भोपाल से लखनऊ का सफर होगा तेज, स्लीपर वंदे भारत चलाने की तै

भोपाल (म.प्र.)

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करीब 12 घंटे का रेल सफर 8 घंटे में पूरा होने की उम्मीद, बढ़ती यात्री संख्या को देखते हुए 20 कोच के साथ ट्रेन चलाने की तैयारी

भोपाल से लखनऊ के बीच ट्रेन से आने-जाने वाले यात्रियों को जल्द एक नई और तेज रेल सेवा मिल सकती है। दोनों राज्यों की राजधानियों को जोड़ने के लिए स्लीपर वंदे भारत ट्रेन चलाने की तैयारी की जा रही है। भोपाल रेल मंडल की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को रेलवे से स्वीकृति मिलने की जानकारी सामने आई है। नई ट्रेन शुरू होने पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच रेल संपर्क बेहतर होगा। खास तौर पर भोपाल और लखनऊ के बीच नियमित यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह नया विकल्प बन सकता है।

अभी भोपाल से लखनऊ के बीच चलने वाली ट्रेनों से सफर में करीब 12 घंटे तक का समय लग जाता है। प्रस्तावित स्लीपर वंदे भारत इस यात्रा के समय को लगभग चार घंटे कम कर सकती है। जानकारी के मुताबिक ट्रेन से दोनों शहरों के बीच यात्रा करीब 8 घंटे में पूरी होने की उम्मीद है। इससे रातभर या लंबे समय तक ट्रेन में रहने की जरूरत कम होगी। हालांकि ट्रेन का अंतिम टाइम टेबल जारी होने के बाद ही वास्तविक यात्रा अवधि की पूरी तस्वीर साफ होगी।

भोपाल और लखनऊ के बीच बड़ी संख्या में यात्री नौकरी, कारोबार, पढ़ाई, इलाज और दूसरे कामों से आवाजाही करते हैं। दोनों शहर राज्यों की राजधानी होने के कारण सरकारी और व्यावसायिक यात्राएं भी लगातार होती हैं। वर्तमान रेल सेवाओं के मुकाबले कम समय में यात्रा पूरी होने से ऐसे यात्रियों को सीधा फायदा मिल सकता है। तेज रेल कनेक्टिविटी के कारण सुबह या दिन के समय यात्रा की योजना बनाना भी आसान होगा। रेलवे इसी यात्री जरूरत को देखते हुए नई सेवा की तैयारी आगे बढ़ा रहा है।

इस प्रस्तावित ट्रेन की सबसे खास बात इसका स्लीपर स्वरूप होगा। देश में अब तक शुरू हुई ज्यादातर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें कम और मध्यम दूरी के रूट पर चेयर कार व्यवस्था के साथ संचालित हो रही हैं। भोपाल-लखनऊ रूट पर प्रस्तावित सेवा में यात्रियों को लेटकर और सोते हुए सफर करने की सुविधा मिलने की बात कही जा रही है। लंबी दूरी के यात्रियों के लिए यह सुविधा सामान्य चेयर कार यात्रा के मुकाबले अधिक आरामदायक साबित हो सकती है।

वंदे भारत के स्लीपर मॉडल को खास तौर पर उन रूटों के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां यात्रियों को कई घंटे लगातार ट्रेन में बिताने पड़ते हैं। भोपाल और लखनऊ के बीच भी दूरी ऐसी है कि स्लीपर सुविधा की मांग उपयोगी मानी जा रही है। ट्रेन में आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ तेज रफ्तार का फायदा मिलने की उम्मीद है। यात्रियों के लिए सीट और बर्थ व्यवस्था कैसी होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी रेलवे की आधिकारिक अधिसूचना और कोच संरचना सामने आने के बाद मिलेगी।

ट्रेन के कोचों की संख्या को लेकर भी योजना में बदलाव की जानकारी सामने आई है। शुरुआती प्रस्ताव में इसे 16 कोच के साथ चलाने की बात थी। यात्रियों की संभावित संख्या और भविष्य में बढ़ने वाली मांग को देखते हुए अब 20 कोच वाली ट्रेन चलाने की तैयारी बताई जा रही है। ज्यादा कोच होने से एक फेरे में अधिक यात्रियों को जगह मिल सकेगी। भोपाल और लखनऊ जैसे बड़े शहरों के बीच यात्री दबाव को देखते हुए रेलवे लंबी अवधि की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना बना रहा है।

