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गुना की पाइप फैक्ट्री में भीषण आग, पांच घंटे बाद पाया काबू
गुना,(म.प्र.)
इंडस्ट्रियल एरिया स्थित प्लास्टिक पाइप यूनिट में देर रात भड़की आग, चार फायर ब्रिगेड की मदद से बुझी लपटें; 80 लाख रुपए तक नुकसान की आशंका
गुना के इंडस्ट्रियल एरिया में मंगलवार देर रात उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एक प्लास्टिक पाइप निर्माण फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और फैक्ट्री परिसर में रखा प्लास्टिक का कच्चा माल, तैयार पाइप और अन्य सामग्री इसकी चपेट में आ गई। आग इतनी तेजी से फैली कि दूर स्थित कॉलोनियों से भी धुएं का गुबार और आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं। सूचना मिलने के बाद नगरपालिका की फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। यह घटना शहर के इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एक प्लास्टिक पाइप निर्माण इकाई में हुई। फैक्ट्री का संचालन हरीश रत्रा द्वारा किया जाता है। यहां कृषि और सिंचाई कार्यों में उपयोग होने वाले विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक पाइप तैयार किए जाते हैं। फैक्ट्री के एक हिस्से में उत्पादन कार्य होता है, जबकि दूसरे हिस्से में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक के दाने, रॉ मटेरियल और तैयार उत्पादों का भंडारण किया जाता है। यही कारण रहा कि आग लगने के बाद स्थिति तेजी से गंभीर हो गई।
फैक्ट्री संचालक के अनुसार मंगलवार शाम रोजाना की तरह उत्पादन कार्य पूरा होने के बाद करीब साढ़े आठ बजे फैक्ट्री बंद कर दी गई थी। सभी कर्मचारी अपने घर लौट गए थे और परिसर पूरी तरह बंद था। उस समय किसी प्रकार की असामान्य स्थिति नहीं थी। रात करीब 11 बजे के आसपास इंडस्ट्रियल एरिया से सटी विंध्याचल कॉलोनी के लोगों ने फैक्ट्री की दिशा से धुआं उठता देखा। कुछ ही मिनटों में आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत नगरपालिका और प्रशासन को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही नगरपालिका का अमला सक्रिय हो गया। कुछ ही देर में फायर ब्रिगेड की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई। आग की भयावहता को देखते हुए एक के बाद एक चार दमकल वाहनों को राहत कार्य में लगाया गया। आग बुझाने का काम शुरू तो हो गया, लेकिन प्लास्टिक सामग्री की अधिकता के कारण आग बार-बार भड़क रही थी। इससे दमकल कर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
राहत कार्य के दौरान सबसे बड़ी चुनौती फैक्ट्री की मजबूत पक्की दीवारें बनीं। आग फैक्ट्री के अंदर गहराई तक फैल चुकी थी और बाहर से पानी की बौछार सीधे प्रभावित हिस्सों तक नहीं पहुंच पा रही थी। ऐसी स्थिति में फायर टीम को अलग रणनीति अपनानी पड़ी। सबसे पहले फैक्ट्री के गेट का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया, लेकिन इससे भी आग तक पूरी तरह पहुंचना आसान नहीं था। इसके बाद दमकल कर्मियों ने फैक्ट्री की दीवारों में कई स्थानों पर छेद किए। इन छेदों के माध्यम से अंदर तक पानी पहुंचाया गया। लगातार पानी डालने और धुएं को नियंत्रित करने के प्रयासों के बाद आग की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगी। आग बुझाने के लिए लगातार पानी की आवश्यकता पड़ रही थी, इसलिए टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई भी जारी रखी गई। पूरी रात राहत कार्य चलता रहा और दमकलकर्मी आग को नियंत्रित करने में जुटे रहे।
करीब पांच घंटे तक चले अभियान के बाद तड़के आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय फैक्ट्री में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि आर्थिक नुकसान काफी बड़ा माना जा रहा है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार आगजनी की इस घटना में 70 से 80 लाख रुपए तक का नुकसान हुआ है। बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का कच्चा माल, तैयार पाइप और अन्य उपकरण जलकर राख हो गए। घटना के दौरान नगरपालिका अध्यक्ष पति अरविंद गुप्ता सहित कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने राहत कार्यों की निगरानी की और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि आग पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया जाता तो नुकसान और अधिक बढ़ सकता था तथा आसपास की अन्य औद्योगिक इकाइयों तक भी आग फैलने का खतरा था। आग लगने के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है। प्रारंभिक स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। पुलिस और संबंधित विभागों की टीम मामले की जांच में जुटी हुई है। फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण कर तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि आग लगने की वजह का पता लगाया जा सके। जिन इकाइयों में ज्वलनशील सामग्री बड़ी मात्रा में मौजूद रहती है, वहां फायर सेफ्टी सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। नियमित निरीक्षण, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और आपातकालीन प्रबंधन की व्यवस्था ऐसी घटनाओं के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकती है। गुना की इस फैक्ट्री में लगी आग भले ही किसी बड़ी जनहानि का कारण नहीं बनी, लेकिन इससे हुए आर्थिक नुकसान ने फैक्ट्री प्रबंधन को बड़ा झटका दिया है।
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गुना की पाइप फैक्ट्री में भीषण आग, पांच घंटे बाद पाया काबू
गुना,(म.प्र.)
