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हॉकी वर्ल्ड कप के लिए भारत की 20 सदस्यीय टीम घोषित, हरमनप्रीत होंगे कप्तान
स्पोर्ट्स डेस्क
अनुभवी और युवा खिलाड़ियों के मिश्रण के साथ उतरेगी टीम इंडिया, पूल-D में इंग्लैंड-पाकिस्तान से बड़ी टक्कर; 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ पहला मुकाबला
अगले महीने होने वाले FIH मेंस हॉकी वर्ल्ड कप के लिए भारत ने अपनी 20 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। अनुभवी ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह को एक बार फिर टीम की कमान सौंपी गई है। हॉकी इंडिया ने बड़े टूर्नामेंट के लिए अनुभव और युवा खिलाड़ियों को मिलाकर टीम तैयार की है। मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, अमित रोहिदास और अभिषेक जैसे लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय हॉकी खेल रहे खिलाड़ी स्क्वॉड का अहम हिस्सा हैं। भारत 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगा।
टीम चयन में हालिया प्रदर्शन के साथ बड़े मुकाबलों के अनुभव को भी महत्व दिया गया है। प्रो लीग में भारतीय टीम का हिस्सा रहे चार खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप के अंतिम दल में जगह नहीं मिली। इनमें डिफेंडर अमनदीप लकड़ा, मिडफील्डर राज कुमार पाल और रबीचंद्र सिंह मोइरांगथेम के अलावा फॉरवर्ड सेल्वम कार्थी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों के बाहर होने के बाद अलग-अलग पोजिशन पर चयनकर्ताओं ने दूसरे विकल्पों पर भरोसा जताया है।
हरमनप्रीत सिंह के कंधों पर कप्तानी के साथ भारतीय डिफेंस और पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। वह पिछले कई वर्षों से भारतीय हॉकी टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। दुनिया के बेहतरीन ड्रैग फ्लिकरों में गिने जाने वाले हरमनप्रीत दबाव वाले मुकाबलों में पेनल्टी कॉर्नर के जरिए मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में भारत के लिए उनकी फॉर्म काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है।
भारत की सबसे बड़ी ताकत टीम में मौजूद अनुभवी खिलाड़ियों का समूह माना जा रहा है। पूर्व कप्तान मनप्रीत सिंह एक बार फिर मिडफील्ड में बड़ी भूमिका निभाते नजर आएंगे। लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान वह ओलिंपिक, वर्ल्ड कप और एशियाई स्तर के कई बड़े टूर्नामेंट खेल चुके हैं। मैदान पर गेंद को नियंत्रित करने के साथ डिफेंस और अटैक के बीच तालमेल बनाने में उनका अनुभव टीम के लिए उपयोगी होगा।
मनप्रीत के साथ हार्दिक सिंह और विवेक सागर प्रसाद मिडफील्ड की जिम्मेदारी संभालेंगे। दोनों खिलाड़ी अपनी गति और गेंद पर नियंत्रण के लिए जाने जाते हैं। हार्दिक तेजी से डिफेंस को अटैक में बदलने की क्षमता रखते हैं, जबकि विवेक छोटे पास और गेंद की मूवमेंट के जरिए विपक्षी टीम की संरचना तोड़ने की कोशिश करते हैं। वर्ल्ड कप में मजबूत यूरोपीय टीमों के खिलाफ भारत के मिडफील्ड की परीक्षा काफी कठिन रहने वाली है।
मिडफील्ड में नीलकांत शर्मा का अनुभव भी टीम को मजबूती देगा। वह दबाव के समय गेंद को नियंत्रित रखने और विपक्ष के हमले को बीच मैदान में रोकने की भूमिका निभा सकते हैं। उनके साथ राजिंदर सिंह और आदित्य अर्जुन लालगे को भी टीम में जगह मिली है। युवा खिलाड़ियों के लिए यह टूर्नामेंट दुनिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ खुद को साबित करने का बड़ा मंच होगा।
