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बड़े कचरा उत्पादकों का ऑनलाइन पंजीयन अनिवार्य, सीपीसीबी पोर्टल से होगी निगरानी
छत्तीसगढ़
शहरी निकायों को बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान कर जल्द रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और नियमों के पालन पर रहेगा फोकस।
प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को निर्देश जारी किए हैं कि उनके क्षेत्र में संचालित सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स यानी बड़े स्तर पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों का अनिवार्य रूप से ऑनलाइन पंजीयन कराया जाए। इसके लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। विभाग का कहना है कि इससे प्रदेश में कचरा प्रबंधन की निगरानी मजबूत होगी और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि बड़े संस्थान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी परिपत्र में सभी नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे सभी संस्थानों की पहचान करें, जो बड़ी मात्रा में ठोस कचरा उत्पन्न करते हैं। इनमें अस्पताल, होटल, बड़े आवासीय परिसर, शैक्षणिक संस्थान, औद्योगिक इकाइयां, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य बड़े संस्थान शामिल हैं। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सभी का पंजीयन सीपीसीबी के ऑनलाइन पोर्टल पर कराना अनिवार्य होगा। विभाग ने इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने पर जोर दिया है ताकि नई व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू हो सके।
अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का यह केंद्रीकृत पोर्टल एक जून 2026 से लागू हो चुका है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत अब बड़े कचरा उत्पादकों का पंजीयन इसी पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड तैयार करना नहीं है, बल्कि कचरे के उत्पादन से लेकर उसके संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और अंतिम निपटान तक की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करना भी है। इससे संबंधित विभागों को वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध होगी और नियमों का पालन सुनिश्चित करने में आसानी होगी। विभाग का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती आबादी और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है। यदि बड़े स्तर पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान अपने स्तर पर वैज्ञानिक तरीके से उसका प्रबंधन नहीं करते हैं, तो इसका सीधा असर पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसी वजह से अब ऐसे संस्थानों को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कचरे का स्रोत पर पृथक्करण किया जाए और उसका निपटान निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जाए।
इस नई व्यवस्था से स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। नगर निगम और नगर पालिकाओं को अपने क्षेत्र में सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स का सर्वे कर सूची तैयार करनी होगी। इसके बाद उनका ऑनलाइन पंजीयन कराया जाएगा और समय-समय पर उनकी गतिविधियों की निगरानी भी की जाएगी। यदि कोई संस्थान नियमों का पालन नहीं करता है या बिना पंजीयन के कार्य करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इससे कचरा प्रबंधन प्रणाली अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनेगी। बताया जा रहा है कि इस व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य स्रोत पर कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करना भी है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र किया जाए और उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाए, तो लैंडफिल पर दबाव कम होगा और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी। इससे पर्यावरण प्रदूषण कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा। इसी बीच राज्य में पर्यावरण संरक्षण को लेकर हाल के दिनों में कई अन्य सख्त कदम भी उठाए गए हैं। करीब 19 दिन पहले छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने बैटरी वेस्ट के अवैध कारोबार के खिलाफ भी सख्ती दिखाई थी। मंडल ने स्पष्ट किया था कि बिना पंजीयन और आवश्यक दस्तावेजों के पुरानी बैटरियों की खरीद-बिक्री, संग्रहण, भंडारण और परिवहन पूरी तरह अवैध माना जाएगा। बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2022 के तहत केवल पंजीकृत संस्थाओं को ही बैटरी अपशिष्ट के संग्रहण और रीसाइक्लिंग की अनुमति है।
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बड़े कचरा उत्पादकों का ऑनलाइन पंजीयन अनिवार्य, सीपीसीबी पोर्टल से होगी निगरानी
छत्तीसगढ़
प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को निर्देश जारी किए हैं कि उनके क्षेत्र में संचालित सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स यानी बड़े स्तर पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों का अनिवार्य रूप से ऑनलाइन पंजीयन कराया जाए। इसके लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। विभाग का कहना है कि इससे प्रदेश में कचरा प्रबंधन की निगरानी मजबूत होगी और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि बड़े संस्थान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी परिपत्र में सभी नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे सभी संस्थानों की पहचान करें, जो बड़ी मात्रा में ठोस कचरा उत्पन्न करते हैं। इनमें अस्पताल, होटल, बड़े आवासीय परिसर, शैक्षणिक संस्थान, औद्योगिक इकाइयां, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य बड़े संस्थान शामिल हैं। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सभी का पंजीयन सीपीसीबी के ऑनलाइन पोर्टल पर कराना अनिवार्य होगा। विभाग ने इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने पर जोर दिया है ताकि नई व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू हो सके।
अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का यह केंद्रीकृत पोर्टल एक जून 2026 से लागू हो चुका है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत अब बड़े कचरा उत्पादकों का पंजीयन इसी पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड तैयार करना नहीं है, बल्कि कचरे के उत्पादन से लेकर उसके संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और अंतिम निपटान तक की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करना भी है। इससे संबंधित विभागों को वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध होगी और नियमों का पालन सुनिश्चित करने में आसानी होगी। विभाग का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती आबादी और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है। यदि बड़े स्तर पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान अपने स्तर पर वैज्ञानिक तरीके से उसका प्रबंधन नहीं करते हैं, तो इसका सीधा असर पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसी वजह से अब ऐसे संस्थानों को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कचरे का स्रोत पर पृथक्करण किया जाए और उसका निपटान निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जाए।
इस नई व्यवस्था से स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। नगर निगम और नगर पालिकाओं को अपने क्षेत्र में सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स का सर्वे कर सूची तैयार करनी होगी। इसके बाद उनका ऑनलाइन पंजीयन कराया जाएगा और समय-समय पर उनकी गतिविधियों की निगरानी भी की जाएगी। यदि कोई संस्थान नियमों का पालन नहीं करता है या बिना पंजीयन के कार्य करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इससे कचरा प्रबंधन प्रणाली अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनेगी। बताया जा रहा है कि इस व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य स्रोत पर कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करना भी है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र किया जाए और उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाए, तो लैंडफिल पर दबाव कम होगा और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी। इससे पर्यावरण प्रदूषण कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा। इसी बीच राज्य में पर्यावरण संरक्षण को लेकर हाल के दिनों में कई अन्य सख्त कदम भी उठाए गए हैं। करीब 19 दिन पहले छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने बैटरी वेस्ट के अवैध कारोबार के खिलाफ भी सख्ती दिखाई थी। मंडल ने स्पष्ट किया था कि बिना पंजीयन और आवश्यक दस्तावेजों के पुरानी बैटरियों की खरीद-बिक्री, संग्रहण, भंडारण और परिवहन पूरी तरह अवैध माना जाएगा। बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2022 के तहत केवल पंजीकृत संस्थाओं को ही बैटरी अपशिष्ट के संग्रहण और रीसाइक्लिंग की अनुमति है।
