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दिल्ली कूच पर निकले किसानों को शंभू बॉर्डर पर रोका, भारी पुलिस बल तैनात
Digital Desk
किसान घाट पर महापंचायत में शामिल होने जा रहे पंजाब-हरियाणा के किसान, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में जुटान; दिल्ली में पहले से जारी युवा आंदोलन के बीच सुरक्षा कड़ी
पंजाब और हरियाणा से दिल्ली की ओर निकले किसानों को मंगलवार, 21 जुलाई को शंभू बॉर्डर पर रोक दिया गया। दिल्ली के किसान घाट पर प्रस्तावित किसान महापंचायत में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में किसान सुबह से अलग-अलग जगहों से रवाना हुए थे। किसानों के दिल्ली पहुंचने से पहले ही हरियाणा पुलिस ने पंजाब से लगती सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। शंभू बॉर्डर पर बैरिकेड लगाए गए हैं और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। किसानों के जत्थे पहुंचने के साथ बॉर्डर पर हलचल बढ़ गई।
इस बार किसानों की महापंचायत का प्रमुख मुद्दा प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता है। किसान संगठनों को आशंका है कि समझौते में कृषि और डेयरी बाजार से जुड़े फैसले भारतीय किसानों के हितों पर असर डाल सकते हैं। इसी मुद्दे को लेकर किसान संगठनों ने दिल्ली में जुटने का आह्वान किया है। पंजाब, हरियाणा के अलावा दूसरे राज्यों से भी किसानों के महापंचायत में पहुंचने की बात कही गई है। किसान नेता केंद्र सरकार से कृषि हितों को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं।
पंजाब के अलग-अलग जिलों से किसानों के जत्थे मंगलवार सुबह दिल्ली के लिए आगे बढ़े। कई किसान बसों और दूसरे वाहनों से रवाना हुए, जबकि कुछ जत्थे पहले ही निर्धारित स्थानों पर पहुंच गए थे। फतेहगढ़ साहिब में एक हजार से ज्यादा किसानों के रात में रुकने की जानकारी सामने आई। सुबह यहां से किसानों का काफिला आगे बढ़ा और जीटी रोड होते हुए शंभू बॉर्डर की तरफ पहुंचने लगा। रास्ते में कई जगह किसानों के वाहनों का लंबा काफिला दिखाई दिया।
किसानों की आवाजाही को देखते हुए हरियाणा पुलिस ने शंभू बॉर्डर पर पहले से तैयारी कर रखी थी। घग्गर नदी के पुल के आसपास बैरिकेडिंग की गई और पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाई गई। सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाई गई कि पंजाब की ओर से आने वाले बड़े किसान जत्थों को हरियाणा में आगे बढ़ने से रोका जा सके। शंभू वही बॉर्डर है जो पिछले किसान आंदोलनों के दौरान भी लंबे समय तक चर्चा में रहा था। एक बार फिर यहां पुलिस और किसान आमने-सामने की स्थिति में दिखाई दिए।
बॉर्डर बंद होने का असर सामान्य यातायात पर भी पड़ा। राष्ट्रीय राजमार्ग और आसपास के रास्तों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की खबरें सामने आईं। अचानक रास्ता बंद होने के कारण कई यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ जगह वाहनों की कतारें लग गईं और लोगों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ा। पुलिस की कोशिश किसान जत्थों को दिल्ली की ओर जाने से रोकने के साथ सामान्य कानून व्यवस्था बनाए रखने की भी है।
किसान नेताओं ने शंभू बॉर्डर पर रोके जाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाकर किसान महापंचायत में शामिल होना चाहते हैं। किसान संगठनों ने सवाल उठाया कि जब उनका कार्यक्रम शांतिपूर्ण है तो उन्हें रास्ते में क्यों रोका जा रहा है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने भी हरियाणा सरकार की बैरिकेडिंग पर नाराजगी जताई। आगे की रणनीति किसान संगठनों के नेताओं के साथ चर्चा के बाद तय किए जाने की बात कही गई है।
शंभू बॉर्डर के अलावा हरियाणा के दूसरे हिस्सों में भी किसानों को रोकने की कार्रवाई सामने आई है। कुरुक्षेत्र के शाहाबाद क्षेत्र में दिल्ली जा रहे किसानों की बसों को पुलिस ने रोक दिया। ये किसान भारतीय किसान यूनियन से जुड़े बताए गए हैं और दिल्ली की महापंचायत में शामिल होने जा रहे थे। किसानों ने आगे जाने की अनुमति नहीं मिलने पर विरोध जताया। कुछ स्थानों पर किसानों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने की बात भी कही।
