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वर्ल्ड कप फाइनल के बाद भिड़े स्पेन-अर्जेंटीना के खिलाड़ी, FIFA ने शुरू की जांच
स्पोर्ट्स डेस्क
खिताबी मुकाबले के बाद मैदान पर जश्न के दौरान बढ़ा विवाद, हिंसक आचरण साबित होने पर खिलाड़ियों को कम से कम तीन आधिकारिक मैचों के प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है
फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल खत्म होने के बाद मैदान पर स्पेन और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के बीच हुई झड़प अब FIFA की जांच के दायरे में आ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फुटबॉल की वैश्विक संस्था ने मैच के बाद हुए घटनाक्रम से जुड़े वीडियो, तस्वीरों और दूसरे उपलब्ध सबूतों की समीक्षा शुरू कर दी है। जांच में अगर किसी खिलाड़ी का हिंसक आचरण साबित होता है तो उस पर कम से कम तीन आधिकारिक मैचों का प्रतिबंध लगाया जा सकता है। जुर्माने और दूसरी अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है।
न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी में खेले गए खिताबी मुकाबले में स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर वर्ल्ड कप अपने नाम किया। मैच खत्म होने के बाद स्पेनिश खिलाड़ी जीत का जश्न मना रहे थे। इसी दौरान दोनों टीमों के कुछ खिलाड़ियों के बीच पहले बहस हुई और फिर माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। देखते ही देखते कई खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ के सदस्य मौके पर पहुंच गए। मैदान पर धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनने के बाद दोनों टीमों के सदस्यों को अलग करने की कोशिश की गई।
इस घटनाक्रम में अर्जेंटीना के लिएंड्रो परेडेस और थियागो अल्माडा के साथ स्पेन के मिडफील्डर गावी का नाम सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जश्न के दौरान किसी बात को लेकर खिलाड़ियों के बीच कहासुनी शुरू हुई थी। शुरुआती बहस कुछ ही समय में बढ़ गई और दूसरे खिलाड़ी भी इसमें शामिल हो गए। FIFA अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि विवाद की शुरुआत किस वजह से हुई और किन खिलाड़ियों ने अनुशासन संहिता का संभावित उल्लंघन किया।
मीडिया रिपोर्ट्स में अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो परेडेस पर स्पेन के एरिक गार्सिया के साथ शारीरिक टकराव का आरोप लगाया गया है। दावा है कि झड़प के दौरान उन्होंने गार्सिया की गर्दन पकड़ने की कोशिश की। इस घटना के वीडियो फुटेज की समीक्षा जांच में अहम हो सकती है। FIFA किसी भी संभावित कार्रवाई से पहले यह देखेगा कि घटना किस क्रम में हुई और खिलाड़ी का व्यवहार अनुशासन संहिता के किस प्रावधान के तहत आता है।
अर्जेंटीना के नाहुएल मोलिना भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। उन पर स्पेन के स्टार मिडफील्डर रोड्री की ओर मुक्का चलाने की कोशिश करने का आरोप है। हालांकि जांच पूरी होने से पहले यह तय नहीं है कि FIFA इस घटनाक्रम को हिंसक आचरण मानेगा या किसी दूसरी श्रेणी में रखेगा। मैच के बाद हुई घटना के अलग-अलग कैमरा एंगल और अधिकारियों की रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
झड़प के दौरान अर्जेंटीना के अनुभवी डिफेंडर निकोलस ओटामेंडी और रोड्री के बीच भी तीखी बहस होने की बात सामने आई है। दोनों खिलाड़ी आमने-सामने दिखाई दिए। आसपास मौजूद टीम साथियों और अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। FIFA की जांच में केवल शारीरिक टकराव ही नहीं, बल्कि उकसाने वाले व्यवहार और खेल भावना के खिलाफ संभावित गतिविधियों की भी समीक्षा की जा सकती है।
