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रेत तस्करी विवाद में भाजपा नेता को जिंदा जलाया, दो की मौत
Digital Desk
कोरिया जिले में रेत घाट के विवाद ने लिया खूनी मोड़, फॉर्च्यूनर में आग लगाकर भाजपा नेता की हत्या; हमले में एक अन्य युवक की भी जान गई, कई घायल
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में रेत कारोबार को लेकर चल रहा विवाद बुधवार देर रात खूनी संघर्ष में बदल गया। सोनहत थाना क्षेत्र के नौगई गांव में भाजपा के पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह की कथित तौर पर जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि रेत कारोबार से जुड़े विवाद के चलते हमलावरों ने उनके घर के सामने खड़ी फॉर्च्यूनर कार को घेर लिया और उस पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। उस समय लल्ला सिंह कार के अंदर मौजूद थे। आग इतनी तेजी से फैली कि उन्हें बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले में एक अन्य युवक की भी जान चली गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। बताया जा रहा है कि नौगई गांव में लंबे समय से रेत घाट के संचालन और अवैध खनन को लेकर दो पक्षों के बीच तनाव बना हुआ था। स्थानीय स्तर पर यह विवाद लगातार बढ़ता जा रहा था और बीते कुछ दिनों में दोनों पक्षों के बीच कई बार कहासुनी और टकराव की स्थिति भी बनी थी। हालांकि किसी को अंदाजा नहीं था कि मामला इतनी बड़ी हिंसक वारदात में बदल जाएगा।
देर रात करीब 12 बजे कुछ लोग लल्ला सिंह के घर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने पहले घर के बाहर खड़ी फॉर्च्यूनर का रास्ता एक हाईवा और अन्य वाहनों से रोक दिया। इसके बाद कार पर पेट्रोल छिड़का गया और आग लगा दी गई। उस समय कार में भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह के अलावा उनके भाई नागेंद्र सिंह, मयंक सिंह और रायपुर निवासी विरेंद्र सिंह भी मौजूद थे। आग लगते ही कार में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि नागेंद्र सिंह, मयंक सिंह और विरेंद्र सिंह किसी तरह वाहन से बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन बाहर निकलते ही हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। आरोपियों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से उनकी बेरहमी से पिटाई की। इस दौरान विरेंद्र सिंह के गले पर फरसे से वार किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना पुलिस और प्रशासन को दी। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक फॉर्च्यूनर पूरी तरह जल चुकी थी और लल्ला सिंह की मौत हो चुकी थी। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। विरेंद्र सिंह को गंभीर हालत में अंबिकापुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस तरह इस पूरे घटनाक्रम में मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई। घटना में घायल नागेंद्र सिंह, मयंक सिंह और योगेंद्र सिंह को बेहतर उपचार के लिए रायपुर रेफर किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। नागेंद्र सिंह के चेहरे और हाथ में गंभीर चोटें आई हैं, जबकि योगेंद्र सिंह का हाथ टूट गया है और उन्हें अंदरूनी चोटें भी लगी हैं।
वारदात की सूचना मिलते ही सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा देर रात कोरिया पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली। फॉरेंसिक टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया। घटनास्थल से कई अहम साक्ष्य जुटाए गए हैं। पुलिस ने इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया है कि रेत घाट के संचालन को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। नौगई रेत घाट का ठेका लल्ला सिंह के रिश्तेदारों से जुड़ा बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर सक्रिय कुछ अन्य लोगों से भी इस कारोबार को लेकर मतभेद थे। दो दिन पहले भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था और इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
अधिकारियों के अनुसार मामले में सात लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीन अन्य की तलाश जारी है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना की पूरी साजिश और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सके। भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह क्षेत्र के प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों में गिने जाते थे। स्थानीय राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी और वे लंबे समय तक जनपद पंचायत की राजनीति से जुड़े रहे। उनकी हत्या के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। एहतियात के तौर पर गांव और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। रेत कारोबार, पुरानी रंजिश, आर्थिक हितों और हाल के विवादों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