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी को हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। किसान संगठनों के दिल्ली कूच को देखते हुए हरियाणा में कई जगह पुलिस सक्रिय रही। प्रमुख सड़कों और उन रास्तों पर निगरानी बढ़ाई गई, जिनसे किसान दिल्ली की ओर जा सकते थे। प्रशासन की कोशिश बड़े काफिलों को एक साथ राष्ट्रीय राजधानी की तरफ बढ़ने से रोकने की रही। इससे कई जगह किसान संगठनों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी।
दिल्ली में प्रस्तावित किसान महापंचायत को लेकर किसान संगठनों ने पहले से तैयारी की थी। किसान घाट पर होने वाले कार्यक्रम में प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर आवाज उठाने की तैयारी है। किसान संगठनों का कहना है कि किसी भी व्यापार समझौते में देश के किसानों और कृषि बाजार के हितों से समझौता नहीं होना चाहिए। खास तौर पर विदेशी कृषि उत्पादों की बाजार तक पहुंच और आयात से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई जा रही है।
किसानों की आशंका है कि अगर विदेशी कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार ज्यादा खोला गया तो इसका असर स्थानीय किसानों की आय और उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है। किसान संगठन चाहते हैं कि सरकार व्यापार समझौते से जुड़े कृषि प्रावधानों पर स्थिति स्पष्ट करे। इसी मांग को लेकर दिल्ली में बड़ा जुटान बुलाया गया है। हालांकि समझौते के अंतिम प्रावधान क्या होंगे, इसे लेकर किसानों की चिंताओं और सरकार की बातचीत की वास्तविक स्थिति को अलग-अलग देखा जाना जरूरी है।
शंभू बॉर्डर पर रोके जाने के बाद किसानों के सामने अब दिल्ली पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है। पुलिस ने प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग कर रखी है। किसान संगठनों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने कार्यक्रम में शामिल होना चाहते हैं और किसी तरह का टकराव नहीं चाहते। दूसरी ओर प्रशासन बड़ी संख्या में लोगों के अचानक दिल्ली की तरफ बढ़ने से कानून व्यवस्था और यातायात पर पड़ने वाले असर को लेकर सतर्क है। दोनों पक्षों की गतिविधियों के कारण बॉर्डर पर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
दिल्ली में पहले से ही जंतर-मंतर पर युवाओं का आंदोलन चल रहा है। सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। मंगलवार को भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहने की खबर है। इसके कारण नई दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में पहले से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।
युवा आंदोलन में परीक्षा और भर्ती से जुड़े मुद्दों समेत कई मांगें उठाई जा रही हैं। सोमवार के घटनाक्रम के बाद मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर अपना धरना जारी रखा। पुलिस की ओर से संसद और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा कड़ी की गई है। ऐसे समय में किसानों के बड़े जत्थों के भी दिल्ली पहुंचने की योजना ने सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती बढ़ा दी है। दिल्ली के प्रवेश मार्गों और प्रमुख प्रदर्शन स्थलों पर पुलिस की नजर बनी हुई है।
हालांकि किसानों की महापंचायत और जंतर-मंतर पर चल रहा युवा आंदोलन अलग-अलग मुद्दों से जुड़े कार्यक्रम हैं। किसानों का मुख्य कार्यक्रम किसान घाट पर प्रस्तावित है और उनका विरोध भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़ी कृषि संबंधी चिंताओं को लेकर है। वहीं जंतर-मंतर का आंदोलन शिक्षा, परीक्षा और युवाओं की मांगों से जुड़ा है। दोनों कार्यक्रम एक ही समय दिल्ली में होने के कारण पुलिस और प्रशासन को भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ रही है।
