लक्षद्वीप में बन रहा दुनिया का पहला हाइब्रिड प्लांट: समुद्र का पानी पीने लायक और 24 घंटे बिजली देगा

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“कवरत्ती में बन रहा दुनिया का पहला हाइब्रिड प्लांट, जो समुद्र की गहराई से पानी लाकर पीने लायक बनाएगा और 24 घंटे स्वच्छ बिजली भी देगा”

कवरत्ती, लक्षद्वीप: चारों ओर समुद्र से घिरे लक्षद्वीप में पीने के पानी और सस्ती बिजली की समस्या का समाधान जल्द ही समुद्र ही देगा। राजधानी कवरत्ती में ऐसा हाइब्रिड प्लांट बन रहा है जो समुद्र की गहराई और सतह के तापमान के अंतर का उपयोग करके बिजली पैदा करेगा और साथ ही समुद्री पानी को रोजाना एक लाख लीटर शुद्ध पीने योग्य पानी में बदलेगा।

क्रांतिकारी तकनीक पर आधारित प्लांट

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT) द्वारा विकसित यह प्लांट ओशन थर्मल एनर्जी कन्वर्जन (OTEC) तकनीक पर आधारित है। इस प्रक्रिया में समुद्र की सतह का गर्म पानी वैक्यूम में भाप बनने के लिए भेजा जाएगा, जो टरबाइन को घुमा कर बिजली उत्पन्न करेगा। इसके बाद गहरे समुद्र से लाए गए ठंडे पानी का उपयोग करके भाप को ठंडा किया जाएगा और मीठा पानी तैयार होगा।

नया प्लांट खुद की जरूरत की बिजली भी उत्पन्न करेगा और इसे चलाने के लिए डीजल या बाहरी बिजली की आवश्यकता नहीं होगी। यह दुनिया का पहला ऐसा हाइब्रिड प्लांट होगा जो चौबीसों घंटे स्वच्छ ऊर्जा और पीने का पानी दोनों उपलब्ध कराएगा।

वर्तमान प्रणाली और नई पहल

वर्तमान में लक्षद्वीप के आठ द्वीपों में लो टेम्परेचर थर्मल डीसैलिनेशन (LTTD) तकनीक से पानी बनाया जा रहा है। हालांकि, इन प्लांटों को चलाने के लिए डीजल जनरेटर से बिजली उपलब्ध करानी पड़ती थी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस प्रोजेक्ट को भविष्य की ‘ऊर्जा सुरक्षा’ का आधार बताया है।

तकनीकी चुनौती और पाइपलाइन

कवरत्ती प्लांट का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा है गहरे समुद्र से ठंडा पानी लाना। इसके लिए लगभग 3.8 किलोमीटर लंबी हाई डेंसिटी पॉलीएथीलीन पाइपलाइन बिछाई जा रही है। 900 मिमी व्यास वाली यह पाइपलाइन समुद्र की 1000 मीटर गहराई से बर्फीला पानी ऊपर लाएगी। कवरत्ती के लैगून क्षेत्र में पाइपलाइन को वेल्डिंग कर समुद्र में स्थापित किया जा रहा है।

बिजली की जरूरत और उत्पादन

लक्षद्वीप की कुल बिजली मांग लगभग 10-12 मेगावाट प्रतिदिन है, जबकि सामान्य डीसैलिनेशन प्लांट 55 मेगावाट बिजली की खपत करता है। नया हाइब्रिड प्लांट प्रतिदिन 65 मेगावाट बिजली उत्पन्न करेगा, जो केवल प्लांट की जरूरत पूरी करने में ही नहीं बल्कि अतिरिक्त स्वच्छ ऊर्जा अन्य द्वीपों तक पहुँचाने में भी सक्षम होगा।

इस परियोजना के पूरी तरह सफल होने के बाद लक्षद्वीप में स्थायी ऊर्जा और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्लांट समुद्री जलवायु और द्वीप जीवन के लिए एक उदाहरण बनेगा और पूरी दुनिया के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगा।