ट्रेन किन-किन स्टेशनों पर रुकेगी, इसे लेकर अभी अंतिम जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। भोपाल से लखनऊ के बीच कई बड़े शहर और महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन पड़ते हैं। ऐसे में संभावित स्टॉपेज को लेकर यात्रियों की दिलचस्पी बनी हुई है। रेलवे को ट्रेन की गति और यात्रा अवधि के साथ उन शहरों की जरूरत भी देखनी होगी, जहां से पर्याप्त यात्री मिलने की संभावना है। ज्यादा स्टॉपेज होने पर यात्रा का समय बढ़ सकता है, इसलिए सीमित और महत्वपूर्ण ठहराव दिए जाने की संभावना रहती है।

नई ट्रेन का पूरा रूट, समय और किराया भी अभी आधिकारिक तौर पर सामने आना बाकी है। रेलवे से जुड़ी जानकारी के मुताबिक अगस्त में इस सेवा को लेकर अधिसूचना जारी होने की संभावना जताई जा रही है। अधिसूचना आने के बाद ट्रेन नंबर, संचालन के दिन, प्रस्थान और आगमन का समय तथा स्टेशनों पर ठहराव की जानकारी स्पष्ट होगी। यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण किराए की तस्वीर भी तभी साफ हो सकेगी। फिलहाल इन विवरणों का इंतजार किया जा रहा है।

भोपाल से लखनऊ के बीच वर्तमान में कई नियमित और साप्ताहिक ट्रेनें यात्रियों को सुविधा देती हैं, लेकिन यात्रा में लगने वाला समय लंबा रहता है। नई वंदे भारत का सबसे बड़ा फायदा समय की बचत के रूप में देखा जा रहा है। अगर प्रस्तावित समय के मुताबिक यात्रा करीब 8 घंटे में पूरी होती है तो मौजूदा यात्रा अवधि के मुकाबले लगभग चार घंटे बच सकते हैं। नौकरी और कारोबार के सिलसिले में लगातार दोनों शहरों के बीच जाने वालों के लिए यह अंतर काफी महत्वपूर्ण होगा।

भोपाल मध्य प्रदेश का प्रमुख रेलवे केंद्र है। यहां रानी कमलापति और भोपाल जंक्शन से देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए बड़ी संख्या में ट्रेनें चलती हैं। वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों के संचालन में भी भोपाल की भूमिका लगातार बढ़ी है। रानी कमलापति स्टेशन से पहले ही वंदे भारत सेवाओं का संचालन किया जा चुका है। प्रस्तावित लखनऊ सेवा किस स्टेशन से शुरू होगी, इसे लेकर अंतिम आधिकारिक शेड्यूल का इंतजार है।

लखनऊ भी उत्तर भारत का बड़ा रेलवे और प्रशासनिक केंद्र है। मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी अधिक रहती है। भोपाल के अलावा प्रदेश के दूसरे शहरों से भी यात्री लखनऊ और आसपास के जिलों तक जाते हैं। नई ट्रेन के संभावित ठहराव ऐसे यात्रियों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं। रूट तय होने के बाद ही यह साफ होगा कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के किन शहरों को इस सेवा का सीधा लाभ मिलेगा।

रेलवे पिछले कुछ वर्षों से वंदे भारत नेटवर्क को लगातार नए शहरों तक बढ़ा रहा है। शुरुआत में इन ट्रेनों को दिन के समय यात्रा वाले रूट पर ज्यादा प्राथमिकता दी गई थी। अब लंबी दूरी की यात्रा के लिए स्लीपर संस्करण पर जोर बढ़ा है। स्लीपर व्यवस्था के जरिए यात्रियों को तेज गति के साथ रात या लंबी दूरी की आरामदायक यात्रा का विकल्प देने की योजना है। भोपाल-लखनऊ जैसे रूट इसी श्रेणी में महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं।

मध्य प्रदेश में पहले से कई वंदे भारत एक्सप्रेस सेवाएं संचालित हो रही हैं। इन ट्रेनों के जरिए भोपाल, इंदौर, रीवा और खजुराहो जैसे शहरों की रेल कनेक्टिविटी देश के दूसरे प्रमुख शहरों से बेहतर हुई है। भोपाल रेल नेटवर्क के लिहाज से वंदे भारत सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। लखनऊ के लिए नई सेवा मिलने पर उत्तर प्रदेश की राजधानी से मध्य प्रदेश की राजधानी का सीधा तेज रेल संपर्क और मजबूत होगा।