पिछले कुछ वर्षों में शंभू बॉर्डर किसान आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। 2024 में भी पंजाब के किसानों के दिल्ली कूच के दौरान इसी सीमा पर लंबे समय तक बैरिकेडिंग और पुलिस बंदोबस्त रहा था। किसानों ने यहां कई महीनों तक डेरा डाला था और MSP समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन किया था। अब एक बार फिर दिल्ली कूच के दौरान शंभू बॉर्डर पर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पुराने आंदोलन की यादों के कारण इस बार भी यहां की स्थिति पर विशेष नजर है।
किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार उन्हें शांतिपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने से रोक रही है। नेताओं का कहना है कि किसान केवल अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जाना चाहते हैं। शंभू बॉर्डर पर मौजूद किसानों ने नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया। किसान नेताओं की बैठक के बाद आगे का कदम तय किया जा सकता है। अगर पुलिस रास्ता नहीं खोलती है तो किसान वहीं धरना देने या दूसरे विकल्प अपनाने का फैसला कर सकते हैं।
हरियाणा पुलिस की ओर से संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं। पंजाब-हरियाणा सीमा के साथ उन मार्गों पर भी निगरानी रखी जा रही है, जहां से किसान छोटे समूहों में आगे बढ़ सकते हैं। बसों और किसान संगठनों के वाहनों की आवाजाही पर भी नजर है। शाहाबाद समेत कुछ स्थानों पर किसानों को रोकने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हुई, लेकिन किसान नेताओं की ओर से फिलहाल शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखने की बात कही जा रही है।
दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए भी स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। शंभू बॉर्डर और आसपास के प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग के कारण पंजाब से हरियाणा आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है। किसानों के काफिलों और पुलिस बंदोबस्त के कारण ट्रैफिक धीमा होने की स्थिति बनी है। प्रशासन की ओर से जरूरत के अनुसार यातायात को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जा सकता है। यात्रियों को निकलने से पहले रास्तों की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी जा रही है।
किसान महापंचायत के लिए दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर रहे जत्थों की संख्या दिन बढ़ने के साथ बदल सकती है। पंजाब के अलग-अलग इलाकों से निकले किसान शंभू बॉर्डर की ओर पहुंच रहे हैं, जबकि हरियाणा के विभिन्न हिस्सों से भी किसान दिल्ली जाने की तैयारी में हैं। पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण बड़े काफिलों का आगे बढ़ना मुश्किल हुआ है। कई किसान संगठनों के नेता मौके पर पहुंचकर स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं।
दिल्ली में भी किसान महापंचायत को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। एक तरफ किसान घाट पर प्रस्तावित कार्यक्रम है, दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर युवा प्रदर्शन जारी है। संसद का मानसून सत्र भी चल रहा है, इसलिए नई दिल्ली क्षेत्र पहले से संवेदनशील बना हुआ है। पुलिस संसद भवन, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। किसानों के दिल्ली पहुंचने की स्थिति में भीड़ प्रबंधन के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है।
शंभू बॉर्डर पर फिलहाल किसानों और पुलिस के बीच आगे की स्थिति किसान संगठनों के फैसले पर निर्भर करेगी। किसान नेताओं ने अपने साथियों से बातचीत कर अगली रणनीति तय करने की बात कही है। दिल्ली जाने वाले कुछ जत्थों को अलग-अलग जगहों पर रोके जाने की खबरें हैं। पुलिस बैरिकेड के दूसरी ओर बड़ी संख्या में जवान तैनात हैं, जबकि पंजाब की तरफ किसान लगातार जुट रहे हैं। किसान महापंचायत, दिल्ली कूच और बॉर्डर पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर दिनभर घटनाक्रम बदलने की संभावना है।
