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बिलासपुर में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर शिकंजा, ITMS और बॉडी कैमरों से होगी निगरानी
बिलासपुर,(छ.ग.)
SSP का सख्त संदेश, सड़क सुरक्षा से समझौता नहीं; तेज रफ्तार और नियम उल्लंघन पर विशेष अभियान
बिलासपुर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने अब सख्त रुख अपना लिया है। शहर की सड़कों पर लापरवाही से वाहन चलाने वाले, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वाले और दूसरों की जान जोखिम में डालने वाले चालकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है और यातायात अमले को नए उपकरणों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में सड़क पर पुलिस की मौजूदगी पहले से ज्यादा दिखाई देगी और नियम तोड़ने वालों को किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी।
शनिवार को आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में यातायात शाखा के अधिकारियों और कर्मचारियों को नई तकनीकों के उपयोग की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के बाद अब पुलिसकर्मी इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), नेक्स्ट जेन एम-परिवहन ऐप और अपडेटेड पीओएस मशीनों से लैस होकर मैदान में उतरेंगे। इसके साथ ही ड्यूटी पर तैनात जवानों को बॉडी वॉर्न कैमरे का उन्नत संस्करण उपलब्ध कराया जाएगा। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन कैमरों से न केवल कार्रवाई की पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि किसी भी विवाद या शिकायत की स्थिति में वास्तविक घटनाक्रम रिकॉर्ड के रूप में उपलब्ध रहेगा।
बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि सड़क सुरक्षा के मामले में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यातायात प्रभारियों और विवेचकों को निर्देश दिए कि केवल चालान काटना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता पैदा करना भी जरूरी है। उनका कहना था कि जब तक नागरिकों में ट्रैफिक सेंस विकसित नहीं होगा, तब तक दुर्घटनाओं में स्थायी कमी लाना मुश्किल रहेगा।
पुलिस की नई रणनीति का केंद्र बिंदु ‘विजिबल पुलिसिंग’ रहेगा। इसके तहत प्रमुख चौक-चौराहों, व्यस्त मार्गों और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में पुलिस की सक्रिय मौजूदगी बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों के अनुसार सड़क पर पुलिस की लगातार मौजूदगी से नियमों का उल्लंघन करने वालों में भय पैदा होगा और यातायात व्यवस्था बेहतर होगी। साथ ही संदिग्ध वाहनों की जांच और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने वालों के खिलाफ भी विशेष अभियान चलाया जाएगा।
यातायात पुलिस ने शहर में व्यवस्था सुधारने के लिए ‘ट्रिपल-ई’ फॉर्मूले को अपनाने का निर्णय लिया है। इस फॉर्मूले में एजुकेशन, इंजीनियरिंग और एनफोर्समेंट तीन प्रमुख स्तंभ शामिल हैं। एजुकेशन के तहत लोगों को ट्रैफिक नियमों और सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूक किया जाएगा। इंजीनियरिंग के अंतर्गत सड़कों की बनावट, संकेतकों और यातायात प्रबंधन से जुड़ी खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करने का प्रयास होगा। वहीं एनफोर्समेंट के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पुलिस ने सात प्रकार के यातायात उल्लंघनों को विशेष निगरानी सूची में रखा है। इनमें शराब पीकर वाहन चलाना, रॉन्ग साइड ड्राइविंग, बुलेट और अन्य मोटरसाइकिलों में मॉडिफाइड साइलेंसर लगाकर ध्वनि प्रदूषण फैलाना, ट्रैफिक सिग्नल तोड़ना, बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना, बिना सीट बेल्ट चारपहिया वाहन चलाना और मालवाहक वाहनों में यात्रियों को बैठाना शामिल है। अधिकारियों ने कहा है कि इन मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी।
शहर में बढ़ते वाहन दबाव और लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए पुलिस का यह अभियान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यातायात नियमों की अनदेखी के कारण कई गंभीर हादसे सामने आए हैं। खासकर तेज रफ्तार, मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना और हेलमेट या सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करना दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल रहे हैं। पुलिस का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
नई व्यवस्था के तहत चालान प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। अपडेटेड पीओएस मशीनों के जरिए मौके पर ही डिजिटल चालान जारी किया जा सकेगा। इससे न केवल कार्रवाई की गति बढ़ेगी बल्कि रिकॉर्ड रखने में भी आसानी होगी। नागरिकों को भी ऑनलाइन भुगतान जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। यदि नागरिक स्वयं नियमों का पालन करें तो दुर्घटनाओं की संख्या में काफी कमी लाई जा सकती है। बिलासपुर में शुरू किया गया यह अभियान आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है। पुलिस की कोशिश है कि आधुनिक तकनीक, जागरूकता और सख्त कार्रवाई के जरिए शहर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाए।
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बिलासपुर में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर शिकंजा, ITMS और बॉडी कैमरों से होगी निगरानी
बिलासपुर,(छ.ग.)