विवाद सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहा। अर्जेंटीना के सहायक कोच रॉबर्टो अयाला और स्पेन के दानी ओल्मो के बीच भी कहासुनी की जानकारी सामने आई है। मैच खत्म होने के बाद मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ बड़ी संख्या में मौजूद थे। इसी वजह से शुरुआती विवाद में कई लोग शामिल होते चले गए। अब जांच में खिलाड़ियों के साथ टीम अधिकारियों की भूमिका भी देखी जा सकती है।
FIFA की अनुशासन समिति ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक संभावित नियम उल्लंघन की जांच के लिए अनुशासन और नैतिकता से जुड़े अभियोजक की नियुक्ति की गई है। जांच अधिकारी मैच अधिकारियों की रिपोर्ट, प्रसारण फुटेज, स्टेडियम कैमरों की रिकॉर्डिंग और उपलब्ध दूसरे साक्ष्यों को देख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित खिलाड़ियों और टीम अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा जा सकता है।
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा संभावित प्रतिबंध को लेकर हो रही है। FIFA अनुशासन संहिता के अनुच्छेद 14 के तहत अगर किसी खिलाड़ी का व्यवहार हिंसक आचरण की श्रेणी में पाया जाता है तो उसे कम से कम तीन आधिकारिक मैचों के लिए निलंबित किया जा सकता है। घटना की गंभीरता ज्यादा होने पर सजा बढ़ भी सकती है। हालांकि अंतिम फैसला जांच पूरी होने और अनुशासनात्मक प्रक्रिया के बाद ही लिया जाएगा।
मैच प्रतिबंध के अलावा आर्थिक जुर्माना लगाने का विकल्प भी FIFA के पास मौजूद है। अगर जांच में यह पाया जाता है कि टीम के कई खिलाड़ी या अधिकारी अनुशासन बनाए रखने में विफल रहे तो संबंधित राष्ट्रीय फुटबॉल संघ के खिलाफ भी कार्रवाई संभव हो सकती है। अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन यानी AFA की जिम्मेदारी भी इसी आधार पर जांच के दायरे में आ सकती है।
स्पेन के खिलाड़ियों की भूमिका भी जांच से बाहर नहीं मानी जा सकती। मैदान पर हुई किसी सामूहिक झड़प में FIFA आम तौर पर दोनों पक्षों के व्यवहार को देखता है। कौन खिलाड़ी विवाद शुरू करने में शामिल था, किसने प्रतिक्रिया दी और किसका व्यवहार हिंसक था, इन सबका अलग-अलग आकलन किया जाता है। इसलिए केवल अर्जेंटीना के खिलाड़ियों पर ही कार्रवाई होगी, ऐसा जांच पूरी होने से पहले निश्चित नहीं कहा जा सकता।
खिताबी मुकाबले का नतीजा स्पेन के पक्ष में रहा था। बेहद कड़े मुकाबले में स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराया। अंतिम सीटी बजने के साथ स्पेनिश खिलाड़ी मैदान पर जश्न मनाने लगे। दूसरी ओर अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के लिए हार बेहद निराशाजनक थी। फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में हार के बाद भावनाएं पहले से ही तेज थीं और इसी दौरान जश्न के बीच विवाद की स्थिति बन गई।
मैच खत्म होने के बाद मैदान पर हुई घटना ने स्पेन की खिताबी जीत के जश्न के बीच अलग विवाद खड़ा कर दिया। सोशल मीडिया पर झड़प से जुड़े वीडियो और तस्वीरें तेजी से सामने आए। इनमें कई खिलाड़ी एक-दूसरे के बेहद करीब और बहस करते दिखाई दिए। कुछ फुटेज में टीम के दूसरे सदस्य बीच-बचाव करते नजर आए। इन्हीं तस्वीरों और वीडियो के आधार पर अलग-अलग खिलाड़ियों के व्यवहार को लेकर सवाल उठे हैं।
FIFA के नियमों में मैच समाप्त होने के बाद होने वाली घटनाएं भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में आ सकती हैं। अंतिम सीटी बजने के साथ खिलाड़ियों पर लागू आचार संहिता तुरंत खत्म नहीं हो जाती। मैदान, ड्रेसिंग रूम क्षेत्र या मैच से जुड़े आधिकारिक परिसर में हुई गंभीर घटना पर भी फुटबॉल की वैश्विक संस्था कार्रवाई कर सकती है। इसी वजह से फाइनल के बाद हुई यह झड़प औपचारिक जांच तक पहुंची है।