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पंजाब और हरियाणा से दिल्ली की ओर निकले किसानों को मंगलवार, 21 जुलाई को शंभू बॉर्डर पर रोक दिया गया। दिल्ली के किसान घाट पर प्रस्तावित किसान महापंचायत में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में किसान सुबह से अलग-अलग जगहों से रवाना हुए थे। किसानों के दिल्ली पहुंचने से पहले ही हरियाणा पुलिस ने पंजाब से लगती सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। शंभू बॉर्डर पर बैरिकेड लगाए गए हैं और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। किसानों के जत्थे पहुंचने के साथ बॉर्डर पर हलचल बढ़ गई।
इस बार किसानों की महापंचायत का प्रमुख मुद्दा प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता है। किसान संगठनों को आशंका है कि समझौते में कृषि और डेयरी बाजार से जुड़े फैसले भारतीय किसानों के हितों पर असर डाल सकते हैं। इसी मुद्दे को लेकर किसान संगठनों ने दिल्ली में जुटने का आह्वान किया है। पंजाब, हरियाणा के अलावा दूसरे राज्यों से भी किसानों के महापंचायत में पहुंचने की बात कही गई है। किसान नेता केंद्र सरकार से कृषि हितों को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं।
पंजाब के अलग-अलग जिलों से किसानों के जत्थे मंगलवार सुबह दिल्ली के लिए आगे बढ़े। कई किसान बसों और दूसरे वाहनों से रवाना हुए, जबकि कुछ जत्थे पहले ही निर्धारित स्थानों पर पहुंच गए थे। फतेहगढ़ साहिब में एक हजार से ज्यादा किसानों के रात में रुकने की जानकारी सामने आई। सुबह यहां से किसानों का काफिला आगे बढ़ा और जीटी रोड होते हुए शंभू बॉर्डर की तरफ पहुंचने लगा। रास्ते में कई जगह किसानों के वाहनों का लंबा काफिला दिखाई दिया।
किसानों की आवाजाही को देखते हुए हरियाणा पुलिस ने शंभू बॉर्डर पर पहले से तैयारी कर रखी थी। घग्गर नदी के पुल के आसपास बैरिकेडिंग की गई और पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाई गई। सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाई गई कि पंजाब की ओर से आने वाले बड़े किसान जत्थों को हरियाणा में आगे बढ़ने से रोका जा सके। शंभू वही बॉर्डर है जो पिछले किसान आंदोलनों के दौरान भी लंबे समय तक चर्चा में रहा था। एक बार फिर यहां पुलिस और किसान आमने-सामने की स्थिति में दिखाई दिए।
बॉर्डर बंद होने का असर सामान्य यातायात पर भी पड़ा। राष्ट्रीय राजमार्ग और आसपास के रास्तों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की खबरें सामने आईं। अचानक रास्ता बंद होने के कारण कई यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ जगह वाहनों की कतारें लग गईं और लोगों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ा। पुलिस की कोशिश किसान जत्थों को दिल्ली की ओर जाने से रोकने के साथ सामान्य कानून व्यवस्था बनाए रखने की भी है।
किसान नेताओं ने शंभू बॉर्डर पर रोके जाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाकर किसान महापंचायत में शामिल होना चाहते हैं। किसान संगठनों ने सवाल उठाया कि जब उनका कार्यक्रम शांतिपूर्ण है तो उन्हें रास्ते में क्यों रोका जा रहा है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने भी हरियाणा सरकार की बैरिकेडिंग पर नाराजगी जताई। आगे की रणनीति किसान संगठनों के नेताओं के साथ चर्चा के बाद तय किए जाने की बात कही गई है।
शंभू बॉर्डर के अलावा हरियाणा के दूसरे हिस्सों में भी किसानों को रोकने की कार्रवाई सामने आई है। कुरुक्षेत्र के शाहाबाद क्षेत्र में दिल्ली जा रहे किसानों की बसों को पुलिस ने रोक दिया। ये किसान भारतीय किसान यूनियन से जुड़े बताए गए हैं और दिल्ली की महापंचायत में शामिल होने जा रहे थे। किसानों ने आगे जाने की अनुमति नहीं मिलने पर विरोध जताया। कुछ स्थानों पर किसानों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने की बात भी कही।
