67 साल से सेवा, पर अब तक बिना मानदेय: झाबुआ में पटेलों ने स्थायी नियुक्ति और आर्थिक सम्मान की उठाई मांग

Jhabua, MP

आदर्श ग्रामीण पटेल संघ ने मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन; कहा— पीढ़ियों से ग्राम व्यवस्था संभाल रहे हैं, फिर भी न वेतन, न पहचान

 झाबुआ जिले में मंगलवार को आदर्श ग्रामीण पटेल संघ के बैनर तले पटेल समुदाय के प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक व्यवस्था में अपने योगदान को मान्यता दिलाने की मांग उठाई। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर उन्होंने मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री और जिला प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें 67 वर्षों से बिना मानदेय के सेवा दे रहे पटेलों के लिए स्थायी नियुक्ति और आर्थिक सम्मान की मांग की गई।

कौन, क्या, कहाँ और क्यों

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वे मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 222 के तहत नियुक्त ग्राम अधिकारी हैं, जो गांवों में राजस्व, प्रशासन और सामाजिक अनुशासन बनाए रखने का कार्य करते हैं। बावजूद इसके, उन्हें अब तक कोई मानदेय, भत्ता या सरकारी सहयोग नहीं मिला। ग्रामीण व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ये पटेल आज भी अपनी जिम्मेदारियां स्वयं के खर्च पर निभा रहे हैं।

समान कार्य, पर अलग待遇

पटेलों ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि ग्राम कोटवार, जिनकी जिम्मेदारियां और नियुक्ति प्रक्रिया लगभग समान हैं, उन्हें सरकारी भूमि के साथ-साथ 9,000 रुपये तक मासिक मानदेय मिलता है। जबकि पटेलों को ऐसी कोई सुविधा प्राप्त नहीं है। संघ ने मांग की कि कोटवारों की तर्ज पर पटेलों को भी मानदेय और सेवा लाभ दिए जाएं।

स्थायी नियुक्ति और पहचान की मांग

संघ ने यह भी कहा कि पीढ़ियों से यह जिम्मेदारी निभाने के बावजूद, आज तक किसी भी पटेल को स्थायी नियुक्ति पत्र या परिचय पत्र जारी नहीं किया गया है। उनके अनुसार, यह परंपरागत दायित्व वंशानुगत रूप से चला आ रहा है, और सेवा अवधि में मृत्यु होने पर उत्तराधिकारी स्वाभाविक रूप से कार्यभार संभाल लेते हैं। संघ का कहना है कि यह परंपरा उनकी निष्ठा और सेवा भावना का प्रमाण है।

“अब निर्णायक लड़ाई का समय है”

आदर्श ग्रामीण पटेल संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश पटेल ने कहा कि अब उनकी लड़ाई केवल मानदेय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पैतृक अधिकार और सम्मानजनक पहचान की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर में प्रदर्शन और चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और पृष्ठभूमि

झाबुआ प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर इसे आगे राज्य सरकार को भेजने की बात कही है। वहीं, स्थानीय लोगों ने पटेलों की मांगों को जनहित से जुड़ा मामला बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि पटेल गांवों में राजस्व रिकॉर्ड, सीमांकन, भूमि विवाद और स्थानीय कानून व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें सरकारी सुविधाओं से वंचित रखा गया है।

आगे की स्थिति

संघ ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे राज्यव्यापी अभियान चलाकर इस मुद्दे को विधानसभा तक पहुंचाएंगे। पटेल समुदाय चाहता है कि उन्हें भी “ग्राम प्रशासन के सहयोगी अधिकारी” के रूप में वह मान्यता और सम्मान मिले, जिसके वे दशकों से हकदार हैं।

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www.dainikjagranmpcg.com
04 Nov 2025 By दैनिक जागरण

67 साल से सेवा, पर अब तक बिना मानदेय: झाबुआ में पटेलों ने स्थायी नियुक्ति और आर्थिक सम्मान की उठाई मांग

Jhabua, MP

 झाबुआ जिले में मंगलवार को आदर्श ग्रामीण पटेल संघ के बैनर तले पटेल समुदाय के प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक व्यवस्था में अपने योगदान को मान्यता दिलाने की मांग उठाई। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर उन्होंने मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री और जिला प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें 67 वर्षों से बिना मानदेय के सेवा दे रहे पटेलों के लिए स्थायी नियुक्ति और आर्थिक सम्मान की मांग की गई।

कौन, क्या, कहाँ और क्यों

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वे मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 222 के तहत नियुक्त ग्राम अधिकारी हैं, जो गांवों में राजस्व, प्रशासन और सामाजिक अनुशासन बनाए रखने का कार्य करते हैं। बावजूद इसके, उन्हें अब तक कोई मानदेय, भत्ता या सरकारी सहयोग नहीं मिला। ग्रामीण व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ये पटेल आज भी अपनी जिम्मेदारियां स्वयं के खर्च पर निभा रहे हैं।

समान कार्य, पर अलग待遇

पटेलों ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि ग्राम कोटवार, जिनकी जिम्मेदारियां और नियुक्ति प्रक्रिया लगभग समान हैं, उन्हें सरकारी भूमि के साथ-साथ 9,000 रुपये तक मासिक मानदेय मिलता है। जबकि पटेलों को ऐसी कोई सुविधा प्राप्त नहीं है। संघ ने मांग की कि कोटवारों की तर्ज पर पटेलों को भी मानदेय और सेवा लाभ दिए जाएं।

स्थायी नियुक्ति और पहचान की मांग

संघ ने यह भी कहा कि पीढ़ियों से यह जिम्मेदारी निभाने के बावजूद, आज तक किसी भी पटेल को स्थायी नियुक्ति पत्र या परिचय पत्र जारी नहीं किया गया है। उनके अनुसार, यह परंपरागत दायित्व वंशानुगत रूप से चला आ रहा है, और सेवा अवधि में मृत्यु होने पर उत्तराधिकारी स्वाभाविक रूप से कार्यभार संभाल लेते हैं। संघ का कहना है कि यह परंपरा उनकी निष्ठा और सेवा भावना का प्रमाण है।

“अब निर्णायक लड़ाई का समय है”

आदर्श ग्रामीण पटेल संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश पटेल ने कहा कि अब उनकी लड़ाई केवल मानदेय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पैतृक अधिकार और सम्मानजनक पहचान की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर में प्रदर्शन और चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और पृष्ठभूमि

झाबुआ प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर इसे आगे राज्य सरकार को भेजने की बात कही है। वहीं, स्थानीय लोगों ने पटेलों की मांगों को जनहित से जुड़ा मामला बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि पटेल गांवों में राजस्व रिकॉर्ड, सीमांकन, भूमि विवाद और स्थानीय कानून व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें सरकारी सुविधाओं से वंचित रखा गया है।

आगे की स्थिति

संघ ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे राज्यव्यापी अभियान चलाकर इस मुद्दे को विधानसभा तक पहुंचाएंगे। पटेल समुदाय चाहता है कि उन्हें भी “ग्राम प्रशासन के सहयोगी अधिकारी” के रूप में वह मान्यता और सम्मान मिले, जिसके वे दशकों से हकदार हैं।

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