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GLP-1 दवाओं की कवरेज पर बहस, सिर्फ डायबिटीज तक सीमित रहे या मोटापे में भी मिले?
Priyanka Mathur
WHO ने मोटापे के इलाज में GLP-1 के इस्तेमाल को सशर्त मंजूरी दी; बढ़ती कीमत और लंबे इलाज के बीच बीमा कवरेज को लेकर दुनिया भर में नई बहस
मोटापे के इलाज में इस्तेमाल होने वाली GLP-1 दवाएं अब सिर्फ टाइप-2 डायबिटीज के इलाज तक सीमित चर्चा नहीं रह गई हैं। इन दवाओं की बढ़ती मांग के साथ सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और निजी बीमा कंपनियों को इन्हें मोटापे के इलाज के लिए भी कवर करना चाहिए या भुगतान की सुविधा केवल डायबिटीज जैसे स्थापित उपयोगों तक रखी जानी चाहिए। यह बहस इसलिए भी तेज हुई है क्योंकि मोटापे को अब कई स्वास्थ्य संस्थान लंबे समय तक चलने वाली बीमारी के तौर पर देख रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दिसंबर 2025 में अपनी पहली GLP-1 गाइडलाइन जारी करते हुए वयस्कों में मोटापे के लंबे समय के इलाज के लिए इन दवाओं के इस्तेमाल की सशर्त सिफारिश की थी। WHO का कहना है कि दवाओं के साथ खान-पान, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्यकर्मियों की मदद वाला व्यापक इलाज जरूरी है। संगठन ने साथ ही लागत, लंबे समय की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की तैयारी को लेकर भी चिंता जताई है।
कवरेज के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क यह है कि मोटापा खुद कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। ऐसे में दवा पर खर्च को केवल वजन कम करने का खर्च मानने के बजाय भविष्य में होने वाली बीमारियों को रोकने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। GLP-1 दवाओं के बारे में उपलब्ध प्रमाणों में वजन कम होने के साथ कुछ मरीजों में हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से जुड़े फायदे भी सामने आए हैं। अमेरिकी FDA ने 2024 में semaglutide यानी Wegovy को हृदय रोग वाले और अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त वयस्कों में हृदय संबंधी मौत, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए भी मंजूरी दी थी। WHO के मुताबिक GLP-1 उपचार से टाइप-2 डायबिटीज और कुछ अन्य बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इसी आधार पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच यह तर्क है कि अगर मोटापे का इलाज देर से शुरू किया गया तो आगे चलकर स्वास्थ्य व्यवस्था पर डायबिटीज, हृदय रोग और दूसरी जटिलताओं का खर्च ज्यादा हो सकता है।
दूसरी तरफ बीमा कंपनियों और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के सामने खर्च का सवाल बड़ा है। GLP-1 दवाओं की कीमत लंबे समय तक इलाज जारी रखने पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य बजट और बीमा प्रीमियम दोनों पर असर डाल सकती है। WHO ने भी अपनी गाइडलाइन में मौजूदा लागत और स्वास्थ्य प्रणालियों की सीमित तैयारी को सशर्त सिफारिश की वजहों में शामिल किया है। संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर इन दवाओं तक पहुंच केवल ज्यादा पैसे वाले लोगों तक रही तो स्वास्थ्य असमानता बढ़ सकती है। दवाओं की मांग बढ़ने के साथ कई देशों में उपलब्धता और सप्लाई भी चुनौती बनी हुई है। WHO के अनुसार 2030 तक भी उन सभी लोगों में से 10 फीसदी से कम तक GLP-1 दवाएं पहुंचने का अनुमान है, जिन्हें इनसे फायदा हो सकता है। इसलिए कवरेज का सवाल सिर्फ यह नहीं है कि दवा का खर्च कौन उठाएगा, बल्कि यह भी है कि सीमित दवाओं को सबसे ज्यादा जरूरत वाले मरीजों तक कैसे पहुंचाया जाए।