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी को हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। किसान संगठनों के दिल्ली कूच को देखते हुए हरियाणा में कई जगह पुलिस सक्रिय रही। प्रमुख सड़कों और उन रास्तों पर निगरानी बढ़ाई गई, जिनसे किसान दिल्ली की ओर जा सकते थे। प्रशासन की कोशिश बड़े काफिलों को एक साथ राष्ट्रीय राजधानी की तरफ बढ़ने से रोकने की रही। इससे कई जगह किसान संगठनों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी।
दिल्ली में प्रस्तावित किसान महापंचायत को लेकर किसान संगठनों ने पहले से तैयारी की थी। किसान घाट पर होने वाले कार्यक्रम में प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर आवाज उठाने की तैयारी है। किसान संगठनों का कहना है कि किसी भी व्यापार समझौते में देश के किसानों और कृषि बाजार के हितों से समझौता नहीं होना चाहिए। खास तौर पर विदेशी कृषि उत्पादों की बाजार तक पहुंच और आयात से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई जा रही है।
किसानों की आशंका है कि अगर विदेशी कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार ज्यादा खोला गया तो इसका असर स्थानीय किसानों की आय और उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है। किसान संगठन चाहते हैं कि सरकार व्यापार समझौते से जुड़े कृषि प्रावधानों पर स्थिति स्पष्ट करे। इसी मांग को लेकर दिल्ली में बड़ा जुटान बुलाया गया है। हालांकि समझौते के अंतिम प्रावधान क्या होंगे, इसे लेकर किसानों की चिंताओं और सरकार की बातचीत की वास्तविक स्थिति को अलग-अलग देखा जाना जरूरी है।
शंभू बॉर्डर पर रोके जाने के बाद किसानों के सामने अब दिल्ली पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है। पुलिस ने प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग कर रखी है। किसान संगठनों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने कार्यक्रम में शामिल होना चाहते हैं और किसी तरह का टकराव नहीं चाहते। दूसरी ओर प्रशासन बड़ी संख्या में लोगों के अचानक दिल्ली की तरफ बढ़ने से कानून व्यवस्था और यातायात पर पड़ने वाले असर को लेकर सतर्क है। दोनों पक्षों की गतिविधियों के कारण बॉर्डर पर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
दिल्ली में पहले से ही जंतर-मंतर पर युवाओं का आंदोलन चल रहा है। सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। मंगलवार को भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहने की खबर है। इसके कारण नई दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में पहले से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।
युवा आंदोलन में परीक्षा और भर्ती से जुड़े मुद्दों समेत कई मांगें उठाई जा रही हैं। सोमवार के घटनाक्रम के बाद मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर अपना धरना जारी रखा। पुलिस की ओर से संसद और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा कड़ी की गई है। ऐसे समय में किसानों के बड़े जत्थों के भी दिल्ली पहुंचने की योजना ने सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती बढ़ा दी है। दिल्ली के प्रवेश मार्गों और प्रमुख प्रदर्शन स्थलों पर पुलिस की नजर बनी हुई है।
हालांकि किसानों की महापंचायत और जंतर-मंतर पर चल रहा युवा आंदोलन अलग-अलग मुद्दों से जुड़े कार्यक्रम हैं। किसानों का मुख्य कार्यक्रम किसान घाट पर प्रस्तावित है और उनका विरोध भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़ी कृषि संबंधी चिंताओं को लेकर है। वहीं जंतर-मंतर का आंदोलन शिक्षा, परीक्षा और युवाओं की मांगों से जुड़ा है। दोनों कार्यक्रम एक ही समय दिल्ली में होने के कारण पुलिस और प्रशासन को भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ रही है।