भारतीय डिफेंस में कप्तान हरमनप्रीत सिंह के साथ अमित रोहिदास का अनुभव अहम रहेगा। रोहिदास लंबे समय से भारतीय बैकलाइन के भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हैं। वह विपक्षी फॉरवर्ड के हमले रोकने के साथ पेनल्टी कॉर्नर डिफेंस में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बड़े मुकाबलों में उनका अनुभव भारत के युवा डिफेंडरों के लिए भी मददगार साबित हो सकता है।
डिफेंस में जर्मनप्रीत सिंह, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच को भी चुना गया है। जुगराज और संजय के रूप में भारत के पास पेनल्टी कॉर्नर पर अतिरिक्त ड्रैग फ्लिक विकल्प मौजूद रहेंगे। इसका फायदा तब मिल सकता है जब विपक्षी टीम हरमनप्रीत को रोकने के लिए खास रणनीति के साथ मैदान पर उतरे। एक से ज्यादा ड्रैग फ्लिक विकल्प होने से भारत की पेनल्टी कॉर्नर रणनीति में विविधता बनी रहेगी।
सुमित अपनी गति और गेंद को आगे ले जाने की क्षमता के कारण डिफेंस से आक्रमण तैयार करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। आधुनिक हॉकी में डिफेंडरों की भूमिका केवल अपने गोल की रक्षा करने तक सीमित नहीं रहती। उन्हें गेंद के साथ तेजी से आगे बढ़कर मिडफील्ड और फॉरवर्ड लाइन को सपोर्ट करना होता है। भारतीय टीम ने इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए डिफेंस में अलग-अलग शैली के खिलाड़ियों को जगह दी है।
गोलकीपिंग विभाग में मोहित एचएस और सूरज करकेरा को चुना गया है। वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में गोलकीपर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि नॉकआउट मुकाबलों में एक बचाव भी मैच का परिणाम बदल सकता है। पेनल्टी कॉर्नर और शूटआउट जैसी परिस्थितियों में गोलकीपर पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है। दोनों खिलाड़ियों के बीच अंतिम एकादश में जगह के लिए मुकाबला रहेगा।
भारतीय टीम की फॉरवर्ड लाइन में अनुभव और आक्रामक गति दोनों को जगह मिली है। मंदीप सिंह और दिलप्रीत सिंह लंबे समय से भारतीय अटैक का हिस्सा रहे हैं। दोनों खिलाड़ियों के पास विपक्षी सर्कल के अंदर जगह बनाने और गोल के मौके तैयार करने का अनुभव है। तेज हॉकी खेलने वाली टीमों के खिलाफ भारत को इन खिलाड़ियों से लगातार दबाव बनाने की जरूरत होगी।
अभिषेक भारतीय आक्रमण के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक माने जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपनी गति, ड्रिब्लिंग और गोल करने की क्षमता से प्रभावित किया है। विपक्षी डिफेंडरों के बीच जगह बनाकर सर्कल में प्रवेश करना उनकी बड़ी ताकत है। वर्ल्ड कप में भारत को उनसे महत्वपूर्ण मौकों पर गोल की उम्मीद रहेगी।
सुखजीत सिंह और शिलानंद लकड़ा को भी फॉरवर्ड लाइन में जगह दी गई है। दोनों खिलाड़ियों की गति भारतीय टीम को काउंटर अटैक में मदद कर सकती है। तेज पासिंग के साथ अचानक विपक्षी सर्कल में पहुंचना भारत की आक्रामक रणनीति का हिस्सा रहा है। टीम को हालांकि मिले मौकों को गोल में बदलने की दर बेहतर रखनी होगी, क्योंकि वर्ल्ड कप में छोटी गलतियां भी भारी पड़ सकती हैं।
मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने चुनी गई टीम में अनुभव और युवा खिलाड़ियों के संतुलन पर भरोसा जताया है। उनका मानना है कि स्क्वॉड में ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं जो पहले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट का दबाव झेल चुके हैं, जबकि युवा खिलाड़ी टीम में नई ऊर्जा लेकर आते हैं। पिछले कुछ समय से भारतीय टीम की रणनीति में मजबूत डिफेंस के साथ तेजी से काउंटर अटैक करने पर जोर दिया गया है।
फुल्टन के सामने वर्ल्ड कप से पहले सबसे बड़ी चुनौती सही प्लेइंग कॉम्बिनेशन तैयार करने की होगी। 20 सदस्यीय टीम में कई पोजिशन पर एक से ज्यादा विकल्प मौजूद हैं। विपक्षी टीम और मैच की परिस्थितियों के आधार पर खिलाड़ियों की भूमिका बदल सकती है। यूरोपीय टीमों के खिलाफ भारत को गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखने के साथ अपने डिफेंस को भी मजबूत रखना होगा।
इस बार का वर्ल्ड कप भारतीय हॉकी के लिए ऐतिहासिक संदर्भ में भी खास माना जा रहा है। भारत ने 1975 में पहली और अब तक की अपनी एकमात्र पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीती थी। उस ऐतिहासिक सफलता के करीब पांच दशक बाद भारतीय टीम एक बार फिर विश्व खिताब की तलाश में उतरेगी। कोचिंग स्टाफ इसी मौके को खिलाड़ियों के लिए अतिरिक्त प्रेरणा के रूप में देख रहा है।
1975 के वर्ल्ड कप में भारत ने फाइनल में पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था। उसके बाद भारतीय टीम कई बार टूर्नामेंट में उतरी, लेकिन दोबारा विश्व चैंपियन नहीं बन सकी। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय हॉकी के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला है। ओलिंपिक में लगातार अच्छे प्रदर्शन और बड़ी टीमों के खिलाफ जीत ने उम्मीदें बढ़ाई हैं।
इस वर्ल्ड कप में भारत को पूल-D में रखा गया है। उसके साथ इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स की टीमें हैं। ग्रुप आसान नहीं माना जा रहा, क्योंकि इंग्लैंड दुनिया की मजबूत हॉकी टीमों में शामिल है और पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला हमेशा दबाव वाला होता है। वेल्स भी उलटफेर करने की क्षमता रखता है। ऐसे में भारत के लिए हर ग्रुप मैच महत्वपूर्ण होगा।
टीम इंडिया अपना पहला मुकाबला 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ खेलेगी। स्वतंत्रता दिवस के दिन होने वाले इस मैच से भारत अपने अभियान की शुरुआत करेगा। टूर्नामेंट में आगे की स्थिति मजबूत रखने के लिए पहले मैच में जीत बेहद महत्वपूर्ण होगी। शुरुआती मुकाबले में पूरे अंक मिलने से टीम पर अगले दो कठिन मैचों का दबाव कुछ कम हो सकता है।
वेल्स के बाद भारत की असली परीक्षा 17 अगस्त को इंग्लैंड के खिलाफ होगी। दोनों टीमों के बीच पिछले कुछ वर्षों में कई करीबी मुकाबले हुए हैं। इंग्लैंड अपनी तेज और शारीरिक रूप से मजबूत हॉकी के लिए जाना जाता है। भारतीय मिडफील्ड को इस मुकाबले में गेंद पर नियंत्रण बनाए रखने के साथ इंग्लैंड के तेज काउंटर अटैक को रोकना होगा।
पूल चरण का सबसे चर्चित मुकाबला 19 अगस्त को भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाएगा। दोनों देशों की हॉकी प्रतिद्वंद्विता का लंबा इतिहास रहा है। हाल के वर्षों में भारतीय टीम का प्रदर्शन पाकिस्तान के मुकाबले अधिक स्थिर रहा है, लेकिन दोनों टीमों के बीच मैच में पिछला रिकॉर्ड कई बार मायने नहीं रखता। दबाव और भावनाओं के बीच खिलाड़ियों के लिए अनुशासन बनाए रखना जरूरी होगा।
