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रायगढ़ में जमीन सौदे के नाम पर 27 लाख की ठगी, फर्जी दस्तावेज दिखाकर किया विश्वास हासिल
रायगढ़,(छ.ग.)
तीन साल तक बहाने बनाता रहा आरोपी, चेक भी हुए बाउंस; शिकायत के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जमीन खरीद-बिक्री के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुसौर थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति से फर्जी दस्तावेज दिखाकर 27 लाख रुपये की ठगी किए जाने का खुलासा हुआ है। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने खुद को जमीन का मालिक बताकर सौदा किया था, जबकि संबंधित भूमि उसके नाम पर थी ही नहीं। लंबे समय तक पीड़ित को भरोसे में रखकर टालमटोल की गई और बाद में दिए गए चेक भी बाउंस हो गए।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बरमकेला थाना क्षेत्र के ग्राम लिंजिर निवासी 50 वर्षीय इंद्रजीत वर्मा ने पुसौर थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी पहचान बघनपुर निवासी 54 वर्षीय भीचरण पटेल से कई वर्षों पुरानी थी। इसी परिचय का फायदा उठाते हुए आरोपी ने वर्ष 2022 में ग्राम कोड़ातराई स्थित एक जमीन को अपनी बताकर बेचने की पेशकश की। जमीन देखने के बाद इंद्रजीत वर्मा को वह पसंद आई और दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। कुछ समय बाद 16 सितंबर 2022 को करीब 35 लाख रुपये में सौदा तय हो गया।
बताया जा रहा है कि सौदा तय होने के बाद इंद्रजीत वर्मा ने 27 लाख रुपये एडवांस के रूप में आरोपी को दे दिए। इस दौरान सौ रुपये के स्टाम्प पेपर पर लिखापढ़ी भी की गई। आरोपी ने जमीन से संबंधित कुछ दस्तावेज दिखाए और दावा किया कि नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होते ही रजिस्ट्री करा दी जाएगी। पुराने परिचय और दस्तावेजों को देखकर इंद्रजीत ने उसकी बातों पर भरोसा कर लिया। हालांकि इसके बाद मामला लगातार लटकता चला गया।
पीड़ित के अनुसार जब भी वह जमीन की रजिस्ट्री या नामांतरण प्रक्रिया के बारे में पूछता, आरोपी कोई न कोई नया बहाना बना देता था। कभी राजस्व प्रक्रिया का हवाला दिया जाता तो कभी अन्य प्रशासनिक कारण बताए जाते। इस तरह महीनों बीत गए लेकिन जमीन का हस्तांतरण नहीं हो सका। धीरे-धीरे इंद्रजीत को संदेह होने लगा कि कहीं उसके साथ धोखा तो नहीं हुआ है।
संदेह बढ़ने पर उसने खुद तहसील कार्यालय पहुंचकर जमीन की जानकारी निकलवाई। वहां जो तथ्य सामने आए, उन्होंने उसके होश उड़ा दिए। राजस्व अभिलेखों की जांच में पता चला कि जिस जमीन का सौदा किया गया था, उसके संबंध में कोई भी राजस्व प्रकरण लंबित नहीं था। इतना ही नहीं, संबंधित भूमि किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज थी। इसके बाद साफ हो गया कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेज दिखाकर उसे गुमराह किया और बड़ी रकम हासिल कर ली।
मामले का खुलासा होने के बाद इंद्रजीत वर्मा ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू कर दिए। लगातार दबाव बढ़ने पर आरोपी ने राशि लौटाने का आश्वासन दिया और भुगतान के लिए तीन चेक दिए। इनमें एक चेक 5 लाख रुपये का था, जबकि दो अन्य चेक 11-11 लाख रुपये के थे। साथ ही आरोपी ने यह भी कहा कि वह पुलिस में शिकायत न करे और जल्द पूरी रकम लौटा देगा। लेकिन जब पीड़ित ने इन चेकों को बैंक में जमा किया तो सभी चेक बाउंस हो गए।
चेक बाउंस होने के बाद पीड़ित को पूरी तरह यकीन हो गया कि उसके साथ सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई है। इसके बावजूद उसने कई बार आरोपी से संपर्क कर पैसे वापस मांगने की कोशिश की। आरोपी हर बार जल्द भुगतान करने का भरोसा देता रहा, लेकिन रकम वापस नहीं की। लंबे समय तक चले इस विवाद के बीच जनवरी 2025 में आरोपी ने केवल 1 लाख रुपये लौटाए। शेष राशि देने के नाम पर वह लगातार टालमटोल करता रहा।
आखिरकार परेशान होकर इंद्रजीत वर्मा ने पुलिस की शरण ली और पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुसौर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। दस्तावेजों की पड़ताल, बैंक रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया। जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जमीन और संपत्ति से जुड़े मामलों में इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई बार लोग बिना दस्तावेजों का सत्यापन किए बड़ी रकम का लेन-देन कर देते हैं, जिसका फायदा ठग उठा लेते हैं। इस मामले में भी आरोपी ने भरोसे और पुराने परिचय का इस्तेमाल कर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया। रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने बताया कि भूमि, संपत्ति और आर्थिक लेन-देन से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि किसी भी जमीन या संपत्ति का सौदा करने से पहले संबंधित दस्तावेजों का राजस्व विभाग और रजिस्ट्री कार्यालय से सत्यापन अवश्य कराएं। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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रायगढ़ में जमीन सौदे के नाम पर 27 लाख की ठगी, फर्जी दस्तावेज दिखाकर किया विश्वास हासिल
