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मध्यप्रदेश का ₹7,765 करोड़ अनुपूरक बजट चर्चा में, सिंचाई, परिवहन और शिक्षा पर रहेगा फोकस
भोपाल,(म.प्र.)
विधानसभा में पेश पहले अनुपूरक बजट पर बुधवार को चर्चा होगी। नर्मदा घाटी विकास, मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना, ई-बस सेवा, लैपटॉप वितरण और पुलिस आधुनिकीकरण के लिए बड़े प्रावधान किए गए हैं।
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश कर दिया है। करीब 7,765.76 करोड़ रुपए के इस बजट पर बुधवार को सदन में विस्तृत चर्चा होगी। सरकार का कहना है कि यह बजट विकास कार्यों की गति बनाए रखने, अधूरी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से लाया गया है। सबसे बड़ा प्रावधान नर्मदा घाटी विकास विभाग के लिए किया गया है, जहां 3,000 करोड़ रुपए विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं, भूमि अधिग्रहण और संबंधित विकास कार्यों पर खर्च किए जाएंगे। विधानसभा में बजट पेश होने के बाद अब सभी की नजर चर्चा और उस पर होने वाली बहस पर टिकी हुई है।
सरकार की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार कुल अनुपूरक बजट में 907.59 करोड़ रुपए राजस्व व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि 6,858.18 करोड़ रुपए पूंजीगत व्यय के रूप में रखे गए हैं। पूंजीगत खर्च का बड़ा हिस्सा सड़क, सिंचाई, परिवहन और आधारभूत संरचना से जुड़ी योजनाओं पर खर्च किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी और राज्य की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। वित्त विभाग का मानना है कि अतिरिक्त बजट से उन योजनाओं को भी मजबूती मिलेगी जिनके लिए पहले स्वीकृत राशि पर्याप्त नहीं थी।
अनुपूरक बजट में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना के लिए 101 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुगम और आधुनिक बनाना है ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को बेहतर यातायात सुविधाएं मिल सकें। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के लिए 50 करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की गई है। अधिकारियों के अनुसार इस योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बढ़ाया जाएगा। इससे प्रदूषण कम करने के साथ-साथ यात्रियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
शिक्षा क्षेत्र को भी इस अनुपूरक बजट में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरण योजना के लिए 58.07 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए यह योजना महत्वपूर्ण साबित होगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इससे हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है। डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता से पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में भी छात्रों को सुविधा मिलेगी।
गृह विभाग के लिए भी अतिरिक्त वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के लिए 98.83 करोड़ रुपए और पुलिस आधुनिकीकरण के लिए 58.52 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस राशि का उपयोग तकनीकी संसाधनों को मजबूत करने, डिजिटल नेटवर्क विकसित करने और पुलिस व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने में किया जाएगा। इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया तेज होगी और अपराधों की जांच में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ेगा।
राजस्व विभाग को भी अनुपूरक बजट के माध्यम से अतिरिक्त सहायता दी गई है। राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) से प्राप्त राशि के हस्तांतरण के लिए 397.54 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह राशि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी। सरकार का कहना है कि मानसून के दौरान संभावित आपदा प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों तक शीघ्र सहायता पहुंचाई जा सके।
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मध्यप्रदेश का ₹7,765 करोड़ अनुपूरक बजट चर्चा में, सिंचाई, परिवहन और शिक्षा पर रहेगा फोकस
भोपाल,(म.प्र.)
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश कर दिया है। करीब 7,765.76 करोड़ रुपए के इस बजट पर बुधवार को सदन में विस्तृत चर्चा होगी। सरकार का कहना है कि यह बजट विकास कार्यों की गति बनाए रखने, अधूरी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से लाया गया है। सबसे बड़ा प्रावधान नर्मदा घाटी विकास विभाग के लिए किया गया है, जहां 3,000 करोड़ रुपए विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं, भूमि अधिग्रहण और संबंधित विकास कार्यों पर खर्च किए जाएंगे। विधानसभा में बजट पेश होने के बाद अब सभी की नजर चर्चा और उस पर होने वाली बहस पर टिकी हुई है।
सरकार की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार कुल अनुपूरक बजट में 907.59 करोड़ रुपए राजस्व व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि 6,858.18 करोड़ रुपए पूंजीगत व्यय के रूप में रखे गए हैं। पूंजीगत खर्च का बड़ा हिस्सा सड़क, सिंचाई, परिवहन और आधारभूत संरचना से जुड़ी योजनाओं पर खर्च किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी और राज्य की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। वित्त विभाग का मानना है कि अतिरिक्त बजट से उन योजनाओं को भी मजबूती मिलेगी जिनके लिए पहले स्वीकृत राशि पर्याप्त नहीं थी।
अनुपूरक बजट में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना के लिए 101 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुगम और आधुनिक बनाना है ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को बेहतर यातायात सुविधाएं मिल सकें। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के लिए 50 करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की गई है। अधिकारियों के अनुसार इस योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बढ़ाया जाएगा। इससे प्रदूषण कम करने के साथ-साथ यात्रियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
शिक्षा क्षेत्र को भी इस अनुपूरक बजट में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरण योजना के लिए 58.07 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए यह योजना महत्वपूर्ण साबित होगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इससे हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है। डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता से पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में भी छात्रों को सुविधा मिलेगी।
गृह विभाग के लिए भी अतिरिक्त वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के लिए 98.83 करोड़ रुपए और पुलिस आधुनिकीकरण के लिए 58.52 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस राशि का उपयोग तकनीकी संसाधनों को मजबूत करने, डिजिटल नेटवर्क विकसित करने और पुलिस व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने में किया जाएगा। इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया तेज होगी और अपराधों की जांच में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ेगा।
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