अगर किसी खिलाड़ी पर तीन मैचों का प्रतिबंध लगता है तो वह सजा किन मुकाबलों में लागू होगी, यह FIFA के अंतिम आदेश और प्रतियोगिता नियमों पर निर्भर करेगा। आम तौर पर अनुशासनात्मक फैसला संबंधित आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय मैचों पर लागू किया जाता है। विश्व कप समाप्त हो चुका है, इसलिए संभावित प्रतिबंध के क्रियान्वयन को लेकर भी आदेश में स्पष्टता जरूरी होगी।
अर्जेंटीना की परेशानी सिर्फ फाइनल के बाद हुई झड़प तक सीमित नहीं है। टीम पहले से ही एक दूसरे मामले में FIFA की जांच का सामना कर रही है। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल जीतने के बाद अर्जेंटीना से जुड़े एक राजनीतिक संदेश वाले बैनर को लेकर विवाद सामने आया था। बैनर पर स्पेनिश भाषा में ‘Las Malvinas son Argentinas’ लिखा था, जिसका अर्थ है कि माल्विनास यानी फॉकलैंड द्वीप अर्जेंटीना के हैं।
फॉकलैंड या माल्विनास द्वीप समूह को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच दशकों पुराना विवाद रहा है। अर्जेंटीना इन द्वीपों पर अपना दावा करता है, जबकि वे ब्रिटेन के नियंत्रण में हैं। फुटबॉल मैदान पर इस मुद्दे से जुड़ा संदेश दिखाई देने के बाद FIFA के नियमों के तहत इसकी समीक्षा शुरू हुई। खेल आयोजनों में राजनीतिक संदेशों को लेकर FIFA के स्पष्ट नियम हैं और उल्लंघन की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
सेमीफाइनल के बाद सामने आए बैनर मामले की जांच अभी चर्चा में ही थी कि फाइनल के बाद खिलाड़ियों की झड़प का नया मामला जुड़ गया। इससे अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन पर अनुशासनात्मक दबाव बढ़ सकता है। दोनों मामलों को अलग-अलग आधार पर देखा जाएगा। एक मामला राजनीतिक संदेश से जुड़ा है, जबकि दूसरा खिलाड़ियों और टीम अधिकारियों के संभावित अनुशासनहीन व्यवहार से संबंधित है।
अर्जेंटीना के लिएंड्रो परेडेस, नाहुएल मोलिना और अन्य खिलाड़ियों से जुड़े वीडियो अब जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। केवल वायरल क्लिप के आधार पर सजा तय नहीं की जाती। जांच अधिकारी पूरे घटनाक्रम को अलग-अलग कैमरों से देखने के साथ मैच अधिकारियों की रिपोर्ट का भी अध्ययन करेंगे। इससे यह पता लगाया जाएगा कि किसी खिलाड़ी ने जानबूझकर हिंसक कार्रवाई की या वह केवल विवाद को रोकने के दौरान मौके पर मौजूद था।
कई बार मैदान पर होने वाली सामूहिक झड़प में बड़ी संख्या में खिलाड़ी एक जगह जमा हो जाते हैं। ऐसे मामलों में हर खिलाड़ी की भूमिका एक जैसी नहीं होती। कोई बहस शुरू करता है, कोई धक्का-मुक्की में शामिल होता है और कुछ खिलाड़ी केवल साथियों को अलग करने की कोशिश करते हैं। FIFA की अनुशासनात्मक प्रक्रिया में इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाती है।
अगर किसी खिलाड़ी पर गर्दन पकड़ने या मुक्का चलाने की कोशिश का आरोप वीडियो से साबित होता है तो मामला गंभीर श्रेणी में जा सकता है। हिंसक आचरण के मामलों में FIFA न्यूनतम प्रतिबंध से आगे भी सजा तय कर सकता है। घटना की गंभीरता, खिलाड़ी का पिछला अनुशासनात्मक रिकॉर्ड और उसके व्यवहार के परिणाम जैसे पहलुओं को भी देखा जा सकता है।
राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों पर संभावित प्रतिबंध का असर आने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों पर पड़ सकता है। अर्जेंटीना और स्पेन दोनों को विश्व कप के बाद दूसरे आधिकारिक टूर्नामेंट और क्वालिफाइंग मुकाबले खेलने होंगे। अगर किसी प्रमुख खिलाड़ी को निलंबित किया जाता है तो संबंधित टीम को उसके बिना मैदान पर उतरना पड़ सकता है। इसलिए जांच के अंतिम फैसले पर दोनों देशों के फुटबॉल संघों की नजर रहेगी।
अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन के खिलाफ संभावित कार्रवाई भी जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी। FIFA के नियमों के तहत किसी टीम के कई सदस्यों के सामूहिक अनुशासन उल्लंघन में संबंधित संघ पर जुर्माना लगाया जा सकता है। टीम अधिकारियों की भूमिका साबित होने पर अलग कार्रवाई भी संभव है। अभी किसी भी तरह की सजा तय नहीं हुई है और प्रक्रिया जांच के स्तर पर है।
स्पेन के लिए यह विश्व कप ऐतिहासिक खिताबी जीत के रूप में दर्ज हुआ, लेकिन फाइनल के बाद की घटना ने जश्न के साथ विवाद भी जोड़ दिया। स्पेनिश खिलाड़ियों के व्यवहार को भी जांच में देखा जा सकता है। गावी, रोड्री, एरिक गार्सिया और दानी ओल्मो के साथ हुई अलग-अलग घटनाओं के वीडियो की समीक्षा से ही स्पष्ट होगा कि टकराव किस तरह आगे बढ़ा।
फाइनल जैसे हाई-प्रेशर मुकाबलों में खिलाड़ियों की भावनाएं काफी तीव्र रहती हैं, लेकिन FIFA मैदान पर हिंसा और अनुशासनहीनता को लेकर सख्त नियम लागू करता है। मैच खत्म होने के बाद भी खिलाड़ियों और अधिकारियों से खेल भावना बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। इसी आधार पर न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी में हुए घटनाक्रम की औपचारिक समीक्षा की जा रही है।
जांच पूरी होने के बाद अनुशासन समिति संबंधित खिलाड़ियों या संघों को अपना पक्ष रखने का मौका दे सकती है। इसके बाद उपलब्ध सबूतों और नियमों के आधार पर फैसला सुनाया जाएगा। दोषी पाए जाने वाले खिलाड़ियों को मैच प्रतिबंध के साथ जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। वहीं पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर किसी खिलाड़ी के खिलाफ मामला बंद भी किया जा सकता है।
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वर्ल्ड कप फाइनल के बाद भिड़े स्पेन-अर्जेंटीना के खिलाड़ी, FIFA ने शुरू की जांच
स्पोर्ट्स डेस्क
फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल खत्म होने के बाद मैदान पर स्पेन और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के बीच हुई झड़प अब FIFA की जांच के दायरे में आ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फुटबॉल की वैश्विक संस्था ने मैच के बाद हुए घटनाक्रम से जुड़े वीडियो, तस्वीरों और दूसरे उपलब्ध सबूतों की समीक्षा शुरू कर दी है। जांच में अगर किसी खिलाड़ी का हिंसक आचरण साबित होता है तो उस पर कम से कम तीन आधिकारिक मैचों का प्रतिबंध लगाया जा सकता है। जुर्माने और दूसरी अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है।
न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी में खेले गए खिताबी मुकाबले में स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर वर्ल्ड कप अपने नाम किया। मैच खत्म होने के बाद स्पेनिश खिलाड़ी जीत का जश्न मना रहे थे। इसी दौरान दोनों टीमों के कुछ खिलाड़ियों के बीच पहले बहस हुई और फिर माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। देखते ही देखते कई खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ के सदस्य मौके पर पहुंच गए। मैदान पर धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनने के बाद दोनों टीमों के सदस्यों को अलग करने की कोशिश की गई।