रायगढ़,(छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जमीन खरीद-बिक्री के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुसौर थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति से फर्जी दस्तावेज दिखाकर 27 लाख रुपये की ठगी किए जाने का खुलासा हुआ है। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने खुद को जमीन का मालिक बताकर सौदा किया था, जबकि संबंधित भूमि उसके नाम पर थी ही नहीं। लंबे समय तक पीड़ित को भरोसे में रखकर टालमटोल की गई और बाद में दिए गए चेक भी बाउंस हो गए।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बरमकेला थाना क्षेत्र के ग्राम लिंजिर निवासी 50 वर्षीय इंद्रजीत वर्मा ने पुसौर थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी पहचान बघनपुर निवासी 54 वर्षीय भीचरण पटेल से कई वर्षों पुरानी थी। इसी परिचय का फायदा उठाते हुए आरोपी ने वर्ष 2022 में ग्राम कोड़ातराई स्थित एक जमीन को अपनी बताकर बेचने की पेशकश की। जमीन देखने के बाद इंद्रजीत वर्मा को वह पसंद आई और दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। कुछ समय बाद 16 सितंबर 2022 को करीब 35 लाख रुपये में सौदा तय हो गया।
बताया जा रहा है कि सौदा तय होने के बाद इंद्रजीत वर्मा ने 27 लाख रुपये एडवांस के रूप में आरोपी को दे दिए। इस दौरान सौ रुपये के स्टाम्प पेपर पर लिखापढ़ी भी की गई। आरोपी ने जमीन से संबंधित कुछ दस्तावेज दिखाए और दावा किया कि नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होते ही रजिस्ट्री करा दी जाएगी। पुराने परिचय और दस्तावेजों को देखकर इंद्रजीत ने उसकी बातों पर भरोसा कर लिया। हालांकि इसके बाद मामला लगातार लटकता चला गया।
पीड़ित के अनुसार जब भी वह जमीन की रजिस्ट्री या नामांतरण प्रक्रिया के बारे में पूछता, आरोपी कोई न कोई नया बहाना बना देता था। कभी राजस्व प्रक्रिया का हवाला दिया जाता तो कभी अन्य प्रशासनिक कारण बताए जाते। इस तरह महीनों बीत गए लेकिन जमीन का हस्तांतरण नहीं हो सका। धीरे-धीरे इंद्रजीत को संदेह होने लगा कि कहीं उसके साथ धोखा तो नहीं हुआ है।
संदेह बढ़ने पर उसने खुद तहसील कार्यालय पहुंचकर जमीन की जानकारी निकलवाई। वहां जो तथ्य सामने आए, उन्होंने उसके होश उड़ा दिए। राजस्व अभिलेखों की जांच में पता चला कि जिस जमीन का सौदा किया गया था, उसके संबंध में कोई भी राजस्व प्रकरण लंबित नहीं था। इतना ही नहीं, संबंधित भूमि किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज थी। इसके बाद साफ हो गया कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेज दिखाकर उसे गुमराह किया और बड़ी रकम हासिल कर ली।
मामले का खुलासा होने के बाद इंद्रजीत वर्मा ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू कर दिए। लगातार दबाव बढ़ने पर आरोपी ने राशि लौटाने का आश्वासन दिया और भुगतान के लिए तीन चेक दिए। इनमें एक चेक 5 लाख रुपये का था, जबकि दो अन्य चेक 11-11 लाख रुपये के थे। साथ ही आरोपी ने यह भी कहा कि वह पुलिस में शिकायत न करे और जल्द पूरी रकम लौटा देगा। लेकिन जब पीड़ित ने इन चेकों को बैंक में जमा किया तो सभी चेक बाउंस हो गए।
चेक बाउंस होने के बाद पीड़ित को पूरी तरह यकीन हो गया कि उसके साथ सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई है। इसके बावजूद उसने कई बार आरोपी से संपर्क कर पैसे वापस मांगने की कोशिश की। आरोपी हर बार जल्द भुगतान करने का भरोसा देता रहा, लेकिन रकम वापस नहीं की। लंबे समय तक चले इस विवाद के बीच जनवरी 2025 में आरोपी ने केवल 1 लाख रुपये लौटाए। शेष राशि देने के नाम पर वह लगातार टालमटोल करता रहा।
आखिरकार परेशान होकर इंद्रजीत वर्मा ने पुलिस की शरण ली और पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुसौर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। दस्तावेजों की पड़ताल, बैंक रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया। जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जमीन और संपत्ति से जुड़े मामलों में इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई बार लोग बिना दस्तावेजों का सत्यापन किए बड़ी रकम का लेन-देन कर देते हैं, जिसका फायदा ठग उठा लेते हैं। इस मामले में भी आरोपी ने भरोसे और पुराने परिचय का इस्तेमाल कर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया। रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने बताया कि भूमि, संपत्ति और आर्थिक लेन-देन से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि किसी भी जमीन या संपत्ति का सौदा करने से पहले संबंधित दस्तावेजों का राजस्व विभाग और रजिस्ट्री कार्यालय से सत्यापन अवश्य कराएं। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
