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ब्रिटेन के सबसे पुराने भारतीय रेस्तरां वीरास्वामी पर बंद होने का खतरा, अदालत पहुंचा मामला
Digital Desk
लीज न बढ़ने से बंद होने का खतरा, मालिक बोले- यह सिर्फ रेस्तरां नहीं बल्कि भारतीय खानपान के इतिहास की पहचान है
ब्रिटेन के सबसे पुराने भारतीय रेस्तरां ‘वीरास्वामी’ के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। लगभग एक सदी से अधिक समय से भारतीय स्वाद और संस्कृति का प्रतिनिधित्व कर रहा यह प्रतिष्ठित रेस्तरां अब अपनी ऐतिहासिक जगह खोने के खतरे का सामना कर रहा है। जिस इमारत में यह रेस्तरां संचालित होता है, उसकी लीज समाप्त होने के बाद संपत्ति मालिक क्राउन एस्टेट ने इसे आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के खिलाफ रेस्तरां प्रबंधन अदालत पहुंच गया है और अपनी विरासत को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। वीरास्वामी रेस्तरां की स्थापना अप्रैल 1926 में लंदन के प्रतिष्ठित इलाके में की गई थी। इसे ब्रिटेन का सबसे पुराना भारतीय रेस्तरां माना जाता है। पिछले 100 वर्षों में यह केवल खाने की जगह नहीं रहा, बल्कि भारतीय व्यंजनों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला एक सांस्कृतिक केंद्र बन गया। यहां आने वाले ग्राहकों में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल से लेकर हॉलीवुड अभिनेता मार्लन ब्रैंडो, चार्ली चैपलिन, विवियन ली, लॉरेंस ओलिवियर और ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय तक शामिल रहे हैं।
मौजूदा विवाद की शुरुआत तब हुई जब क्राउन एस्टेट ने जून 2025 में समाप्त हुई रेस्तरां की लीज को नवीनीकृत करने से इनकार कर दिया। क्राउन एस्टेट का कहना है कि वह विक्ट्री हाउस भवन में बड़े पैमाने पर पुनर्विकास और संरचनात्मक बदलाव करना चाहता है। योजना के तहत कार्यालयों और प्रवेश क्षेत्र को नया स्वरूप दिया जाएगा, जिससे इमारत का व्यावसायिक मूल्य बढ़ सके। संपत्ति प्रबंधन का दावा है कि प्रस्तावित बदलावों से कार्यालयों का किराया बढ़ेगा और भवन का बेहतर उपयोग हो सकेगा। हालांकि वीरास्वामी के संचालक इस तर्क से सहमत नहीं हैं। रेस्तरां की मूल कंपनी एमडब्ल्यू ईट का कहना है कि भवन में मरम्मत और नवीनीकरण का काम रेस्तरां को हटाए बिना भी किया जा सकता है। उनका मानना है कि केवल व्यावसायिक लाभ के लिए एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाली संस्था को उसकी जगह से हटाना उचित नहीं होगा।
रेस्तरां के सह-मालिक रंजीत माथरानी ने इस मामले को केवल कारोबारी विवाद नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा मुद्दा बताया है। उन्होंने ग्राहकों और समर्थकों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक संस्थान को बचाने के लिए अपना समर्थन दें। उनका कहना है कि वीरास्वामी ने ब्रिटेन में भारतीय भोजन की लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसकी पहचान केवल एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं है। वीरास्वामी से जुड़ी कई ऐतिहासिक बातें इसे खास बनाती हैं। कहा जाता है कि इंग्लैंड में करी के साथ बीयर पीने की परंपरा की शुरुआत भी यहीं से हुई थी। रेस्तरां के मालिकों के अनुसार, डेनमार्क के राजा यहां नियमित रूप से भोजन करने आते थे और उन्होंने अपनी पसंदीदा कार्ल्सबर्ग बीयर का एक पूरा पीपा रेस्तरां में रखवा दिया था ताकि उनके आने पर वही बीयर परोसी जा सके। यह किस्सा आज भी रेस्तरां की पहचान का हिस्सा माना जाता है।