इस घटनाक्रम में अर्जेंटीना के लिएंड्रो परेडेस और थियागो अल्माडा के साथ स्पेन के मिडफील्डर गावी का नाम सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जश्न के दौरान किसी बात को लेकर खिलाड़ियों के बीच कहासुनी शुरू हुई थी। शुरुआती बहस कुछ ही समय में बढ़ गई और दूसरे खिलाड़ी भी इसमें शामिल हो गए। FIFA अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि विवाद की शुरुआत किस वजह से हुई और किन खिलाड़ियों ने अनुशासन संहिता का संभावित उल्लंघन किया।
मीडिया रिपोर्ट्स में अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो परेडेस पर स्पेन के एरिक गार्सिया के साथ शारीरिक टकराव का आरोप लगाया गया है। दावा है कि झड़प के दौरान उन्होंने गार्सिया की गर्दन पकड़ने की कोशिश की। इस घटना के वीडियो फुटेज की समीक्षा जांच में अहम हो सकती है। FIFA किसी भी संभावित कार्रवाई से पहले यह देखेगा कि घटना किस क्रम में हुई और खिलाड़ी का व्यवहार अनुशासन संहिता के किस प्रावधान के तहत आता है।
अर्जेंटीना के नाहुएल मोलिना भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। उन पर स्पेन के स्टार मिडफील्डर रोड्री की ओर मुक्का चलाने की कोशिश करने का आरोप है। हालांकि जांच पूरी होने से पहले यह तय नहीं है कि FIFA इस घटनाक्रम को हिंसक आचरण मानेगा या किसी दूसरी श्रेणी में रखेगा। मैच के बाद हुई घटना के अलग-अलग कैमरा एंगल और अधिकारियों की रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
झड़प के दौरान अर्जेंटीना के अनुभवी डिफेंडर निकोलस ओटामेंडी और रोड्री के बीच भी तीखी बहस होने की बात सामने आई है। दोनों खिलाड़ी आमने-सामने दिखाई दिए। आसपास मौजूद टीम साथियों और अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। FIFA की जांच में केवल शारीरिक टकराव ही नहीं, बल्कि उकसाने वाले व्यवहार और खेल भावना के खिलाफ संभावित गतिविधियों की भी समीक्षा की जा सकती है।
विवाद सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहा। अर्जेंटीना के सहायक कोच रॉबर्टो अयाला और स्पेन के दानी ओल्मो के बीच भी कहासुनी की जानकारी सामने आई है। मैच खत्म होने के बाद मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ बड़ी संख्या में मौजूद थे। इसी वजह से शुरुआती विवाद में कई लोग शामिल होते चले गए। अब जांच में खिलाड़ियों के साथ टीम अधिकारियों की भूमिका भी देखी जा सकती है।
FIFA की अनुशासन समिति ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक संभावित नियम उल्लंघन की जांच के लिए अनुशासन और नैतिकता से जुड़े अभियोजक की नियुक्ति की गई है। जांच अधिकारी मैच अधिकारियों की रिपोर्ट, प्रसारण फुटेज, स्टेडियम कैमरों की रिकॉर्डिंग और उपलब्ध दूसरे साक्ष्यों को देख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित खिलाड़ियों और टीम अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा जा सकता है।
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा संभावित प्रतिबंध को लेकर हो रही है। FIFA अनुशासन संहिता के अनुच्छेद 14 के तहत अगर किसी खिलाड़ी का व्यवहार हिंसक आचरण की श्रेणी में पाया जाता है तो उसे कम से कम तीन आधिकारिक मैचों के लिए निलंबित किया जा सकता है। घटना की गंभीरता ज्यादा होने पर सजा बढ़ भी सकती है। हालांकि अंतिम फैसला जांच पूरी होने और अनुशासनात्मक प्रक्रिया के बाद ही लिया जाएगा।
मैच प्रतिबंध के अलावा आर्थिक जुर्माना लगाने का विकल्प भी FIFA के पास मौजूद है। अगर जांच में यह पाया जाता है कि टीम के कई खिलाड़ी या अधिकारी अनुशासन बनाए रखने में विफल रहे तो संबंधित राष्ट्रीय फुटबॉल संघ के खिलाफ भी कार्रवाई संभव हो सकती है। अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन यानी AFA की जिम्मेदारी भी इसी आधार पर जांच के दायरे में आ सकती है।
