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भिलाई स्टील प्लांट में लापरवाही का आरोप: असुरक्षित काम के दौरान पोल से गिरा ठेका मजदूर, प्रबंधन व ठेकेदार पर मामला दर्ज
दुर्ग–भिलाई (छ.ग.)
बिना हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट कराए गए काम से गंभीर रूप से घायल हुआ श्रमिक, इलाज और मुआवजे को लेकर भी उठे सवाल
भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) टाउनशिप क्षेत्र में एक गंभीर औद्योगिक दुर्घटना के बाद कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। विद्युत कार्य के दौरान एक ठेका श्रमिक के झुके हुए पोल से गिरकर गंभीर रूप से घायल होने के मामले में पुलिस ने बीएसपी प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।
पुलिस के मुताबिक, मामला भिलाई नगर थाना क्षेत्र का है। पीड़ित ललित कुमार चंद्राकर, निवासी ग्राम चंदखुरी, पिछले करीब 12 वर्षों से बीएसपी टाउनशिप में ठेका श्रमिक के रूप में काम कर रहे हैं। 3 सितंबर 2025 की शाम उन्हें सेक्टर-06 स्थित जगदंबा मंदिर के पास विद्युत लाइन से जुड़े कार्य के लिए भेजा गया था।
शिकायत में बताया गया है कि जिस बिजली पोल पर काम कराया जा रहा था, उसकी स्थिति पहले से ही सुरक्षित नहीं थी। पोल टेढ़ा था और उसे क्रेन के सहारे खड़ा कर अस्थायी रूप से स्थिर किया गया था। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने पोल की हालत और सुरक्षा उपकरणों की कमी को देखते हुए ऊपर चढ़ने से इनकार किया था, लेकिन इसके बावजूद उनसे काम करने को कहा गया।
आरोप है कि न तो सेफ्टी बेल्ट, न हेलमेट और न ही अन्य जरूरी सुरक्षा साधन उपलब्ध कराए गए। काम के दौरान क्रेन और रस्सियों की मदद से पोल को संतुलित रखने का प्रयास किया जा रहा था, तभी अचानक संतुलन बिगड़ गया और ललित कुमार लगभग 15 फीट की ऊंचाई से नीचे गिर पड़े।
हादसे में उनके हाथ, पैर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें पहले भिलाई के सेक्टर-9 अस्पताल ले जाया गया, जहां से ईएसआई अस्पताल और बाद में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़ित का आरोप है कि इलाज के दौरान भी पर्याप्त देखभाल नहीं की गई और हालत पूरी तरह स्थिर हुए बिना ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
ललित कुमार का कहना है कि दुर्घटना के बाद ठेकेदार ने मुआवजा देने और स्वस्थ होने पर दोबारा काम पर रखने का भरोसा दिलाया था, लेकिन चार महीने बीत जाने के बावजूद कोई सहायता नहीं दी गई। इलाज पर उन्हें करीब एक लाख रुपये अपनी जेब से खर्च करने पड़े।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि बीएसपी टाउनशिप से जुड़े कुछ अधिकारियों द्वारा उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया। मना करने पर कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और धमकी भी दी गई।
मामले की शिकायत दुर्ग पुलिस अधीक्षक से की गई थी। प्रारंभिक जांच के बाद भिलाई नगर पुलिस ने बीएसपी के अधिकारी राजकिशोर, दिलीप राणे, टिकेंद्र ठाकुर, अशोक साहू, महिपाल देशमुख और ठेकेदार शंकर दयाल सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 289 और 125(बी) के तहत अपराध दर्ज किया है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर दस्तावेज और गवाहों के बयान जुटाए जा रहे हैं। यह घटना औद्योगिक क्षेत्रों में ठेका श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है।
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