सत्यकथा : ईरानी डेरे का डॉन राजू ईरानी गिरफ्तार, दो दशक से फैले अपराध नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा

सत्यकथा

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ठगी, लूट और जमीन कब्जाने के दर्जनों मामलों में वांटेड रहमान डकैत सूरत से पकड़ा गया, कई राज्यों की पुलिस को बड़ी राहत

भोपाल के कुख्यात ‘ईरानी डेरे’ का सरगना राजू ईरानी उर्फ आबिद अली उर्फ रहमान डकैत आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गया है। दो दशक से ज्यादा समय तक देश के कई राज्यों में ठगी, लूट, डकैती और जमीन कब्जाने के मामलों में वांटेड रहे इस अपराधी की गिरफ्तारी को पुलिस बड़ी कामयाबी मान रही है। हालांकि, यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह गिरफ्तारी ईरानी डेरे के संगठित अपराध नेटवर्क का अंत साबित होगी या सिर्फ एक अध्याय का समापन है।

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राजू ईरानी का नाम लंबे समय से भोपाल की अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरे से जुड़ा रहा है। यह डेरा सिर्फ एक बस्ती नहीं, बल्कि संगठित अपराध का मजबूत ठिकाना माना जाता रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, यहां रहने वाले दर्जनों परिवारों के सदस्य अलग-अलग राज्यों में दर्ज आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं। चोरी, ठगी, नकली पुलिस और केंद्रीय एजेंसी के अफसर बनकर वारदात करना, हाईवे पर फर्जी चेकिंग और जमीनों पर जबरन कब्जा—इन सबकी साजिश इसी डेरे से रची जाती थी।

दिसंबर के अंत में भोपाल पुलिस ने करीब 150 जवानों के साथ ईरानी डेरे में बड़ा कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया था। मकसद था गिरोह के सरगना राजू ईरानी की गिरफ्तारी। तलाशी के दौरान अवैध हथियार, बिना नंबर की स्पोर्ट्स बाइक, नकली नोट और दर्जनों मोबाइल फोन बरामद किए गए। हालांकि, हंगामे और विरोध के बीच राजू ईरानी पुलिस की पकड़ से बचकर फरार हो गया। इस दौरान बलवे के आरोप में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई।

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फरारी ज्यादा दिन नहीं चली। मुखबिरों की सूचना पर सूरत क्राइम ब्रांच ने उसे गुजरात के लालगेट इलाके से दबोच लिया। बताया गया कि वह वहां अपने रिश्तेदार के घर छिपा हुआ था और किसी बड़ी वारदात की तैयारी में था। गिरफ्तारी के समय उसके पास फर्जी दस्तावेज और वेश बदलने का सामान मिला। पुलिस का दावा है कि वह पहचान बदलने में माहिर था और पहले भी कई बार इसी तरीके से बच निकल चुका था।

जांच में सामने आया है कि राजू ईरानी का नेटवर्क किसी कॉरपोरेट सिस्टम की तरह काम करता था। अलग-अलग गैंग अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते थे। कोई बुजुर्गों को निशाना बनाता था, तो कोई साधु या अधिकारी का भेष धरकर ठगी करता था। पकड़े जाने पर जमानत और कानूनी खर्च की जिम्मेदारी सरगना उठाता था, बदले में उसे हर वारदात से तय हिस्सा मिलता था।

ईरानी डेरे का आपराधिक इतिहास 1970 के दशक से जुड़ा माना जाता है। समय के साथ इसका दायरा बढ़ता गया और डर का ऐसा माहौल बना कि लोग शिकायत करने से भी कतराते थे। जमीनें औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हुए, दुकानदारों से रंगदारी वसूली गई।

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अब राजू ईरानी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी में है। फरारी में मदद करने वालों और गिरोह के अन्य सक्रिय सदस्यों पर भी शिकंजा कसने की बात कही जा रही है। हालांकि, पुलिस अधिकारी मानते हैं कि चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। डेरे के कई युवा सदस्य अब भी सक्रिय हैं और नेतृत्व किसी और के हाथ में जा सकता है।

राजू ईरानी की गिरफ्तारी संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता जरूर है, लेकिन यह आने वाले समय में साफ होगा कि क्या इससे ईरानी डेरे का डर और अपराध दोनों खत्म हो पाएंगे या यह नेटवर्क किसी नए चेहरे के साथ फिर उभर आएगा।