गुना के इंडस्ट्रियल एरिया में मंगलवार देर रात उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एक प्लास्टिक पाइप निर्माण फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और फैक्ट्री परिसर में रखा प्लास्टिक का कच्चा माल, तैयार पाइप और अन्य सामग्री इसकी चपेट में आ गई। आग इतनी तेजी से फैली कि दूर स्थित कॉलोनियों से भी धुएं का गुबार और आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं। सूचना मिलने के बाद नगरपालिका की फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। यह घटना शहर के इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एक प्लास्टिक पाइप निर्माण इकाई में हुई। फैक्ट्री का संचालन हरीश रत्रा द्वारा किया जाता है। यहां कृषि और सिंचाई कार्यों में उपयोग होने वाले विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक पाइप तैयार किए जाते हैं। फैक्ट्री के एक हिस्से में उत्पादन कार्य होता है, जबकि दूसरे हिस्से में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक के दाने, रॉ मटेरियल और तैयार उत्पादों का भंडारण किया जाता है। यही कारण रहा कि आग लगने के बाद स्थिति तेजी से गंभीर हो गई।
फैक्ट्री संचालक के अनुसार मंगलवार शाम रोजाना की तरह उत्पादन कार्य पूरा होने के बाद करीब साढ़े आठ बजे फैक्ट्री बंद कर दी गई थी। सभी कर्मचारी अपने घर लौट गए थे और परिसर पूरी तरह बंद था। उस समय किसी प्रकार की असामान्य स्थिति नहीं थी। रात करीब 11 बजे के आसपास इंडस्ट्रियल एरिया से सटी विंध्याचल कॉलोनी के लोगों ने फैक्ट्री की दिशा से धुआं उठता देखा। कुछ ही मिनटों में आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत नगरपालिका और प्रशासन को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही नगरपालिका का अमला सक्रिय हो गया। कुछ ही देर में फायर ब्रिगेड की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई। आग की भयावहता को देखते हुए एक के बाद एक चार दमकल वाहनों को राहत कार्य में लगाया गया। आग बुझाने का काम शुरू तो हो गया, लेकिन प्लास्टिक सामग्री की अधिकता के कारण आग बार-बार भड़क रही थी। इससे दमकल कर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
राहत कार्य के दौरान सबसे बड़ी चुनौती फैक्ट्री की मजबूत पक्की दीवारें बनीं। आग फैक्ट्री के अंदर गहराई तक फैल चुकी थी और बाहर से पानी की बौछार सीधे प्रभावित हिस्सों तक नहीं पहुंच पा रही थी। ऐसी स्थिति में फायर टीम को अलग रणनीति अपनानी पड़ी। सबसे पहले फैक्ट्री के गेट का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया, लेकिन इससे भी आग तक पूरी तरह पहुंचना आसान नहीं था। इसके बाद दमकल कर्मियों ने फैक्ट्री की दीवारों में कई स्थानों पर छेद किए। इन छेदों के माध्यम से अंदर तक पानी पहुंचाया गया। लगातार पानी डालने और धुएं को नियंत्रित करने के प्रयासों के बाद आग की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगी। आग बुझाने के लिए लगातार पानी की आवश्यकता पड़ रही थी, इसलिए टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई भी जारी रखी गई। पूरी रात राहत कार्य चलता रहा और दमकलकर्मी आग को नियंत्रित करने में जुटे रहे।
करीब पांच घंटे तक चले अभियान के बाद तड़के आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय फैक्ट्री में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि आर्थिक नुकसान काफी बड़ा माना जा रहा है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार आगजनी की इस घटना में 70 से 80 लाख रुपए तक का नुकसान हुआ है। बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का कच्चा माल, तैयार पाइप और अन्य उपकरण जलकर राख हो गए। घटना के दौरान नगरपालिका अध्यक्ष पति अरविंद गुप्ता सहित कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने राहत कार्यों की निगरानी की और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि आग पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया जाता तो नुकसान और अधिक बढ़ सकता था तथा आसपास की अन्य औद्योगिक इकाइयों तक भी आग फैलने का खतरा था। आग लगने के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है। प्रारंभिक स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। पुलिस और संबंधित विभागों की टीम मामले की जांच में जुटी हुई है। फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण कर तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि आग लगने की वजह का पता लगाया जा सके। जिन इकाइयों में ज्वलनशील सामग्री बड़ी मात्रा में मौजूद रहती है, वहां फायर सेफ्टी सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। नियमित निरीक्षण, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और आपातकालीन प्रबंधन की व्यवस्था ऐसी घटनाओं के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकती है। गुना की इस फैक्ट्री में लगी आग भले ही किसी बड़ी जनहानि का कारण नहीं बनी, लेकिन इससे हुए आर्थिक नुकसान ने फैक्ट्री प्रबंधन को बड़ा झटका दिया है।
