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CJP आंदोलन के बीच राहुल, प्रियंका और अखिलेश हिरासत में, जंतर-मंतर पर फिर जुटे हजारों प्रदर्शनकारी
Digital Desk
दिल्ली में CJP आंदोलन के दौरान विपक्षी नेताओं को प्रधानमंत्री आवास के पास पुलिस ने हिरासत में लिया। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहा, जबकि सोनम वांगचुक को हाईकोर्ट की अनुमति के बाद मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया।
दिल्ली में शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे CJP आंदोलन के बीच मंगलवार को राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। प्रधानमंत्री आवास के निकट प्रदर्शन करने पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित प्रतिबंधों को देखते हुए पुलिस ने यह कार्रवाई की। इसके बाद नेताओं को अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या फिर बढ़ती दिखाई दी, जहां छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि एक बार फिर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सोमवार की घटनाओं के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं सरकार की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सुबह से ही लोक कल्याण मार्ग और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। जैसे ही विपक्षी नेता वहां पहुंचे और धरने पर बैठने की कोशिश की, पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी बाद में मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचीं, जहां हिरासत में लिए गए नेताओं के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। अधिकारियों के मुताबिक पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थिति नियंत्रण में रही और किसी बड़े अप्रिय घटनाक्रम की सूचना नहीं मिली। उधर विपक्षी दलों ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे। वहीं सरकार का पक्ष है कि राजधानी में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना सभी के लिए आवश्यक है और किसी भी क्षेत्र में नियमों का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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इधर जंतर-मंतर पर आंदोलन का केंद्र फिर सक्रिय नजर आया। सोमवार की तुलना में मंगलवार को भी बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक यहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी मांगों पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। कुछ प्रतिनिधियों ने बताया कि सरकार के साथ बातचीत हुई, लेकिन उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। आंदोलन से जुड़े कुछ सदस्यों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात आगे भी रखते रहेंगे। दिनभर जंतर-मंतर पर विभिन्न समूहों ने अपनी-अपनी बात रखी। पुलिस की ओर से भी पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न फैले। प्रशासन लगातार लोगों से निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील करता रहा।
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इस बीच आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत को लेकर भी दिनभर चर्चा रही। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें अपनी पसंद के निजी अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति दी, जिसके बाद उन्हें मेदांता अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार शुरू किया गया। अदालत के आदेश के बाद स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल पूरी की गईं। उनके समर्थकों ने अस्पताल के बाहर पहुंचकर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रशासन की ओर से कहा गया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया है और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
राजनीतिक हलकों में भी इस घटनाक्रम को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं आती रहीं। विभिन्न विपक्षी दलों ने आंदोलन के समर्थन में अपनी बात रखी, जबकि सरकार की ओर से यह दोहराया गया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद का स्वागत है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। अधिकारियों ने कहा कि राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है और उसी के अनुरूप सभी कदम उठाए गए हैं। दिनभर संसद परिसर और दिल्ली के कई हिस्सों में इस मुद्दे पर चर्चा का माहौल बना रहा। सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर रखे हुए थीं।
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दिल्ली में शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे CJP आंदोलन के बीच मंगलवार को राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। प्रधानमंत्री आवास के निकट प्रदर्शन करने पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित प्रतिबंधों को देखते हुए पुलिस ने यह कार्रवाई की। इसके बाद नेताओं को अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या फिर बढ़ती दिखाई दी, जहां छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि एक बार फिर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सोमवार की घटनाओं के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं सरकार की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सुबह से ही लोक कल्याण मार्ग और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। जैसे ही विपक्षी नेता वहां पहुंचे और धरने पर बैठने की कोशिश की, पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी बाद में मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचीं, जहां हिरासत में लिए गए नेताओं के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। अधिकारियों के मुताबिक पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थिति नियंत्रण में रही और किसी बड़े अप्रिय घटनाक्रम की सूचना नहीं मिली। उधर विपक्षी दलों ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे। वहीं सरकार का पक्ष है कि राजधानी में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना सभी के लिए आवश्यक है और किसी भी क्षेत्र में नियमों का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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इधर जंतर-मंतर पर आंदोलन का केंद्र फिर सक्रिय नजर आया। सोमवार की तुलना में मंगलवार को भी बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक यहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी मांगों पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। कुछ प्रतिनिधियों ने बताया कि सरकार के साथ बातचीत हुई, लेकिन उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। आंदोलन से जुड़े कुछ सदस्यों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात आगे भी रखते रहेंगे। दिनभर जंतर-मंतर पर विभिन्न समूहों ने अपनी-अपनी बात रखी। पुलिस की ओर से भी पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न फैले। प्रशासन लगातार लोगों से निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील करता रहा।
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इस बीच आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत को लेकर भी दिनभर चर्चा रही। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें अपनी पसंद के निजी अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति दी, जिसके बाद उन्हें मेदांता अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार शुरू किया गया। अदालत के आदेश के बाद स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल पूरी की गईं। उनके समर्थकों ने अस्पताल के बाहर पहुंचकर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रशासन की ओर से कहा गया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया है और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
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