स्पेन के खिलाड़ियों की भूमिका भी जांच से बाहर नहीं मानी जा सकती। मैदान पर हुई किसी सामूहिक झड़प में FIFA आम तौर पर दोनों पक्षों के व्यवहार को देखता है। कौन खिलाड़ी विवाद शुरू करने में शामिल था, किसने प्रतिक्रिया दी और किसका व्यवहार हिंसक था, इन सबका अलग-अलग आकलन किया जाता है। इसलिए केवल अर्जेंटीना के खिलाड़ियों पर ही कार्रवाई होगी, ऐसा जांच पूरी होने से पहले निश्चित नहीं कहा जा सकता।
खिताबी मुकाबले का नतीजा स्पेन के पक्ष में रहा था। बेहद कड़े मुकाबले में स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराया। अंतिम सीटी बजने के साथ स्पेनिश खिलाड़ी मैदान पर जश्न मनाने लगे। दूसरी ओर अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के लिए हार बेहद निराशाजनक थी। फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में हार के बाद भावनाएं पहले से ही तेज थीं और इसी दौरान जश्न के बीच विवाद की स्थिति बन गई।
मैच खत्म होने के बाद मैदान पर हुई घटना ने स्पेन की खिताबी जीत के जश्न के बीच अलग विवाद खड़ा कर दिया। सोशल मीडिया पर झड़प से जुड़े वीडियो और तस्वीरें तेजी से सामने आए। इनमें कई खिलाड़ी एक-दूसरे के बेहद करीब और बहस करते दिखाई दिए। कुछ फुटेज में टीम के दूसरे सदस्य बीच-बचाव करते नजर आए। इन्हीं तस्वीरों और वीडियो के आधार पर अलग-अलग खिलाड़ियों के व्यवहार को लेकर सवाल उठे हैं।
FIFA के नियमों में मैच समाप्त होने के बाद होने वाली घटनाएं भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में आ सकती हैं। अंतिम सीटी बजने के साथ खिलाड़ियों पर लागू आचार संहिता तुरंत खत्म नहीं हो जाती। मैदान, ड्रेसिंग रूम क्षेत्र या मैच से जुड़े आधिकारिक परिसर में हुई गंभीर घटना पर भी फुटबॉल की वैश्विक संस्था कार्रवाई कर सकती है। इसी वजह से फाइनल के बाद हुई यह झड़प औपचारिक जांच तक पहुंची है।
अगर किसी खिलाड़ी पर तीन मैचों का प्रतिबंध लगता है तो वह सजा किन मुकाबलों में लागू होगी, यह FIFA के अंतिम आदेश और प्रतियोगिता नियमों पर निर्भर करेगा। आम तौर पर अनुशासनात्मक फैसला संबंधित आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय मैचों पर लागू किया जाता है। विश्व कप समाप्त हो चुका है, इसलिए संभावित प्रतिबंध के क्रियान्वयन को लेकर भी आदेश में स्पष्टता जरूरी होगी।
अर्जेंटीना की परेशानी सिर्फ फाइनल के बाद हुई झड़प तक सीमित नहीं है। टीम पहले से ही एक दूसरे मामले में FIFA की जांच का सामना कर रही है। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल जीतने के बाद अर्जेंटीना से जुड़े एक राजनीतिक संदेश वाले बैनर को लेकर विवाद सामने आया था। बैनर पर स्पेनिश भाषा में ‘Las Malvinas son Argentinas’ लिखा था, जिसका अर्थ है कि माल्विनास यानी फॉकलैंड द्वीप अर्जेंटीना के हैं।
फॉकलैंड या माल्विनास द्वीप समूह को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच दशकों पुराना विवाद रहा है। अर्जेंटीना इन द्वीपों पर अपना दावा करता है, जबकि वे ब्रिटेन के नियंत्रण में हैं। फुटबॉल मैदान पर इस मुद्दे से जुड़ा संदेश दिखाई देने के बाद FIFA के नियमों के तहत इसकी समीक्षा शुरू हुई। खेल आयोजनों में राजनीतिक संदेशों को लेकर FIFA के स्पष्ट नियम हैं और उल्लंघन की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
सेमीफाइनल के बाद सामने आए बैनर मामले की जांच अभी चर्चा में ही थी कि फाइनल के बाद खिलाड़ियों की झड़प का नया मामला जुड़ गया। इससे अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन पर अनुशासनात्मक दबाव बढ़ सकता है। दोनों मामलों को अलग-अलग आधार पर देखा जाएगा। एक मामला राजनीतिक संदेश से जुड़ा है, जबकि दूसरा खिलाड़ियों और टीम अधिकारियों के संभावित अनुशासनहीन व्यवहार से संबंधित है।
