- Hindi News
- स्पोर्ट्स
- दो साल बाद चैंपियन बनीं पीवी सिंधु, विराट कोहली की सलाह ने बदली सोच
दो साल बाद चैंपियन बनीं पीवी सिंधु, विराट कोहली की सलाह ने बदली सोच
स्पोर्ट्स डेस्क
जापान ओपन Super 750 जीतकर सिंधु ने खत्म किया लंबा इंतजार, मुश्किल दौर में विराट से हुई बातचीत को बताया वापसी का अहम मोड़
भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर इंटरनेशनल कोर्ट पर खिताब जीतकर अपनी वापसी दर्ज कराई है। दो बार की ओलिंपिक मेडलिस्ट सिंधु ने जापान ओपन Super 750 का खिताब अपने नाम किया। करीब दो साल से बड़े खिताब का इंतजार कर रहीं सिंधु के लिए यह जीत सिर्फ एक और ट्रॉफी नहीं रही। टूर्नामेंट जीतने के बाद उन्होंने अपनी वापसी के सफर में भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली से मिली सलाह की भूमिका का भी जिक्र किया।
सिंधु पिछले कुछ समय से अपने करियर के मुश्किल दौर से गुजर रही थीं। चोट, लगातार बदलते परिणाम और बड़े टूर्नामेंट में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं होने से उनके खेल को लेकर सवाल उठने लगे थे। एक समय दुनिया की सबसे मजबूत महिला बैडमिंटन खिलाड़ियों में शामिल रहीं सिंधु के लिए लगातार हार के बीच आत्मविश्वास बनाए रखना आसान नहीं था। जापान में मिली जीत ने उस लंबे इंतजार को खत्म किया और उन्हें फिर विजेता मंच तक पहुंचाया।
खिताब जीतने के बाद सिंधु ने सोशल मीडिया पर अपने सफर को लेकर एक पोस्ट साझा किया। इसमें उन्होंने उस दौर का जिक्र किया जब उनके लिए चीजें कोर्ट पर ठीक नहीं चल रही थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात विराट कोहली से हुई थी। सिंधु के मुताबिक दोनों के बीच हुई बातचीत और विराट की एक सलाह ने उन्हें अपने खेल और करियर को देखने का नया नजरिया दिया। उन्होंने इस बातचीत को अपनी सोच में आए बदलाव से जोड़कर देखा।
विराट और सिंधु की मुलाकात रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। दोनों भारतीय खेल जगत के बड़े नाम हैं और लंबे समय से अपने-अपने खेल में दबाव तथा अपेक्षाओं के बीच प्रदर्शन करते आए हैं। इस मुलाकात में सिंधु ने अपने करियर के मुश्किल दौर को लेकर विराट से बात की। सिंधु के अनुसार विराट ने उन्हें ऐसी बात समझाई, जिसने खेल के प्रति उनके नजरिए को बदलने में मदद की।
विराट की सलाह का केंद्र अपने भीतर उस वजह को दोबारा तलाशना था, जिसके कारण किसी खिलाड़ी ने शुरुआत में खेल को चुना था। लगातार जीत, हार, रैंकिंग और बाहरी उम्मीदों के बीच कई बार खिलाड़ी खेल का मूल आनंद भूल सकता है। सिंधु ने अपनी पोस्ट में संकेत दिया कि विराट से हुई बातचीत ने उन्हें इसी सोच की तरफ वापस लौटने में मदद की। उन्होंने परिणाम के दबाव से हटकर खेल के प्रति अपने जुड़ाव को दोबारा महसूस करना शुरू किया।
सिंधु के लिए यह दौर मानसिक रूप से भी आसान नहीं था। लंबे करियर में ओलिंपिक, वर्ल्ड चैंपियनशिप और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में सफलता हासिल करने के बाद उनसे हर प्रतियोगिता में बड़ी उम्मीद रहती है। ऐसे में शुरुआती दौर में हार या लगातार टूर्नामेंट बिना खिताब के खत्म होना ज्यादा चर्चा में आता है। उनके प्रदर्शन की तुलना भी उनके पुराने रिकॉर्ड से होती रही। इन सबके बीच उन्हें अपने खेल को दोबारा खड़ा करना था।