नई सेवा से केवल सामान्य यात्रियों को ही नहीं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच व्यावसायिक आवाजाही करने वाले लोगों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है। भोपाल और लखनऊ दोनों बड़े प्रशासनिक, शैक्षणिक और कारोबारी केंद्र हैं। दोनों शहरों के बीच नियमित रूप से छात्र, कर्मचारी, कारोबारी और सरकारी काम से जुड़े लोग यात्रा करते हैं। चार घंटे तक यात्रा समय कम होने की स्थिति में इन यात्रियों के पास ट्रेन से आने-जाने का एक ज्यादा तेज विकल्प उपलब्ध हो सकता है।

यात्रियों की नजर अब ट्रेन के किराए पर भी रहेगी। वंदे भारत श्रेणी की ट्रेनों का किराया सामान्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों से अलग होता है। स्लीपर वंदे भारत में अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से किराया तय किया जा सकता है। भोपाल से लखनऊ तक यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए किराया कितना होगा, यह रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। ट्रेन के संचालन के दिन और टिकट बुकिंग शुरू होने की तारीख भी अधिसूचना के साथ सामने आने की उम्मीद है।

20 कोच के प्रस्ताव की जानकारी इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे रेलवे इस रूट पर संभावित यात्री मांग को बड़े स्तर पर देख रहा है। शुरुआती योजना में 16 कोच रखे जाने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 20 कोच करने की तैयारी की गई। अधिक क्षमता वाली ट्रेन होने से त्योहारों, छुट्टियों और ज्यादा यात्री दबाव वाले दिनों में सीटों की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। हालांकि अंतिम कोच संरचना रेलवे की औपचारिक घोषणा के बाद ही तय मानी जाएगी।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सामाजिक और व्यावसायिक आवाजाही पहले से काफी मजबूत है। दोनों राज्यों की सीमाएं जुड़ी होने के कारण सड़क और रेल दोनों माध्यमों से बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। भोपाल से लखनऊ के बीच तेज ट्रेन मिलने से लंबी दूरी की रेल यात्रा का समय कम हो सकता है। बीच के महत्वपूर्ण शहरों को ठहराव मिलता है तो वहां के यात्रियों को भी नई प्रीमियम रेल सेवा का विकल्प मिल सकेगा।

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21 Jul 2026 By Priyanka

भोपाल से लखनऊ का सफर होगा तेज, स्लीपर वंदे भारत चलाने की तै

भोपाल (म.प्र.)

भोपाल से लखनऊ के बीच ट्रेन से आने-जाने वाले यात्रियों को जल्द एक नई और तेज रेल सेवा मिल सकती है। दोनों राज्यों की राजधानियों को जोड़ने के लिए स्लीपर वंदे भारत ट्रेन चलाने की तैयारी की जा रही है। भोपाल रेल मंडल की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को रेलवे से स्वीकृति मिलने की जानकारी सामने आई है। नई ट्रेन शुरू होने पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच रेल संपर्क बेहतर होगा। खास तौर पर भोपाल और लखनऊ के बीच नियमित यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह नया विकल्प बन सकता है।

अभी भोपाल से लखनऊ के बीच चलने वाली ट्रेनों से सफर में करीब 12 घंटे तक का समय लग जाता है। प्रस्तावित स्लीपर वंदे भारत इस यात्रा के समय को लगभग चार घंटे कम कर सकती है। जानकारी के मुताबिक ट्रेन से दोनों शहरों के बीच यात्रा करीब 8 घंटे में पूरी होने की उम्मीद है। इससे रातभर या लंबे समय तक ट्रेन में रहने की जरूरत कम होगी। हालांकि ट्रेन का अंतिम टाइम टेबल जारी होने के बाद ही वास्तविक यात्रा अवधि की पूरी तस्वीर साफ होगी।

भोपाल और लखनऊ के बीच बड़ी संख्या में यात्री नौकरी, कारोबार, पढ़ाई, इलाज और दूसरे कामों से आवाजाही करते हैं। दोनों शहर राज्यों की राजधानी होने के कारण सरकारी और व्यावसायिक यात्राएं भी लगातार होती हैं। वर्तमान रेल सेवाओं के मुकाबले कम समय में यात्रा पूरी होने से ऐसे यात्रियों को सीधा फायदा मिल सकता है। तेज रेल कनेक्टिविटी के कारण सुबह या दिन के समय यात्रा की योजना बनाना भी आसान होगा। रेलवे इसी यात्री जरूरत को देखते हुए नई सेवा की तैयारी आगे बढ़ा रहा है।