बिलासपुर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने अब सख्त रुख अपना लिया है। शहर की सड़कों पर लापरवाही से वाहन चलाने वाले, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वाले और दूसरों की जान जोखिम में डालने वाले चालकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है और यातायात अमले को नए उपकरणों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में सड़क पर पुलिस की मौजूदगी पहले से ज्यादा दिखाई देगी और नियम तोड़ने वालों को किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी।
शनिवार को आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में यातायात शाखा के अधिकारियों और कर्मचारियों को नई तकनीकों के उपयोग की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के बाद अब पुलिसकर्मी इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), नेक्स्ट जेन एम-परिवहन ऐप और अपडेटेड पीओएस मशीनों से लैस होकर मैदान में उतरेंगे। इसके साथ ही ड्यूटी पर तैनात जवानों को बॉडी वॉर्न कैमरे का उन्नत संस्करण उपलब्ध कराया जाएगा। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन कैमरों से न केवल कार्रवाई की पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि किसी भी विवाद या शिकायत की स्थिति में वास्तविक घटनाक्रम रिकॉर्ड के रूप में उपलब्ध रहेगा।
बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि सड़क सुरक्षा के मामले में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यातायात प्रभारियों और विवेचकों को निर्देश दिए कि केवल चालान काटना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता पैदा करना भी जरूरी है। उनका कहना था कि जब तक नागरिकों में ट्रैफिक सेंस विकसित नहीं होगा, तब तक दुर्घटनाओं में स्थायी कमी लाना मुश्किल रहेगा।
पुलिस की नई रणनीति का केंद्र बिंदु ‘विजिबल पुलिसिंग’ रहेगा। इसके तहत प्रमुख चौक-चौराहों, व्यस्त मार्गों और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में पुलिस की सक्रिय मौजूदगी बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों के अनुसार सड़क पर पुलिस की लगातार मौजूदगी से नियमों का उल्लंघन करने वालों में भय पैदा होगा और यातायात व्यवस्था बेहतर होगी। साथ ही संदिग्ध वाहनों की जांच और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने वालों के खिलाफ भी विशेष अभियान चलाया जाएगा।
यातायात पुलिस ने शहर में व्यवस्था सुधारने के लिए ‘ट्रिपल-ई’ फॉर्मूले को अपनाने का निर्णय लिया है। इस फॉर्मूले में एजुकेशन, इंजीनियरिंग और एनफोर्समेंट तीन प्रमुख स्तंभ शामिल हैं। एजुकेशन के तहत लोगों को ट्रैफिक नियमों और सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूक किया जाएगा। इंजीनियरिंग के अंतर्गत सड़कों की बनावट, संकेतकों और यातायात प्रबंधन से जुड़ी खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करने का प्रयास होगा। वहीं एनफोर्समेंट के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पुलिस ने सात प्रकार के यातायात उल्लंघनों को विशेष निगरानी सूची में रखा है। इनमें शराब पीकर वाहन चलाना, रॉन्ग साइड ड्राइविंग, बुलेट और अन्य मोटरसाइकिलों में मॉडिफाइड साइलेंसर लगाकर ध्वनि प्रदूषण फैलाना, ट्रैफिक सिग्नल तोड़ना, बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना, बिना सीट बेल्ट चारपहिया वाहन चलाना और मालवाहक वाहनों में यात्रियों को बैठाना शामिल है। अधिकारियों ने कहा है कि इन मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी।
शहर में बढ़ते वाहन दबाव और लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए पुलिस का यह अभियान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यातायात नियमों की अनदेखी के कारण कई गंभीर हादसे सामने आए हैं। खासकर तेज रफ्तार, मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना और हेलमेट या सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करना दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल रहे हैं। पुलिस का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
नई व्यवस्था के तहत चालान प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। अपडेटेड पीओएस मशीनों के जरिए मौके पर ही डिजिटल चालान जारी किया जा सकेगा। इससे न केवल कार्रवाई की गति बढ़ेगी बल्कि रिकॉर्ड रखने में भी आसानी होगी। नागरिकों को भी ऑनलाइन भुगतान जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। यदि नागरिक स्वयं नियमों का पालन करें तो दुर्घटनाओं की संख्या में काफी कमी लाई जा सकती है। बिलासपुर में शुरू किया गया यह अभियान आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है। पुलिस की कोशिश है कि आधुनिक तकनीक, जागरूकता और सख्त कार्रवाई के जरिए शहर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाए।