सिंधु भारतीय बैडमिंटन के इतिहास की सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने 2016 रियो ओलिंपिक में सिल्वर मेडल जीता था और इसके बाद टोक्यो ओलिंपिक में ब्रॉन्ज हासिल किया। इसके साथ वह लगातार दो ओलिंपिक में व्यक्तिगत पदक जीतने वाली चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हुईं। 2019 में उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप का गोल्ड जीतकर भारतीय बैडमिंटन के लिए इतिहास रचा था।
इतनी बड़ी उपलब्धियों के बाद भी पिछले कुछ वर्षों में सिंधु का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। चोटों ने उनकी तैयारी और टूर्नामेंट शेड्यूल को प्रभावित किया। वापसी के बाद उन्हें पहले जैसी लय हासिल करने में समय लगा। कई टूर्नामेंट में उनका अभियान उम्मीद से पहले खत्म हुआ। कुछ मुकाबलों में अच्छी शुरुआत के बावजूद वह आगे नहीं बढ़ सकीं। इसी वजह से एक बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब का इंतजार लगातार लंबा होता गया।
करीब दो साल तक खिताब नहीं जीत पाने का दबाव भी बढ़ता गया। हर नए टूर्नामेंट के साथ यह सवाल सामने आता था कि सिंधु कब अपनी पुरानी फॉर्म में लौटेंगी। इस दौरान उन्होंने अपनी ट्रेनिंग, फिटनेस और खेल के तकनीकी हिस्सों पर लगातार काम किया। कोचिंग सेटअप में भी बदलाव हुए। लक्ष्य केवल मैच जीतना नहीं बल्कि लंबे समय तक उच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए खेल में जरूरी बदलाव करना था।
जापान ओपन में इस मेहनत का असर दिखाई दिया। Super 750 स्तर का टूर्नामेंट होने के कारण यहां दुनिया की मजबूत बैडमिंटन खिलाड़ी हिस्सा लेती हैं। सिंधु ने टूर्नामेंट में दबाव के बीच लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और आखिरकार खिताब तक पहुंचीं। इस जीत की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि यह उनके लंबे खिताबी सूखे के बाद आई है। लगातार सवालों और मुश्किल नतीजों के बाद वह फिर पोडियम के सबसे ऊपर खड़ी दिखाई दीं।
इस जीत के बाद सिंधु ने अपने कमबैक को सिर्फ तकनीकी बदलाव या फिटनेस से नहीं जोड़ा। उन्होंने मानसिकता में आए बदलाव को भी महत्वपूर्ण बताया। इसी संदर्भ में विराट कोहली से हुई बातचीत सामने आई। सिंधु ने बताया कि करियर के कठिन समय में विराट से मिली सलाह ने उन्हें अपने भीतर झांकने और खेल को अलग नजरिए से देखने में मदद की।
विराट कोहली खुद भी अपने क्रिकेट करियर में ऐसे दौर से गुजर चुके हैं, जब लंबे समय तक उनके बल्ले से इंटरनेशनल शतक नहीं आया था। दुनिया के सबसे सफल बल्लेबाजों में गिने जाने के बावजूद उनकी फॉर्म पर लगातार सवाल उठे। हर पारी के साथ दबाव बढ़ता गया था। बाद में उन्होंने मजबूत वापसी की और एक बार फिर बड़े मुकाबलों में महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। शायद इसी अनुभव के कारण उनकी बात सिंधु के लिए ज्यादा मायने रखती थी।
दोनों खिलाड़ियों के करियर में एक समान बात लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहने का दबाव भी है। विराट से हर क्रिकेट मैच में बड़ी पारी की उम्मीद की जाती रही है, जबकि सिंधु से हर बड़े बैडमिंटन टूर्नामेंट में पदक या खिताब की उम्मीद रहती है। जब कोई खिलाड़ी लंबे समय तक जीतता है तो सामान्य प्रदर्शन भी असफलता की तरह देखा जाने लगता है। ऐसे दौर में मानसिक संतुलन बनाए रखना खेल के तकनीकी हिस्से जितना ही जरूरी हो जाता है।
सिंधु ने विराट से मिली सीख को अपने तरीके से अपनाया। उन्होंने केवल परिणाम के पीछे भागने के बजाय उस प्रक्रिया पर दोबारा ध्यान देना शुरू किया, जिसने उन्हें वर्षों तक दुनिया की शीर्ष खिलाड़ियों के बीच बनाए रखा। ट्रेनिंग, फिटनेस, कोर्ट पर धैर्य और मुकाबले के दौरान मानसिक मजबूती पर फोकस बढ़ाया गया। जापान ओपन में उनके प्रदर्शन में यही आत्मविश्वास नजर आया।
