दुनिया भर में समुद्री हादसों की बढ़ती संख्या अब सिर्फ स्थानीय या क्षेत्रीय समस्या नहीं रही, बल्कि यह एक वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी है। यात्रियों से भरी फेरी का डूबना हो, मालवाहक जहाजों की टक्कर, या क्रूज शिप में आग लगने की घटनाएं—लगभग हर महाद्वीप से ऐसी खबरें सामने आ रही हैं। सवाल यह नहीं है कि हादसे क्यों होते हैं, बल्कि यह है कि तकनीकी प्रगति और अंतरराष्ट्रीय नियमों के बावजूद ये हादसे लगातार क्यों बढ़ रहे हैं।
सबसे बड़ा कारण है सुरक्षा मानकों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) जैसे संस्थान नियम और दिशानिर्देश तो तय करते हैं, लेकिन उनका पालन कई देशों में कमजोर है। खासतौर पर विकासशील और द्वीपीय देशों में जहाजों का रखरखाव, नियमित तकनीकी जांच और सुरक्षा अभ्यास अक्सर कागज़ों तक सीमित रह जाते हैं। नतीजा यह होता है कि छोटी तकनीकी खराबी भी बड़ी त्रासदी में बदल जाती है।
दूसरा अहम कारण है ओवरलोडिंग और व्यावसायिक दबाव। यात्रियों या माल की संख्या बढ़ाकर मुनाफा कमाने की होड़ में जहाज संचालक अक्सर जोखिम उठाते हैं। कई मामलों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया जाता है, जीवन रक्षक उपकरण कम पड़ जाते हैं और आपात स्थिति में बचाव कार्य बेहद कठिन हो जाता है। यह समस्या खासतौर पर उन रूट्स पर ज्यादा दिखती है, जहां समुद्री परिवहन आम लोगों के लिए सस्ता और जरूरी साधन है।
मौसम परिवर्तन भी समुद्री हादसों को बढ़ाने वाला एक बड़ा कारक बन रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्रों में अचानक तूफान, ऊंची लहरें और तेज हवाएं अब पहले से ज्यादा आम हो गई हैं। कई जहाज ऐसे हालात के लिए डिज़ाइन नहीं होते या समय रहते चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। नतीजतन, जहाज खुले समुद्र में फंस जाते हैं और बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
इसके साथ ही प्रशिक्षण और मानव संसाधन की कमी भी एक गंभीर मुद्दा है। अनुभवी क्रू की जगह कम प्रशिक्षित स्टाफ की नियुक्ति, थकान भरे शिफ्ट और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी—ये सभी मिलकर दुर्घटना की आशंका बढ़ाते हैं। समुद्री परिवहन में मानवीय भूल आज भी हादसों का बड़ा कारण बनी हुई है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि हादसों के बाद जवाबदेही तय नहीं होती। जांच रिपोर्ट आती है, मुआवजे की घोषणा होती है और कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी और दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सुधार की उम्मीद अधूरी रहेगी।
समुद्री हादसे इसलिए भी ग्लोबल चिंता हैं क्योंकि समुद्र किसी एक देश की सीमा में नहीं बंधे। एक हादसा न सिर्फ मानव जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार, पर्यावरण और वैश्विक सप्लाई चेन को भी नुकसान पहुंचाता है। अब जरूरत है कि समुद्री सुरक्षा को सिर्फ नियमों का विषय न मानकर मानव जीवन की प्राथमिकता बनाया जाए। कड़े निरीक्षण, पारदर्शी जांच, आधुनिक तकनीक और जवाबदेही—यही वे कदम हैं, जिनसे समुद्र यात्राएं सच में सुरक्षित बन सकती हैं।
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