अमेरिका में इसी बहस के बीच कवरेज के अलग-अलग मॉडल सामने आ रहे हैं। 1 जुलाई 2026 से Medicare ने पात्र Part D लाभार्थियों के लिए कुछ GLP-1 दवाओं तक पहुंच देने वाला अस्थायी Medicare GLP-1 Bridge कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें पात्र लोगों के लिए कुछ दवाएं वजन घटाने और वजन कम बनाए रखने के उद्देश्य से उपलब्ध कराई जा रही हैं और मासिक भुगतान 50 डॉलर रखा गया है। पात्रता भी सभी लोगों के लिए एक जैसी नहीं है। उदाहरण के तौर पर कुछ मामलों में BMI 35 या उससे अधिक होना, या कम BMI के साथ हृदय, किडनी, हाई ब्लड प्रेशर, प्री-डायबिटीज जैसी स्थितियां शामिल होना जरूरी है। CMS का BALANCE मॉडल भी GLP-1 दवाओं और लाइफस्टाइल सपोर्ट तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। यानी अमेरिकी मॉडल में कवरेज को पूरी तरह खुला रखने के बजाय मेडिकल जरूरत और पात्रता से जोड़ने की कोशिश दिखाई दे रही है।
हालांकि बीमा कवरेज को केवल डायबिटीज के मरीजों तक सीमित रखने की मांग भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कुछ स्वास्थ्य योजनाएं अभी भी वजन घटाने के लिए GLP-1 दवाओं को कवर नहीं करतीं, जबकि डायबिटीज के लिए स्वीकृत इस्तेमाल पर भुगतान जारी रहता है। उदाहरण के तौर पर Health New England ने 2026 में अपने कुछ प्लान सदस्यों के लिए वजन घटाने और संबंधित स्थितियों में GLP-1 कवरेज समाप्त करने की जानकारी दी, जबकि FDA-approved diabetes use के लिए कवरेज जारी रखा। वहीं कुछ योजनाएं BMI और दूसरी बीमारियों के आधार पर कवरेज देने का रास्ता अपना रही हैं। इससे नीति बनाने वालों के सामने एक बीच का मॉडल भी उभरता है, जिसमें हर व्यक्ति के लिए दवा मुफ्त या पूरी तरह कवर करने के बजाय गंभीर मोटापे, संबंधित बीमारी या उच्च जोखिम वाले मरीजों को प्राथमिकता दी जाए। ऐसे मॉडल में डॉक्टर की जांच, BMI, मेडिकल हिस्ट्री और पहले किए गए वजन प्रबंधन प्रयासों को पात्रता का हिस्सा बनाया जा सकता है।
इस बहस में एक और अहम मुद्दा यह है कि GLP-1 को केवल वजन घटाने वाली दवा मानकर कवरेज तय किया जाए या मोटापे के व्यापक इलाज का हिस्सा माना जाए। WHO का मौजूदा रुख दवा को अकेले समाधान के तौर पर नहीं देखता। संगठन ने साफ तौर पर कहा है कि GLP-1 के साथ स्वस्थ आहार, शारीरिक गतिविधि और व्यवहार संबंधी सहायता भी जरूरी है। दवाओं के लंबे समय तक इस्तेमाल, उन्हें बंद करने के बाद वजन बनाए रखने और दीर्घकालिक सुरक्षा से जुड़े आंकड़ों पर भी अभी काम जारी है। WHO ने जुलाई 2026 में GLP-1 दवाओं के गैर-स्वीकृत इस्तेमाल और बिना चिकित्सकीय निगरानी ऑनलाइन खरीद को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा। ऐसे में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों के सामने कवरेज का मॉडल तय करते समय दवा की कीमत, मरीज की जरूरत, लंबे समय का स्वास्थ्य लाभ, सप्लाई और समान पहुंच—इन सभी पहलुओं को एक साथ देखना पड़ रहा है।
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