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Edited By: Nitin Trivedi

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29 Jan 2026 By Nitin Trivedi

सत्यकथा : ईरानी डेरे का डॉन राजू ईरानी गिरफ्तार, दो दशक से फैले अपराध नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा

सत्यकथा

भोपाल के कुख्यात ‘ईरानी डेरे’ का सरगना राजू ईरानी उर्फ आबिद अली उर्फ रहमान डकैत आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गया है। दो दशक से ज्यादा समय तक देश के कई राज्यों में ठगी, लूट, डकैती और जमीन कब्जाने के मामलों में वांटेड रहे इस अपराधी की गिरफ्तारी को पुलिस बड़ी कामयाबी मान रही है। हालांकि, यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह गिरफ्तारी ईरानी डेरे के संगठित अपराध नेटवर्क का अंत साबित होगी या सिर्फ एक अध्याय का समापन है।

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राजू ईरानी का नाम लंबे समय से भोपाल की अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरे से जुड़ा रहा है। यह डेरा सिर्फ एक बस्ती नहीं, बल्कि संगठित अपराध का मजबूत ठिकाना माना जाता रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, यहां रहने वाले दर्जनों परिवारों के सदस्य अलग-अलग राज्यों में दर्ज आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं। चोरी, ठगी, नकली पुलिस और केंद्रीय एजेंसी के अफसर बनकर वारदात करना, हाईवे पर फर्जी चेकिंग और जमीनों पर जबरन कब्जा—इन सबकी साजिश इसी डेरे से रची जाती थी।

दिसंबर के अंत में भोपाल पुलिस ने करीब 150 जवानों के साथ ईरानी डेरे में बड़ा कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया था। मकसद था गिरोह के सरगना राजू ईरानी की गिरफ्तारी। तलाशी के दौरान अवैध हथियार, बिना नंबर की स्पोर्ट्स बाइक, नकली नोट और दर्जनों मोबाइल फोन बरामद किए गए। हालांकि, हंगामे और विरोध के बीच राजू ईरानी पुलिस की पकड़ से बचकर फरार हो गया। इस दौरान बलवे के आरोप में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई।

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फरारी ज्यादा दिन नहीं चली। मुखबिरों की सूचना पर सूरत क्राइम ब्रांच ने उसे गुजरात के लालगेट इलाके से दबोच लिया। बताया गया कि वह वहां अपने रिश्तेदार के घर छिपा हुआ था और किसी बड़ी वारदात की तैयारी में था। गिरफ्तारी के समय उसके पास फर्जी दस्तावेज और वेश बदलने का सामान मिला। पुलिस का दावा है कि वह पहचान बदलने में माहिर था और पहले भी कई बार इसी तरीके से बच निकल चुका था।

जांच में सामने आया है कि राजू ईरानी का नेटवर्क किसी कॉरपोरेट सिस्टम की तरह काम करता था। अलग-अलग गैंग अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते थे। कोई बुजुर्गों को निशाना बनाता था, तो कोई साधु या अधिकारी का भेष धरकर ठगी करता था। पकड़े जाने पर जमानत और कानूनी खर्च की जिम्मेदारी सरगना उठाता था, बदले में उसे हर वारदात से तय हिस्सा मिलता था।

ईरानी डेरे का आपराधिक इतिहास 1970 के दशक से जुड़ा माना जाता है। समय के साथ इसका दायरा बढ़ता गया और डर का ऐसा माहौल बना कि लोग शिकायत करने से भी कतराते थे। जमीनें औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हुए, दुकानदारों से रंगदारी वसूली गई।

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अब राजू ईरानी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी में है। फरारी में मदद करने वालों और गिरोह के अन्य सक्रिय सदस्यों पर भी शिकंजा कसने की बात कही जा रही है। हालांकि, पुलिस अधिकारी मानते हैं कि चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। डेरे के कई युवा सदस्य अब भी सक्रिय हैं और नेतृत्व किसी और के हाथ में जा सकता है।

राजू ईरानी की गिरफ्तारी संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता जरूर है, लेकिन यह आने वाले समय में साफ होगा कि क्या इससे ईरानी डेरे का डर और अपराध दोनों खत्म हो पाएंगे या यह नेटवर्क किसी नए चेहरे के साथ फिर उभर आएगा।

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