यह जीत सिंधु के करियर में ऐसे समय आई है जब भारतीय बैडमिंटन में नई पीढ़ी तेजी से आगे बढ़ रही है। महिला सिंगल्स में युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं। इसके बावजूद सिंधु का अनुभव और बड़े टूर्नामेंट में उनका रिकॉर्ड उन्हें अलग स्थान देता है। लंबे समय बाद Super 750 स्तर का खिताब जीतना यह संकेत देता है कि वह अब भी बड़े मुकाबलों में चुनौती देने की क्षमता रखती हैं।
सिंधु की उम्र 31 साल है और इस स्तर पर फिटनेस उनके आगे के करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहने वाली है। बैडमिंटन में तेज मूवमेंट, लंबी रैलियां और लगातार टूर्नामेंट शरीर पर काफी दबाव डालते हैं। पिछले कुछ वर्षों में चोटों के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। ऐसे में जापान ओपन की जीत उनके खेल के साथ फिटनेस और मानसिक तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उनके लिए अब चुनौती इस लय को आने वाले टूर्नामेंट में बनाए रखने की होगी। एक बड़े खिताब से आत्मविश्वास जरूर बढ़ता है, लेकिन वर्ल्ड बैडमिंटन में प्रतिस्पर्धा लगातार कठिन हुई है। चीन, जापान, कोरिया और दूसरे देशों की खिलाड़ी महिला सिंगल्स में मजबूत चुनौती पेश कर रही हैं। सिंधु को अपनी अनुभवी शैली के साथ गति और फिटनेस का संतुलन बनाए रखना होगा।
विराट कोहली और पीवी सिंधु की मुलाकात इससे पहले भी खेल प्रशंसकों के बीच चर्चा में रही थी। दोनों एक RCB कार्यक्रम में मिले थे और उनकी तस्वीरें सामने आई थीं। सिंधु ने अब अपनी वापसी के बाद उस मुलाकात के एक अलग पहलू का जिक्र किया है। उनके मुताबिक उस समय हुई बातचीत सिर्फ दो स्टार खिलाड़ियों की सामान्य मुलाकात नहीं थी, बल्कि उससे मिली सीख बाद में उनके लिए उपयोगी साबित हुई।
खेल में मानसिक मजबूती को लेकर विराट कई बार अपनी बात रख चुके हैं। लंबे खराब दौर से बाहर आने के अपने अनुभव का भी उन्होंने अलग-अलग मौकों पर जिक्र किया है। सिंधु का सफर भी दिखाता है कि बड़े खिलाड़ियों के लिए खराब फॉर्म से वापसी केवल तकनीक बदलने का मामला नहीं होता। आत्मविश्वास, खेल के प्रति नजरिया और लगातार हार के बावजूद अभ्यास जारी रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
जापान ओपन का खिताब सिंधु के लिए इसलिए खास है क्योंकि इसने करीब दो साल से चले आ रहे इंतजार को खत्म किया। लंबे समय तक बिना ट्रॉफी के रहने के बावजूद उन्होंने प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन जारी रखा। चोट और खराब नतीजों के बीच भी वह लगातार वापसी की कोशिश करती रहीं। अब Super 750 स्तर की जीत ने उनके आगे के सीजन को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
सिंधु की सोशल मीडिया पोस्ट में विराट के लिए जताया गया आभार भी चर्चा में है। उन्होंने अपनी वापसी में उन लोगों की भूमिका को याद किया जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया या सोच बदलने में मदद की। विराट से मिली सलाह इसी सफर का हिस्सा रही। सिंधु ने यह भी बताया कि एक बातचीत कई बार खिलाड़ी को अपने करियर को नए नजरिए से देखने में मदद कर सकती है।
अब सिंधु का फोकस आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट पर रहेगा। जापान ओपन में मिली जीत से उनकी रैंकिंग और आत्मविश्वास दोनों को फायदा मिल सकता है। लंबे समय से जिस खिताबी जीत का इंतजार था, वह खत्म हो चुका है। उनकी ट्रेनिंग और आगे के टूर्नामेंट शेड्यूल पर भी नजर रहेगी, क्योंकि लगातार अच्छा प्रदर्शन ही इस वापसी को आगे मजबूत कर सकेगा।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