इस प्रस्तावित ट्रेन की सबसे खास बात इसका स्लीपर स्वरूप होगा। देश में अब तक शुरू हुई ज्यादातर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें कम और मध्यम दूरी के रूट पर चेयर कार व्यवस्था के साथ संचालित हो रही हैं। भोपाल-लखनऊ रूट पर प्रस्तावित सेवा में यात्रियों को लेटकर और सोते हुए सफर करने की सुविधा मिलने की बात कही जा रही है। लंबी दूरी के यात्रियों के लिए यह सुविधा सामान्य चेयर कार यात्रा के मुकाबले अधिक आरामदायक साबित हो सकती है।

वंदे भारत के स्लीपर मॉडल को खास तौर पर उन रूटों के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां यात्रियों को कई घंटे लगातार ट्रेन में बिताने पड़ते हैं। भोपाल और लखनऊ के बीच भी दूरी ऐसी है कि स्लीपर सुविधा की मांग उपयोगी मानी जा रही है। ट्रेन में आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ तेज रफ्तार का फायदा मिलने की उम्मीद है। यात्रियों के लिए सीट और बर्थ व्यवस्था कैसी होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी रेलवे की आधिकारिक अधिसूचना और कोच संरचना सामने आने के बाद मिलेगी।

ट्रेन के कोचों की संख्या को लेकर भी योजना में बदलाव की जानकारी सामने आई है। शुरुआती प्रस्ताव में इसे 16 कोच के साथ चलाने की बात थी। यात्रियों की संभावित संख्या और भविष्य में बढ़ने वाली मांग को देखते हुए अब 20 कोच वाली ट्रेन चलाने की तैयारी बताई जा रही है। ज्यादा कोच होने से एक फेरे में अधिक यात्रियों को जगह मिल सकेगी। भोपाल और लखनऊ जैसे बड़े शहरों के बीच यात्री दबाव को देखते हुए रेलवे लंबी अवधि की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना बना रहा है।

ट्रेन किन-किन स्टेशनों पर रुकेगी, इसे लेकर अभी अंतिम जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। भोपाल से लखनऊ के बीच कई बड़े शहर और महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन पड़ते हैं। ऐसे में संभावित स्टॉपेज को लेकर यात्रियों की दिलचस्पी बनी हुई है। रेलवे को ट्रेन की गति और यात्रा अवधि के साथ उन शहरों की जरूरत भी देखनी होगी, जहां से पर्याप्त यात्री मिलने की संभावना है। ज्यादा स्टॉपेज होने पर यात्रा का समय बढ़ सकता है, इसलिए सीमित और महत्वपूर्ण ठहराव दिए जाने की संभावना रहती है।

नई ट्रेन का पूरा रूट, समय और किराया भी अभी आधिकारिक तौर पर सामने आना बाकी है। रेलवे से जुड़ी जानकारी के मुताबिक अगस्त में इस सेवा को लेकर अधिसूचना जारी होने की संभावना जताई जा रही है। अधिसूचना आने के बाद ट्रेन नंबर, संचालन के दिन, प्रस्थान और आगमन का समय तथा स्टेशनों पर ठहराव की जानकारी स्पष्ट होगी। यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण किराए की तस्वीर भी तभी साफ हो सकेगी। फिलहाल इन विवरणों का इंतजार किया जा रहा है।

भोपाल से लखनऊ के बीच वर्तमान में कई नियमित और साप्ताहिक ट्रेनें यात्रियों को सुविधा देती हैं, लेकिन यात्रा में लगने वाला समय लंबा रहता है। नई वंदे भारत का सबसे बड़ा फायदा समय की बचत के रूप में देखा जा रहा है। अगर प्रस्तावित समय के मुताबिक यात्रा करीब 8 घंटे में पूरी होती है तो मौजूदा यात्रा अवधि के मुकाबले लगभग चार घंटे बच सकते हैं। नौकरी और कारोबार के सिलसिले में लगातार दोनों शहरों के बीच जाने वालों के लिए यह अंतर काफी महत्वपूर्ण होगा।

भोपाल मध्य प्रदेश का प्रमुख रेलवे केंद्र है। यहां रानी कमलापति और भोपाल जंक्शन से देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए बड़ी संख्या में ट्रेनें चलती हैं। वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों के संचालन में भी भोपाल की भूमिका लगातार बढ़ी है। रानी कमलापति स्टेशन से पहले ही वंदे भारत सेवाओं का संचालन किया जा चुका है। प्रस्तावित लखनऊ सेवा किस स्टेशन से शुरू होगी, इसे लेकर अंतिम आधिकारिक शेड्यूल का इंतजार है।