अर्जेंटीना के लिएंड्रो परेडेस, नाहुएल मोलिना और अन्य खिलाड़ियों से जुड़े वीडियो अब जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। केवल वायरल क्लिप के आधार पर सजा तय नहीं की जाती। जांच अधिकारी पूरे घटनाक्रम को अलग-अलग कैमरों से देखने के साथ मैच अधिकारियों की रिपोर्ट का भी अध्ययन करेंगे। इससे यह पता लगाया जाएगा कि किसी खिलाड़ी ने जानबूझकर हिंसक कार्रवाई की या वह केवल विवाद को रोकने के दौरान मौके पर मौजूद था।
कई बार मैदान पर होने वाली सामूहिक झड़प में बड़ी संख्या में खिलाड़ी एक जगह जमा हो जाते हैं। ऐसे मामलों में हर खिलाड़ी की भूमिका एक जैसी नहीं होती। कोई बहस शुरू करता है, कोई धक्का-मुक्की में शामिल होता है और कुछ खिलाड़ी केवल साथियों को अलग करने की कोशिश करते हैं। FIFA की अनुशासनात्मक प्रक्रिया में इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाती है।
अगर किसी खिलाड़ी पर गर्दन पकड़ने या मुक्का चलाने की कोशिश का आरोप वीडियो से साबित होता है तो मामला गंभीर श्रेणी में जा सकता है। हिंसक आचरण के मामलों में FIFA न्यूनतम प्रतिबंध से आगे भी सजा तय कर सकता है। घटना की गंभीरता, खिलाड़ी का पिछला अनुशासनात्मक रिकॉर्ड और उसके व्यवहार के परिणाम जैसे पहलुओं को भी देखा जा सकता है।
राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों पर संभावित प्रतिबंध का असर आने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों पर पड़ सकता है। अर्जेंटीना और स्पेन दोनों को विश्व कप के बाद दूसरे आधिकारिक टूर्नामेंट और क्वालिफाइंग मुकाबले खेलने होंगे। अगर किसी प्रमुख खिलाड़ी को निलंबित किया जाता है तो संबंधित टीम को उसके बिना मैदान पर उतरना पड़ सकता है। इसलिए जांच के अंतिम फैसले पर दोनों देशों के फुटबॉल संघों की नजर रहेगी।
अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन के खिलाफ संभावित कार्रवाई भी जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी। FIFA के नियमों के तहत किसी टीम के कई सदस्यों के सामूहिक अनुशासन उल्लंघन में संबंधित संघ पर जुर्माना लगाया जा सकता है। टीम अधिकारियों की भूमिका साबित होने पर अलग कार्रवाई भी संभव है। अभी किसी भी तरह की सजा तय नहीं हुई है और प्रक्रिया जांच के स्तर पर है।
स्पेन के लिए यह विश्व कप ऐतिहासिक खिताबी जीत के रूप में दर्ज हुआ, लेकिन फाइनल के बाद की घटना ने जश्न के साथ विवाद भी जोड़ दिया। स्पेनिश खिलाड़ियों के व्यवहार को भी जांच में देखा जा सकता है। गावी, रोड्री, एरिक गार्सिया और दानी ओल्मो के साथ हुई अलग-अलग घटनाओं के वीडियो की समीक्षा से ही स्पष्ट होगा कि टकराव किस तरह आगे बढ़ा।
फाइनल जैसे हाई-प्रेशर मुकाबलों में खिलाड़ियों की भावनाएं काफी तीव्र रहती हैं, लेकिन FIFA मैदान पर हिंसा और अनुशासनहीनता को लेकर सख्त नियम लागू करता है। मैच खत्म होने के बाद भी खिलाड़ियों और अधिकारियों से खेल भावना बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। इसी आधार पर न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी में हुए घटनाक्रम की औपचारिक समीक्षा की जा रही है।
जांच पूरी होने के बाद अनुशासन समिति संबंधित खिलाड़ियों या संघों को अपना पक्ष रखने का मौका दे सकती है। इसके बाद उपलब्ध सबूतों और नियमों के आधार पर फैसला सुनाया जाएगा। दोषी पाए जाने वाले खिलाड़ियों को मैच प्रतिबंध के साथ जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। वहीं पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर किसी खिलाड़ी के खिलाफ मामला बंद भी किया जा सकता है।
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