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रेत तस्करी विवाद में भाजपा नेता को जिंदा जलाया, दो की मौत
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छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में रेत कारोबार को लेकर चल रहा विवाद बुधवार देर रात खूनी संघर्ष में बदल गया। सोनहत थाना क्षेत्र के नौगई गांव में भाजपा के पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह की कथित तौर पर जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि रेत कारोबार से जुड़े विवाद के चलते हमलावरों ने उनके घर के सामने खड़ी फॉर्च्यूनर कार को घेर लिया और उस पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। उस समय लल्ला सिंह कार के अंदर मौजूद थे। आग इतनी तेजी से फैली कि उन्हें बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले में एक अन्य युवक की भी जान चली गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। बताया जा रहा है कि नौगई गांव में लंबे समय से रेत घाट के संचालन और अवैध खनन को लेकर दो पक्षों के बीच तनाव बना हुआ था। स्थानीय स्तर पर यह विवाद लगातार बढ़ता जा रहा था और बीते कुछ दिनों में दोनों पक्षों के बीच कई बार कहासुनी और टकराव की स्थिति भी बनी थी। हालांकि किसी को अंदाजा नहीं था कि मामला इतनी बड़ी हिंसक वारदात में बदल जाएगा।
देर रात करीब 12 बजे कुछ लोग लल्ला सिंह के घर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने पहले घर के बाहर खड़ी फॉर्च्यूनर का रास्ता एक हाईवा और अन्य वाहनों से रोक दिया। इसके बाद कार पर पेट्रोल छिड़का गया और आग लगा दी गई। उस समय कार में भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह के अलावा उनके भाई नागेंद्र सिंह, मयंक सिंह और रायपुर निवासी विरेंद्र सिंह भी मौजूद थे। आग लगते ही कार में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि नागेंद्र सिंह, मयंक सिंह और विरेंद्र सिंह किसी तरह वाहन से बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन बाहर निकलते ही हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। आरोपियों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से उनकी बेरहमी से पिटाई की। इस दौरान विरेंद्र सिंह के गले पर फरसे से वार किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना पुलिस और प्रशासन को दी। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक फॉर्च्यूनर पूरी तरह जल चुकी थी और लल्ला सिंह की मौत हो चुकी थी। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। विरेंद्र सिंह को गंभीर हालत में अंबिकापुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस तरह इस पूरे घटनाक्रम में मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई। घटना में घायल नागेंद्र सिंह, मयंक सिंह और योगेंद्र सिंह को बेहतर उपचार के लिए रायपुर रेफर किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। नागेंद्र सिंह के चेहरे और हाथ में गंभीर चोटें आई हैं, जबकि योगेंद्र सिंह का हाथ टूट गया है और उन्हें अंदरूनी चोटें भी लगी हैं।
वारदात की सूचना मिलते ही सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा देर रात कोरिया पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली। फॉरेंसिक टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया। घटनास्थल से कई अहम साक्ष्य जुटाए गए हैं। पुलिस ने इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया है कि रेत घाट के संचालन को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। नौगई रेत घाट का ठेका लल्ला सिंह के रिश्तेदारों से जुड़ा बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर सक्रिय कुछ अन्य लोगों से भी इस कारोबार को लेकर मतभेद थे। दो दिन पहले भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था और इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
अधिकारियों के अनुसार मामले में सात लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीन अन्य की तलाश जारी है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना की पूरी साजिश और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सके। भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह क्षेत्र के प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों में गिने जाते थे। स्थानीय राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी और वे लंबे समय तक जनपद पंचायत की राजनीति से जुड़े रहे। उनकी हत्या के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। एहतियात के तौर पर गांव और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। रेत कारोबार, पुरानी रंजिश, आर्थिक हितों और हाल के विवादों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
