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भोपाल में 15 साल से प्लॉट का इंतजार, 300 परिवार परेशान
भोपाल,(म.प्र.)
रोहित हाउसिंग सोसायटी में जमीन आवंटन और रजिस्ट्री न मिलने से सदस्य भटक रहे, लाखों रुपये जमा करने के बावजूद नहीं मिला न्याय
भोपाल में हाउसिंग सोसायटी से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां रोहित हाउसिंग सोसायटी के करीब 300 सदस्य पिछले लगभग 15 वर्षों से अपने प्लॉट और जमीन की रजिस्ट्री के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। यह मामला अब प्रशासनिक दफ्तरों से लेकर जनसुनवाई तक पहुंच चुका है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई इस उम्मीद में जमा कर दी कि उन्हें एक दिन अपना घर मिलेगा, लेकिन आज भी वे खाली हाथ हैं। सदस्यों के अनुसार सोसायटी ने शुरुआत में सदस्यता शुल्क और बाद में विकास शुल्क के नाम पर लाखों रुपये जमा कराए थे। रकम जमा करने के बाद उन्हें भरोसा दिया गया था कि विकास कार्य पूरे होने पर सभी को प्लॉट और रजिस्ट्री दी जाएगी। लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी न तो प्लॉट का आवंटन हुआ और न ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हुई। कई सदस्य अब भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।
पीड़ित मंजू पाठक ने बताया कि सोसायटी ने बाद में कई जमीनें नए लोगों को बेच दीं, जबकि पुराने सदस्यों को उनका हक नहीं मिला। उनका कहना है कि यह साफ तौर पर नियमों की अनदेखी है और पुराने सदस्यों के साथ अन्याय किया गया है। मंगलवार को यह मामला एक बार फिर जनसुनवाई में उठाया गया, जहां पीड़ितों ने कलेक्टर को आवेदन देकर पूरी जमीन की जांच और सत्यापन की मांग की। पीड़ित सदस्य अजय सक्सेना ने बताया कि वर्ष 2012 में कलेक्ट्रेट स्तर पर हुई बैठक के बाद सदस्यों से अतिरिक्त राशि जमा कराई गई थी। उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि सभी विकास कार्य पूरे होने के बाद प्लॉट की रजिस्ट्री कर दी जाएगी। लेकिन समय बीतने के साथ स्थिति और खराब होती गई। बाद में मामला सहकारिता विभाग के अधीन चला गया और 2016 में प्रशासक भी नियुक्त किया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
सदस्यों का आरोप है कि विकास शुल्क के नाम पर उनसे लगभग 3.45 लाख रुपये से लेकर 4.5 लाख रुपये तक वसूले गए। कई लोगों ने पहले भी राशि जमा की थी और बाद में अतिरिक्त भुगतान भी किया, लेकिन आज तक जमीन नहीं मिली। कुछ सदस्यों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी बचत इस योजना में लगा दी, लेकिन अब वे सिर्फ आश्वासन के भरोसे हैं। सबसे गंभीर आरोप यह भी है कि जिन प्लॉटों का पहले पुराने सदस्यों को आवंटन किया गया था, उनमें से कुछ बाद में दूसरे लोगों के नाम पर रजिस्ट्री कर दी गई। इससे पुराने सदस्य अपने अधिकार से वंचित हो गए। पीड़ितों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और वरिष्ठता के नियमों का पालन नहीं किया गया।
दस्तावेजों के अनुसार सदस्य 2010 से लगातार इस मामले को लेकर जनसुनवाई, कलेक्टर कार्यालय, सहकारिता विभाग और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करा रहे हैं। कई बार सुनवाई हुई, लेकिन हर बार मामला आगे बढ़ने के बजाय अटका रह गया। कुछ लोग दर्जनों बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं मिला। स्थिति यह है कि कई सदस्य अब बुजुर्ग हो चुके हैं और रोज-रोज दफ्तरों के चक्कर लगाने में असमर्थ हैं। कुछ सदस्यों की इस इंतजार में मौत भी हो चुकी है, लेकिन उनके परिवार आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पीड़ितों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं बल्कि जीवनभर की कमाई और भरोसे का सवाल है।
वहीं प्रशासनिक स्तर पर यह भी सामने आया है कि भोपाल में हाउसिंग सोसायटी से जुड़े करीब 900 से अधिक लोग विभिन्न समस्याओं से प्रभावित हैं। इनमें से कई मामले लंबे समय से लंबित हैं। सहकारिता विभाग से जुड़ी बड़ी संख्या में शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में भी अटकी हुई हैं, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ितों की मांग है कि पूरी जमीन की स्थिति, पहले हुए आवंटन और जमा की गई राशि की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर गलती कहां हुई और जिम्मेदारी किसकी है।
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भोपाल में 15 साल से प्लॉट का इंतजार, 300 परिवार परेशान
भोपाल,(म.प्र.)