भारत और पाकिस्तान के मुकाबले में पेनल्टी कॉर्नर की भूमिका भी अहम रह सकती है। हरमनप्रीत सिंह की ड्रैग फ्लिक भारत के लिए बड़ी ताकत है। पाकिस्तान की टीम भी तेज आक्रामक हॉकी के लिए जानी जाती है। ऐसे में भारत को सर्कल के आसपास अनावश्यक फाउल से बचना होगा और अपने मौकों का बेहतर इस्तेमाल करना पड़ेगा।
भारत के सभी पूल मुकाबले नीदरलैंड के एम्सटेलवीन में खेले जाएंगे। यूरोप की परिस्थितियों में खेलना भारतीय खिलाड़ियों के लिए नया नहीं है, क्योंकि टीम नियमित रूप से FIH प्रो लीग और दूसरे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए वहां जाती रही है। फिर भी मौसम और मैदान की परिस्थितियों के अनुसार खुद को जल्दी ढालना जरूरी होगा।
टीम चयन में प्रो लीग का हिस्सा रहे चार खिलाड़ियों का बाहर होना भी चर्चा में है। डिफेंडर अमनदीप लकड़ा को अंतिम 20 में जगह नहीं मिली। मिडफील्ड से राज कुमार पाल और रबीचंद्र सिंह मोइरांगथेम भी स्क्वॉड से बाहर हैं। फॉरवर्ड सेल्वम कार्थी को भी वर्ल्ड कप टीम में शामिल नहीं किया गया है।
इन खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में चुने गए सदस्यों पर अपनी जगह सही साबित करने का दबाव रहेगा। बड़े टूर्नामेंट में टीम चयन हमेशा हालिया फॉर्म, फिटनेस और रणनीतिक जरूरतों के आधार पर किया जाता है। कोचिंग स्टाफ ने अलग-अलग पोजिशन पर उन खिलाड़ियों को चुना है जिन्हें वर्ल्ड कप की योजना के लिए बेहतर विकल्प माना गया।
हरमनप्रीत के लिए कप्तान के रूप में यह टूर्नामेंट बड़ी परीक्षा होगा। उन्हें अपनी व्यक्तिगत भूमिका के साथ पूरी टीम की रणनीति संभालनी होगी। पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करने का दबाव भी उन्हीं पर रहेगा। विपक्षी टीमें उनके ड्रैग फ्लिक को रोकने के लिए खास रणनीति तैयार करेंगी, इसलिए जुगराज और संजय जैसे दूसरे विकल्प महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
मनप्रीत सिंह का अनुभव भी दबाव वाले मैचों में काम आएगा। लंबे समय तक भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके मनप्रीत मैदान पर खिलाड़ियों को व्यवस्थित रखने की क्षमता रखते हैं। खासकर इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबलों में उनके अनुभव की जरूरत होगी। युवा खिलाड़ियों के लिए भी मैदान के भीतर उनका मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहेगा।
भारत की आगे की राह काफी हद तक पूल चरण के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी। शुरुआती तीन मुकाबलों में अंक गंवाने से नॉकआउट की राह मुश्किल हो सकती है। टीम की कोशिश वेल्स के खिलाफ मजबूत शुरुआत करने और फिर इंग्लैंड तथा पाकिस्तान के सामने अपनी सर्वश्रेष्ठ हॉकी खेलने की होगी। टीम प्रबंधन मैच-दर-मैच रणनीति के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।
भारत की 20 सदस्यीय टीम: गोलकीपर – मोहित एचएस, सूरज करकेरा। डिफेंडर – जर्मनप्रीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच। मिडफील्डर – मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नीलकांत शर्मा, राजिंदर सिंह और आदित्य अर्जुन लालगे। फॉरवर्ड – मंदीप सिंह, दिलप्रीत सिंह, अभिषेक, सुखजीत सिंह और शिलानंद लकड़ा।