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www.dainikjagranmpcg.com
16 Mar 2026 By ANKITA

लक्षद्वीप में बन रहा दुनिया का पहला हाइब्रिड प्लांट: समुद्र का पानी पीने लायक और 24 घंटे बिजली देगा

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कवरत्ती, लक्षद्वीप: चारों ओर समुद्र से घिरे लक्षद्वीप में पीने के पानी और सस्ती बिजली की समस्या का समाधान जल्द ही समुद्र ही देगा। राजधानी कवरत्ती में ऐसा हाइब्रिड प्लांट बन रहा है जो समुद्र की गहराई और सतह के तापमान के अंतर का उपयोग करके बिजली पैदा करेगा और साथ ही समुद्री पानी को रोजाना एक लाख लीटर शुद्ध पीने योग्य पानी में बदलेगा।

क्रांतिकारी तकनीक पर आधारित प्लांट

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT) द्वारा विकसित यह प्लांट ओशन थर्मल एनर्जी कन्वर्जन (OTEC) तकनीक पर आधारित है। इस प्रक्रिया में समुद्र की सतह का गर्म पानी वैक्यूम में भाप बनने के लिए भेजा जाएगा, जो टरबाइन को घुमा कर बिजली उत्पन्न करेगा। इसके बाद गहरे समुद्र से लाए गए ठंडे पानी का उपयोग करके भाप को ठंडा किया जाएगा और मीठा पानी तैयार होगा।

नया प्लांट खुद की जरूरत की बिजली भी उत्पन्न करेगा और इसे चलाने के लिए डीजल या बाहरी बिजली की आवश्यकता नहीं होगी। यह दुनिया का पहला ऐसा हाइब्रिड प्लांट होगा जो चौबीसों घंटे स्वच्छ ऊर्जा और पीने का पानी दोनों उपलब्ध कराएगा।

वर्तमान प्रणाली और नई पहल

वर्तमान में लक्षद्वीप के आठ द्वीपों में लो टेम्परेचर थर्मल डीसैलिनेशन (LTTD) तकनीक से पानी बनाया जा रहा है। हालांकि, इन प्लांटों को चलाने के लिए डीजल जनरेटर से बिजली उपलब्ध करानी पड़ती थी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस प्रोजेक्ट को भविष्य की ‘ऊर्जा सुरक्षा’ का आधार बताया है।

तकनीकी चुनौती और पाइपलाइन

कवरत्ती प्लांट का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा है गहरे समुद्र से ठंडा पानी लाना। इसके लिए लगभग 3.8 किलोमीटर लंबी हाई डेंसिटी पॉलीएथीलीन पाइपलाइन बिछाई जा रही है। 900 मिमी व्यास वाली यह पाइपलाइन समुद्र की 1000 मीटर गहराई से बर्फीला पानी ऊपर लाएगी। कवरत्ती के लैगून क्षेत्र में पाइपलाइन को वेल्डिंग कर समुद्र में स्थापित किया जा रहा है।

बिजली की जरूरत और उत्पादन

लक्षद्वीप की कुल बिजली मांग लगभग 10-12 मेगावाट प्रतिदिन है, जबकि सामान्य डीसैलिनेशन प्लांट 55 मेगावाट बिजली की खपत करता है। नया हाइब्रिड प्लांट प्रतिदिन 65 मेगावाट बिजली उत्पन्न करेगा, जो केवल प्लांट की जरूरत पूरी करने में ही नहीं बल्कि अतिरिक्त स्वच्छ ऊर्जा अन्य द्वीपों तक पहुँचाने में भी सक्षम होगा।

इस परियोजना के पूरी तरह सफल होने के बाद लक्षद्वीप में स्थायी ऊर्जा और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्लांट समुद्री जलवायु और द्वीप जीवन के लिए एक उदाहरण बनेगा और पूरी दुनिया के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगा।

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