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बिहार में वर्दी पर दाग: किशनगंज में थानेदार पर महिला से दुष्कर्म का आरोप, एसपी ने तत्काल दर्ज कराया मामला
Satyakatha
पति की तलाश में मदद मांगने पहुंची युवती से थानेदार पर आठ दिन तक यौन उत्पीड़न का आरोप; जांच के बाद एसएचओ और पंचायत प्रतिनिधि के खिलाफ केस दर्ज
बिहार में एक बार फिर पुलिस वर्दी पर गंभीर आरोप लगे हैं। किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ थाना प्रभारी पर एक महिला फरियादी के साथ यौन शोषण का मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई तब हुई जब महिला अपने पति की गुमशुदगी की शिकायत लेकर थाने पहुंची थी। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर एसपी कार्यालय के निर्देश पर थानेदार और पंचायत प्रतिनिधि के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
घटना बीते अप्रैल माह की बताई जा रही है। किशनगंज के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डॉ. इनामुल हक मेंगनू को एक दंपती ने कार्यालय में पहुंचकर शिकायत सौंपी। महिला ने आरोप लगाया कि जब वह पति की खोज में टेढ़ागाछ थाने मदद मांगने गई, तो थानेदार ने उसे धोखे से अपने सरकारी आवास पर बुलाकर कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा और दुष्कर्म किया। इस दौरान थानेदार के साथ एक स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि के शामिल होने की भी बात सामने आई।
शिकायत मिलने के बाद एसपी मेंगनू ने मामले की जांच की जिम्मेदारी प्रशिक्षु डीएसपी राजन कुमार को सौंपी। जांच के दौरान पीड़िता का बयान दर्ज किया गया और चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। साक्ष्यों की पुष्टि होने पर पुलिस मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी गई, जिसके आधार पर टेढ़ागाछ थाने के तत्कालीन एसएचओ नीरज कुमार निराला और पंचायत प्रतिनिधि मनोज यादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
एसपी ने बताया कि पीड़िता की शिकायत गंभीर प्रकृति की थी और पुलिस की प्राथमिक जांच में उसमें सत्यता मिली। “कानून सभी के लिए समान है। चाहे कोई पुलिस अधिकारी ही क्यों न हो, अगर उसने अपराध किया है तो उसे दंड मिलेगा,” एसपी मेंगनू ने कहा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना की सूचना मिलते ही आरोपी अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही विभागीय जांच शुरू की गई है। फिलहाल दोनों आरोपियों की तलाश जारी है और मामले की निगरानी स्वयं वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं।
इस घटना ने बिहार पुलिस की छवि पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। सामाजिक संगठनों और महिला आयोग ने मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है। स्थानीय महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और न्यायिक निगरानी जरूरी है, ताकि पीड़िताओं का भरोसा तंत्र पर बना रहे।
पुलिस विभाग ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा और पीड़िता को हरसंभव सुरक्षा व सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
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बिहार में एक बार फिर पुलिस वर्दी पर गंभीर आरोप लगे हैं। किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ थाना प्रभारी पर एक महिला फरियादी के साथ यौन शोषण का मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई तब हुई जब महिला अपने पति की गुमशुदगी की शिकायत लेकर थाने पहुंची थी। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर एसपी कार्यालय के निर्देश पर थानेदार और पंचायत प्रतिनिधि के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
घटना बीते अप्रैल माह की बताई जा रही है। किशनगंज के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डॉ. इनामुल हक मेंगनू को एक दंपती ने कार्यालय में पहुंचकर शिकायत सौंपी। महिला ने आरोप लगाया कि जब वह पति की खोज में टेढ़ागाछ थाने मदद मांगने गई, तो थानेदार ने उसे धोखे से अपने सरकारी आवास पर बुलाकर कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा और दुष्कर्म किया। इस दौरान थानेदार के साथ एक स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि के शामिल होने की भी बात सामने आई।
शिकायत मिलने के बाद एसपी मेंगनू ने मामले की जांच की जिम्मेदारी प्रशिक्षु डीएसपी राजन कुमार को सौंपी। जांच के दौरान पीड़िता का बयान दर्ज किया गया और चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। साक्ष्यों की पुष्टि होने पर पुलिस मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी गई, जिसके आधार पर टेढ़ागाछ थाने के तत्कालीन एसएचओ नीरज कुमार निराला और पंचायत प्रतिनिधि मनोज यादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
एसपी ने बताया कि पीड़िता की शिकायत गंभीर प्रकृति की थी और पुलिस की प्राथमिक जांच में उसमें सत्यता मिली। “कानून सभी के लिए समान है। चाहे कोई पुलिस अधिकारी ही क्यों न हो, अगर उसने अपराध किया है तो उसे दंड मिलेगा,” एसपी मेंगनू ने कहा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना की सूचना मिलते ही आरोपी अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही विभागीय जांच शुरू की गई है। फिलहाल दोनों आरोपियों की तलाश जारी है और मामले की निगरानी स्वयं वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं।
इस घटना ने बिहार पुलिस की छवि पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। सामाजिक संगठनों और महिला आयोग ने मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है। स्थानीय महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और न्यायिक निगरानी जरूरी है, ताकि पीड़िताओं का भरोसा तंत्र पर बना रहे।
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