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हॉकी वर्ल्ड कप के लिए भारत की 20 सदस्यीय टीम घोषित, हरमनप्रीत होंगे कप्तान
स्पोर्ट्स डेस्क
अगले महीने होने वाले FIH मेंस हॉकी वर्ल्ड कप के लिए भारत ने अपनी 20 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। अनुभवी ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह को एक बार फिर टीम की कमान सौंपी गई है। हॉकी इंडिया ने बड़े टूर्नामेंट के लिए अनुभव और युवा खिलाड़ियों को मिलाकर टीम तैयार की है। मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, अमित रोहिदास और अभिषेक जैसे लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय हॉकी खेल रहे खिलाड़ी स्क्वॉड का अहम हिस्सा हैं। भारत 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगा।
टीम चयन में हालिया प्रदर्शन के साथ बड़े मुकाबलों के अनुभव को भी महत्व दिया गया है। प्रो लीग में भारतीय टीम का हिस्सा रहे चार खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप के अंतिम दल में जगह नहीं मिली। इनमें डिफेंडर अमनदीप लकड़ा, मिडफील्डर राज कुमार पाल और रबीचंद्र सिंह मोइरांगथेम के अलावा फॉरवर्ड सेल्वम कार्थी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों के बाहर होने के बाद अलग-अलग पोजिशन पर चयनकर्ताओं ने दूसरे विकल्पों पर भरोसा जताया है।
हरमनप्रीत सिंह के कंधों पर कप्तानी के साथ भारतीय डिफेंस और पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। वह पिछले कई वर्षों से भारतीय हॉकी टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। दुनिया के बेहतरीन ड्रैग फ्लिकरों में गिने जाने वाले हरमनप्रीत दबाव वाले मुकाबलों में पेनल्टी कॉर्नर के जरिए मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में भारत के लिए उनकी फॉर्म काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है।
भारत की सबसे बड़ी ताकत टीम में मौजूद अनुभवी खिलाड़ियों का समूह माना जा रहा है। पूर्व कप्तान मनप्रीत सिंह एक बार फिर मिडफील्ड में बड़ी भूमिका निभाते नजर आएंगे। लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान वह ओलिंपिक, वर्ल्ड कप और एशियाई स्तर के कई बड़े टूर्नामेंट खेल चुके हैं। मैदान पर गेंद को नियंत्रित करने के साथ डिफेंस और अटैक के बीच तालमेल बनाने में उनका अनुभव टीम के लिए उपयोगी होगा।
मनप्रीत के साथ हार्दिक सिंह और विवेक सागर प्रसाद मिडफील्ड की जिम्मेदारी संभालेंगे। दोनों खिलाड़ी अपनी गति और गेंद पर नियंत्रण के लिए जाने जाते हैं। हार्दिक तेजी से डिफेंस को अटैक में बदलने की क्षमता रखते हैं, जबकि विवेक छोटे पास और गेंद की मूवमेंट के जरिए विपक्षी टीम की संरचना तोड़ने की कोशिश करते हैं। वर्ल्ड कप में मजबूत यूरोपीय टीमों के खिलाफ भारत के मिडफील्ड की परीक्षा काफी कठिन रहने वाली है।
मिडफील्ड में नीलकांत शर्मा का अनुभव भी टीम को मजबूती देगा। वह दबाव के समय गेंद को नियंत्रित रखने और विपक्ष के हमले को बीच मैदान में रोकने की भूमिका निभा सकते हैं। उनके साथ राजिंदर सिंह और आदित्य अर्जुन लालगे को भी टीम में जगह मिली है। युवा खिलाड़ियों के लिए यह टूर्नामेंट दुनिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ खुद को साबित करने का बड़ा मंच होगा।
