UGC नए नियमों का विरोध जारी: DU-लखनऊ में प्रदर्शन, यूपी में युवक ने बाल मुंडवाए, तमिलनाडु CM ने समर्थन किया

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देशभर में छात्रों और नागरिकों ने UGC 2026 के नियमों के खिलाफ विरोध जताया; कुछ नेताओं ने इसे विभाजनकारी बताया

नई दिल्ली।देशभर में यूजीसी (UGC) के नए नियम 2026 को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। गुरुवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के नॉर्थ कैंपस के बाहर छात्रों ने जमकर नारेबाजी की और विरोध जताया। वहीं, उत्तर प्रदेश की लखनऊ यूनिवर्सिटी के न्यू कैंपस में विभिन्न छात्र संगठनों के सदस्य सड़क पर बैठकर हंगामा कर रहे थे।

उपस्थित पुलिस बल ने छात्रों को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शन लगातार जारी रहा। इसी दौरान कानपुर के भरत शुक्ला नामक व्यक्ति ने विरोध के रूप में सिर मुंडवाकर अनोखा प्रदर्शन किया। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

तमिलनाडु CM का रुख
इस बीच, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने UGC के नए नियमों का समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि “UGC नियम 2026 भले ही देर से उठाया गया कदम है, लेकिन यह हाइअर एजुकेशन सिस्टम में भेदभाव और उदासीनता को दूर करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।”

राजनीतिक प्रतिक्रिया
वहीं, भाजपा के नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने नए UGC प्रावधानों का विरोध किया। उन्होंने इसे समाज में विभाजन पैदा करने वाला नियम बताया। बृजभूषण ने कहा, “एक समुदाय को शोषित और दूसरे को पीड़ित माना जा रहा है, जबकि कमेटी में शोषित समुदाय का कोई प्रतिनिधि नहीं है। इससे समाज में तनाव पैदा हो रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि विरोध केवल उच्च जाति के लोगों का नहीं है, बल्कि OBC और दलित समुदायों के बच्चों को भी हालात समझने और आगे आने की आवश्यकता है।

विरोध का कारण 
नए UGC नियम 2026 में उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव मिटाने और पिछड़े वर्गों को समान अवसर देने के प्रावधान शामिल हैं। इसके तहत विशेष समुदायों के लिए दाखिले और वित्तीय सहायता के मानक निर्धारित किए गए हैं। इस कदम को कुछ समूहों ने सकारात्मक बताया है, वहीं कुछ इसे विभाजनकारी और असमान मान रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नियम उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने का प्रयास हैं, लेकिन समाज के विभिन्न वर्गों में असंतोष और गलतफहमियों को भी जन्म दे सकते हैं।

देशभर के विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन जारी हैं, और छात्रों के विभिन्न संघटन सड़कों पर बैठकर विरोध कर रहे हैं। वहीं, राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने अभी तक नियमों में कोई संशोधन नहीं किया है, लेकिन आने वाले हफ्तों में संसद और विश्वविद्यालय प्रशासन से आगे की नीति तय होने की संभावना है।

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