दो साल बाद चैंपियन बनीं पीवी सिंधु, विराट कोहली की सलाह ने बदली सोच
स्पोर्ट्स डेस्क
भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर इंटरनेशनल कोर्ट पर खिताब जीतकर अपनी वापसी दर्ज कराई है। दो बार की ओलिंपिक मेडलिस्ट सिंधु ने जापान ओपन Super 750 का खिताब अपने नाम किया। करीब दो साल से बड़े खिताब का इंतजार कर रहीं सिंधु के लिए यह जीत सिर्फ एक और ट्रॉफी नहीं रही। टूर्नामेंट जीतने के बाद उन्होंने अपनी वापसी के सफर में भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली से मिली सलाह की भूमिका का भी जिक्र किया।
सिंधु पिछले कुछ समय से अपने करियर के मुश्किल दौर से गुजर रही थीं। चोट, लगातार बदलते परिणाम और बड़े टूर्नामेंट में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं होने से उनके खेल को लेकर सवाल उठने लगे थे। एक समय दुनिया की सबसे मजबूत महिला बैडमिंटन खिलाड़ियों में शामिल रहीं सिंधु के लिए लगातार हार के बीच आत्मविश्वास बनाए रखना आसान नहीं था। जापान में मिली जीत ने उस लंबे इंतजार को खत्म किया और उन्हें फिर विजेता मंच तक पहुंचाया।
खिताब जीतने के बाद सिंधु ने सोशल मीडिया पर अपने सफर को लेकर एक पोस्ट साझा किया। इसमें उन्होंने उस दौर का जिक्र किया जब उनके लिए चीजें कोर्ट पर ठीक नहीं चल रही थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात विराट कोहली से हुई थी। सिंधु के मुताबिक दोनों के बीच हुई बातचीत और विराट की एक सलाह ने उन्हें अपने खेल और करियर को देखने का नया नजरिया दिया। उन्होंने इस बातचीत को अपनी सोच में आए बदलाव से जोड़कर देखा।
विराट और सिंधु की मुलाकात रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। दोनों भारतीय खेल जगत के बड़े नाम हैं और लंबे समय से अपने-अपने खेल में दबाव तथा अपेक्षाओं के बीच प्रदर्शन करते आए हैं। इस मुलाकात में सिंधु ने अपने करियर के मुश्किल दौर को लेकर विराट से बात की। सिंधु के अनुसार विराट ने उन्हें ऐसी बात समझाई, जिसने खेल के प्रति उनके नजरिए को बदलने में मदद की।
विराट की सलाह का केंद्र अपने भीतर उस वजह को दोबारा तलाशना था, जिसके कारण किसी खिलाड़ी ने शुरुआत में खेल को चुना था। लगातार जीत, हार, रैंकिंग और बाहरी उम्मीदों के बीच कई बार खिलाड़ी खेल का मूल आनंद भूल सकता है। सिंधु ने अपनी पोस्ट में संकेत दिया कि विराट से हुई बातचीत ने उन्हें इसी सोच की तरफ वापस लौटने में मदद की। उन्होंने परिणाम के दबाव से हटकर खेल के प्रति अपने जुड़ाव को दोबारा महसूस करना शुरू किया।
सिंधु के लिए यह दौर मानसिक रूप से भी आसान नहीं था। लंबे करियर में ओलिंपिक, वर्ल्ड चैंपियनशिप और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में सफलता हासिल करने के बाद उनसे हर प्रतियोगिता में बड़ी उम्मीद रहती है। ऐसे में शुरुआती दौर में हार या लगातार टूर्नामेंट बिना खिताब के खत्म होना ज्यादा चर्चा में आता है। उनके प्रदर्शन की तुलना भी उनके पुराने रिकॉर्ड से होती रही। इन सबके बीच उन्हें अपने खेल को दोबारा खड़ा करना था।
सिंधु भारतीय बैडमिंटन के इतिहास की सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने 2016 रियो ओलिंपिक में सिल्वर मेडल जीता था और इसके बाद टोक्यो ओलिंपिक में ब्रॉन्ज हासिल किया। इसके साथ वह लगातार दो ओलिंपिक में व्यक्तिगत पदक जीतने वाली चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हुईं। 2019 में उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप का गोल्ड जीतकर भारतीय बैडमिंटन के लिए इतिहास रचा था।