भारतीय डिफेंस में कप्तान हरमनप्रीत सिंह के साथ अमित रोहिदास का अनुभव अहम रहेगा। रोहिदास लंबे समय से भारतीय बैकलाइन के भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हैं। वह विपक्षी फॉरवर्ड के हमले रोकने के साथ पेनल्टी कॉर्नर डिफेंस में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बड़े मुकाबलों में उनका अनुभव भारत के युवा डिफेंडरों के लिए भी मददगार साबित हो सकता है।
डिफेंस में जर्मनप्रीत सिंह, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच को भी चुना गया है। जुगराज और संजय के रूप में भारत के पास पेनल्टी कॉर्नर पर अतिरिक्त ड्रैग फ्लिक विकल्प मौजूद रहेंगे। इसका फायदा तब मिल सकता है जब विपक्षी टीम हरमनप्रीत को रोकने के लिए खास रणनीति के साथ मैदान पर उतरे। एक से ज्यादा ड्रैग फ्लिक विकल्प होने से भारत की पेनल्टी कॉर्नर रणनीति में विविधता बनी रहेगी।
सुमित अपनी गति और गेंद को आगे ले जाने की क्षमता के कारण डिफेंस से आक्रमण तैयार करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। आधुनिक हॉकी में डिफेंडरों की भूमिका केवल अपने गोल की रक्षा करने तक सीमित नहीं रहती। उन्हें गेंद के साथ तेजी से आगे बढ़कर मिडफील्ड और फॉरवर्ड लाइन को सपोर्ट करना होता है। भारतीय टीम ने इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए डिफेंस में अलग-अलग शैली के खिलाड़ियों को जगह दी है।
गोलकीपिंग विभाग में मोहित एचएस और सूरज करकेरा को चुना गया है। वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में गोलकीपर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि नॉकआउट मुकाबलों में एक बचाव भी मैच का परिणाम बदल सकता है। पेनल्टी कॉर्नर और शूटआउट जैसी परिस्थितियों में गोलकीपर पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है। दोनों खिलाड़ियों के बीच अंतिम एकादश में जगह के लिए मुकाबला रहेगा।
भारतीय टीम की फॉरवर्ड लाइन में अनुभव और आक्रामक गति दोनों को जगह मिली है। मंदीप सिंह और दिलप्रीत सिंह लंबे समय से भारतीय अटैक का हिस्सा रहे हैं। दोनों खिलाड़ियों के पास विपक्षी सर्कल के अंदर जगह बनाने और गोल के मौके तैयार करने का अनुभव है। तेज हॉकी खेलने वाली टीमों के खिलाफ भारत को इन खिलाड़ियों से लगातार दबाव बनाने की जरूरत होगी।
अभिषेक भारतीय आक्रमण के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक माने जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपनी गति, ड्रिब्लिंग और गोल करने की क्षमता से प्रभावित किया है। विपक्षी डिफेंडरों के बीच जगह बनाकर सर्कल में प्रवेश करना उनकी बड़ी ताकत है। वर्ल्ड कप में भारत को उनसे महत्वपूर्ण मौकों पर गोल की उम्मीद रहेगी।
सुखजीत सिंह और शिलानंद लकड़ा को भी फॉरवर्ड लाइन में जगह दी गई है। दोनों खिलाड़ियों की गति भारतीय टीम को काउंटर अटैक में मदद कर सकती है। तेज पासिंग के साथ अचानक विपक्षी सर्कल में पहुंचना भारत की आक्रामक रणनीति का हिस्सा रहा है। टीम को हालांकि मिले मौकों को गोल में बदलने की दर बेहतर रखनी होगी, क्योंकि वर्ल्ड कप में छोटी गलतियां भी भारी पड़ सकती हैं।
मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने चुनी गई टीम में अनुभव और युवा खिलाड़ियों के संतुलन पर भरोसा जताया है। उनका मानना है कि स्क्वॉड में ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं जो पहले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट का दबाव झेल चुके हैं, जबकि युवा खिलाड़ी टीम में नई ऊर्जा लेकर आते हैं। पिछले कुछ समय से भारतीय टीम की रणनीति में मजबूत डिफेंस के साथ तेजी से काउंटर अटैक करने पर जोर दिया गया है।
फुल्टन के सामने वर्ल्ड कप से पहले सबसे बड़ी चुनौती सही प्लेइंग कॉम्बिनेशन तैयार करने की होगी। 20 सदस्यीय टीम में कई पोजिशन पर एक से ज्यादा विकल्प मौजूद हैं। विपक्षी टीम और मैच की परिस्थितियों के आधार पर खिलाड़ियों की भूमिका बदल सकती है। यूरोपीय टीमों के खिलाफ भारत को गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखने के साथ अपने डिफेंस को भी मजबूत रखना होगा।
इस बार का वर्ल्ड कप भारतीय हॉकी के लिए ऐतिहासिक संदर्भ में भी खास माना जा रहा है। भारत ने 1975 में पहली और अब तक की अपनी एकमात्र पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीती थी। उस ऐतिहासिक सफलता के करीब पांच दशक बाद भारतीय टीम एक बार फिर विश्व खिताब की तलाश में उतरेगी। कोचिंग स्टाफ इसी मौके को खिलाड़ियों के लिए अतिरिक्त प्रेरणा के रूप में देख रहा है।
1975 के वर्ल्ड कप में भारत ने फाइनल में पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था। उसके बाद भारतीय टीम कई बार टूर्नामेंट में उतरी, लेकिन दोबारा विश्व चैंपियन नहीं बन सकी। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय हॉकी के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला है। ओलिंपिक में लगातार अच्छे प्रदर्शन और बड़ी टीमों के खिलाफ जीत ने उम्मीदें बढ़ाई हैं।
इस वर्ल्ड कप में भारत को पूल-D में रखा गया है। उसके साथ इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स की टीमें हैं। ग्रुप आसान नहीं माना जा रहा, क्योंकि इंग्लैंड दुनिया की मजबूत हॉकी टीमों में शामिल है और पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला हमेशा दबाव वाला होता है। वेल्स भी उलटफेर करने की क्षमता रखता है। ऐसे में भारत के लिए हर ग्रुप मैच महत्वपूर्ण होगा।
टीम इंडिया अपना पहला मुकाबला 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ खेलेगी। स्वतंत्रता दिवस के दिन होने वाले इस मैच से भारत अपने अभियान की शुरुआत करेगा। टूर्नामेंट में आगे की स्थिति मजबूत रखने के लिए पहले मैच में जीत बेहद महत्वपूर्ण होगी। शुरुआती मुकाबले में पूरे अंक मिलने से टीम पर अगले दो कठिन मैचों का दबाव कुछ कम हो सकता है।
वेल्स के बाद भारत की असली परीक्षा 17 अगस्त को इंग्लैंड के खिलाफ होगी। दोनों टीमों के बीच पिछले कुछ वर्षों में कई करीबी मुकाबले हुए हैं। इंग्लैंड अपनी तेज और शारीरिक रूप से मजबूत हॉकी के लिए जाना जाता है। भारतीय मिडफील्ड को इस मुकाबले में गेंद पर नियंत्रण बनाए रखने के साथ इंग्लैंड के तेज काउंटर अटैक को रोकना होगा।
पूल चरण का सबसे चर्चित मुकाबला 19 अगस्त को भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाएगा। दोनों देशों की हॉकी प्रतिद्वंद्विता का लंबा इतिहास रहा है। हाल के वर्षों में भारतीय टीम का प्रदर्शन पाकिस्तान के मुकाबले अधिक स्थिर रहा है, लेकिन दोनों टीमों के बीच मैच में पिछला रिकॉर्ड कई बार मायने नहीं रखता। दबाव और भावनाओं के बीच खिलाड़ियों के लिए अनुशासन बनाए रखना जरूरी होगा।
