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इकोनॉमिक सर्वे से पहले पीएम मोदी का संदेश: ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ से ही 2047 का विकसित भारत
नेशनल न्यूज
यूरोपियन यूनियन का बाजार खुलने से भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा मौका, क्वालिटी पर जोर देने की अपील
नई दिल्ली।इकोनॉमिक सर्वे पेश होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए सरकार की आर्थिक दिशा और प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की पहचान “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” रही है और अब देश “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर आगे बढ़ चुका है। प्रधानमंत्री का यह बयान बजट सत्र के दूसरे दिन आया, जिसे उन्होंने देश के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा पूरा हो चुका है और अब दूसरा चरण शुरू हो रहा है। उनके अनुसार, 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आने वाले 25 साल निर्णायक होंगे। उन्होंने संसद में सहयोग और सकारात्मक चर्चा के लिए सांसदों का आभार जताते हुए कहा कि सरकार के सभी फैसले देश की प्रगति और नागरिकों के हित को केंद्र में रखकर किए जा रहे हैं।
यूरोपियन बाजार पर सरकार का फोकस
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए समझौते का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यूरोपियन यूनियन का बड़ा बाजार अब भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए खुल गया है, जिससे निर्यात के नए अवसर पैदा होंगे। प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत से अपील की कि वे इस मौके का पूरा लाभ उठाएं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुणवत्ता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाएं।
उन्होंने कहा कि अच्छी क्वालिटी का सामान यूरोपीय संघ के 27 देशों के उपभोक्ताओं का भरोसा जीत सकता है और इसका असर दशकों तक रहेगा। उनके अनुसार, जब कंपनियों का ब्रांड देश के ब्रांड के साथ जुड़ता है, तो इससे भारत की वैश्विक छवि को नया गौरव मिलता है।
मानव-केंद्रित विकास पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार तकनीक को अपनाने के साथ-साथ मानव-केंद्रित व्यवस्था को भी उतना ही महत्व देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतियां केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य आम नागरिक के जीवन को बेहतर बनाना है। उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और युवा आबादी को दुनिया के लिए “आशा की किरण” बताया।
बजट सत्र का महत्व
प्रधानमंत्री का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब बजट सत्र के दौरान कई अहम विधेयकों पर चर्चा संभावित है। लोकसभा में शिक्षा, प्रतिभूति बाजार और संविधान संशोधन से जुड़े विधेयक लंबित हैं, जिनकी समीक्षा संसदीय समितियों में चल रही है। सरकार का संकेत है कि इन सुधारों के जरिए आर्थिक और संस्थागत ढांचे को मजबूत किया जाएगा।
राजनीतिक और आर्थिक प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री के बयान पर सत्तापक्ष ने इसे दीर्घकालिक आर्थिक दृष्टि का संकेत बताया, जबकि विपक्ष ने रोजगार और सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसदों ने मनरेगा के बजट आवंटन को लेकर चिंता जताई, जिसे सरकार ने पहले ही “राज्यों के साथ साझा जिम्मेदारी” बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इकोनॉमिक सर्वे और आगामी बजट से यह स्पष्ट होगा कि सरकार सुधारों को किस गति से आगे बढ़ाना चाहती है। यूरोपियन बाजार तक बेहतर पहुंच और घरेलू सुधारों के जरिए भारत अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को नई ऊंचाई देने की तैयारी में है।
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