इतनी बड़ी उपलब्धियों के बाद भी पिछले कुछ वर्षों में सिंधु का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। चोटों ने उनकी तैयारी और टूर्नामेंट शेड्यूल को प्रभावित किया। वापसी के बाद उन्हें पहले जैसी लय हासिल करने में समय लगा। कई टूर्नामेंट में उनका अभियान उम्मीद से पहले खत्म हुआ। कुछ मुकाबलों में अच्छी शुरुआत के बावजूद वह आगे नहीं बढ़ सकीं। इसी वजह से एक बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब का इंतजार लगातार लंबा होता गया।
करीब दो साल तक खिताब नहीं जीत पाने का दबाव भी बढ़ता गया। हर नए टूर्नामेंट के साथ यह सवाल सामने आता था कि सिंधु कब अपनी पुरानी फॉर्म में लौटेंगी। इस दौरान उन्होंने अपनी ट्रेनिंग, फिटनेस और खेल के तकनीकी हिस्सों पर लगातार काम किया। कोचिंग सेटअप में भी बदलाव हुए। लक्ष्य केवल मैच जीतना नहीं बल्कि लंबे समय तक उच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए खेल में जरूरी बदलाव करना था।
जापान ओपन में इस मेहनत का असर दिखाई दिया। Super 750 स्तर का टूर्नामेंट होने के कारण यहां दुनिया की मजबूत बैडमिंटन खिलाड़ी हिस्सा लेती हैं। सिंधु ने टूर्नामेंट में दबाव के बीच लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और आखिरकार खिताब तक पहुंचीं। इस जीत की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि यह उनके लंबे खिताबी सूखे के बाद आई है। लगातार सवालों और मुश्किल नतीजों के बाद वह फिर पोडियम के सबसे ऊपर खड़ी दिखाई दीं।
इस जीत के बाद सिंधु ने अपने कमबैक को सिर्फ तकनीकी बदलाव या फिटनेस से नहीं जोड़ा। उन्होंने मानसिकता में आए बदलाव को भी महत्वपूर्ण बताया। इसी संदर्भ में विराट कोहली से हुई बातचीत सामने आई। सिंधु ने बताया कि करियर के कठिन समय में विराट से मिली सलाह ने उन्हें अपने भीतर झांकने और खेल को अलग नजरिए से देखने में मदद की।
विराट कोहली खुद भी अपने क्रिकेट करियर में ऐसे दौर से गुजर चुके हैं, जब लंबे समय तक उनके बल्ले से इंटरनेशनल शतक नहीं आया था। दुनिया के सबसे सफल बल्लेबाजों में गिने जाने के बावजूद उनकी फॉर्म पर लगातार सवाल उठे। हर पारी के साथ दबाव बढ़ता गया था। बाद में उन्होंने मजबूत वापसी की और एक बार फिर बड़े मुकाबलों में महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। शायद इसी अनुभव के कारण उनकी बात सिंधु के लिए ज्यादा मायने रखती थी।
दोनों खिलाड़ियों के करियर में एक समान बात लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहने का दबाव भी है। विराट से हर क्रिकेट मैच में बड़ी पारी की उम्मीद की जाती रही है, जबकि सिंधु से हर बड़े बैडमिंटन टूर्नामेंट में पदक या खिताब की उम्मीद रहती है। जब कोई खिलाड़ी लंबे समय तक जीतता है तो सामान्य प्रदर्शन भी असफलता की तरह देखा जाने लगता है। ऐसे दौर में मानसिक संतुलन बनाए रखना खेल के तकनीकी हिस्से जितना ही जरूरी हो जाता है।
सिंधु ने विराट से मिली सीख को अपने तरीके से अपनाया। उन्होंने केवल परिणाम के पीछे भागने के बजाय उस प्रक्रिया पर दोबारा ध्यान देना शुरू किया, जिसने उन्हें वर्षों तक दुनिया की शीर्ष खिलाड़ियों के बीच बनाए रखा। ट्रेनिंग, फिटनेस, कोर्ट पर धैर्य और मुकाबले के दौरान मानसिक मजबूती पर फोकस बढ़ाया गया। जापान ओपन में उनके प्रदर्शन में यही आत्मविश्वास नजर आया।
