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया। पीड़ित बच्ची और आरोपी नाबालिग के परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते थे। दोनों परिवारों के बीच सामाजिक परिचय होने के कारण आरोपी का पीड़ित परिवार के घर आना-जाना था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इसी परिचय का फायदा उठाकर आरोपी ने कथित तौर पर वारदात को अंजाम देने की कोशिश की। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने तत्काल पुलिस से संपर्क किया और लिखित शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बिना देरी किए जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की। चूंकि आरोपी की उम्र 18 वर्ष से कम है, इसलिए उसके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवारों को पहले से अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस तरह की घटनाओं पर चिंता जताई है और बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार, समाज और संस्थानों को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा, जहां बच्चे सुरक्षित महसूस कर सकें और किसी भी तरह की असहज स्थिति की जानकारी बिना डर के अपने अभिभावकों को दे सकें।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चों से जुड़े अपराधों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में पीड़ित की पहचान और निजी जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करती हैं कि बच्चा और उसका परिवार किसी अतिरिक्त मानसिक दबाव का सामना न करे। इसी कारण मामले से जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जातीं। बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं है। अभिभावकों को भी बच्चों के व्यवहार, दिनचर्या और उनके संपर्क में आने वाले लोगों पर नजर रखनी चाहिए। बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार सुरक्षा संबंधी जानकारी देना और उन्हें ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में समझाना भी जरूरी माना जाता है। कई बार बच्चे डर या झिझक के कारण अपने साथ हुई असहज घटनाओं के बारे में तुरंत नहीं बता पाते, इसलिए परिवार का सहयोगात्मक रवैया बेहद महत्वपूर्ण होता है।

इस घटना के बाद सक्ती जिले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन को मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए, ताकि बच्चों और अभिभावकों दोनों को सुरक्षा संबंधी जानकारी मिल सके। कई लोगों ने यह भी कहा कि समाज में ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने और पीड़ित परिवारों का समर्थन करने की जरूरत है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि मामले को लेकर किसी तरह की अफवाह न फैलाएं और पीड़ित परिवार की निजता का सम्मान करें। बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर कानून में कड़े प्रावधान हैं और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल आरोपी नाबालिग को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है और मामले की आगे की सुनवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

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17 Jun 2026 By Vaishnavi.J

सक्ती में 4 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म की कोशिश, नाबालिग आरोपी पकड़ा गया

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छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में एक चार वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म की कोशिश का मामला सामने आने के बाद इलाके में चिंता और आक्रोश का माहौल है। घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए एक 14 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया। बाद में उसे किशोर न्याय प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे कोरबा स्थित बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया। पीड़ित बच्ची और आरोपी नाबालिग के परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते थे। दोनों परिवारों के बीच सामाजिक परिचय होने के कारण आरोपी का पीड़ित परिवार के घर आना-जाना था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इसी परिचय का फायदा उठाकर आरोपी ने कथित तौर पर वारदात को अंजाम देने की कोशिश की। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने तत्काल पुलिस से संपर्क किया और लिखित शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बिना देरी किए जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की। चूंकि आरोपी की उम्र 18 वर्ष से कम है, इसलिए उसके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवारों को पहले से अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस तरह की घटनाओं पर चिंता जताई है और बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार, समाज और संस्थानों को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा, जहां बच्चे सुरक्षित महसूस कर सकें और किसी भी तरह की असहज स्थिति की जानकारी बिना डर के अपने अभिभावकों को दे सकें।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चों से जुड़े अपराधों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में पीड़ित की पहचान और निजी जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करती हैं कि बच्चा और उसका परिवार किसी अतिरिक्त मानसिक दबाव का सामना न करे। इसी कारण मामले से जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जातीं। बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं है। अभिभावकों को भी बच्चों के व्यवहार, दिनचर्या और उनके संपर्क में आने वाले लोगों पर नजर रखनी चाहिए। बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार सुरक्षा संबंधी जानकारी देना और उन्हें ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में समझाना भी जरूरी माना जाता है। कई बार बच्चे डर या झिझक के कारण अपने साथ हुई असहज घटनाओं के बारे में तुरंत नहीं बता पाते, इसलिए परिवार का सहयोगात्मक रवैया बेहद महत्वपूर्ण होता है।

इस घटना के बाद सक्ती जिले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन को मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए, ताकि बच्चों और अभिभावकों दोनों को सुरक्षा संबंधी जानकारी मिल सके। कई लोगों ने यह भी कहा कि समाज में ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने और पीड़ित परिवारों का समर्थन करने की जरूरत है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि मामले को लेकर किसी तरह की अफवाह न फैलाएं और पीड़ित परिवार की निजता का सम्मान करें। बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर कानून में कड़े प्रावधान हैं और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल आरोपी नाबालिग को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है और मामले की आगे की सुनवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/minor-accused-caught-trying-to-rape-4-year-old-girl/article-56213

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