पिछले कुछ वर्षों में शंभू बॉर्डर किसान आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। 2024 में भी पंजाब के किसानों के दिल्ली कूच के दौरान इसी सीमा पर लंबे समय तक बैरिकेडिंग और पुलिस बंदोबस्त रहा था। किसानों ने यहां कई महीनों तक डेरा डाला था और MSP समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन किया था। अब एक बार फिर दिल्ली कूच के दौरान शंभू बॉर्डर पर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पुराने आंदोलन की यादों के कारण इस बार भी यहां की स्थिति पर विशेष नजर है।
किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार उन्हें शांतिपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने से रोक रही है। नेताओं का कहना है कि किसान केवल अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जाना चाहते हैं। शंभू बॉर्डर पर मौजूद किसानों ने नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया। किसान नेताओं की बैठक के बाद आगे का कदम तय किया जा सकता है। अगर पुलिस रास्ता नहीं खोलती है तो किसान वहीं धरना देने या दूसरे विकल्प अपनाने का फैसला कर सकते हैं।
हरियाणा पुलिस की ओर से संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं। पंजाब-हरियाणा सीमा के साथ उन मार्गों पर भी निगरानी रखी जा रही है, जहां से किसान छोटे समूहों में आगे बढ़ सकते हैं। बसों और किसान संगठनों के वाहनों की आवाजाही पर भी नजर है। शाहाबाद समेत कुछ स्थानों पर किसानों को रोकने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हुई, लेकिन किसान नेताओं की ओर से फिलहाल शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखने की बात कही जा रही है।
दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए भी स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। शंभू बॉर्डर और आसपास के प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग के कारण पंजाब से हरियाणा आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है। किसानों के काफिलों और पुलिस बंदोबस्त के कारण ट्रैफिक धीमा होने की स्थिति बनी है। प्रशासन की ओर से जरूरत के अनुसार यातायात को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जा सकता है। यात्रियों को निकलने से पहले रास्तों की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी जा रही है।
किसान महापंचायत के लिए दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर रहे जत्थों की संख्या दिन बढ़ने के साथ बदल सकती है। पंजाब के अलग-अलग इलाकों से निकले किसान शंभू बॉर्डर की ओर पहुंच रहे हैं, जबकि हरियाणा के विभिन्न हिस्सों से भी किसान दिल्ली जाने की तैयारी में हैं। पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण बड़े काफिलों का आगे बढ़ना मुश्किल हुआ है। कई किसान संगठनों के नेता मौके पर पहुंचकर स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं।
दिल्ली में भी किसान महापंचायत को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। एक तरफ किसान घाट पर प्रस्तावित कार्यक्रम है, दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर युवा प्रदर्शन जारी है। संसद का मानसून सत्र भी चल रहा है, इसलिए नई दिल्ली क्षेत्र पहले से संवेदनशील बना हुआ है। पुलिस संसद भवन, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। किसानों के दिल्ली पहुंचने की स्थिति में भीड़ प्रबंधन के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है।
शंभू बॉर्डर पर फिलहाल किसानों और पुलिस के बीच आगे की स्थिति किसान संगठनों के फैसले पर निर्भर करेगी। किसान नेताओं ने अपने साथियों से बातचीत कर अगली रणनीति तय करने की बात कही है। दिल्ली जाने वाले कुछ जत्थों को अलग-अलग जगहों पर रोके जाने की खबरें हैं। पुलिस बैरिकेड के दूसरी ओर बड़ी संख्या में जवान तैनात हैं, जबकि पंजाब की तरफ किसान लगातार जुट रहे हैं। किसान महापंचायत, दिल्ली कूच और बॉर्डर पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर दिनभर घटनाक्रम बदलने की संभावना है।
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