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गुजरात की द्रोणा साइबरसॉल्यूशंस ने एआई-संचालित साइबर सुरक्षा में स्थापित किया नया वैश्विक मानक
डिजिटल डेस्क
NG-SOC, डिजिटल फोरेंसिक्स और साइबर गवर्नेंस में अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशनों के साथ भारत की बढ़ती साइबर ताकत को मिली पहचान
गुजरात स्थित कंपनी द्रोणा साइबरसॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड दुनिया के सबसे ज़्यादा सर्टिफाइड इंटीग्रेटेड साइबर सिक्योरिटी कमांड कंट्रोल सेंटर्स में से एक के रूप में उभरकर सामने आई है, जिससे भारत के तेज़ी से बढ़ते साइबर सिक्योरिटी इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। कंपनी की यह उपलब्धि एआई, गवर्न नेक्स्ट, जेनरेशन सिक्योरिटी ऑपरेशंस (NG, SOC), डिजिटल फोरेंसिक्स और साइबर गवर्नेंस के क्षेत्र में एक दुर्लभ ग्लोबल बेंचमार्क मानी जा रही है।
जबकि ज़्यादातर मैनेज्ड सिक्योरिटी सर्विस प्रोवाइडर सीमित कंप्लायंस फ्रेमवर्क तक ही सीमित हैं, वहीं द्रोणा साइबरसॉल्यूशंस ने साइबरसिक्योरिटी गवर्नेंस, डिजिटल फोरेंसिक्स, एआई, कानूनी साक्ष्य प्रबंधन, सस्टेनेबिलिटी और संपूर्ण साइबर इंसिडेंट लाइफसाइकिल मैनेजमेंट के क्षेत्रों में इंटरनेशनल सर्टिफिकेशन्स का एक बहुत बड़ा पोर्टफोलियो प्रस्तुत किया है—जो एक ऐसी उपलब्धि है, जो मल्टीनेशनल कंपनियों में भी शायद ही कभी देखने को मिलती है।
इस संगठन ने ISO/IEC 27001, SOC 2, कोर्ट के लिए ISO/IEC 17025, स्वीकार्य डिजिटल फोरेंसिक लैबोरेटरी, साइबर इंसिडेंट रिस्पॉन्स और डिजिटल एविडेंस लाइफसाइकिल मैनेजमेंट को शामिल करने वाले कई ISO 27000 सीरीज़ सर्टिफिकेशन, ई-डिस्कवरी और कानूनी सबूत गवर्नेंस के लिए ISO/IEC 27050, तथा AI मैनेजमेंट सिस्टम के लिए ISO/IEC 42001:2023 जैसे विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त स्टैंडर्ड अपनाए हैं।
इसके अलावा, कंपनी की सस्टेनेबल और एनर्जी-एफिशिएंट साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रति प्रतिबद्धता ISO 14001 और ISO 50001 जैसे सर्टिफिकेशन से स्पष्ट होती है।
द्रोणा साइबरसॉल्यूशंस NG, SOC ऑपरेशंस के मामले में एक अग्रणी नाम है, जो एआई द्वारा संचालित हैं। कंपनी इस स्टेटस का श्रेय अपने कोर ऑपरेशनल लेयर में एजेंटिव थ्रेट इंटेलिजेंस के इंटीग्रेशन को देती है।NG, SOC ऑपरेशंस का उनका तरीका रिएक्टिव और रूल-बेस्ड सिस्टम से आगे जाता है। यह एक एजेंट-बेस्ड AI आर्किटेक्चर पर आधारित है, जो लगातार ग्लोबल लेवल पर थ्रेट इंटेलिजेंस इकट्ठा करने, बिहेवियरल एनालिसिस करने, रिस्क कॉन्टेक्स्टुअलाइज़ेशन करने और एनालिस्ट को फैसले लेने व रिस्पॉन्स ऑर्केस्ट्रेशन में मदद करता है।
असल में, कंपनी के सभी एआई-आधारित ऑपरेशन ISO/IEC 42001:2023 के नियमों के तहत आते हैं, जो समझने योग्य, ऑडिट करने योग्य, जवाबदेह और आवश्यक मानवीय निगरानी के लिए स्पष्ट स्टैंडर्ड तय करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि ये ऑपरेशन पूरी तरह से मैनेज्ड और इंसानों द्वारा कंट्रोल किए जाते हैं—खासतौर पर सरकारी, BFSI और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे रेगुलेटेड सेक्टर में।
गुजरात में स्थापित द्रोणा साइबरसॉल्यूशंस ने एक स्टार्टअप से तेज़ी से एक ऐसी साइबरसिक्योरिटी संस्था का रूप ले लिया है, जिसे इंडस्ट्री कमांड ऑपरेशंस पर फोकस करने वाली संस्था के तौर पर देखती है।
उनके कंबाइंड ऑपरेटिंग मॉडल में शामिल हैं:
• 24×7 एआई-असिस्टेड NG, SOC और NOC सर्विसेज़
• अत्याधुनिक डिजिटल फोरेंसिक और इंसिडेंट रिस्पॉन्स लैब
• डार्क वेब मॉनिटरिंग
• एआई-ड्रिवन साइबर एनालिटिक्स
• कोर्ट के लिए तैयार डिजिटल एविडेंस मैनेजमेंट
इस ऑर्गनाइज़ेशनल सेटअप के ज़रिए कंपनी सरकारी एजेंसियों, PSUs, BFSI संस्थानों, एंटरप्राइज़ेज़ और ग्लोबल क्लाइंट्स को नेशनल साइबर कमांड सेंटर्स के स्तर की गवर्नेंस और ऑपरेशनल मैच्योरिटी प्रदान कर सकती है।इसके अलावा, कंपनी के भविष्य के प्लान और भी मज़बूत हो गए हैं, जब उसने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 के अनुरूप NG, SOC के विस्तार का खुलासा किया, जो FY 2025–26 के अंत तक चालू हो जाएगा। यह उपलब्धि गुजरात के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मानी जा रही है, जिससे राज्य भारत के साइबरसिक्योरिटी परिदृश्य में और अधिक मज़बूती से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।
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