रेस्तरां ने अपने लंबे इतिहास में कई चुनौतियों का सामना किया है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मन बमबारी के दौर में भी यह सुरक्षित बचा रहा। आर्थिक मंदी, बदलते बाजार, महामारी और रेस्तरां उद्योग की अनेक चुनौतियों के बावजूद इसने अपनी पहचान बनाए रखी। वर्ष 2016 में इसे प्रतिष्ठित मिशेलिन स्टार सम्मान भी मिला, जिसने इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और मजबूत किया। अब मामला अदालत में पहुंच चुका है। 29 जून से सेंट्रल लंदन काउंटी कोर्ट में पांच दिन तक इस मामले की सुनवाई होगी। अदालत यह तय करेगी कि रेस्तरां को मौजूदा स्थान पर बने रहने का अधिकार मिलेगा या उसे अपनी ऐतिहासिक जगह खाली करनी पड़ेगी। इस फैसले का असर केवल एक व्यवसाय पर नहीं बल्कि ब्रिटेन में भारतीय खानपान की विरासत पर भी पड़ सकता है।
एमडब्ल्यू ईट का कहना है कि यदि उन्हें यह जगह छोड़नी पड़ी तो नई जगह पर रेस्तरां स्थापित करने की लागत बेहद भारी होगी। लंदन के वेस्ट एंड जैसे प्रीमियम इलाके में उपयुक्त स्थान ढूंढना आसान नहीं है। इसके अलावा नई जगह को वीरास्वामी के स्तर और प्रतिष्ठा के अनुरूप तैयार करने में करोड़ों रुपये खर्च होंगे। रसोई, डाइनिंग हॉल, इंटीरियर, लाइसेंस और अन्य व्यवस्थाओं पर भारी निवेश करना पड़ेगा। कंपनी का अनुमान है कि स्थानांतरण की कुल लागत 50 लाख पाउंड यानी करीब 57 से 58 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इसमें वह आर्थिक नुकसान भी शामिल है जो रेस्तरां बंद रहने के दौरान होगा। प्रबंधन का कहना है कि वर्षों से जुड़े ग्राहक भी नई जगह पर पूरी तरह स्थानांतरित नहीं हो सकते, जिससे आय पर अतिरिक्त असर पड़ेगा। दूसरी ओर, क्राउन एस्टेट का कहना है कि वह कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहा है और भवन के पुनर्विकास की योजना लंबे समय से तैयार की जा रही है। हालांकि रेस्तरां प्रबंधन का आरोप है कि प्रस्तावित मुआवजा संभावित नुकसान की तुलना में बहुत कम है और इससे उनका नुकसान पूरा नहीं हो सकेगा।
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ब्रिटेन के सबसे पुराने भारतीय रेस्तरां वीरास्वामी पर बंद होने का खतरा, अदालत पहुंचा मामला
Digital Desk
ब्रिटेन के सबसे पुराने भारतीय रेस्तरां ‘वीरास्वामी’ के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। लगभग एक सदी से अधिक समय से भारतीय स्वाद और संस्कृति का प्रतिनिधित्व कर रहा यह प्रतिष्ठित रेस्तरां अब अपनी ऐतिहासिक जगह खोने के खतरे का सामना कर रहा है। जिस इमारत में यह रेस्तरां संचालित होता है, उसकी लीज समाप्त होने के बाद संपत्ति मालिक क्राउन एस्टेट ने इसे आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के खिलाफ रेस्तरां प्रबंधन अदालत पहुंच गया है और अपनी विरासत को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। वीरास्वामी रेस्तरां की स्थापना अप्रैल 1926 में लंदन के प्रतिष्ठित इलाके में की गई थी। इसे ब्रिटेन का सबसे पुराना भारतीय रेस्तरां माना जाता है। पिछले 100 वर्षों में यह केवल खाने की जगह नहीं रहा, बल्कि भारतीय व्यंजनों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला एक सांस्कृतिक केंद्र बन गया। यहां आने वाले ग्राहकों में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल से लेकर हॉलीवुड अभिनेता मार्लन ब्रैंडो, चार्ली चैपलिन, विवियन ली, लॉरेंस ओलिवियर और ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय तक शामिल रहे हैं।