भोपाल में हाउसिंग सोसायटी से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां रोहित हाउसिंग सोसायटी के करीब 300 सदस्य पिछले लगभग 15 वर्षों से अपने प्लॉट और जमीन की रजिस्ट्री के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। यह मामला अब प्रशासनिक दफ्तरों से लेकर जनसुनवाई तक पहुंच चुका है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई इस उम्मीद में जमा कर दी कि उन्हें एक दिन अपना घर मिलेगा, लेकिन आज भी वे खाली हाथ हैं। सदस्यों के अनुसार सोसायटी ने शुरुआत में सदस्यता शुल्क और बाद में विकास शुल्क के नाम पर लाखों रुपये जमा कराए थे। रकम जमा करने के बाद उन्हें भरोसा दिया गया था कि विकास कार्य पूरे होने पर सभी को प्लॉट और रजिस्ट्री दी जाएगी। लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी न तो प्लॉट का आवंटन हुआ और न ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हुई। कई सदस्य अब भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।
पीड़ित मंजू पाठक ने बताया कि सोसायटी ने बाद में कई जमीनें नए लोगों को बेच दीं, जबकि पुराने सदस्यों को उनका हक नहीं मिला। उनका कहना है कि यह साफ तौर पर नियमों की अनदेखी है और पुराने सदस्यों के साथ अन्याय किया गया है। मंगलवार को यह मामला एक बार फिर जनसुनवाई में उठाया गया, जहां पीड़ितों ने कलेक्टर को आवेदन देकर पूरी जमीन की जांच और सत्यापन की मांग की। पीड़ित सदस्य अजय सक्सेना ने बताया कि वर्ष 2012 में कलेक्ट्रेट स्तर पर हुई बैठक के बाद सदस्यों से अतिरिक्त राशि जमा कराई गई थी। उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि सभी विकास कार्य पूरे होने के बाद प्लॉट की रजिस्ट्री कर दी जाएगी। लेकिन समय बीतने के साथ स्थिति और खराब होती गई। बाद में मामला सहकारिता विभाग के अधीन चला गया और 2016 में प्रशासक भी नियुक्त किया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
सदस्यों का आरोप है कि विकास शुल्क के नाम पर उनसे लगभग 3.45 लाख रुपये से लेकर 4.5 लाख रुपये तक वसूले गए। कई लोगों ने पहले भी राशि जमा की थी और बाद में अतिरिक्त भुगतान भी किया, लेकिन आज तक जमीन नहीं मिली। कुछ सदस्यों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी बचत इस योजना में लगा दी, लेकिन अब वे सिर्फ आश्वासन के भरोसे हैं। सबसे गंभीर आरोप यह भी है कि जिन प्लॉटों का पहले पुराने सदस्यों को आवंटन किया गया था, उनमें से कुछ बाद में दूसरे लोगों के नाम पर रजिस्ट्री कर दी गई। इससे पुराने सदस्य अपने अधिकार से वंचित हो गए। पीड़ितों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और वरिष्ठता के नियमों का पालन नहीं किया गया।
दस्तावेजों के अनुसार सदस्य 2010 से लगातार इस मामले को लेकर जनसुनवाई, कलेक्टर कार्यालय, सहकारिता विभाग और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करा रहे हैं। कई बार सुनवाई हुई, लेकिन हर बार मामला आगे बढ़ने के बजाय अटका रह गया। कुछ लोग दर्जनों बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं मिला। स्थिति यह है कि कई सदस्य अब बुजुर्ग हो चुके हैं और रोज-रोज दफ्तरों के चक्कर लगाने में असमर्थ हैं। कुछ सदस्यों की इस इंतजार में मौत भी हो चुकी है, लेकिन उनके परिवार आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पीड़ितों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं बल्कि जीवनभर की कमाई और भरोसे का सवाल है।
वहीं प्रशासनिक स्तर पर यह भी सामने आया है कि भोपाल में हाउसिंग सोसायटी से जुड़े करीब 900 से अधिक लोग विभिन्न समस्याओं से प्रभावित हैं। इनमें से कई मामले लंबे समय से लंबित हैं। सहकारिता विभाग से जुड़ी बड़ी संख्या में शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में भी अटकी हुई हैं, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ितों की मांग है कि पूरी जमीन की स्थिति, पहले हुए आवंटन और जमा की गई राशि की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर गलती कहां हुई और जिम्मेदारी किसकी है।
