भोपाल मेट्रो परियोजना में बड़ा कदम: पुराने शहर के नीचे सुरंग बनाने के लिए TBM मशीन 15 मीटर नीचे उतरी

भोपाल (म.प्र.)

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रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक 3.39 किमी भूमिगत कॉरिडोर बनेगा; अप्रैल की शुरुआत में सुरंग खुदाई शुरू होने की संभावना।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी में चल रही भोपाल मेट्रो परियोजना अब एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर गई है। मेट्रो की ऑरेंज लाइन के तहत पुराने शहर के व्यस्त इलाकों के नीचे बनने वाले भूमिगत कॉरिडोर के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) का पहला हिस्सा लगभग 15 मीटर की गहराई में उतार दिया गया है। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार मशीन की तकनीकी स्थापना और परीक्षण के बाद मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल की शुरुआत में सुरंग की खुदाई शुरू हो सकती है।

यह भूमिगत कॉरिडोर भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक लगभग 3.39 किलोमीटर लंबा होगा। इस हिस्से में मेट्रो ट्रेन के संचालन के लिए दो समानांतर सुरंगें बनाई जाएंगी। परियोजना से जुड़े इंजीनियरों का कहना है कि यह चरण तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है क्योंकि सुरंग शहर के पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों के नीचे से गुजरने वाली है।

मेट्रो प्रबंधन के अनुसार टीबीएम मशीन दिसंबर 2025 में बेंगलुरु से भोपाल लाई गई थी। मशीन कई हिस्सों में आती है जिन्हें क्रमिक रूप से जमीन के नीचे उतारा जाता है और बाद में असेंबल किया जाता है। पूरी तरह स्थापित होने के बाद मशीन लगभग 19 से 20 मीटर की गहराई पर सुरंग खोदने का काम शुरू करेगी। इसकी तकनीकी क्षमता प्रतिदिन लगभग 15 मीटर तक खुदाई करने की है।

परियोजना के तहत पुल पातरा और सिंधी कॉलोनी क्षेत्र में अंडरग्राउंड रैंप भी बनाया जाएगा, जिससे मेट्रो ट्रेन सतह से भूमिगत स्टेशन तक आसानी से पहुंच सकेगी। यह पूरा कार्य मेट्रो परियोजना के पैकेज BH-04 के अंतर्गत किया जा रहा है।

भोपाल के पुराने शहर में कई इमारतें दशकों पुरानी हैं और कुछ संरचनाएं अपेक्षाकृत कमजोर भी मानी जाती हैं। इसे देखते हुए निर्माण कार्य के दौरान विशेष सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक भूमिगत तकनीक की मदद से ऊपर की इमारतों और सड़कों पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा और यातायात भी सामान्य रूप से चलता रहेगा।

शहर में तेजी से बढ़ती आबादी और यातायात दबाव को देखते हुए मेट्रो परियोजना को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार भूमिगत कॉरिडोर तैयार होने के बाद पुराने भोपाल और नए शहर के बीच आवागमन अधिक तेज और सुगम हो सकेगा। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या कम होने और यात्रियों को समय की बचत होने की उम्मीद है।

मेट्रो परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आगामी महीनों में सुरंग निर्माण की प्रगति के साथ परियोजना के अन्य चरणों पर भी तेजी से काम किया जाएगा। यदि कार्य तय समय के अनुसार आगे बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में भोपाल को आधुनिक और बेहतर शहरी परिवहन प्रणाली मिल सकेगी।

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