भारत और पाकिस्तान के मुकाबले में पेनल्टी कॉर्नर की भूमिका भी अहम रह सकती है। हरमनप्रीत सिंह की ड्रैग फ्लिक भारत के लिए बड़ी ताकत है। पाकिस्तान की टीम भी तेज आक्रामक हॉकी के लिए जानी जाती है। ऐसे में भारत को सर्कल के आसपास अनावश्यक फाउल से बचना होगा और अपने मौकों का बेहतर इस्तेमाल करना पड़ेगा।
भारत के सभी पूल मुकाबले नीदरलैंड के एम्सटेलवीन में खेले जाएंगे। यूरोप की परिस्थितियों में खेलना भारतीय खिलाड़ियों के लिए नया नहीं है, क्योंकि टीम नियमित रूप से FIH प्रो लीग और दूसरे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए वहां जाती रही है। फिर भी मौसम और मैदान की परिस्थितियों के अनुसार खुद को जल्दी ढालना जरूरी होगा।
टीम चयन में प्रो लीग का हिस्सा रहे चार खिलाड़ियों का बाहर होना भी चर्चा में है। डिफेंडर अमनदीप लकड़ा को अंतिम 20 में जगह नहीं मिली। मिडफील्ड से राज कुमार पाल और रबीचंद्र सिंह मोइरांगथेम भी स्क्वॉड से बाहर हैं। फॉरवर्ड सेल्वम कार्थी को भी वर्ल्ड कप टीम में शामिल नहीं किया गया है।
इन खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में चुने गए सदस्यों पर अपनी जगह सही साबित करने का दबाव रहेगा। बड़े टूर्नामेंट में टीम चयन हमेशा हालिया फॉर्म, फिटनेस और रणनीतिक जरूरतों के आधार पर किया जाता है। कोचिंग स्टाफ ने अलग-अलग पोजिशन पर उन खिलाड़ियों को चुना है जिन्हें वर्ल्ड कप की योजना के लिए बेहतर विकल्प माना गया।
हरमनप्रीत के लिए कप्तान के रूप में यह टूर्नामेंट बड़ी परीक्षा होगा। उन्हें अपनी व्यक्तिगत भूमिका के साथ पूरी टीम की रणनीति संभालनी होगी। पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करने का दबाव भी उन्हीं पर रहेगा। विपक्षी टीमें उनके ड्रैग फ्लिक को रोकने के लिए खास रणनीति तैयार करेंगी, इसलिए जुगराज और संजय जैसे दूसरे विकल्प महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
मनप्रीत सिंह का अनुभव भी दबाव वाले मैचों में काम आएगा। लंबे समय तक भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके मनप्रीत मैदान पर खिलाड़ियों को व्यवस्थित रखने की क्षमता रखते हैं। खासकर इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबलों में उनके अनुभव की जरूरत होगी। युवा खिलाड़ियों के लिए भी मैदान के भीतर उनका मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहेगा।
भारत की आगे की राह काफी हद तक पूल चरण के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी। शुरुआती तीन मुकाबलों में अंक गंवाने से नॉकआउट की राह मुश्किल हो सकती है। टीम की कोशिश वेल्स के खिलाफ मजबूत शुरुआत करने और फिर इंग्लैंड तथा पाकिस्तान के सामने अपनी सर्वश्रेष्ठ हॉकी खेलने की होगी। टीम प्रबंधन मैच-दर-मैच रणनीति के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।
भारत की 20 सदस्यीय टीम: गोलकीपर – मोहित एचएस, सूरज करकेरा। डिफेंडर – जर्मनप्रीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच। मिडफील्डर – मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नीलकांत शर्मा, राजिंदर सिंह और आदित्य अर्जुन लालगे। फॉरवर्ड – मंदीप सिंह, दिलप्रीत सिंह, अभिषेक, सुखजीत सिंह और शिलानंद लकड़ा।
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