मौजूदा विवाद की शुरुआत तब हुई जब क्राउन एस्टेट ने जून 2025 में समाप्त हुई रेस्तरां की लीज को नवीनीकृत करने से इनकार कर दिया। क्राउन एस्टेट का कहना है कि वह विक्ट्री हाउस भवन में बड़े पैमाने पर पुनर्विकास और संरचनात्मक बदलाव करना चाहता है। योजना के तहत कार्यालयों और प्रवेश क्षेत्र को नया स्वरूप दिया जाएगा, जिससे इमारत का व्यावसायिक मूल्य बढ़ सके। संपत्ति प्रबंधन का दावा है कि प्रस्तावित बदलावों से कार्यालयों का किराया बढ़ेगा और भवन का बेहतर उपयोग हो सकेगा। हालांकि वीरास्वामी के संचालक इस तर्क से सहमत नहीं हैं। रेस्तरां की मूल कंपनी एमडब्ल्यू ईट का कहना है कि भवन में मरम्मत और नवीनीकरण का काम रेस्तरां को हटाए बिना भी किया जा सकता है। उनका मानना है कि केवल व्यावसायिक लाभ के लिए एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाली संस्था को उसकी जगह से हटाना उचित नहीं होगा।
रेस्तरां के सह-मालिक रंजीत माथरानी ने इस मामले को केवल कारोबारी विवाद नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा मुद्दा बताया है। उन्होंने ग्राहकों और समर्थकों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक संस्थान को बचाने के लिए अपना समर्थन दें। उनका कहना है कि वीरास्वामी ने ब्रिटेन में भारतीय भोजन की लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसकी पहचान केवल एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं है। वीरास्वामी से जुड़ी कई ऐतिहासिक बातें इसे खास बनाती हैं। कहा जाता है कि इंग्लैंड में करी के साथ बीयर पीने की परंपरा की शुरुआत भी यहीं से हुई थी। रेस्तरां के मालिकों के अनुसार, डेनमार्क के राजा यहां नियमित रूप से भोजन करने आते थे और उन्होंने अपनी पसंदीदा कार्ल्सबर्ग बीयर का एक पूरा पीपा रेस्तरां में रखवा दिया था ताकि उनके आने पर वही बीयर परोसी जा सके। यह किस्सा आज भी रेस्तरां की पहचान का हिस्सा माना जाता है।
रेस्तरां ने अपने लंबे इतिहास में कई चुनौतियों का सामना किया है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मन बमबारी के दौर में भी यह सुरक्षित बचा रहा। आर्थिक मंदी, बदलते बाजार, महामारी और रेस्तरां उद्योग की अनेक चुनौतियों के बावजूद इसने अपनी पहचान बनाए रखी। वर्ष 2016 में इसे प्रतिष्ठित मिशेलिन स्टार सम्मान भी मिला, जिसने इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और मजबूत किया। अब मामला अदालत में पहुंच चुका है। 29 जून से सेंट्रल लंदन काउंटी कोर्ट में पांच दिन तक इस मामले की सुनवाई होगी। अदालत यह तय करेगी कि रेस्तरां को मौजूदा स्थान पर बने रहने का अधिकार मिलेगा या उसे अपनी ऐतिहासिक जगह खाली करनी पड़ेगी। इस फैसले का असर केवल एक व्यवसाय पर नहीं बल्कि ब्रिटेन में भारतीय खानपान की विरासत पर भी पड़ सकता है।
एमडब्ल्यू ईट का कहना है कि यदि उन्हें यह जगह छोड़नी पड़ी तो नई जगह पर रेस्तरां स्थापित करने की लागत बेहद भारी होगी। लंदन के वेस्ट एंड जैसे प्रीमियम इलाके में उपयुक्त स्थान ढूंढना आसान नहीं है। इसके अलावा नई जगह को वीरास्वामी के स्तर और प्रतिष्ठा के अनुरूप तैयार करने में करोड़ों रुपये खर्च होंगे। रसोई, डाइनिंग हॉल, इंटीरियर, लाइसेंस और अन्य व्यवस्थाओं पर भारी निवेश करना पड़ेगा। कंपनी का अनुमान है कि स्थानांतरण की कुल लागत 50 लाख पाउंड यानी करीब 57 से 58 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इसमें वह आर्थिक नुकसान भी शामिल है जो रेस्तरां बंद रहने के दौरान होगा। प्रबंधन का कहना है कि वर्षों से जुड़े ग्राहक भी नई जगह पर पूरी तरह स्थानांतरित नहीं हो सकते, जिससे आय पर अतिरिक्त असर पड़ेगा। दूसरी ओर, क्राउन एस्टेट का कहना है कि वह कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहा है और भवन के पुनर्विकास की योजना लंबे समय से तैयार की जा रही है। हालांकि रेस्तरां प्रबंधन का आरोप है कि प्रस्तावित मुआवजा संभावित नुकसान की तुलना में बहुत कम है और इससे उनका नुकसान पूरा नहीं हो सकेगा।