लखनऊ भी उत्तर भारत का बड़ा रेलवे और प्रशासनिक केंद्र है। मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी अधिक रहती है। भोपाल के अलावा प्रदेश के दूसरे शहरों से भी यात्री लखनऊ और आसपास के जिलों तक जाते हैं। नई ट्रेन के संभावित ठहराव ऐसे यात्रियों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं। रूट तय होने के बाद ही यह साफ होगा कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के किन शहरों को इस सेवा का सीधा लाभ मिलेगा।

रेलवे पिछले कुछ वर्षों से वंदे भारत नेटवर्क को लगातार नए शहरों तक बढ़ा रहा है। शुरुआत में इन ट्रेनों को दिन के समय यात्रा वाले रूट पर ज्यादा प्राथमिकता दी गई थी। अब लंबी दूरी की यात्रा के लिए स्लीपर संस्करण पर जोर बढ़ा है। स्लीपर व्यवस्था के जरिए यात्रियों को तेज गति के साथ रात या लंबी दूरी की आरामदायक यात्रा का विकल्प देने की योजना है। भोपाल-लखनऊ जैसे रूट इसी श्रेणी में महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं।

मध्य प्रदेश में पहले से कई वंदे भारत एक्सप्रेस सेवाएं संचालित हो रही हैं। इन ट्रेनों के जरिए भोपाल, इंदौर, रीवा और खजुराहो जैसे शहरों की रेल कनेक्टिविटी देश के दूसरे प्रमुख शहरों से बेहतर हुई है। भोपाल रेल नेटवर्क के लिहाज से वंदे भारत सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। लखनऊ के लिए नई सेवा मिलने पर उत्तर प्रदेश की राजधानी से मध्य प्रदेश की राजधानी का सीधा तेज रेल संपर्क और मजबूत होगा।

नई सेवा से केवल सामान्य यात्रियों को ही नहीं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच व्यावसायिक आवाजाही करने वाले लोगों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है। भोपाल और लखनऊ दोनों बड़े प्रशासनिक, शैक्षणिक और कारोबारी केंद्र हैं। दोनों शहरों के बीच नियमित रूप से छात्र, कर्मचारी, कारोबारी और सरकारी काम से जुड़े लोग यात्रा करते हैं। चार घंटे तक यात्रा समय कम होने की स्थिति में इन यात्रियों के पास ट्रेन से आने-जाने का एक ज्यादा तेज विकल्प उपलब्ध हो सकता है।

यात्रियों की नजर अब ट्रेन के किराए पर भी रहेगी। वंदे भारत श्रेणी की ट्रेनों का किराया सामान्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों से अलग होता है। स्लीपर वंदे भारत में अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से किराया तय किया जा सकता है। भोपाल से लखनऊ तक यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए किराया कितना होगा, यह रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। ट्रेन के संचालन के दिन और टिकट बुकिंग शुरू होने की तारीख भी अधिसूचना के साथ सामने आने की उम्मीद है।

20 कोच के प्रस्ताव की जानकारी इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे रेलवे इस रूट पर संभावित यात्री मांग को बड़े स्तर पर देख रहा है। शुरुआती योजना में 16 कोच रखे जाने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 20 कोच करने की तैयारी की गई। अधिक क्षमता वाली ट्रेन होने से त्योहारों, छुट्टियों और ज्यादा यात्री दबाव वाले दिनों में सीटों की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। हालांकि अंतिम कोच संरचना रेलवे की औपचारिक घोषणा के बाद ही तय मानी जाएगी।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सामाजिक और व्यावसायिक आवाजाही पहले से काफी मजबूत है। दोनों राज्यों की सीमाएं जुड़ी होने के कारण सड़क और रेल दोनों माध्यमों से बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। भोपाल से लखनऊ के बीच तेज ट्रेन मिलने से लंबी दूरी की रेल यात्रा का समय कम हो सकता है। बीच के महत्वपूर्ण शहरों को ठहराव मिलता है तो वहां के यात्रियों को भी नई प्रीमियम रेल सेवा का विकल्प मिल सकेगा।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/fast-sleeper-vande-bharat-will-travel-from-bhopal-to-lucknow/article-59355

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