अंधविश्वास जब तर्क और संवेदना पर हावी हो जाता है, तो उसका परिणाम अक्सर हिंसा और विनाश के रूप में सामने आता है। नर्मदापुरम जिले में सामने आया चंदन नागवंशी हत्याकांड इसी कड़वी सच्चाई की गवाही देता है, जहां एक युवक ने अपनी मां की मौत का बदला लेने के नाम पर अपने ही दोस्त की निर्मम हत्या कर दी।

घटना जावली गांव की है। 22 दिसंबर की ठंडी शाम को गांव के पांच युवक दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर घर से निकले। उनमें 21 वर्षीय चंदन नागवंशी भी शामिल था। वह यह नहीं जानता था कि जिन दोस्तों पर वह आंख बंद कर भरोसा कर रहा है, वे पहले ही उसकी हत्या की साजिश रच चुके हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि चंदन के दोस्त सुशील नागवंशी की मां का एक महीने पहले अचानक निधन हो गया था। इस मौत के पीछे सुशील ने बिना किसी आधार के यह मान लिया कि चंदन की मां ने जादू-टोना कराया है। यही शक धीरे-धीरे नफरत में बदला और नफरत ने हत्या की साजिश का रूप ले लिया।

सुशील ने अपने दोस्त साहिल और दो नाबालिग साथियों को इस साजिश में शामिल किया। योजना बेहद शातिर थी। चंदन को भरोसे में लेने के लिए उसे कई बार जंगल में शराब पार्टी के बहाने ले जाया गया। हर बार स्थान और माहौल ऐसा चुना गया कि चंदन को किसी खतरे का आभास न हो।
अंततः 22 दिसंबर को उसे मिडघाट के घने जंगल में ले जाया गया। रास्ते में शराब खरीदी गई और जंगल के भीतर एक सुनसान जगह पर पार्टी शुरू हुई। आरोपियों ने लड़की के आने का झूठा बहाना बनाकर चंदन को नशे में धुत कर दिया। जब वह पूरी तरह बेसुध हो गया, तभी सुशील ने भारी पत्थर से उसके सिर पर वार कर दिया। मौके पर ही चंदन की मौत हो गई।

हत्या के बाद पहचान छुपाने के इरादे से आरोपियों ने शव और मोटरसाइकिल पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसके बाद वे गांव लौट आए, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
इधर चंदन के घर न लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की और माखननगर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। शुरुआती पूछताछ में आरोपी पुलिस को गुमराह करते रहे और प्रेमिका के साथ फरार होने की कहानी गढ़ते रहे।
मामले में मोड़ तब आया जब पुलिस ने मोबाइल लोकेशन खंगाली। सभी आरोपियों की लोकेशन घटना के समय मिडघाट के जंगल में एक साथ मिली। सख्ती से पूछताछ के बाद आरोपी टूट गए और उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

31 दिसंबर को आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने जंगल से चंदन का अधजला शव और जली हुई बाइक बरामद की। सुशील और साहिल को जेल भेजा गया, जबकि दोनों नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेजा गया।
नर्मदापुरम एसपी सांई कृष्णा थोटा ने बताया कि यह हत्या पूरी तरह योजनाबद्ध थी और सबूत मिटाने का प्रयास भी किया गया। उन्होंने अंधविश्वास और नाबालिगों की अपराधों में बढ़ती संलिप्तता को समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।
आज चंदन का परिवार न्याय की आस में है। सबसे ज्यादा पीड़ा उस मां की है, जिसने अपने बेटे को सिर्फ एक अंधविश्वास की भेंट चढ़ते देखा — एक ऐसा दर्द, जो शायद कभी कम न हो।
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