यह जीत सिंधु के करियर में ऐसे समय आई है जब भारतीय बैडमिंटन में नई पीढ़ी तेजी से आगे बढ़ रही है। महिला सिंगल्स में युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं। इसके बावजूद सिंधु का अनुभव और बड़े टूर्नामेंट में उनका रिकॉर्ड उन्हें अलग स्थान देता है। लंबे समय बाद Super 750 स्तर का खिताब जीतना यह संकेत देता है कि वह अब भी बड़े मुकाबलों में चुनौती देने की क्षमता रखती हैं।
सिंधु की उम्र 31 साल है और इस स्तर पर फिटनेस उनके आगे के करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहने वाली है। बैडमिंटन में तेज मूवमेंट, लंबी रैलियां और लगातार टूर्नामेंट शरीर पर काफी दबाव डालते हैं। पिछले कुछ वर्षों में चोटों के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। ऐसे में जापान ओपन की जीत उनके खेल के साथ फिटनेस और मानसिक तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उनके लिए अब चुनौती इस लय को आने वाले टूर्नामेंट में बनाए रखने की होगी। एक बड़े खिताब से आत्मविश्वास जरूर बढ़ता है, लेकिन वर्ल्ड बैडमिंटन में प्रतिस्पर्धा लगातार कठिन हुई है। चीन, जापान, कोरिया और दूसरे देशों की खिलाड़ी महिला सिंगल्स में मजबूत चुनौती पेश कर रही हैं। सिंधु को अपनी अनुभवी शैली के साथ गति और फिटनेस का संतुलन बनाए रखना होगा।
विराट कोहली और पीवी सिंधु की मुलाकात इससे पहले भी खेल प्रशंसकों के बीच चर्चा में रही थी। दोनों एक RCB कार्यक्रम में मिले थे और उनकी तस्वीरें सामने आई थीं। सिंधु ने अब अपनी वापसी के बाद उस मुलाकात के एक अलग पहलू का जिक्र किया है। उनके मुताबिक उस समय हुई बातचीत सिर्फ दो स्टार खिलाड़ियों की सामान्य मुलाकात नहीं थी, बल्कि उससे मिली सीख बाद में उनके लिए उपयोगी साबित हुई।
खेल में मानसिक मजबूती को लेकर विराट कई बार अपनी बात रख चुके हैं। लंबे खराब दौर से बाहर आने के अपने अनुभव का भी उन्होंने अलग-अलग मौकों पर जिक्र किया है। सिंधु का सफर भी दिखाता है कि बड़े खिलाड़ियों के लिए खराब फॉर्म से वापसी केवल तकनीक बदलने का मामला नहीं होता। आत्मविश्वास, खेल के प्रति नजरिया और लगातार हार के बावजूद अभ्यास जारी रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
जापान ओपन का खिताब सिंधु के लिए इसलिए खास है क्योंकि इसने करीब दो साल से चले आ रहे इंतजार को खत्म किया। लंबे समय तक बिना ट्रॉफी के रहने के बावजूद उन्होंने प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन जारी रखा। चोट और खराब नतीजों के बीच भी वह लगातार वापसी की कोशिश करती रहीं। अब Super 750 स्तर की जीत ने उनके आगे के सीजन को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
सिंधु की सोशल मीडिया पोस्ट में विराट के लिए जताया गया आभार भी चर्चा में है। उन्होंने अपनी वापसी में उन लोगों की भूमिका को याद किया जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया या सोच बदलने में मदद की। विराट से मिली सलाह इसी सफर का हिस्सा रही। सिंधु ने यह भी बताया कि एक बातचीत कई बार खिलाड़ी को अपने करियर को नए नजरिए से देखने में मदद कर सकती है।
अब सिंधु का फोकस आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट पर रहेगा। जापान ओपन में मिली जीत से उनकी रैंकिंग और आत्मविश्वास दोनों को फायदा मिल सकता है। लंबे समय से जिस खिताबी जीत का इंतजार था, वह खत्म हो चुका है। उनकी ट्रेनिंग और आगे के टूर्नामेंट शेड्यूल पर भी नजर रहेगी, क्योंकि लगातार अच्छा प्रदर्शन ही इस वापसी को आगे मजबूत कर सकेगा।
खबरें और भी हैं
Thank you for voting! Results will be shown after the poll ends.
Thank you for voting! Results will be shown after the poll ends.
