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नक्सल ऑपरेशन से घबराए उग्रवादी, प्रेस नोट जारी कर मांगी वार्ता
Bilaspur
छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की संयुक्त फोर्स द्वारा नक्सल प्रभावित इलाकों में चलाए जा रहे सबसे बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशन का असर साफ नजर आने लगा है। लगातार बढ़ते दबाव और नुकसानों से घबराए नक्सलियों ने अब प्रेस नोट जारी कर सरकार से वार्ता की अपील की है और सुरक्षा बलों से अभियान रोकने की मांग की है।
उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के प्रभारी रूपेश द्वारा जारी किए गए प्रेस नोट में कहा गया है कि सरकार को समस्या के समाधान के लिए सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि शांतिवार्ता का रास्ता अपनाना चाहिए। रूपेश ने कहा है कि यदि सरकार सकारात्मक माहौल बनाती है तो इसके सकारात्मक नतीजे निकल सकते हैं। उन्होंने संयुक्त ऑपरेशन को कम से कम एक महीने के लिए स्थगित करने की मांग की है।
ऑपरेशन से बैकफुट पर नक्सली
प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि सरकार और नक्सलियों के बीच बातचीत के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए। नक्सल संगठन ने सुरक्षा बलों को हटाने और सैन्य कार्रवाई रोकने को जरूरी बताया है।
गौरतलब है कि पिछले चार दिनों से बस्तर के जंगलों में 5 से 8 हजार जवानों की तैनाती के साथ एक बड़ा संयुक्त ऑपरेशन चल रहा है। इस दौरान कई बार मुठभेड़ हुई, जिसमें अब तक कम से कम 6 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है।
वार्ता की अपील को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
नक्सलियों की इस वार्ता की पेशकश को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता बरत रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह अपील भी एक रणनीतिक चाल हो सकती है, ताकि अभियान की रफ्तार को धीमा किया जा सके।
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नक्सल ऑपरेशन से घबराए उग्रवादी, प्रेस नोट जारी कर मांगी वार्ता
Bilaspur
उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के प्रभारी रूपेश द्वारा जारी किए गए प्रेस नोट में कहा गया है कि सरकार को समस्या के समाधान के लिए सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि शांतिवार्ता का रास्ता अपनाना चाहिए। रूपेश ने कहा है कि यदि सरकार सकारात्मक माहौल बनाती है तो इसके सकारात्मक नतीजे निकल सकते हैं। उन्होंने संयुक्त ऑपरेशन को कम से कम एक महीने के लिए स्थगित करने की मांग की है।
ऑपरेशन से बैकफुट पर नक्सली
प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि सरकार और नक्सलियों के बीच बातचीत के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए। नक्सल संगठन ने सुरक्षा बलों को हटाने और सैन्य कार्रवाई रोकने को जरूरी बताया है।
गौरतलब है कि पिछले चार दिनों से बस्तर के जंगलों में 5 से 8 हजार जवानों की तैनाती के साथ एक बड़ा संयुक्त ऑपरेशन चल रहा है। इस दौरान कई बार मुठभेड़ हुई, जिसमें अब तक कम से कम 6 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है।
वार्ता की अपील को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
नक्सलियों की इस वार्ता की पेशकश को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता बरत रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह अपील भी एक रणनीतिक चाल हो सकती है, ताकि अभियान की रफ्तार को धीमा किया जा सके।
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